Beghar Ankhen
(0)
₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Description Awaited
Read moreAbout the Book
Description Awaited
Book Details
-
ISBNshivna20264
-
Pages169
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Narak Dar Narak
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: ‘नरक-दर-नरक’ ममता कालिया के चर्चित उपन्यासों में से एक है। अपने समय का सांगोपांग चित्रण करने वाली यह रचना पाठकों और आलोचकों दोनों की प्रिय रही है। उपन्यास के केन्द्र में जगन और उषा हैं जो एक तरह से आज़ादी के बाद पैदा हुई युवा पीढ़ी का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। अच्छा रोज़गार और बेहतर जीवन उनके ऐसे सपने हैं जो अपनी योग्यता के बावजूद उन्हें अपनी पहुँच से दूर दिखाई देते हैं। प्रेम और उसके बाद तुरन्त ही शादी के बाद उनका प्यार ही है जो उन्हें राहत देता है, नहीं तो जगन के कॉलेज में वहाँ की राजनीति, मामूली-सी तनख़्वाह और उषा के सामने घर को सँभालने की चुनौती उन्हें तनाव में ही रखती है। हारकर वे मुम्बई से इलाहाबाद आते हैं और वहाँ जगन एक प्रेस शुरू करता है। लेकिन चुनौतियाँ यहाँ भी कम नहीं। नया शहर, नया काम और फिर एक बच्चा भी उनके जीवन में आ जाता है। दाम्पत्य जीवन और सामाजिक–राजनीतिक तनावों को यह उपन्यास अत्यन्त कुशलता से चित्रित करता है। भाषा की चुस्ती, संवाद और सूक्ष्म मनोभावों का अंकन कहीं भी पाठक को भटकने नहीं देता।
Tonhi
- Author Name:
Prabha Saras
- Book Type:

- Description: This is a book for children.
Uttara
- Author Name:
Supreeth K N
- Book Type:

- Description: Novel based on seeking answers for fundamental question. ಉತ್ತರ’ ಸುಪ್ರೀತ್ ಕೆ.ಎನ್ ಅವರ ಕಾದಂಬರಿ. ಕನ್ನಡದ ಭರವಸೆಯ ಕಾದಂಬರಿಕಾರರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬರಾದ ಸುಪ್ರೀತ್ ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿ ಕೃತಿಯನ್ನೂ ಅಧ್ಯಾತ್ಮದ ಅಡಿಪಾಯದಲ್ಲೇ ರಚಿಸಿದರೂ, ಪ್ರತಿ ಕೃತಿಯಲ್ಲೂ ಅಧ್ಯಾತ್ಮದ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಆಯಾಮಗಳನ್ನು ಪರಿಚಯಿಸುತ್ತಾರೆ. ಈ ‘ಉತ್ತರ’ ಕಾದಂಬರಿಯ ಮೂಲ ವಸ್ತು 'ನೋವು'. ಕಥನಾಯಕ ಸ್ಕಂದ ನೋವಿನ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯೊಂದರಲ್ಲಿ ಸಿಲುಕಿದಾಗ, ಮನುಷ್ಯನಿಗೆ ನೋವು ಯಾಕೆ ಕಾಡುತ್ತದೆ? ನೋವಿನ ಮೂಲವೇನು? ನಮ್ಮನ್ನು ಕಾಡುವ ನೋವಿನಿಂದ ಹೇಗೆ ಹೊರಬರಬೇಕು? ಎನ್ನುವಂತಹ ಮೂಲಭೂತ ಪ್ರಶ್ನೆಗಳನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಂಡು ಅದಕ್ಕೆ ಉತ್ತರ ಹುಡುಕುತ್ತಾ ಆಶ್ರಮವೊಂದಕ್ಕೆ ತೆರಳಿ ಅಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಾತ್ಮ ಸಾಧನೆಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಾ ತನ್ನ ನೋವಿನ ಮೂಲ ಹುಡುಕುತ್ತಾನೆ. ಉತ್ತರ ಹುಡುಕುವ ಈ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಕರ್ಮ ಸಿದ್ಧಾಂತಗಳ ಹಲವು ಮಜಲುಗಳ ಪರಿಚಯವು ಆಗುತ್ತದೆ.
Kabira Soi Peer Hai
- Author Name:
Pratibha Katiyar
- Book Type:

- Description: मूलतः एक संवेदनशील कवि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली प्रतिभा कटियार का यह पहला उपन्यास अपनी पठनीयता और अपने सरोकार दोनों वजहों से लगभग चकित करता है। उपन्यास एक कोचिंग सेंटर से शुरू होता है जहाँ अलग-अलग वर्गों के छात्र एक-सी महत्वाकांक्षा के साथ पहुँचते हैं। मगर वहाँ भी छात्रों की पसन्द-नापसन्द, उनकी मैत्री और उनके सम्बन्धों में एक स्पष्ट भेदभाव चला आता है। उपन्यास में ऐसे किरदार हैं जो इस भेदभाव को तोड़कर आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि दुनिया इन खानों से बड़ी है। जाहिर है, यह प्रेम और आपसी समझ के रसायन से बनी मनुष्यता है जो सामाजिक चाल-चलन पर भारी पड़ रही है। उपन्यास की नायिका दलित समाज से आती है और बचपन से ही देखती है कि उसकी प्रतिभा दूसरों की आँख का काँटा बनी हुई है। उसकी सफलता भी उसका अभिशाप है। जब उसे कोचिंग सेंटर में ऐसा दोस्त मिलता है जो बराबरी पर भरोसा करता है और उससे प्रेम करने लगता है तब वह कुछ बदलती दिखती है। उपन्यास अगर इसी दिशा में बढ़कर एक सुखान्त पर खत्म हो जाता तो तो शायद वह बराबरी की कामना का एक रूमानी बयान होकर रह जाता। यहाँ लेखिका साबित करती हैं कि उनके लहजे में चाहे जितनी रूमानियत हो, यथार्थ की उनकी समझ बहुत खरी है। वे घर-परिवार और समाज के सारे पूर्वग्रह और पाखंड जैसे तार-तार कर देने पर तुली हैं। वे एक पल के लिए भी इस बात को ओझल नहीं होने देतीं कि यह समाज बहुधा कुछ लोगों के प्रति बहुत अमानुषिक व्यवहार करता है और अगर यह भी न हो तो अपनी उदारता के चरम लम्हों में भी वह उनके अवसर छीनने में कोई कोताही नहीं करता, कोई हिचक नहीं दिखाता। इसमें सन्देह नहीं कि यह उपन्यास एक साँस में पढ़ा जा सकता है, लेकिन उसके बाद जिस गहरी और लम्बी साँस की ज़रूरत पड़ती है, वह कहीं हलक में अटकी रह जाती है। कई किरदारों और स्थितियों के बीच रचा गया यह उपन्यास हमारे समय की एक बड़ी विडम्बना पर उँगली रखता है और अपने छोटे कलेवर के बावजूद एक बड़ा वृत्तान्त रचता है। —प्रियदर्शन
Sachcha Jhooth
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: ‘सच्चा झूठ’ उपन्यास का विषय कोरोना काल है, और यह कहानियाँ सुनाता है उन लोगों की जो अपनी-अपनी जगहों पर, अपनी-अपनी हैसियत और हदों के साथ इस स्याह समय से गुज़रे, जिन्होंने इसकी तकलीफ़ों, डरों, सदमों और दुखों को कभी हिम्मत से तो कभी आशंकाओं के साथ झेला। यानी कथा है हम सब की। बहुत समय नहीं बीता है, जब सारी दुनिया अचानक कोरोना नाम की इस ख़ौफ़नाक महामारी के सामने असहाय हो गई थी। अमीर-ग़रीब, छोटे-बड़े, सब अचानक ऐसे हालात के सामने आ खड़े हुए जिनसे निबटने का तरीका किसी को नहीं आता था। एक नए ढंग की छुआछूत ने हम सबको अपनों तक से दूर कर दिया। शारीरिक दूरी की जगह सामाजिक दूरी ने ले ली और उन तमाम धागों को उधेड़ दिया, जो सामान्य समय में हमें एक समाज बनाते थे। इस उपन्यास में अलग-अलग पात्रों के हवाले से इस पूरे दौर की एक मुकम्मल तस्वीर प्रस्तुत की गई है। यहाँ एक तरफ़ अगर मौत का भय है, तो दूसरी तरफ़ हमारी सामाजिक-धार्मिक-आर्थिक उलझनें। कहीं पारिवारिक सम्बन्धों की दरकन दिखती है तो कहीं मनुष्यता के अनुकरणीय उदाहरण भी–यह उपन्यास इन सभी पहलुओं को बहुत बारीकी से अंकित करता है। एक प्रेम-कथा भी इस उपन्यास का हिस्सा है जो कोरोना के इसी भयानक दौर में धीर-धीरे परवान चढ़ती है, और कोरोना की चुनौती के साथ सामाजिक भेदभाव की बाधा को भी सफलतापूर्वक पार करती है।
Kailas Mein Golmaal
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

- Description: महान फ़िल्मकार और अनूठे कथाकार सत्यजित राय के चर्चित जासूस किरदार फेलूदा का एक लोमहर्षक कारनामा है— ‘कैलास में गोलमाल’। इस बहुचर्चित उपन्यास में फेलूदा का सामना होता है प्राचीन मूर्तियों की तस्करी करनेवालों से। भुवनेश्वर के एक प्रसिद्ध मन्दिर से यक्षिणी की मूर्ति के मस्तक गायब होने की घटना से शुरू हुआ यह मामला उस वक्त बेहद पेचीदा हो जाता है, जब सम्भावित तस्कर वस्तुतः एक जासूस निकलता है। रहस्य-रोमांच के बेहद चक्करदार रास्तों से होकर गुजरती इस कथा में भरपूर रोमांच और मनोरंजन तो है ही, देश की ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर के संरक्षण तथा उसके प्रति प्रेम का सन्देश भी निहित है।
The Branded
- Author Name:
Laxman Gaikwad +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Uchalya, literally meaning 'pilferer', is an autobiographical account of the life of a stereotyped underdog but of a representative of a section of society thriving on petty crimes. It is a poignant satire on social inequiality and a candid account of the author's life brought up in the Uchalya community. His treatment of the Dalit theme, in which his own delicsate subjectivity is a part, is widely acclaimed for the masterful sensitivity. He depicts in all their subtlety and pougnancy the inner feeling, suffering and empotional complexities of a tribe historically viewed as criminals. The novel has the freshness of rugged sincerity written in a style untamed by sophistication and therefore has become unquestionably valueable as a socially significant document besides being a powerful literary work.
Main Nastik Hoon
- Author Name:
Rajesh Sonwar
- Book Type:

- Description: Book
Kamal Ka Hai Mannu
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: मन्नू यानी मानस के लिए दादी ठीक ही कहती हैं—‘कमाल का है साड्डा मन्नू!’ वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया का यह उपन्यास किशोरों के लिए है। परीक्षाओं में नंबरों की मारामारी के बरअक्स मन्नू और उसके दोस्तों की यह कहानी बताती है कि ऊँचे नंबर लाना जितना अहम है, उतना ही अहम एक बेहतर नागरिक बनना भी है, बल्कि उससे ज़्यादा। और इसी के साथ ज़रूरी है अपनी प्रतिभा की पहचान करना, अपनी वास्तविक रुचि को समझना और उस दिशा में काम करते रहना। मन्नू का मन बिगड़ी हुई घड़ियों, ट्रांजिस्टरों आदि को ठीक करने में जितना लगता है, उतना न तो किताबें रटने में लगता है, न ही दोस्तों के साथ मटरगश्ती में। इसीलिए भले ही उसके नम्बर बस पास होन के लिए ही आए हों, उसके विज्ञान मॉडल को राज्यस्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में पहला पुरस्कार मिला। यह लघु-उपन्यास किशोरों और छात्रों को पढ़ाई और जीवन के प्रति एक स्वस्थ; सन्तुलित और रचनात्मक नज़रिया देता है।
Samandar
- Author Name:
Milind Bokil
- Book Type:

- Description: Novel
Mallika ka Rachna-Sansar
- Author Name:
Vasudha Dalmiya
- Book Type:

- Description: औरतों के प्रति जब कभी पुरानी धारणा की मुठभेड़ आधुनिकता से होती है, तो भारतीय मन मनुष्य और समाज को पुरुषार्थ के उजाले में देखने-दिखाने के लिए मुड़ जाता है। पर हमारी परम्परा में पुरुषार्थ की साधना वही कर सकता है जो स्वतंत्र हो। और स्त्री की बाबत स्मृतियों की राय यही है कि वह बुद्धि और विवेक से रहित है। इसलिए वह स्वतंत्र हुई तो स्वैराचारिणी बनी। बेहतर हो वह पराश्रयी बन कर रहे। प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेन्दु की रक्षिता मल्लिका का निजी जीवन और उनका यह दुर्लभ कृतित्व इस धारणा को उसी के धरातल में जाकर प्रखर चुनौती देता है। काशी के एक सम्पन्न परिवार के कुलदीपक की रक्षिता यह बांग्ला मूल की महिला 19वीं सदी के समाज में सामाजिक स्वीकार से वंचित रहीं। फिर भी उनकी नैसर्गिक प्रतिभा और कुछ हद तक भारतेन्दु के साथ रहते हुए उस प्रतिभा के निरन्तर परिष्कार से वह अपने समय के समाज में स्त्री जाति की असली दशा, विशेषकर युवा विधवाओं और किसी भी वजह से समाज की डार से बिछड़ गई औरतों की दुनिया पर निडर रचनात्मक नज़र डाल सकीं। यह आज भी विरल है, तब के युग में तो वह दुर्लभ ही था। —मृणाल पाण्डे
Shailoosh
- Author Name:
Shiv Prashad Singh
- Book Type:

- Description: खानाबदोश नटों के जीवन, संस्कृति, उनकी यायावरी और भावनात्मक पक्ष पर केन्द्रित शिवप्रसाद सिंह के अत्यन्त चर्चित उपन्यासों में से एक है। इस उपन्यास में जरायमपेशा और हमेशा चलते रहने वाले नटों की जिन्दगी के आँखों देखे विवरणों के साथ उन्होंने अपने शोध व अनुसन्धान से प्राप्त तथ्यों को भी शामिल किया है। एक कबीलाई जीवन-शैली की यह कथा हमारी कई नैतिक धारणाओं और सामाजिक पूर्वग्रहों को भी तोड़ती है, और हमें एक अलग ढंग के जीवन से परिचित कराती है। नट समाज के जीवन में आने वाले बाहरी दबावों और उनके अपने दायरे के विभिन्न पहलुओं को समेटते हुए इस उपन्यास में भाषा का प्रयोग भी उपन्यासकार ने अत्यन्त सामर्थ्य के साथ किया है और शिक्षित समाज की दृष्टि को एक ओर रखकर नटों के जीवन की एक प्रामाणिक कथा रची है।
Gayab Hota Desh
- Author Name:
Ranendra
- Book Type:

- Description: जादुई यथार्थवाद...यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है। संजीव आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान...जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली...यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है। —मैत्रेयी पुष्पा यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी... लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं। —प्रसन्न कुमार चौधरी
Lohe Ke Pankh
- Author Name:
Himanshu Shrivastava
- Rating:
- Book Type:

- Description: लोहे के पंख दलित समुदाय से आने वाले एक व्यक्ति की आपबीती के जरिये भारतीय किसान-मजदूरों के कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष का जैसा ज़मीनी और विशद चित्र प्रस्तुत करता है, वैसा कम ही उपन्यासों में देखने को मिलता है। आज़ादी के पहले और बाद के लगभग तीन दशकों की पृष्ठभूमि में विन्यस्त और बिहार के ग्रामीण और शहरी समाज को समेटे यह उपन्यास तत्कालीन परिस्थितियों को अंकित करते हुए जिन सामाजिक-राजनीतिक विषमताओं को उजागर करता है वे आज भी समाप्त नहीं हुई हैं। सामन्ती वर्चस्व और अत्याचार, दलितों का शोषण-उत्पीड़न, राजनीतिक दलों की कथनी-करनी का अन्तर...आज भी आम हैं। ‘लोहे के पंख’ जिस समय—बीसवीं सदी के छठे दशक में—लिखा गया था उस समय हिन्दी साहित्य में दलित प्रश्न इतना केन्द्रीय और मुखर नहीं था। इस नजरिये से देखें तो हिमांशु श्रीवास्तव का एक दलित पात्र को अपने उपन्यास का नायक बनाकर उसके मुख से ही समय-समाज की पड़ताल कराना विशेष महत्व रखता है।
Karmbhoomi
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: प्रेमचंद आधुनिक हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं। कथा-कुल की सभी विधाओं—कहानी, उपन्यास, लघुकथा आदि सभी में उन्होंने लिखा और अपनी लगभग पैंतीस वर्ष की साहित्य-साधना तथा लगभग चौदह उपन्यासों एवं तीन सौ कहानियों की रचना करके ‘प्रेमचंद युग’ के रूप में स्वीकृत होकर सदैव के लिए अमर हो गए। प्रेमचंद का ‘सेवासदन’ उपन्यास इतना लोकप्रिय हुआ कि वह हिंदी का बेहतरीन उपन्यास माना गया। ‘सेवासदन’ में वेश्या-समस्या और उसके समाधान का चित्रण है, जो हिंदी मानस के लिए नई विषयवस्तु थी। ‘प्रेमाश्रम’ में जमींदार-किसान के संबंधों तथा पश्चिमी सभ्यता के पड़ते प्रभाव का उद्घाटन है। ‘रंगभूमि’ में सूरदास के माध्यम से गांधी के स्वाधीनता संग्राम का बड़ा व्यापक चित्रण है। ‘कायाकल्प’ में शारीरिक एवं मानसिक कायाकल्प की कथा है। ‘निर्मला’ में दहेज-प्रथा तथा बेमेल-विवाह के दुष्परिणामों की कथा है। ‘प्रतिज्ञा’ उपन्यास में पुनः ‘प्रेमा’ की कथा को कुछ परिवर्तन के साथ प्रस्तुत किया गया है। ‘गबन’ में युवा पीढ़ी की पतन-गाथा है और ‘कर्मभूमि’ में देश के राजनीति संघर्ष को रेखांकित किया गया है। ‘गोदान’ में कृषक और कृषि-जीवन के विध्वंस की त्रासद कहानी है। उपन्यासकार के रूप में प्रेमचंद का महान् योगदान है। उन्होंने हिंदी उपन्यास को भारतीय मुहावरा दिया और उसे समाज और संस्कृति से जोड़ा तथा साधारण व्यक्ति को नायक बनाकर नया आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने हिंदी भाषा को मानक रूप दिया और देश-विदेश में हिंदी उपन्यास को भारतीय रूप देकर सदैव के लिए अमर बना दिया। —डॉ. कमल किशोर गोयनका
Bhootgaon
- Author Name:
Naveen Joshi
- Book Type:

- Description: हिन्दी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार लीलाधर मंडलोई की यह आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ केवल उनकी नहीं बल्कि सतपुड़ा के जंगलों में विस्थापित होकर पहुँचे खान-मज़दूरों, दलित-अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की भी कथा है। कोरकू, गोंड़ और भारिया आदिवासियों के जीवन के स्याह चित्र भी इसमें आपको मिलेंगे। वेस्टर्न कोल्ड फ़ील्ड के छिन्दवाड़ा और दमुआ जिलों में कोयला-खानों की एक बड़ी शृंखला है। एक में कोयला ख़त्म हुआ तो दूसरी, तीसरी, चौथी और यह प्रक्रिया चलती रहती है जिसमें मज़दूरों को बार-बार उजड़ना पड़ता है। न पक्की नौकरी, न अस्पताल, न स्कूल, न मकान; बस भूख, ग़रीबी, अकाल मृत्यु, दुर्घटनाएँ और दुखों का असीम संसार। ओपनकास्ट और अंडर ग्राऊंड खदानों में बाल-मज़दूर का जीवन जीते हुए लेखक ने यह सब बचपन में ही देख-जी लिया था। आस-पास का जीवन त्रासद था लेकिन जीवन की प्रतिकूलताओं में बनी सामुदायिकता ने वहाँ संघर्ष, जिजीविषा और आनन्द की एक पारिस्थितिकी भी निर्मित की थी जिसमें गोंडवाना, बुन्देलखंड और बाहर से आए लोगों की बोली-बानी, भाषा, खानपान, रहन-सहन और संगीत की समावेशी संस्कृति दिखाई देती थी। इस आत्मकथा को पढ़ते हुए हम जान पाते हैं कि खदानों की गहराइयों ने खदानों को कैसे खोखला कर दिया, कैसे जल-स्तर हज़ारों फ़ीट नीचे चला गया, पानी का संकट गहराया और जंगल उजड़ने लगा। जंगल का जीव-जगत समाप्त होने लगा। कई प्रजातियाँ खो गईं। आदिवासियों का विस्थापन शुरु हुआ। उनकी संस्कृति लुप्त होने लगी। सके अलावा प्राइवेट कम्पनी के कार्यकाल में शोषण, अनाचार, उपेक्षा, शोषण आदि के आख्यान भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं।
Everything Will Be Alright
- Author Name:
Shubhanku Kochar
- Book Type:

- Description: The novel is about two lovers cum friends, Nihal and Bhoomi, who leave their houses searching for fulfilment. They both have a dream. Nihal wants to win a gold medal in Mega events on an international platform, whereas Bhoomi intends to search for her biological parents as an adopted child. Both of them meet at a certain point and fall in love, and decide to get married even after the divine forces have declined their match. Along with this runs a parallel story of Antra and Apurva, who come from different backgrounds. They also fall in love with their terms for getting married. The story is full of magic realism where God and human beings, myth and reality, participate collectively in a specific direction. The attempt here is to experiment with the phrase: Everything will be alright. Humans tend to say to each other, "Don’t worry, Everything will be alright,” in our sheer exuberance, we keep challenging the unseen forces represented by God. The question that the novel poses before the reader is, “Can everything be alright?” Moreover, the intervention of God or Nature at various places is symbolic in asserting that human beings should not try to behave like the Lord of the Universe.
Kamkaji Mahila Hostel
- Author Name:
Kalpna Varma
- Book Type:

- Description: जरूरी नहीं कि तूफान से सब कुछ अस्त-व्यस्त ही हो जाए। तूफान से रास्ता साफ भी होता है। यह सकारात्मकता मेरे भीतर उठते तूफानों से दृश्यों को साफ करने का काम करती है, शब्दों की ताकत से परिचय कराती है। शब्द घाव भी करते हैं और घाव को भरते भी हैं, क्योंकि शब्दों का अपना तापमान होता है, उनमें कूलिंग और हीटिंग का सन्तुलन बनाना लेखकीय दायित्व होता है। इसलिए जब भी मैं कहने के लिए उतावली हुई हूँ शब्दों का चयन मैंने संभल कर किया है। भावनाओं, संवेदनाओं और अनुभवों ने जो तानाबाना बुना उससे कहानी को आकार दिया है। कहानियों में ठहरे हुए पलों की कहानी है, उम्र से परे वैचारिक मित्रता है, जिन्दगी के बदलते हुए दृश्य हैं, जानने-मानने-चाहने जैसे विरोधाभास हैं। गलत दिशा में भाग रही भीड़ का हिस्सा न बनकर मैंने सही दिशा मे अकेले चलने को बेहतर माना है।
Proud Convicts Of Love
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Pankaj Subeer is well known for his writings on unique subjects and his mesmerizing extraordinary ways of storytelling. He is a novelist, short story writer and an editor of two magazines. He has written three novels, eight short story books and his writings have appeared in many magazines, daily newspapers and books. In his writings, he depicts social injustice, ugliness and discrimination in the society, and hope through love. His one novel ''Akaal mein utsav'' is on farmer's problems. Another novel 'Yeh woh sehar to nahin' is written on those historical characters which had been forgotten and forbidden by the time. In his short stories, he has succeeded in riveting the reader's attention towards his characters with different, very engrossing, styles of writings in Indian literature. He has won numerous national and international awards for his contribution to literature. ''Proud convicts of love'' is a translation of his very popular Hindi novel ''Jinhe jurm e ishq par naaz tha.'' Rachana Tyagi has translated this novel. The novel was published in 2019 by Shiva publications and was sold out very quickly and its second edition was also published in 2019.Third and fourth editions came out in 2020 and fifth edition in 2021. Although all his books have been very popular, this novel has broken all records and is his best creation to date. ''Proud convicts of love'' is a beautiful journey of five thousand years of civilizations portraying the role religion played in shaping and dividing societies and nation building based on unfounded and selfish interpretations of religious teachings. In this novel Pankaj Subeer has been successful in bringing forward a new ideology of love, faith and belief. I'm confident that this English translation will enthrall the readers as much as the Hindi version continues to do till this day!. -Sudha Om Dhingra, USA
Kaniya ek ghunghruawali
- Author Name:
Vibha Rani
- Book Type:

- Description: मैथिली मे नवम दशक सँ लेखनरत विभा रानी (1959) हिन्दी मे सेहो सक्रिय छथि। कथा, नाटक आ अनुवाद मे हुनक बहुत रास काज छनि। हिनक मौलिक सैंतीस टा आ अनूदित दस टा किताब प्रकाशित। विभा रानीक नवीनतम उपन्यास 'कनियाँ एक घुँघरुआवाली’क मादे मंतव्य: उपन्यास, जटिल आ स्त्री-मोनक लेल दमनकारी परिस्थितिक बीच कामनाक प्रतिफलन हेतु मर्म मे बसल संघर्षक निरंतरताक कथा कहैए। ई मिथिला-केंद्रित, स्त्री-प्रतिभाक प्रतिमान बनबाक कथा सेहो छी जे विडंबनाग्रस्त पितृ-सत्ताक अनवरत अवरोध, विरोध, छल-छद्मक अविराम प्रतिरोध करैए आ डोमकछ कें विस्तार दैए। —कुणाल नृत्य-संगीतक प्रति मैथिल समाज मे घोर उपेक्षा भाव कें उपन्यास मे आलोचनात्मक दृष्टिएँ दर्शाओल गेल अछि। मैथिल लोकनि गीत-नृत्यक रसिया होइत छथि ओकरा ई खूब नीक लगैत छनि, मुदा दोसरक बेटी-पुतोहु द्वारा कयल गेल नृत्य आ गाओल गेल गीत। —कमलानंद झा उपन्यास मे सामाजिक वातावरण, परिवेश, स्त्री-पुरुष लोकनिक संवाद उपन्यास कें सजीव रूप प्रदान करैत अछि। —बिभा कुमारी
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book