Lokraja Shahu Chhatrapati
(0)
Author:
Ramesh JadhavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
995
796 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
राजर्षि शाहू छत्रपति (1874-1922) कोल्हापुर रियासत के अधिपति थे। अपने अल्पकाल के राज्यशासन में प्रगतिशील सुधारों से आप ‘लोकराजा’ बने। मराठा इतिहास के विशेषज्ञ डॉ. रमेश जाधव ने अपने अनुसन्धान को आधार बनाकर इन्हीं लोकराजा का चरित्र लिखा।</p> <p>‘लोकराजा शाहू छत्रपति’ ग्रन्थ राजर्षि शाहू छत्रपति के जीवन, कार्य एवं विचारों की जीवन्त व प्रामाणिक कथा अभिव्यक्त करता है। महाराष्ट्र में बीसवीं सदी के प्रारम्भ में अछूतोद्धार, नारी शिक्षा, निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा, अन्तरजातीय विवाह, कृषि सुधार, सहकारिता, छात्रावासों की निर्मिति से विभिन्न समुदायों के मध्य समन्वय, कला-क्रीड़ा-संस्कृति उपक्रमों को बढ़ावा इत्यादि प्रजाहितैषी कार्यों से राजर्षि शाहू छत्रपति भारतवर्ष के लिए अनुकरणीय बने। उत्तर प्रदेश में उनकी स्मृति में ज़िला एवं विश्वविद्यालय का निर्माण, संसद भवन में उनकी प्रतिमा की स्थापना उनके सामाजिक कार्यों की महत्ता को रेखांकित करते हैं।</p> <p>सामाजिक न्याय को सर्वोच्च जीवनमूल्य माननेवाले ‘लोकराजा शाहू छत्रपति’ के इस जीवन चरित को जीवनी लेखन के क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है। मराठी से हिन्दी में अनुवाद करते हुए प्रो. शरद कणबरकर ने संवेदना और भाषिक संरचना का विशेष ध्यान रखा है। इस जीवनी को पढ़ना व्यापक सामाजिकता में प्रवेश करना है।</p> <p>
Read moreAbout the Book
राजर्षि शाहू छत्रपति (1874-1922) कोल्हापुर रियासत के अधिपति थे। अपने अल्पकाल के राज्यशासन में प्रगतिशील सुधारों से आप ‘लोकराजा’ बने। मराठा इतिहास के विशेषज्ञ डॉ. रमेश जाधव ने अपने अनुसन्धान को आधार बनाकर इन्हीं लोकराजा का चरित्र लिखा।</p>
<p>‘लोकराजा शाहू छत्रपति’ ग्रन्थ राजर्षि शाहू छत्रपति के जीवन, कार्य एवं विचारों की जीवन्त व प्रामाणिक कथा अभिव्यक्त करता है। महाराष्ट्र में बीसवीं सदी के प्रारम्भ में अछूतोद्धार, नारी शिक्षा, निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा, अन्तरजातीय विवाह, कृषि सुधार, सहकारिता, छात्रावासों की निर्मिति से विभिन्न समुदायों के मध्य समन्वय, कला-क्रीड़ा-संस्कृति उपक्रमों को बढ़ावा इत्यादि प्रजाहितैषी कार्यों से राजर्षि शाहू छत्रपति भारतवर्ष के लिए अनुकरणीय बने। उत्तर प्रदेश में उनकी स्मृति में ज़िला एवं विश्वविद्यालय का निर्माण, संसद भवन में उनकी प्रतिमा की स्थापना उनके सामाजिक कार्यों की महत्ता को रेखांकित करते हैं।</p>
<p>सामाजिक न्याय को सर्वोच्च जीवनमूल्य माननेवाले ‘लोकराजा शाहू छत्रपति’ के इस जीवन चरित को जीवनी लेखन के क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है। मराठी से हिन्दी में अनुवाद करते हुए प्रो. शरद कणबरकर ने संवेदना और भाषिक संरचना का विशेष ध्यान रखा है। इस जीवनी को पढ़ना व्यापक सामाजिकता में प्रवेश करना है।</p>
<p>
Book Details
-
ISBN9788183615204
-
Pages356
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Zindagi
- Author Name:
Sanjay Sinha
- Book Type:

- Description: जिस पहली महिला ने मुझे अपनी ओर आकर्षित किया था, वो मेरी माँ ही थी। मैं माँ को कभी खुद से दूर नहीं होने देना चाहता था, इसलिए मैंने चार-पाँच साल की उम्र में माँ से कहा था कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। माँ हँस पड़ी थी, कहने लगी कि मैं तुम्हारे लिए परीलोक की राजकुमारी लाऊँगी। मैं कह रहा था कि माँ, तुमसे सुंदर कोई और हो ही नहीं सकती। मृत्यु से एक रात पहले माँ ने मुझे बताया था कि वो कल चली जाएगी। मैंने माँ से पूछा था, तुम चली जाओगी, फिर मैं अकेला कैसे रहूँगा। माँ ने कहा था, मैं तुम्हारे आस-पास रहूँगी। हर पल। कहते हैं रामकृष्ण परमहंस को पत्नी में माँ दिखने लगी थी। एक औरत में माँ का दिखना ही चेतना का सबसे बड़ा सागर होता है। संसार की हर औरत को इस बात के लिए गौरवान्वित होने का हक है कि वो माँ बन सकती है। उसके पास अपने भीतर से एक मनुष्य को जन्म देने का माद्दा है। उसे बहुधा इस काम के लिए किसी पुरुष की भी दरकार नहीं। शादी के बाद जो भी मेरी पत्नी से मिला, सबने कहा ये तुम्हारी माँ का पुनर्जन्म है। विरोधाभासों और कल्पनाओं के अथाह समंदर का नाम जिंदगी है।
Main Jahan-Jahan Chala Hun
- Author Name:
Dr. Gyaneshwar Muley
- Book Type:

-
Description:
मैं जहाँ-जहाँ चला हूँ पारम्परिक अर्थ में न सिर्फ़ यात्रा-वृत्त है, न सिर्फ़ संस्मरण, यह इन दोनों का मिला-जुला रूप है। हम इसे लेखक का प्रवास-वृत्त कह सकते हैं; वे स्वयं इन्हें ‘मेरे पड़ाव’ कहते हैं। गहरी उत्सुकता, जिज्ञासा, सहज ग्रहणशीलता और उत्फुल्ल हास्यबोध के साथ लेखक ने इन संस्मरणात्मक निबन्धों में उन स्थानों का वर्णन किया है, जहाँ-जहाँ उन्हें कुछ समय रहने का मौक़ा मिला जैसे जापान, मॉरीशस व पाकिस्तान और जहाँ-जहाँ उनका मन रुका, जैसे रेलवे स्टेशन, दिल्ली की सड़कें और देश-विदेश के नाई।
ज्ञानेश्वर मुले भारतीय विदेश सेवा में अधिकारी रहे हैं और मराठी के चर्चित लेखक, कवि तथा स्तम्भकार हैं। इस पुस्तक में वे हमें सूचनाओं और संवेदनाओं में सन्तुलित एक सुग्राह्य और आकर्षक गद्य उपलब्ध कराते हैं। जापान के लोगों का ‘साकुरा-प्रेम’ हो, या मॉरीशस के नागरिकों का ‘भारत-प्रेम’, पाकिस्तान के सरकारी तंत्र का सशंक बर्ताव हो या दिल्ली में फैला भारतीय इतिहास, उलझी सड़कें और अपने वंशजों को सीधी चुनौती देने वाले बन्दर, हर चीज़ और स्थान को वे एक रचनात्मक उछाह के साथ देखते हैं और उसी उछाह के साथ उसे पाठक तक पहुँचाते हैं। जहाँ ज़रूरत हो वहाँ व्यंग्य करते हैं, जहाँ ज़रूरत हो वहाँ संवेदना का भीना वितान बुन देते हैं और जहाँ ज़रूरत हो प्राकृतिक दृश्यों के सजीव-सचल चित्र खींच देते हैं।
Hum Nahin Change Bura Na Koy
- Author Name:
Surendra Mohan Pathak
- Book Type:

- Description: लोकप्रिय साहित्य हिन्दी अकादमिक जगत के लिए मूल्यांकन की चीज़ कभी नहीं रहा, लेकिन हिन्दी के शिक्षित समाज का बड़ा तबका उसके ही असर में रहता आया है। हमें लोकप्रिय साहित्य का बाज़ार तो दिखता है, उसकी आन्तरिक दुनिया की बनावट नहीं दिखती। ऐसे में लोकप्रिय लेखन के एक बड़े नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक अपनी आत्मकथा लिखकर बहस और मूल्यांकन की एक नई ज़मीन तैयार कर रहे हैं। उनका अपना जीवन है भी ऐसा जिसके बारे में दूसरों को दिलचस्पी हो। कान में सुनने की मशीन, आँखों पर मोटे लेंस का चश्मा लगाए, नौकरी करते हुए, तीन सौ से अधिक सफल उपन्यास लिखनेवाले पाठक जी अपने ही रचे किसी अमर किरदार जैसे आकर्षक व्यक्तित्व वाले हैं। लेखन के तौर-तरीक़े और ख़ुद के लिए तय किया हुआ अनुशासन अचरजकारी। लाखों पाठकों की रुचि को समझना, उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के दबाव को धत्ता बताते हुए, उनके दिमाग़ पर क़ब्ज़ा जमाना—यह कोई मामूली बात नहीं है। इन सब बातों को समझने में एक औज़ार का काम कर सकती है यह आत्मकथा—'हम नहीं चंगे बुरा न कोय’। यह सुरेन्द्र मोहन पाठक के लेखकीय जीवन के सबसे हलचल वाले दिनों की कथा है। यह उनके समय के पल्प फ़िक्शन इंडस्ट्री को जानने के लिए भी ज़रूरी किताब है।
Hitler Ka Yatna-Griha
- Author Name:
Ajay Shankar Pandey
- Book Type:

-
Description:
हर जन्म लेनेवाले की मृत्यु निश्चित है। मृत्यु भयावह नहीं है, भयावह है उसकी कल्पना। इसीलिए शायद ईश्वर ने मानव–जाति को सचेत कर दिया कि उसकी मृत्यु अवश्यंभावी है, उसे कोई टाल नहीं सकता। परन्तु यह कब और कैसी होगी, इसे रहस्य बना दिया।
किन्तु इतिहास के उस काले काल में हिटलर के कॉन्सन्ट्रेशन कैम्पों में बन्द लाखों अभागों को यह मालूम था कि उन्हें कब और कैसी मौत मरना है। उन्हें पता था, अमुक दिन, अमुक समय अपने सगे–सम्बन्धियों से सदा–सदा के लिए बिछुड़ जाना है।
मौत को साक्षात् सामने देखकर उन क़ैदियों की कैसी मन:स्थिति रही होगी? मौत को क़रीब पा क्या वे लोग विचलित नहीं हो रहे होंगे? क्या वे अपने भीतर जीने की ललक समाप्त कर मृत्यु की कामना कर रहे होंगे?
मौत के मुँह की ओर धीरे–धीरे बढ़ते लाखों बच्चों, नवयुवकों, वृद्धाओं की रोंगटे खड़े कर देनेवाली छवियों का संचयन है हिटलर का यातना–गृह! ऐसा यातना–गृह जहाँ हिटलर की क्रूरता का नंगा नाच देखने के लिए अभिशप्त थे क़ैदी! उन्हीं की हक़ीक़त से रू-ब-रू करवाती है यह पुस्तक ‘कॉन्सन्ट्रेशन कैम्प में तीन घंटे’।
Sach, Pyar Aur Thodi Si Shararat
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

-
Description:
अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और कथाकार खुशवंत सिंह की आत्मकथा सिर्फ़ आत्मकथा नहीं, अपने समय का बयान है। एक पत्रकार की हैसियत से उनके सम्पर्कों का दायरा बहुत बड़ा रहा है। इस आत्मकथा के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन के राजनीतिक, सामाजिक माहौल की पुनर्रचना तो की ही है, पत्रकारिता की दुनिया में झाँकने का मौक़ा भी मुहैया किया है। भारत के इतिहास में यह दौर हर दृष्टि से निर्णायक रहा है। इस प्रक्रिया में न जाने कितनी जानी-मानी हस्तियाँ बेनक़ाब हुई हैं और न जाने कितनी घटनाओं पर से पर्दा उठा है। ऐसा करते हुए खुशवंत सिंह ने हैरत में डालनेवाली साहसिकता का परिचय दिया है।
खुशवंत सिंह यह काम बड़ी निर्ममता और बेबाकी के साथ करते हैं। ख़ास बात यह है कि इस प्रक्रिया में औरों के साथ उन्होंने ख़ुद को भी नहीं बख़्शा है। वक़्त के सामने खड़े होकर वे उसे पूरी तटस्थता से देखने की कामयाब कोशिश करते हैं। इस कोशिश में वे एक हद तक ख़ुद अपने सामने भी खड़े हैं —ठीक उसी शरारत-भरी शैली में जिससे ‘मैलिस’ स्तम्भ के पाठक बख़ूबी परिचित हैं, जिसमें न मुरौवत है और न संकोच।
उनकी ज़िन्दगी और उनके वक़्त की इस दास्तान में ‘थोड़ी-सी गप है, कुछ गुदगुदाने की कोशिश है, कुछ मशहूर हस्तियों की चीर-फाड़ और कुछ मनोरंजन’ के साथ बहुत कुछ जानकारी भी।
Swatantrata Senani Krantikari Baikunth Sukul Ka Mukadama
- Author Name:
Nandkishore Sukla
- Book Type:

- Description: बिहार के ग्राम जलालपुर, जिला मुजफ्फरपुर (वर्तमान वैशाली) में जन्मे बैकुंठ सुकुल उन स्वतंत्रता सेनानियों में थे, जो गुमनामी के अंधेरों में रहे हैं। उन्हें मुजफ्फरपुर के सत्र न्यायाधीश ने भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के प्रसिद्ध मुकदमे के इकबालिया गवाह फणीन्द्रनाथ घोष की हत्या के आरोप में फाँसी की सजा सुनाई थी। बंगाल और लाहौर सहित विभिन्न जगहों के 91 सरकारी गवाहों की सुनवाई में सुकुल जी के द्वारा 50 बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया गया। बैकुंठ सुकुल को सजा सुनाते समय सत्र न्यायाधीश उन तीन निर्णायकों से असहमत रहा जिन्होंने बैकुंठ सुकुल को दोषी नहीं पाया बल्कि बहुमत छोड़कर एक निर्णायक से सहमत रहते हुए फैसला सुनाया गया और 14 मई,1934 को बैकुंठ नाथ सुकुल को फाँसी दे दी गई। यह पुस्तक तत्कालीन राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में शहीद बैकुंठ सुकुल के मुकदमे की कार्यवाहियों को प्रामाणिकता से प्रस्तुत करती है। 24 फरवरी, 1934 का वह पत्र भी इस पुस्तक में शामिल में किया गया है, जो मुजफ्फरपुर के सत्र न्यायाधीश ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को लिखा था। उस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि ‘बैकुंठ सुकुल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष बचाव वकील खड़ा करने का कोई अर्थ नहीं है।’ साथ ही यहाँ ‘लाहौर षड्यंत्र’ के मुकदमे के फैसले से जुड़े दस्तावेज भी हैं जो सुखदेव और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध किया गया था। इन दस्तावेजों के अतिरिक्त इस पुस्तक में जहाँ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन गतिविधियों का खुलासा किया गया है, वहीं बिहार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमि,जातियों, समुदाय और शिक्षा की सापेक्ष भूमिका पर प्रकाश भी डाला गया है।
Aur Babasaheb Ambedkar Ne Kaha : Vols. 1-6
- Author Name:
DR. B.R. Ambedkar
- Book Type:

- Description: वह अम्बेडकर ही थे जिनके सिद्धान्तों ने दलित वर्ग को नई चेतना प्रदान की। और बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा...उन्हीं के 1920 से लेकर 1956 तक के लेखों, अभिलेखों और अभिभाषणों का संकलन है। पाँच खंडों में विभाजित इस रचनावली में डॉ. अम्बेडकर की उसी सामग्री को लिया गया है जो अभी तक केवल मराठी में उपलब्ध थी। हमें खुशी है कि हम इस सामग्री को पहली बार सीधे हिन्दी में उपलब्ध करा रहे हैं। पहले खंड में बाबासाहेब के 1920 से 1928 तक के लेख व अभिभाषण प्रस्तुत हैं। अपने भाषणों में डॉ. अम्बेडकर ने जहाँ ब्राह्मणवाद पर कड़ा प्रहार किया, वहीं उन्होंने दलितों को भी नया दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रथम खंड में प्रस्तुत सामग्री बताती है कि किस तरह से हजारों सालों से दलितों पर हो रही जुल्म-ज्यादतियों के खिलाफ लडऩे के लिए बाबासाहेब ने दलित वर्ग को मानसिक रूप से सुदृढ़ किया और उन्हें उनके उद्धार का रास्ता भी दिखाया। इसमें कोई सन्देह नहीं कि यह खंड दलित वर्ग ही नहीं बल्कि सामाजिक क्रान्ति में विश्वास रखनेवाले सभी महानुभावों की जिज्ञासाओं को तुष्ट करेगा।
Vivekanand Tum Laut Aao
- Author Name:
Shubhangi Bhadbhade
- Book Type:

- Description: सरयू नदी के किनारे बैठे हुए विवेकानंद को सभी का स्मरण हो आया। उन्होंने सोचा; कुछ भी हो; अब प्रत्येक स्थान पर मुझे गुरु-महिमा बखाननी ही चाहिए। उसके बिना मैं अधूरा हूँ। • ‘गुरु—जो संपूर्ण जीवन को पूर्ण ईश्वर तक ले जाता है।’ • ‘गुरु—सकल ज्ञान का; सिद्धि का और इस जन्म का मोक्षदाता।’ • ‘गुरु—स्नेह का सागर; अपरंपार करुणा का आगर।’ • ‘गुरु एक ऐसी कड़ी है; जो आत्मा-परमात्मा को जोड़ती है।’ • ‘गुरु—शुद्ध; सात्त्विक; संयमी; मधुर भाषी व हितैषी भी।’ —इसी पुस्तक से भारत के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक आकाश के सबसे जाज्वल्यमान नक्षत्र स्वामी विवेकानंद का जीवन यद्यपि अल्पायु था; पर अपनी प्रखर वाणी और विचारों के कारण वे भारतीय जनमानस के मन-मस्तिष्क पर गहरे से अंकित हैं। आज की सामाजिक स्थिति में उनकी अंतर्दृष्टि जितनी आवश्यक है उतनी शायद पहले नहीं थी। इसलिए लेखिका ने इस उपन्यास के माध्यम से आह्वान किया है कि भारत के पुनरुत्थान के लिए ‘विवेकानंद; तुम लौट आओ’। Reconnect with the Wisdom of Swami Vivekananda in 'Vivekanand Tum Laut Aao' by Shubhangi Bhadbhade Embark on a spiritual journey and rediscover the timeless teachings of Swami Vivekananda in 'Vivekanand Tum Laut Aao' by Shubhangi Bhadbhade. This profound work not only pays homage to the revered spiritual leader but also invites readers to reconnect with his wisdom, bringing forth insights that resonate with the challenges of the contemporary world. Rekindle the Essence of Swami Vivekananda's Teachings 'Vivekanand Tum Laut Aao' serves as a spiritual beacon, guiding readers back to the teachings of Swami Vivekananda. Shubhangi Bhadbhade skillfully captures the essence of Vivekananda's philosophy, offering a modern perspective on timeless wisdom. As you delve into the pages, you'll find yourself immersed in a journey of self-discovery and spiritual awakening. Bhadbhade's narrative not only recounts Vivekananda's life but also contextualizes his teachings, making them relevant to the challenges and aspirations of today. Whether you are a spiritual seeker or someone seeking inspiration for personal growth, this book provides a roadmap to navigate the complexities of life through Vivekananda's profound insights. Experience the Resonance of Vivekananda's Message 'Vivekanand Tum Laut Aao' goes beyond being a mere biography; it is a call to embrace Swami Vivekananda's timeless message. Bhadbhade's writing style ensures that readers resonate deeply with Vivekananda's thoughts and principles. The book serves as a bridge between the past and the present, inviting readers to apply Vivekananda's wisdom in their daily lives. More than just a literary work, this book becomes a companion on your spiritual journey, offering solace, guidance, and a renewed sense of purpose. Bhadbhade's dedication to Vivekananda's legacy ensures that readers not only understand his teachings but also internalize them for personal transformation. Why 'Vivekanand Tum Laut Aao' Is a Must-Read Spiritual Guide: Timeless Wisdom: Reconnect with the timeless wisdom of Swami Vivekananda, presented with clarity and relevance by Shubhangi Bhadbhade. Modern Perspective: This course explores Vivekananda's teachings in a contemporary context, making them accessible and applicable to today's challenges. Spiritual Awakening: Immerse yourself in a journey of self-discovery and spiritual awakening, guided by Swami Vivekananda's profound insights. Don't miss the opportunity to reconnect with the spiritual legacy of Swami Vivekananda. Let 'Vivekanand Tum Laut Aao' be your guide to rediscovering timeless wisdom. Secure your copy now and embrace the transformative teachings that continue to inspire and uplift souls.
Karmayogi - Ramchandra Chandravanshi
- Author Name:
Upendra Nath Panday
- Book Type:

- Description: उदारहृदय, कर्मयोगी, पलामू के सुपुत्र रामचंद्र चंद्रवंशी राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देनेवाले व्यक्तित्व हैं। क्षेत्र में स्थापित पारंपरिक, राजनीतिक व्यवस्था के विपरीत उन्होंने नई दिशा प्रदान की और वहाँ की सामाजिक संस्कृतियों में निखार लाए। एक खास वर्ग को समाज की मुख्यधारा में आने के लिए प्रेरित किया। रामचंद्र चंद्रवंशी ने अपनी संवेदनशीलता, सकारात्मक विचार, अनुभव एवं ज्ञान के सहारे शिक्षा की ज्योति जलाई । जिस क्षेत्र में नक्सलियों की बंदूकें गरजती थीं, उस क्षेत्र में शिक्षण संस्थाओं का जाल बिछा दिया। देश के दर्जनभर पिछड़े जिलों में से एक पलामू जिले में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की नींव रखी। इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय की स्थापना की। इस क्षेत्र की बेटियाँ शिक्षण संस्थान दूर होने के कारण चाहकर भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं, आज वे आसानी से उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। रामचंद्र चंद्रवंशी का पूरा जीवन समाज के उत्थान, शिक्षा और राजनीतिक शुचिता को समर्पित है। वह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं कि कैसे समाज को तरक्की की दिशा दी जा सकती है। प्रभावी व्यक्तित्व से वे अपने संपर्क में आनेवाले सब लोगों को प्रेरित करते हैं। कर्मयोगी रामचंद्र चंद्रवंशीके अनुकरणीय जीवन की यशोगाथा है यह पुस्तक ।
Satrein Aur Satrein
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

-
Description:
यह पुस्तक कथाकार मोहन राकेश के बारे में है जिसे लिखा है—अनीता राकेश ने। यह अनीता जी के अपने बारे में भी है; राकेश जी से उनके रिश्ते के बारे में भी। और इसकी विशेषता है, एक ऐसी क़लम से लिखा जाना जिसने लिखा बहुत कम, और जिया बहुत ज़्यादा। यही वजह है कि आप इसे एक ही बैठक में पढ़ने को बाध्य हो जाते हैं।
मोहन राकेश का अपना जीवन अनेक विडम्बनाओं, दु:खों और परेशानियों में बीता, उनका वैवाहिक जीवन कभी उस तरह सन्तोषजनक नहीं रहा, जैसे सामान्यत: लोगों का होता है। अनीता जी ने जब उनके जीवन में क़दम रखा, तब वे उनसे बहुत छोटी थीं, बहुत लम्बे समय उनके साथ रह भी नहीं पाईं। इससे पहले कि उनके रिश्ते एक स्थिर जीवन में बदलते, राकेश दुनिया छोड़ गए।
इस किताब में उन पेचीदगियों का वर्णन है जिससे कुछ समय के साथ के दौरान, ख़ासकर अनीता जी गुज़रीं, और राकेश भी। इसके बाद उस समय की कथा है जब वे अचानक अकेली रह गईं। एक तरफ़ भावनात्मक अकेलापन और दूसरी तरफ़ जीवन की व्यावहारिक चुनौतियाँ। इस किताब के पन्नों पर इस सबको बिना किसी आलंकारिकता के प्रस्तुत कर दिया गया है।
यह इस संस्मरण शृंखला की दूसरी पुस्तक है। इसमें हम मोहन राकेश के बारे में जितना जान पाते हैं, उतनी ही उस दौर के साहित्यिक माहौल के बारे में भी, और उतना ही मनुष्य जीवन की विकट सच्चाइयों के बारे में भी।
The World As I See It
- Author Name:
Albert Einstein
- Book Type:

- Description: The World as I See It is a book by Albert Einstein, translated from the German by A. Harris. The Bodley Head (London). The original German book is “Mein Weltbild” by Albert Einstein. Composed of assorted articles, addresses, letters, interviews, and pronouncements, it includes Einstein’s opinions on the meaning of life, ethics, science, society, religion, and politics. Albert Einstein believed in humanity, in a peaceful world of mutual helpfulness, and in the high mission of science. This book is intended as a plea for this belief at a time that compels every one of us to overhaul his mental attitude and his ideas.
Meena Bazar
- Author Name:
Saadat Hasan Manto
- Book Type:

-
Description:
‘मीना बाज़ार’ उर्दू के सुप्रसिद्ध अफ़सानानिगार सआदत हसन मंटो की बहुचर्चित संस्मरण-कृति है, जिसमें उन्होंने फ़िल्म-जगत की कुछ मशहूर हस्तियों का पारदर्शी चित्रण किया है। ऐसा करते हुए उनका लहज़ा आत्मीय होकर भी बेलौस है। इसमें उनका अपना स्वभाव और नज़रिया तो है ही, वे सामाजिक सच्चाइयाँ भी हैं, जब फ़िल्म-कलाकारों को आज के जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं थी। मंटो ने यहाँ नर्गिस, नसीम, अशोक कुमार, कुलदीप कौर, श्याम, सितारा, बी.एच. देसाई और इस्मत चुगताई जैसी हस्तियों की विशेष रूप से चर्चा की है। इन हस्तियों को वे एक दोस्त की हैसियत से तो देखते ही हैं, कलाकार के नाते भी देखते हैं और उनके निजी तथा व्यावसायिक जीवन को एक ख़ास अदाकारी के साथ हमारे सामने खोलते हैं।
मंटो हिन्दी और उर्दू, दोनों ही भाषाओं की अदबी दुनिया के चहेते रचनाकार हैं। उनके जैसी तरल मानवीय संवेदना और जीवनानुभवों की विविधता बहुत कम लेखकों में दिखाई पड़ती है। निस्सन्देह, ‘मीना बाज़ार’ उनकी उसी संवेदना और रचनात्मक विविधता का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
Aadi Shankracharya : Jeewan Aur Darshan
- Author Name:
Jairam Mishra
- Book Type:

- Description: v data-content-type="html" data-appearance="default" data-element="main"><p>आठवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में भारत में जैन धर्म, बौद्ध धर्म तथा अन्य अनेक सम्प्रदायों और मत-मतान्तरों का बोलबाला था। जैन धर्म की अपेक्षा बौद्ध धर्म अधिक शक्तिशाली सिद्ध हुआ। जैन धर्म को खुलकर चुनौती दी। जैन धर्म भी वैदिक धर्म का कम विरोधी नहीं था। बौद्ध और जैन धर्मों के अतिरिक्त सातवीं-आठवीं शताब्दी में अन्य धार्मिक सम्प्रदाय भी प्रचलित हो गए थे। उनमें भागवत, कपिल, लोकायतिक (चार्वाक), काणाडी, पौराणिक, ऐश्वर, कारणिक, कारंधमिन (धातुवादी), सप्ततान्त्व (मीमांसक), शाब्दिक (वैयाकरण), पांचेरात्रिक प्रमुख थे। ये सभी सम्प्रदाय वेद-विरोधक और श्रुति-निन्दक थे। ऐसी विषम और भयावह स्थिति में धार्मिक जगत में किसी ऐसे उत्कट त्यागी, निस्पृह, वीतराग, धुरंधर विद्वान, तपोनिष्ठ, उदार, सर्वगुण-संपन्न अवतारी पुरुष की महान आवश्यकता थी जो धर्म की विशृंखलित कड़ियों को एकाकार करके उसे सुदृढ़ बनाता और धर्म का वास्तविक स्वरूप सबके सम्मुख प्रस्तुत करता। मध्वाचार्य ने शंकराचार्य के अवतार का वर्णन विस्तार के साथ किया है। उसका सारांश इस प्रकार है—"भगवती भूदेवी और समस्त देवताओं ने जगत-सृष्टा ब्रह्मा के साथ कैलाश पर्वत पर जाकर पिनाकपाणी आशुतोष भगवान शंकर की आर्त्त वाणी में करबद्ध स्तुति की। तब भगवान शंकर उन लोगों के सम्मुख अत्यन्त तेजस्वी रूप में प्रकट हुए और उन्हें इस प्रकार आश्वासन दिया—‘हे देवगण, मैं समस्त घटनाओं से भली-भाँति विज्ञ हूँ। अतः मैं मनुष्य का रूप धारण कर आप लोगों की मनोकामना पूर्ण करूँगा। दुष्टाचार विनाश के लिए तथा धर्म के स्थापन के लिए, ब्रह्मसूत्र के तात्पर्य निर्णायक भाष्य की रचना कर, अज्ञानमूलक द्वैतरूपी अन्धकार को दूर करने के लिए मध्यकालीन सूर्य की भाँति चार शिष्यों के साथ चार भुजाओं से युक्त विष्णु के समान इस भूतल पर यतियों में श्रेष्ठ शंकर नाम से अवतरित होऊँगा। मेरे समान ही आप लोग भी मनुष्य-शरीर धारण कर मेरे कार्य में हाथ बँटाइए।’ इतना कहकर और देवताओं को अन्य आवश्यक निर्देश देकर भगवान शंकर अन्तर्धान हो गए!" आचार्य शंकर का भारतीय दार्शनिकों में अप्रतिम स्थान है। पाश्चात्य दार्शनिक भी उन्हें श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं और उनकी प्रतिभा के सम्मुख नतमस्तक हैं। उनके बाल्यकाल से देहलीला सँवरण तक की घटनाएँ चमत्कारिक एवं दैवी शक्ति से परिपूर्ण हैं। इसलिए उन्हें भगवान आशुतोष शंकर का अवतार माना जाता है। उन्होंने वैदिक धर्म का पुनरुद्धार किया और उसके वास्तविक स्वरूप को सही अर्थ में समझाने की चेष्टा की। इस महान प्रयास में उन्हें तत्कालीन धर्मों और सम्प्रदायों से लोहा लेना पड़ा। शैवों, शाक्तों, वैष्णवों, बौद्धों, जैनों एवं कापालिकों आदि से शास्त्रार्थ करना पड़ा। अपनी असाधारण प्रतिभा और अकाट्य तर्कों द्वारा उन्हें पराजित किया। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण में चार शंकराचार्य को अभिषिक्त कर भारतीय वैदिक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का उत्तरदायित्व उन्हें सौंपा। उन्होंने शैवों, शाक्तों एवं वैष्णवों को एक सूत्र में बाँधा। इससे वैदिक धर्म अत्यन्त शक्तिशाली हो गया। मात्र बत्तीस वर्ष की अल्पायु में उन्होंने अद्वितीय आश्चर्यजनक कार्य किए।</p>
Ek Thi Ramrati
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।
कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।
इस पुस्तक में ‘वाग्देवी का अदूभुत वरदान हे विदेशिनी!’, ‘हम तुम्हें पहचानते हैं’,‘...मुरलिया तू कौन गुमान भरी? जो मिले सुर स्वर-लय नटिनी’, ‘के रहीम अब बिरछ करूँ’, ‘माताहारी?’, ‘नदी जो मरुस्थल में खो गई’, ‘स्वरलय नटिनी’, ‘ननिया ने हाय राम’, ‘एक थी रामरती’, ‘चिरस्थायी शेर वन्दन’, ‘दाना मियाँ?’, ‘मत तोड़ो चटकाय’, ‘परमतृप्ति जन्मदिन’ आदि संस्मरण और रेखाचित्र शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।
Pao Bhar Jeere Main Brahmbhoj
- Author Name:
Ashok Vajpeyi
- Book Type:

-
Description:
समकालीन संस्कृति और हिन्दी साहित्य के पिछले दशकों के दृश्य में जो कुछ व्यक्ति बेहद सक्रिय और उतने ही विवादास्पद रहे हैं, उनमें अशोक वाजपेयी निश्चय ही एक हैं। जहाँ उनके जीवट, साहस, बेबाकी और अदम्यता की व्यापक सराहना होती रही है वहीं उन्हें समाज-विरोधी, नीचट कलावादी, अभिजात, आत्मकेन्द्रित आदि भी कहा जाता रहा है। अशोक वाजपेयी की कविता आज लिखी जा रही अधिकांश कविता का प्रतिपक्ष है, अपनी ज़िद पर अड़ी कविता। उनकी आलोचना का वितान बहुत व्यापक है : वे कविता, विश्व कविता, साहित्य-चिन्तन से लेकर शास्त्रीय और समकालीन कलाओं का साधिकार विश्लेषण और आकलन करने में समर्थ रहे हैं। युवा प्रतिभा का, फिर वह शास्त्रीय संगीत या नृत्य हो, ललित कलाएँ हों या रंगमंच या लोककलाएँ, अशोक वाजपेयी जैसा उन्नायक बिरला ही होगा लेकिन उन पर हिन्दी की युवतम प्रतिभा को दुर्लक्ष्य करने का आरोप लगता रहता है। अपने समय की सभी प्रमुख बहसों में उनकी हिस्सेदारी रही है और वे इस समय हिन्दी के सबसे प्रखर और विचारोत्तेजक वक्ता माने जाते हैं। उन पर कभी भी कटूक्ति करने से न चूकने का इल्ज़ाम लगता रहता है। हमेशा हँसमुख, मददगार अशोक वाजपेयी अपने गुट के अथक समर्थक माने जाते हैं। बेहद यारबाश होने के बावजूद अशोक वाजपेयी के व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष यह है कि वे ऐकान्तिक अवसाद से घिरे रहते हैं। पिछली अधसदी में हिन्दी अंचल में सबसे अधिक संस्कृति सम्बन्धी संस्थाओं के निर्माता और उनमें से अनेक के सफल संचालक अशोक वाजपेयी को सांस्कृतिक ज़ार कहा जाता रहा है।
यह पुस्तक अशोक वाजपेयी के अन्तरंग का आत्मीय, सटीक और मुखर दस्तावेज़ है। इसके गद्य में उनकी कविता की गरमाहट और आलोचना की तीक्ष्णता का ऐसा संयोग है जो उन्हें हमारे समय का समर्थ और साक्षी गद्यकार भी सिद्ध करता है।
Main Pakistan Mein Bharat Ka Jasoos Tha
- Author Name:
Mohanlal Bhaskar
- Book Type:

- Description: जासूसी को लेकर विश्व की विभिन्न भाषाओं में अनेक सत्यकथाएँ लिखी गई हैं, जिनमें मोहनलाल भास्कर नामक भारतीय जासूस द्वारा लिखित अपनी इस आपबीती का एक अलग स्थान है। इसमें 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उसके पाकिस्तान-प्रवेश, मित्रघात के कारण उसकी गिरफ़्तारी और लम्बी जेल-यातना का यथातथ्य चित्रण हुआ है। लेकिन इस कृति के बारे में इतना ही कहना नाकाफ़ी है क्योंकि यह कुछ साहसी और सूझबूझ-भरी घटनाओं का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के तत्कालीन हालात का भी ऐतिहासिक विश्लेषण करती है। इसमें पाकिस्तान के तथाकथित भुट्टोवादी लोकतंत्र, निरन्तर मज़बूत होते जा रहे तानाशाही निज़ाम तथा धार्मिक कठमुल्लावाद और उसके सामाजिक-आर्थिक अन्तर्विरोधों को उघाड़ने के साथ-साथ भारत-विरोधी षड्यंत्रों के उन अन्तरराष्ट्रीय सूत्रों की भी पड़ताल की गई है, जिसके एक असाध्य परिणाम को हम ‘ख़ालिस्तानी’ नासूर की शक्ल में झेल रहे हैं। उसमें जहाँ एक ओर भास्कर ने पाकिस्तानी जेलों की नारकीय स्थिति, जेल-अधिकारियों के अमानवीय व्यवहार के बारे में बताया है, वहीं पाकिस्तानी अवाम और मेजर अय्याज अहमद सिपरा जैसे व्यक्ति के इंसानी बर्ताव को भी रेखांकित किया है।
Ghumakkad Swami
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘घुमक्कड़ स्वामी’ बाबा हरिशरणानन्द का जीवन-वृत्त है जिसे राहुल सांकृत्यायन ने जीवनी के साथ-साथ यात्रा-वृत्तान्त का रूप देते हुए लिखा है। स्वामी हरिशरणानन्द का जन्म 1889 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ जो कानपुर में व्यापार करता था। मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र में उन्होंने कुछ साधुओं के साथ गृह-त्याग कर दिया जो एक अथक, खोजी और जिज्ञासु यात्रा का आरम्भ था। योग-साधना से शुरू होकर उनका यह सफ़र स्वतंत्रता-आन्दोलन में भागीदारी से होते हुए आयुर्वेद में शोध तक चलता रहा, फिर 1941 में बावन वर्ष की आयु में वे गृहस्थ हुए। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी स्वामी हरिशरणानन्द ने हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की यात्राएँ भी कीं। वे एक विज्ञान-प्रेमी और दृष्टिवान सन्त थे। रूढ़िवादी कर्मकांड और पंडों आदि के पाखंड को उजागर करते हुए उन्होंने ज्ञान के मार्ग का अवगाहन किया। इस प्रसिद्ध पुस्तक में राहुल जी उनकी जीवन-यात्रा को उस समय के नगरों, व्यवसायों, आध्यात्मिक परम्पराओं, साधु-सन्तों की जीवनचर्या, आश्रमों-मठों के वातावरण और आयुर्वेद की गहरी जानकारियाँ साझा करते हुए लिखते हैं। 19वीं-20वीं सदी का भारत इसमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं के साथ साक्षात दिखता है।
Sunita Williams
- Author Name:
Kali Shankar +1
- Book Type:

- Description: "सुनीता विलियम्स एक असाधारण महिला की अदम्य इच्छाशक्ति, समर्पण, उत्साह तथा आत्मविश्वास का पर्याय है। इन्हीं गुणों ने एक पशु-चिकित्सक बनने की महत्त्वाकांक्षा रखनेवाली छोटी बालिका सुनीता विलियम्स को एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान सुनीता विलियम्स दुनिया भर के लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। 29 घंटे 17 मिनट में कुल चार स्पेस वॉक (अंतरिक्ष में चलने का कार्य) पूरा करके उन्होंने महिलाओं के लिए ‘असाधारण वाहनीय गतिविधि’ का एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। सुनीता के अंतरिक्ष प्रवास ने विश्व में भारत का सम्मान और बढ़ा दिया। सुनीता समुद्रों में तैराकी कर चुकी हैं, महासागरों में गोताखोरी कर चुकी हैं, युद्ध और मानव-कल्याण के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं; अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से अब वापस धरती पर आ चुकी हैं; सचमुच, एक जीवित किंवदंती हैं वे। पे्ररणादायी सुनीता के जीवन से हर बालक-बालिका प्रेरणा लेकर किसी भी क्षेत्र के आकाश को छुए, यही इस पुस्तक के प्रकाशन का उद्देश्य है।
Seven Summers: A Memoir
- Author Name:
Mulk Raj Anand
- Book Type:

- Description: Seven Summers, first drafted when Mulk Raj anand was a student at London University but not published till 1951, recreates teh events and feelings of the first seven years of the writer’s life, or what he called his ‘half unconcious and half conscious childhood’. first of the seven volumes of autobiographical fiction that Anand conceptualized but never completed, this book is full of memorable scenes and people observed through the eyes of a child. the most impressive of them all being the Coronation Durbar in Delhi to which our young hero is smuggled wrapped in a blanket so that the Sahibs might not object to the presence of ‘so discordant an element into so gorgeous a ceremony’. this edition of Seven Summers is a special reissue of the classic autobiography to commemorate Anand’s birth centenary.
Charlie Chaplin: A Complete Biography
- Author Name:
Nandini Saraf
- Book Type:

- Description: Charlie Chaplin, the universal comic icon, who with his lovable portrayal of a ‘tramp’ made and still makes the world laugh. The Hitler’s toothbrush moustache, the bowler or derby hat, the coat a size or two too small, the baggy trousers, the floppy shoes and the cane made him the most unforgettable character. The mere mention of his name conjures a picture of him as the tramp. One of the most pivotal stars of the early silent era of Hollywood, Charlie Chaplin’s films made everyone laugh and cry at the same time. The world cinema is indebted to him for films like ‘The Kid’, ‘The Gold Rush’, “The Circus,” ‘City Lights’, ‘Modern Times’ and ‘The Great Dictator’. An enigma to the world, people have vast curiosity about his life and his body of work. This book is an attempt to unravel the various aspects of his life and his struggles. The happiness and the despair, the controversies and the acclaims are all revealed in this authentic biography of this great legend. Though he is no more between us but he continues to live in our memories.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book