Khuli Hava
(0)
₹
350
280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा— ‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’। ‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा। ‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा। ‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’ ‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा। ‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’ ‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Read moreAbout the Book
कुछ दिन इसी प्रकार और बीत गए। अभिवादनों का आदान-प्रदान हो गया। और एक दिन जब सायंकाल को दीये जल चुके थे, तभी अलका लौट रही थी। ऊपर से मणिकलाल ने धीरे से कहा—
‘‘भाभी?’’ वह ठिठक गई और उसने भी धीरे से कहा, ‘जी’।
‘‘आप से एक-दो मिनट बात करना चाहता हूँ?’’ मणिकलाल ने नम्रता भरे शब्दों से कहा।
‘‘इस समय?’’ अलका ने घूँघट में से ही पूछा।
‘‘हाँ। अभी! केवल दो मिनट! आप तनिक मेरे पास इधर आ जाए!’’
‘‘क्या बात है यहीं कह दीजिए!’’ अलका ने वहीं खड़े-खड़े कहा।
‘‘भाभी ये रास्ता है यहाँ ठीक नहीं है, आप डरिए नहीं। तनिक इधर आ जाओ।’’ कहकर वह द्वार से भीतर को बैठक में चला गया। अलका ने मन-ही-मन सोचा कदाचित् आज ही वह दिन आ गया, जिसकी उसे आशंका थी। उसने सोचा ‘नहीं!’ इसके प्रस्ताव को ठुकरा दो, इसे स्पष्ट मना कर दो। पर उन वस्त्रों और खाद्य पदार्थों के दबाव ने उसे ऐसा नहीं करने दिया और वह अपने स्थान से थोड़ी सी हटकर बैठक के द्वार के निकट खड़ी हो गई बोली—‘‘कहिए?’’
‘‘देखिए, आप घबराएँ नहीं, अंदर ही आ जाएँ!
Book Details
-
ISBN9789380839714
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Manrangi
- Author Name:
Garima Mudgal
- Book Type:

- Description: राख बनकर बिखरने से पहले ख़ुशबू बनकर महक जाऊँ बस, इसी मौज के साथ लिखने की शुरुआत की थी। वैसे तो जो कुछ कहना था, इस कहानी के माध्यम से कह चुकी हूँ पर ‘मनरंगी’ के बारे में यह ज़रूर बताना चाहूँगी कि यह कहानी किसी नदी की तरह आगे बढ़ती है और नदी के जैसे ही हर पड़ाव पर इसकी तासीर अलहदा है। कहीं यह कहानी पहाड़ों से गुज़रती नदी की तरह अल्हड़ जान पड़ेगी तो कहीं निर्झर की तरह आवेग से खिलखिलाती। कहीं यह गहरी और शांत भी दिखाई देगी। एक नदी के सागर से मिलने के मानिंद यह तो तय है कि कहानी भी अपनी मंज़िल से मिलेगी, पर ख़ास वे रास्ते होंगे जहाँ से यह होकर गुज़रती है। और जैसे नदी को अपने साथ रखने की क़वा’इद में हम अपने पात्रों मे थोड़ी-सी नदी भर लेते हैं वैसे ही अगर अंजुली भर कहानी आपके ह्रदय-पात्र में जगह बना पाई तो मुझे लगेगा कि किताब के पन्नों से निकलकर कहानी अपने मुकाम तक पहुंच गई। किताब आपको कैसी लगी, जानने की प्रतीक्षा में ....
Maharana Pratap
- Author Name:
Anand Sharma
- Book Type:

- Description: स्वाधीनता संघर्ष के विश्ववंद्य, अतुलनीय, अपराजित योद्ठा महाराणा प्रताप के सफल संघर्ष की वास्तविक कथा इतिहास-प्रंथों में दर्ज होने के बावजूद अनेक काल्पनिक कथाओं के द्वारा उसे धूमिल करने का प्रयास ही किया गया है । इस प्रामाणिक पठनीय उपन्यास में घास की रोटी खाने, हल्दीघाटी युद्ध में शक्तिसिंह द्वारा प्राणरक्षा, युद्ध में जय-पराजय विवाद, भामाशाह द्वारा स्वयमोपार्जित अपार धन प्रदान करने जैसे अनेक जनप्रवादों का सच पर्याप्त शोध के पश्चात् सामने लाने का प्रयास किया गया है। बचपन से युवावस्था तक पिता महाराणा उदयसिंह की घोर उपेक्षा के शिकार रहने के बावजूद प्रताप के किशोरावस्था में ही अपने शौर्य प्रदर्शन से लेकर महाराणा बनने में आए व्यवधान जैसे दर्जनों अज्ञात प्रकरण पुस्तक में होने के कारण पाठक को महाराणा प्रताप के अकल्पनीय संघर्ष की सच्चाई से अवगत होने का अवसर मिलेगा। उनके द्वारा आविष्कृत 'छापाकार युद्ध के द्वारा आठ वर्षों तक प्रलयंकारी मुगल आक्रमणों के प्रतिकार में मिली सफलता के कारण विश्व भर में इस पद्धति का अनुसरण होता रहा । भारतवर्ष के गौरव महाराणा प्रताप के दुर्धष संघर्ष, अप्रतिम संकल्पशक्ति और अपरिमेय जिजीविषा का यह प्रेरक विवरण हमारे वीर और प्रतापी सम्राटों के पराक्रम, साहस और शौर्य का जयघोष करेगा।
Vinayak
- Author Name:
Ramesh Chandra Shah +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Vinayak, a Sahitya Akademi-award winning Hindi Novel, as a sequel to the author;s first novel 'Gobar Ganesh', according to the novelist, is the "pratismriti" (remembrance of our national-cultural memories) and the katha or narrative of India as a civilizational state. Its multi-perspectiveal, multi-centric kathana (plot), involving characters representing a cross section of Indian Society, is marked by engaging and interesting debates on such issues as gender-politics, culturalimperialism, casteism, communalism, the Kashmir-question and the condition of Kashmiri Pundits, sustainable development, ecological consciouness, swaraj or decolonization of mind, role of "Breaking India" forces comouflaged as NGO-activism, and the all0embracing nature of the spiritual that subsumes the secular, the significance of purusharthas or cardinal principles of life, etc. A sahridaya or cultivaed reader whould also relish how deftly the narrative echoes the voices of such great masters as Valmiki, Vyas, Krishna, Keats, Rike, Yeats, Eliot, Naipaul, Proust, Prasad and others.
Pankh Se Chhuta
- Author Name:
Pragya Pandey
- Book Type:

- Description: प्रज्ञा पांडेय के इस उपन्यास में वल्लरी और उसकी बेटी अन्ना की यह कथा सिर्फ़ माँ-बेटी की कथा नहीं है। मानवीय संबंधों के सर्पिल पेंचदार गलियों से गुजरती इस कथा में मन के अनगिन गवाक्ष हैं और इन गवाक्षों में छिपा जीवन पाठकों को विलक्षण जीवनानुभव सौंपता है। प्रेम में चोटिल होने के बावजूद वल्लरी अपने गर्भ की रक्षा करती है और अन्ना को जन्म देती है। वह इसे अपने लिए केवल प्रकृति का उपहार नहीं मानती, बल्कि स्त्री-जीवन की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय मानती है. अन्ना का जन्म उसके अंतःकरण को नई शक्ति देता है.
Kaamnaon Ki Munder Par
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description: ‘हंस’ में कहानी ‘अफ़सानाबाज़’ पढ़ी। दर्द को मन में पूरी तरह जज़्ब करके लिखी है यह कहानी जो कहानी नहीं, सच लगती रहती है बराबर। उनके पहाड़ जैसे सन्ताप के सामने हमारे अपने निजी दुख कितने छोटे नज़र आने लगते हैं। गीताश्री ने लिखी नहीं, कहानी जी है। मृदुला गर्ग,कथाकार गीताश्री की कहानियों में आधुनिक स्त्री की उन्मुक्त उड़ान है तो परम्पराओं में क़ैद नारी की यौनिक आज़ादी व स्वतंत्र अस्तित्व के लिए छटपटाहट भी। वे अपनी कहानियों में लोक कथाओं का बघार लगाना भी बख़ूबी जानती हैं। गीता की समस्या यह है कि वे साहित्य की मर्दवादी दुनिया में एक एनिग्मा की तरह देखी जाती हैं। जो भी हो, आप उनकी कहानियों की आलोचना कर सकते हैं, आप उनकी कहानियों की प्रशंसा कर सकते हैं किन्तु अप्रभावित नहीं रह सकते। संजय सहाय, सम्पादक-कथाकार गीताश्री हमारे समय की एक विशिष्ट रचनाकार हैं। पत्रकारिता के प्रशिक्षण ने उन्हें एक ऐसी सूक्ष्म दृष्टि प्रदान की है जो उनके थीम्स के चयन के मार्फ़त हमें चौंकाती है और एक नई दुनिया को बिना किसी मिलावट के हमारे सामने नग्न कर देती है। समाज की रूढ़ियों, वर्जित विषयों और हाशिये पर खड़े लोगों पर गीताश्री ने संवेदनशील कहानियाँ लिखी हैं। उनमें से कुछ उनके इस संग्रह में शामिल हैं। उसकी बानगी है ‘न्याय-चक्र’ कहानी। जाति व्यवस्था किस तरह सामूहिक वर्ग-भेद के भीतर बनी रहती है और हाशिये का समाज कैसे इस दोहरी मार से उबर नहीं पाता है, इसका अद्भुत विश्लेषण करती है यह कहानी। वन्दना राग,कथाकार
Ret Samadhi
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Rating:
- Book Type:

- Description: अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बज़िद कि अब नहीं उठूँगी। फिर इन्हीं शब्दों की ध्वनि बदलकर हो जाती है अब तो नई ही उठूँगी। दादी उठती है। बिलकुल नई। नया बचपन, नई जवानी, सामाजिक वर्जनाओं-निषेधों से मुक्त, नए रिश्तों और नए तेवरों में पूर्ण स्वच्छन्द। कथा लेखन की एक नई छटा है इस उपन्यास में। इसकी कथा, इसका कालक्रम, इसकी संवेदना, इसका कहन, सब अपने निराले अन्दाज़ में चलते हैं। हमारी चिर-परिचित हदों-सरहदों को नकारते लाँघते। जाना-पहचाना भी बिलकुल अनोखा और नया है यहाँ। इसका संसार परिचित भी है और जादुई भी, दोनों के अन्तर को मिटाता। काल भी यहाँ अपनी निरन्तरता में आता है। हर होना विगत के होनों को समेटे रहता है, और हर क्षण सुषुप्त सदियाँ। मसलन, वाघा बार्डर पर हर शाम होनेवाले आक्रामक हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी राष्ट्रवादी प्रदर्शन में ध्वनित होते हैं ‘क़त्लेआम के माज़ी से लौटे स्वर’, और संयुक्त परिवार के रोज़मर्रा में सिमटे रहते हैं काल के लम्बे साए। और सरहदें भी हैं जिन्हें लाँघकर यह कृति अनूठी बन जाती है, जैसे स्त्री और पुरुष, युवक और बूढ़ा, तन व मन, प्यार और द्वेष, सोना और जागना, संयुक्त और एकल परिवार, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, मानव और अन्य जीव-जन्तु (अकारण नहीं कि यह कहानी कई बार तितली या कौवे या तीतर या सड़क या पुश्तैनी दरवाज़े की आवाज़ में बयान होती है) या गद्य और काव्य : ‘धम्म से आँसू गिरते हैं जैसे पत्थर। बरसात की बूँद।’
Jahaz Paanch Paal Wala
- Author Name:
Savita Bhargav
- Book Type:

- Description: ‘जहाज़ पाँच पाल वाला’ के केन्द्र में तीन ख़ुद-मुख़्तार स्त्रियाँ—वर्तिका, चारुचित्रा और एमिली— हैं जिन्होंने लीक तोड़ते हुए, अपने घर-परिवार, परम्परा और आसपास की पितृसत्तात्मक दुनिया के द्वारा आरोपित तमाम अवरोधों से जूझते हुए अपने लिए अलग राह चुनी और रंगमंच और जीवन दोनों ही इलाकों में एक क़ाबिले-रश्क जगह बनाई। यहाँ परदे के पीछे से समय और घटनाओं के दबाव के बीच रंगमंच की राजनीति है तो मंच पर इन नायिकाओं का हलचल पैदा करनेवाला बिन्दास जीवन, जहाँ जीवन और रंगमंच एक दूसरे का आईना बनते जा रहे हैं और बरसों पहले खेले गए नाटकों के अनेक प्रसंगों की त्रासद छायाएँ उनके वास्तविक जीवन में एक उदास निरन्तरता में गिर रही हैं। अपने निजी सम्बन्धों में ये कई बार ऐसे विरोधाभासों से युक्त दिखाई पड़ती हैं जो बताते हैं कि मुक्ति और बराबरी की यह लड़ाई कितनी मुश्किल होनेवाली है। असल में खोजे जा रहे रास्ते और दुनिया उनके लिए इतनी नई है कि यह नितान्त स्वाभाविक है कि इस खोज में कई बार भटकाव भी दिखें। चारुचित्रा और उसकी बेटी का पहाड़ी बाबा के सम्मोहन में फँसकर जान गँवाना त्रासद है लेकिन यही बात इन्हें एक वास्तविक दुनिया की रहवासी भी बनाती है। यह उपन्यास सांस्कृतिक रूप से उर्वर शहर भोपाल में घटित होता है। भोपाली हिन्दी का प्रयोग इसे एक गाढ़ा स्थानीय रंग और विश्वसनीयता देता है जहाँ से यह उन सारी स्त्रियों की गाथा बन जाता है जो अपने-अपने शहरों में अपने मन का जीवन जीने की लड़ाई लड़ रही हैं।
A Green Warrior
- Author Name:
Amit Mahoday Arywarti
- Book Type:

- Description: 'अ ग्रीन वॉरियर' फिल्म अभिनेता तथा लेखक अमित महोदय आर्यावर्ती द्वारा लिखा गया उपन्यास है।
Parva
- Author Name:
S.L. Bhyrappa
- Rating:
- Book Type:

- Description: Parva is a novel written by S. L. Bhyrappa in the Kannada language. It is a retelling of the Sanskrit epic Mahabharata, narrated through the personal reflections of the principal characters. The novel is widely acclaimed as a modern classic. Parva is among Bhyrappa's most widely debated and popular works and is considered by many to be his greatest.
Shahar Mein Curfew
- Author Name:
Vibhuti Narayan Rai
- Book Type:

- Description: पिछले तीन-चार दशकों में साम्प्रदायिकता का ज़हर तेजी से फैला है। परिणाम यह हुआ कि आज देश की राजनीति साम्प्रदायिक विचारधारा के इर्द-गिर्द संगठित हो गई है। साम्प्रदायिक हिंसा का तांडव देश को बेचैन बनाए हुए है। विभूति नारायण राय का चर्चित उपन्यास ‘शहर में कर्फ़्यू’ इसी विकराल समस्या से टकराता है। ‘शहर में कर्फ़्यू’ साम्प्रदायिक दंगे की चपेट में आए एक शहर के कर्फ़्यूग्रस्त मुहल्ले और ख़ासकर उससे पीड़ित एक परिवार की तीन दिनों की व्यथा-कथा है। यह कर्फ़्यू कुछ लोगों के लिए जीवन-मरण का सवाल है तो कुछ अन्य के लिए राजनीतिक नफ़ा-नुक़सान का खेल। दो जून की रोटी के लिए रोज़ चौदह घंटे खटनेवाले बीड़ी मज़दूर परिवार की बहू सईदा की बीमार बेटी की मौत इलाज के अभाव में हो जाती है। हर तरह से लाचार इस परिवार पर क्या क़हर टूटता है और उसे कैसे-कैसे दहशत भरे अनुभवों से गुजरना पड़ता है, लेखक ने इस सब का चित्रण अत्यन्त गहरी संवेदनशीलता के साथ किया है। अभावग्रस्त माँ सईदा अपनी मृत बेटी को याद करने की कोशिश करती है तो उसे ‘जो चीज़ याद आ रही थी वह भूख, धूल और बहती नाक का ऐसा मिला-जुला समिश्रण था जिससे फ़िल्मी माँ के वात्सल्य का कोई माहौल नहीं बन पा रहा था।’ कंट्रास्ट के द्वारा लेखक ने सईदा की नारकीय व्यथा को मर्मभेदी बना दिया है। उपन्यास में कई मार्मिक स्थल हैं। इनसानों के गली-मुहल्ले में दिन-दहाड़े एक बच्ची का बलात्कार ऐसा ही स्तब्ध करने वाला प्रसंग है। ऐसा पाशविक कृत्य किसी भी समाज का सबसे बड़ा कलंक है। ऐसे प्रसंगों की रचना में लेखक ने विलक्षण संवेदनशीलता के साथ वैचारिक सन्तुलन साधने में असाधारण दक्षता का परिचय दिया है। ‘शहर में कर्फ़्यू’ के माध्यम से लेखक ने समाज और राजनीति में लगातार सक्रिय साम्प्रदायिक विचारधारा के ख़तरों के प्रति जागरूक और सावधान किया है और उसे सिरे से ख़ारिज कर अपनी पक्षधरता की मुखर घोषणा भी की है। आकस्मिक नहीं कि कई दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा इस उपन्यास की प्रतियाँ जलाई गई थीं। इससे प्रमाणित है कि उपन्यास ने सिर्फ़ वैचारिक उत्तेजना ही नहीं पैदा की है बल्कि सही जगह पर चोट भी की है। —कृष्ण कुमार सिंह
The Tiger King: The Bagheera Chronicles
- Author Name:
Rahul Balaji
- Book Type:


- Description: “Your Majesty, the occurrence of true love is rare, and that is why it is so powerful.” An ancient curse forces the eighteen-year-old Rajput Prince Vanraj Sisodia to live the life of a Bagheera — an infamous shape-shifter that transforms into a tiger under the full moon. His life of luxury is thrown off-course, and he must cope with this curse and the burdens of a not so regular life of a prince. His family bears the brunt of the curse, when he loses his parents in a horrific accident. With only his grandmother, beside him, and a sister who blames him for all that they have lost, he leads a reclusive life, hating himself. His miserable existence takes a magical turn when he meets the beautiful and vivacious Lasya — a teenage witch. Connecting with others has never been easy for the young prince, but Lasya's mysterious charm is more than he can resist. He doesn't want to trust her, considering the fact that a witch was responsible for his curse. True Love is the last thing that Vanraj wants in his life, and yet, True Love is the only thing that can save him.
Durdamya
- Author Name:
Gangadhar Gadgil +1
- Book Type:

- Description: A truly wonderful book . It explains the life of one of our greatest leader Lokmanya Bal Gangadhar Tilak . A truly inspiring book
Kawale and Manas
- Author Name:
Uttam Kamble
- Book Type:

- Description: कावळे आणि माणसं... एक जमिनीवरून चालणारा आणि हवेत उडणारा पक्षी तर दुसरा जमिनीवरून चालणारा आणि कल्पनेचे पंख घेऊन उडणारा... दोघांचं भौतिक जग भिन्न वाटत असलं तरी मानसिक जग जवळपास जाणारं... काही वेळा कावळे माणसासारखं वागतात तर माणसं कावळ्यासारखं... कावळा माणसाचा बाप बनतो पण माणूस कावळ्याचा बाप नाही बनत... ज्या माणसाच्या सहवासात कावळा राहतो त्याचे गुण-दुर्गुण उचलतो... कधी कधी कावळा माणसापेक्षा शहाणा होतो तर कधी कधी असहाय्य माणूस कावळ्यासमोर हात जोडतो... कावळे, माणसं आणि स्मशान यांना शब्दात पकडण्याचा हा एक प्रयत्न... Kawale and Manas : Uttam Kamble कावळे आणि माणसं : उत्तम कांबळे
Adhure Suryon Ke Satya
- Author Name:
Prakash Kant
- Book Type:

- Description: Novel
Gadiwalon Ka Katra
- Author Name:
Aleksandr Kuprin
- Book Type:

- Description: गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।
Sindbad Ki Antim Yatra
- Author Name:
Ravindranath Tyagi
- Book Type:

- Description: हिंदी की व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। त्यागीजी ने अपने दो अन्य सहयात्रियों के साथ हिंदी-व्यंग्य को एक सुनिश्चित दिशा प्रदान की और उसे एक विधा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने में अप्रतिम योगदान दिया। इस व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी की व्यंग्य-दिशा पूर्णत: भिन्न थी। हरिशंकर परसाई का क्षेत्र राजनीतिक था, शरद जोशी में विषय का वैविध्य एवं नए प्रयोगों का कौशल था, जबकि त्यागीजी में साहित्य और लालित्य की प्रधानता थी। त्यागीजी का यह विशिष्ट रंग था, अपनी मौलिक सर्जनात्मकता थी और हिंदी-व्यंग्य को शिखर तक ले जाने की प्रतिभा थी। यही कारण है कि हिंदी-व्यंग्य में उनकी अपनी अलग पहचान है तथा व्यंग्य-त्रयी के अंग होने पर भी वे अपने जैसे अकेले ही हैं। हिंदी-व्यंग्य के इतिहास में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान रहेगा और नई पीढ़ी के प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगे। रवींद्रनाथ त्यागी ने विपुल मात्रा में व्यंग्य रचनाएँ कीं। संभव है, आज उनकी संपूर्ण व्यंग्य-कृतियाँ उपलब्ध न हों और पाठक उनकी प्रतिनिधि तथा उच्च कोटि की रचनाओं से वंचित रह जाएँ। इसी को ध्यान में रखकर रवींद्रनाथ त्यागी के संपूर्ण व्यंग्य-साहित्य में से कुछ चुनी हुई रचनाएँ इस पुस्तक में प्रकाशित की गई हैं। इससे पाठकों को उनके व्यंग्य-साहित्य की एक झलक मिल सकेगी और वे अपने इस प्रिय व्यंग्यकार की रचनाओं का रसास्वादन कर सकेंगे।
Jahan Ek Jangal Tha
- Author Name:
Madan Mohan
- Book Type:

- Description: Novel
Aag
- Author Name:
Chandrarekha Dhadwal
- Book Type:

- Description: पहाड़, उसकी बर्फीली चोटियाँ और शांत वातावरण शुरू से लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं लेकिन इस पर्यटकीय छवि से इतर पहाड़ की गोद में बसे सैकड़ों छोटे गाँवों की तरफ लोगों का ध्यान अपेक्षाकृत कम जाता है। अपने पहले उपन्यास 'समय मेरे अनुरूप हुआ' से ही चर्चा में आईं वरिष्ठ लेखिका चंद्ररेखा ढडवाल अपने नये उपन्यास 'आग' में हिमाचल प्रदेश के एक ऐसी ही पहाड़ी गाँव की कहानी कहती हैं, जिसमें ग्रामीण परिवेश का संघर्षों से भरा जीवन है। प्रेम है। बैर है। लोकगीत और किस्से-कहानियाँ हैं। पर्व-त्यौहार, मेले-ठेले और खान-पान हैं। एक खिलंदड़ और मनमौजी मिज़ाज की लड़की लोइना है। उसी घर में पला-बढ़ा खेत-खलिहान में काम करने के लिए रखा गया बाहर का एक लड़का प्रीतो है। दोनों के भीतर सुलगती एक प्रेम आग है। लेकिन इससे पहले कि इनके प्रेम को हवा मिलती, लोइना ब्याह दी जाती है। और यहीं से शुरू होती है, लोइना के जीवन की दुश्वारियाँ। फौजी पति शादी के दूसरे रोज़ ही मोर्चे पर चला जाता है और गायब हो जाता है। एक चुलबुली लड़की के लिए, जिसने अभी-अभी जवानी के आँगन में पैर रखे हैं, उसके जीवन की इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है!... अपने भीतर ग्रामीण संस्कृति, विशेष बोली और आंचलिकता का प्रवाह समेटे यह एक ऐसा उपन्यास है, जिसे पढ़ते हुए लगता है, आप किसी पहाड़ी गाँव के मेंड़ों पर चलते हुए इसे सुन रहे हों। अपने सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ती लोइना, पीपल सरीखे छाया देने वाले शांत प्रीतो और प्यारी सास मस्या की एक रुला देने वाली कहानी है 'आग'। कथ्य के साथ-साथ यह उपन्यास में बरती गई लोकधर्मी भाषा की खूबी है कि बढ़ते पन्नों के साथ ही आप इसके चरित्रों की गर्माहट महसूस करने लग जाते हैं। —मिथिलेश प्रियदर्शी
Aabhas
- Author Name:
Varsha Adalja +1
- Book Type:

- Description: आभास साहित्य अकादमी से गुजरती भाषा में पुरस्कृत अड़सार उपन्यास का हिन्दी अनुवाद है। इस कृति में कथाकार ने कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास और इस बीमारी के साथ जुड़े सामाजिक कलंक की समस्या को उठाया है। यह प्रत्येक संवेंदनशील व्यक्ति को अंतर्मुख करनेवाली तथा जीवन्मूल्यों का अन्वेषण करने के लिए प्रेरित करने वाली कृति है। "अड़सार" का अर्थ है - 'ईश्वर की घंटी'। हर किसी के मन में ईश्वर की एक घंटी होती है। हर एक मन में सत-असत् प्रवृत्तियों का संघर्ष जारी रहता है। संवेदनशील व्यक्ति के मन में जब उस ईश्वर की घंटी की आवाज़ आती है और वह संघर्ष जब अस्तित्व को ही चुनौती देता है, तभी उस घंटी की गूंज सुनाई देती है और मनुष्य की 'मनुष्यता' ही अपनी चरमसीमा तक पहुँचती है। इस उपन्यास में मोह और विमोह के दो ध्रुवों को इस कौशल के साथ स्पर्श किया गया है कि कथाचरित्र का दारुण कष्ट और निर्मोही समाज का वास्तविक चेहरा बयाँ हो जाता है।
Madar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description: A Maithili Novel
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book