Meena Bazar
(0)
Author:
Saadat Hasan MantoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘मीना बाज़ार’ उर्दू के सुप्रसिद्ध अफ़सानानिगार सआदत हसन मंटो की बहुचर्चित संस्मरण-कृति है, जिसमें उन्होंने फ़िल्म-जगत की कुछ मशहूर हस्तियों का पारदर्शी चित्रण किया है। ऐसा करते हुए उनका लहज़ा आत्मीय होकर भी बेलौस है। इसमें उनका अपना स्वभाव और नज़रिया तो है ही, वे सामाजिक सच्चाइयाँ भी हैं, जब फ़िल्म-कलाकारों को आज के जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं थी। मंटो ने यहाँ नर्गिस, नसीम, अशोक कुमार, कुलदीप कौर, श्याम, सितारा, बी.एच. देसाई और इस्मत चुगताई जैसी हस्तियों की विशेष रूप से चर्चा की है। इन हस्तियों को वे एक दोस्त की हैसियत से तो देखते ही हैं, कलाकार के नाते भी देखते हैं और उनके निजी तथा व्यावसायिक जीवन को एक ख़ास अदाकारी के साथ हमारे सामने खोलते हैं।</p> <p>मंटो हिन्दी और उर्दू, दोनों ही भाषाओं की अदबी दुनिया के चहेते रचनाकार हैं। उनके जैसी तरल मानवीय संवेदना और जीवनानुभवों की विविधता बहुत कम लेखकों में दिखाई पड़ती है। निस्सन्देह, ‘मीना बाज़ार’ उनकी उसी संवेदना और रचनात्मक विविधता का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
Read moreAbout the Book
‘मीना बाज़ार’ उर्दू के सुप्रसिद्ध अफ़सानानिगार सआदत हसन मंटो की बहुचर्चित संस्मरण-कृति है, जिसमें उन्होंने फ़िल्म-जगत की कुछ मशहूर हस्तियों का पारदर्शी चित्रण किया है। ऐसा करते हुए उनका लहज़ा आत्मीय होकर भी बेलौस है। इसमें उनका अपना स्वभाव और नज़रिया तो है ही, वे सामाजिक सच्चाइयाँ भी हैं, जब फ़िल्म-कलाकारों को आज के जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं थी। मंटो ने यहाँ नर्गिस, नसीम, अशोक कुमार, कुलदीप कौर, श्याम, सितारा, बी.एच. देसाई और इस्मत चुगताई जैसी हस्तियों की विशेष रूप से चर्चा की है। इन हस्तियों को वे एक दोस्त की हैसियत से तो देखते ही हैं, कलाकार के नाते भी देखते हैं और उनके निजी तथा व्यावसायिक जीवन को एक ख़ास अदाकारी के साथ हमारे सामने खोलते हैं।</p>
<p>मंटो हिन्दी और उर्दू, दोनों ही भाषाओं की अदबी दुनिया के चहेते रचनाकार हैं। उनके जैसी तरल मानवीय संवेदना और जीवनानुभवों की विविधता बहुत कम लेखकों में दिखाई पड़ती है। निस्सन्देह, ‘मीना बाज़ार’ उनकी उसी संवेदना और रचनात्मक विविधता का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
Book Details
-
ISBN9788126703197
-
Pages123
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Apani Sharton Per
- Author Name:
Sharad Pawar
- Book Type:

- Description:
शरद पवार भारत की सर्वाधिक प्रभावशाली राजनैतिक हस्तियों में गण्य-मान्य हैं। पाँच दशक लम्बे अपने राजनैतिक जीवन में उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा। चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। देश के रक्षामंत्री और फिर कृषि मंत्री के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। दो मौक़े ऐसे भी आए जब वे भारत के प्रधानमंत्री हो सकते थे। लोकप्रियता के ऊपर नीति और व्यावहारिकता को तरजीह देते हुए उन्होंने अक्सर सोच की नई धारा बनाई और अपने प्रशासनिक कौशल तथा सामंजस्यपूर्ण राजनीति के लिए प्रशंसा के पात्र बने। वे भारत और महाराष्ट्र के इतिहास को साठ के दशक से देख रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने गठबन्धन की राजनीति, कांग्रेस के भीतर लोकतंत्र के क्षरण, कृषि और उद्योग की स्थिति और भावी भारत के लिए सामाजिक समरसता तथा उदार दृष्टिकोण की अहमियत पर अपने विचार प्रकट किए हैं। पुस्तक में वे देश पर आए संकट के कुछ क्षणों पर भी हमें दुर्लभ जानकारी देते चलते हैं, जिनमें आपातकाल और देश की क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय राजनीति पर उसके प्रभाव; 1991 में चन्द्रशेखर सरकार का पतन; राजीव गांधी और एच.एस. लोंगोवाल के बीच हुआ पंजाब समझौता; बाबरी मस्जिद ध्वंस; 1993 के मुम्बई दंगे; लातूर का भूकम्प; एनरॉन विद्युत परियोजना विवाद और श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री पद न लेने का फ़ैसला आदि निर्णायक महत्त्व के मुद्दे शामिल हैं। भारतीय राजनीति के कुछ बड़े नामों का रोमांचकारी आकलन भी उन्होंने किया है, जिससे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, वाई.बी. चव्हाण, मोरारजी देसाई, बीजू पटनायक, अटल बिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, पी.वी. नरसिम्हा राव, जॉर्ज फर्नांडीज और बाल ठाकरे के व्यक्तित्वों पर नई रोशनी पड़ती है। 'अपनी शर्तों पर’ में न सिर्फ़ देश के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में से एक, शरद पवार, के अन्तर्दृष्टिपूर्ण संस्मरण हैं, बल्कि इस पुस्तक से हमें भारत के आधुनिक इतिहास को भी समझने का अवसर मिलता है।
Hindu Rashtra Darshan
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description:
A Hindu, to sum up the conclusions arrived at, is he who looks upon the land that extends from Sindhu to Sindhu, from the Indus to the seas, as the land of his forefathers, his pitrabhu, who inherited the blood of that race whose first discernible source is traced to the Vedic Saptasindhus, which, on its onward march, assimilated much that was incorporated and ennobling. The Hindus, who inherited and claimed as their own the culture of that race, as expressed chiefly in their common classic language, Sanskrit, and represented by a common history, a common literature, art and architecture, law and jurisprudence, rites and rituals, ceremonies and sacraments, fairs and festivals, and who, above all, address this land, this Sindhustan, as their punyabhu, as the holy land, the land of their saints and seers, of godmen and gurus, the land of piety and pilgrimage. These are the essentials of Hindutva – a common rashtra, a common jaati, and a common sanskriti. All these essentials could best be summed up by stating in brief that they are Hindu to whom Sindhustan is not only a pitrabhu but also a punyabhu. —Excerpts from this book This classic and unique book, Hindu Rashtra Darshan by Swatantrayaveer Savarkar, gives the true meaning and correct picture of the Hindu Rashtra, wherein everyone living on the land this side of Indus river is a Hindu by culture, by values and not by the religion in its narrow definition. The book is divided in three major parts—First part is Hindu Pad-Padshahi, Second is Hindu Rashtra Darshan and third part is Essentials of Hindutva. It is a must read book for all Bharatiyas.
Aaj Ke Ateet
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description:
भीष्म साहनी की कथा-शैली से जो बात सबसे पहले ध्यान खींचती है, वह ये कि हम एक ऐसे लेखक के पाठ के साथ हैं, जो लेखक बाद में है, पहले साथ बैठा हुआ मित्र है। ऐसा मित्र जो आपको कम-से-कम चौंकाते हुए, बल्कि शायद इस बात का ध्यान रखते हुए, अपनी बात कहता है कि उसकी कोई बात अगर आपके साथ कुछ करे तो आपके व्यक्तित्व की सबसे भीतरी तहों में वह सबसे पहले घटित हो। 'आज के अतीत’ में उनका यह मित्र भाव चरम पर है, और संयोग यह कि यहाँ वे अपने बारे में बता रहे हैं जो हमारा दोहरा लाभ है। हम अपने प्रिय लेखक को जान रहे हैं और उसकी कला के जादुई दायरे में ख़ुद को भी नवीकृत कर रहे हैं। इस आत्मकथा से हम उनके जीवन के साथ-साथ उनकी कई कृतियों की रचना-प्रक्रिया से भी अवगत होंगे, जानेंगे कि 'तमस’ कैसे बना, 'हानूश’ ने आकार कैसे लिया, और किस तरह भीष्म जी ने बतौर लेखक अपने समय, समाज, साथियों और इतिहास को देखा-समझा। इसमें उनके मास्को प्रवास का ब्यौरा भी आता है जहाँ वे काफ़ी समय रहे, और अनुवादक के रूप में कई पुस्तकों के अनुवाद हम तक पहुँचाए। यह हिस्सा ख़ास तौर पर पठनीय इसलिए है कि यहाँ हमें साम्यवादी सोवियत संघ के भीतर जारी उस प्रक्रिया की जानकारी भी मिलती है, जो धीरे-धीरे सोवियत संघ के पतन की तरफ़ गई। 'आज के अतीत’ से हमें उनके इप्टा के दौर और बड़े भाई बलराज साहनी के साथ उनके रिश्तों के बारे में भी बहुत कुछ जानने को मिलता है। हिन्दी आत्मकथाओं में ईमानदारी और पारदर्शी सहजता को स्थापित करनेवाली एक अनूठी रचना।
Rajkamal Choudhary Ka Safar
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description:
Biography
Dilli Shahar Dar Shahar
- Author Name:
Nirmala Jain
- Book Type:

- Description:
एक वक़्त के बाद कोई भी शहर वहाँ रहने वालों के लिए सिर्फ़ शहर नहीं, जीने का तरीक़ा हो जाता है। जिस तरह हम धीरे-धीरे शहर को बनाते हैं, बाद में उसी तरह शहर हमें बनाने लगता है और हम ‘दिल्ली वाले’, ‘मुम्बई वाले’ या ‘आगरा वाले’ कहे जाने लगते हैं।
सुपरिचित आलोचक निर्मला जैन की यह कृति एक दिल्ली वाले की तरफ़ से अपने शहर को दिया गया उपहार है। बराबर सजग और चुस्त उनकी लेखनी से उतरी हुई यह किताब बीसवीं शताब्दी की दिल्ली के स्याह-सफ़ेद और ऊँचाइयों-नीचाइयों के साथ न सिर्फ़ उसके विकास-क्रम को रेखांकित करती है, बल्कि उन दिशाओं की तरफ़ भी इशारा करती है जिधर यह शहर जा रहा है, और जिन्हें सिर्फ़ वही आदमी महसूस कर सकता है जिसे अपने शहर से प्यार हो।
सांस्कृतिक ‘मेल्टिंग पॉट’ बनी आज की दिल्ली के हम बाशिन्दे, जिन्हें अपने मतलब-भर से ज़्यादा दिल्ली को न देखने की फ़ुरसत है, न समझने की जिज्ञासा, नहीं जानते कि आज से मात्र 60-70 साल पहले यह शहर कैसा था, कैसी ज़िन्दगी पुरानी और असली दिल्ली की गलियों में धड़कती थी। हममें से अनेक यह भी नहीं जानते कि आज जिस नई दिल्ली की सत्ता देश को नियंत्रित करती है उसकी कुशादा, शफ़्फ़ाफ़ सड़कें कैसे वजूद में आईं, और दोनों दिल्लियों के बीच हमने क्या खोया और क्या पाया!
निर्मला जी की यह किताब 40 के दशक से सदी के लगभग अन्त तक की दिल्ली का देखा और जिया हुआ लेखा-जोखा है। इसमें साहित्य और शिक्षा के मोर्चों पर आज़ादी के बाद खड़ा होता हुआ देश भी है, और वे तमाम राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रियाएँ भी जिन्हें हमारे भवितव्य का श्रेय दिया जाना है।
Jo Kuchh Rah Gaya Ankaha
- Author Name:
Kedarnath Pandey
- Book Type:

- Description:
‘जो कुछ रह गया अनकहा’ लेखक के जीवन संघर्षों की औपन्यासिक गाथा है। इसे पढ़ते हुए लेखक के जीवन से ही नहीं, युग-युग के उस सच से भी अवगत हो सकते हैं जो अपनी प्रक्रिया में एक दिन एक मिसाल बनता है। उत्तर प्रदेश के ज़िला ग़ाज़ीपुर का गाँव वीरपुर, जहाँ लेखक का जन्म हुआ, यह खाँटी बाँगर मिट्टी का क्षेत्र है। यहाँ सिंचाई के अभाव में तब मुश्किल से ज्वार, बाजरा की फ़सल उपजती। लेखक ने खेती करते हुए पढ़ाई की तो आजीविका के लिए भटकाव की स्थिति से गुज़रना पड़ा। सबसे पहले कानपुर में 60 रुपए मासिक वेतन की नौकरी की, यह नौकरी रास नहीं आई तो नौ माह पश्चात् ही घर आ गए और गाँव के निजी संस्कृत विद्यालय में अध्यापन का कार्य सँभाला। पढ़ने की ललक निरन्तर बनी रही तो धीरे-धीरे एम.ए., एम.एड. तक की शिक्षा प्राप्त कर ली। फिर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के ज़िला सचिव का पद मिला। 1977 में सीवान में अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन हुआ तो सीवान ज़िला इकाई का सचिव पद मिला। फिर 1992 में मुज़फ़्फ़रपुर राज्य संघ में महासचिव हुए। 2008 में अखिल भारतीय शान्ति एकजुटता संगठन के सौजन्य से वियतनाम में आयोजित द्वितीय भारत वियतनाम मैत्री महोत्सव में शिष्टमंडल के सदस्य रहे। समय तेज़ी से परिवर्तित होता गया, लेखक को वह दौर भी देखने को मिला जब दुनिया-भर में शिक्षा और शिक्षकों के समक्ष एक ही प्रकार की चुनौतियाँ आईं। शिक्षा पर निजीकरण और व्यावसायीकरण का ख़तरा मँडराया, जब शिक्षकों के संवर्ग को समाप्त कर अल्पवेतन, अल्प योग्यताधारी शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षा को पूर्णतः बाज़ार के हवाले कर देने की योजना को बढ़ावा मिला। लेखक इससे विचलित तो नहीं हुआ परन्तु शारीरिक तौर पर अस्वस्थता ने जीवन-नौका को डुबाने की कगार पर ला दिया। अन्ततः एन्जियोप्लास्टी के कष्ट को भी झेलना पड़ा। एक बार फिर जीवन संघर्षों से जूझने को बाध्य हो गया। तब लगा कि जीवन संघर्षों से ही निखरता है जैसे सोना अग्नि में तपकर चमकता है। हम कह सकते हैं कि यह पुस्तक अपने आख्यान में जीवन्त तो है ही, अपने पाठ में जीने और जीतने की कला भी सिखाती है।
Jeevan Sangit
- Author Name:
Dr. Gangubai Hangal
- Book Type:

- Description:
यह विख्यात ख़याल गायिका विदुषी गंगूबाई हंगल की आत्मकथा है, जो मूलतः कन्नड़ भाषा में कही गई थी। पहले यह कन्नड़ से अंग्रेज़ी में अनूदित हुई और अब हिन्दी में आपके सामने है। गंगूबाई हंगल निचली कही जाने वाली जाति में पैदा हुईं, वे उस देवदासी परम्परा से आती थीं जहाँ स्त्रियाँ ब्राह्मण पुरुष की ‘रक्षिता’ होती थीं। लेकिन जाति, जेंडर और परम्परा की कठिनाइयों को चीरती हुई, सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों को पार करती हुई वे संगीत के प्रति समर्पण और साधना से भारतीय संगीत जगत के आकाश पर छा गईं। गले के ऑपरेशन के चलते उनकी आवाज़ में एक ‘मर्दाना भारीपन’ आ गया था, लेकिन इस सीमा को भी उन्होंने शक्ति में बदल दिया। ‘संगीत नाटक अकादेमी सम्मान’, ‘तानसेन सम्मान’, ‘पद्म भूषण’ एवं ‘पद्म विभूषण’ जैसे सम्मानों से नवाज़ी गईं गंगूबाई हंगल की यह आत्मकथा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक दौर की गवाही तो देती ही है, साथ ही हमें लगन, मेहनत, जीवट, समर्पण और प्रतिभा की आभा से दमकती ऐसी इनसान से भी मिलवाती है, जिसने कभी हार नहीं मानी, जिसने समाज द्वारा दी गई पहचान का अतिक्रमण कर अपनी अस्मिता ख़ुद गढ़ी।
Ulua, Bulua Aur Main
- Author Name:
Ramsagar Prasad Singh
- Book Type:

- Description:
इस ग्लोबलाइज़्ड दुनिया में जहाँ चारों ओर समरूपता का हठ पाँव पसार रहा है, ऐसे में ‘उलुआ, बुलुआ और मैं’ भरी दुपहरी में छाँव की तरह है। आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई यह रचना व्यक्ति के साथ-साथ अपने समय, अंचल और ग्राम्य-संस्कृति की भी कथा कहती है। वैसे तो हर व्यक्ति का जीवन अगर दर्ज हो जाए तो महाकाव्य का विषय है। मुक्तिबोध ने सच ही कहा है कि 'मुझे भ्रम होता है कि प्रत्येक पत्थर में चमकता हीरा है।' इस रचना की चमक इतिहास की धार में बह रहे क़िस्से, शब्द और लोग-बाग हैं जिन्हें लेखक ने शिद्दत के साथ पकड़ने की कोशिश की है। यह रचना आज़ादी के पहले और उसके बाद के कुछ समय के बदलावों का साहित्य रचती है। साहित्य की परम्परा से वाक़िफ़ लोगों को इसमें रेणु, रामवृक्ष बेनीपुरी और शिवपूजन सहाय जैसे मिट्टी के रचनाकारों की छवि दिखाई पड़ सकती है। साथ ही वैसे इतिहास और संस्कृतिकर्मी जो लोगों के सुख-दु:ख, खान-पान, आचार-व्यवहार, लोकगाथाओं आदि को भी इतिहास-अध्ययन का विषय मानते हैं, उनके लिए भी यह रचना फलदायी साबित होगी। शैली के तौर पर यह कभी आपको आत्मकथा, कभी उपन्यास, कभी कहानी तो कभी ललित निबन्ध का अहसास कराती चलती है।
कुल मिलाकर ‘उलुआ, बुलुआ और मैं' अपने समय और समाज के निर्वासित लोगों, शब्दों, गँवई संस्कृति और समय की आपा-धापी में छूट रहे जीवन के विविध राग-रंगों को फिर से साहित्य की दुनिया में पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।
—अरुण कमल
Ramanujan Prashnottari
- Author Name:
Rajesh Kumar Thakur
- Book Type:

- Description:
"रामानुजन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपनी पीढ़ी के गणितज्ञों को प्रेरणा प्रदान की और 21वीं सदी में ऐसे बहुत से गणित-प्रेमी हैं, जो उनके गणित के शोध कार्यों का अभी भी अनुसरण कर रहे हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसे गणित से प्रेम है, उसके लिए रामानुजन के परिचय की आवश्यकता नहीं है। फ्रीमैन डायसन ने रामानुजन के लिए कहा था, ‘‘उन्होंने बहुत कुछ ढूँढ़ा है और अपने बगीचे में दूसरे लोगों के ढूँढ़ने के लिए और भी बहुत कुछ छोड़ दिया है। हर बार, जब मैं रामानुजन के बगीचे में आता हूँ, तब मैंने वहाँ कुछ नए खिले फूल देखे हैं।’’ इस पुस्तक की रोचकता बरकरार रखने के लिए इसे नौ अलग-अलग वर्गों में बाँट दिया गया है। रामानुजन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा गणित को उनके अवदान को प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया। इस रूप में विद्यार्थी-शिक्षार्थी एवं शोधार्थी गणित को बड़ी सहजता से हृदयंगम कर सकेंगे।
Bura Waqt Achchhe log
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

- Description:
सुधीर चन्द्र यूँ तो इतिहासकार हैं लेकिन उनकी चिन्ताओं और दिलचस्पियों का फलक इस अकादमिक श्रेणी से कहीं ज़्यादा बड़ा है। गांधी पर जो काम वे करते रहे हैं, वह सिर्फ़ इतिहासकार का काम नहीं है। गांधी के साथ उन्होंने एक नितान्त निजी और दुर्लभ रिश्ता बनाया है, और उस 'असम्भव' व्यक्तित्व को समझते-जानते हुए देखने का एक अपना ढंग पाया है। हो सकता है कि यह ढंग उनका स्वभाव ही हो जिसे गांधी के स्पर्श ने और पुख़्ता, और टिकाऊ बना दिया।
इस किताब में शामिल गांधी-विषयक लेखों को अलग करके यदि हम समसामयिक सवालों और मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों को भी ग़ौर से पढ़ें तो उस दृष्टि की मौजूदगी साफ़ दिखाई देगी जो जीवन को भी, और जीवन में होनेवाले परिवर्तन को भी एक गहरी नैतिक कार्रवाई के रूप में देखना चाहती है। 16 दिसम्बर—निर्भया कांड पर उनकी व्यथित प्रतिक्रियाएँ हों या दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उदय पर उनकी टिप्पणियाँ हों, उनकी कसौटी कहीं अस्पष्ट नहीं है। अन्ना के अनशन को लेकर जब लगभग सबने अपने आपको एक हताशाजनित आशावाद के सुपुर्द कर दिया था, सुधीर जी बहुत साफ़ ढंग से उसकी नैतिक और व्यावहारिक विसंगतियों को देख और अभिव्यक्त कर पा रहे थे। इसी तरह पहले मुख्यमंत्रित्व काल में अरविन्द केजरीवाल के जिस धरने पर उनके समर्थक तक डिफ़ेंसिव हो रहे थे, सुधीर जी केजरीवाल के उस फ़ैसले की ऐतिहासिक और सैद्धान्तिक अहमियत को समझ पा रहे थे।
देश में बढ़ती असहिष्णुता, कठिन और संवेदना-च्युत होता सामाजिक जीवन और राजनैतिक हताशा उनके चिन्तन के मुख्य बिन्दु हैं जिन पर वे इतिहास की गहरी समझ और आन्तरिक नैतिकता के स्पष्ट तर्क के साथ बार-बार विचार करते हैं।
किताब में कुछ संस्मरण भी हैं जिनमें भीमसेन जोशी और भूपेन खख्खर पर केन्द्रित कतिपय लम्बे आलेख सम्बन्धित व्यक्तित्वों के अलावा भारतीय कला के इन दो पक्षों, संगीत और चित्रकला पर महत्त्वपूर्ण रोशनी डालते हैं। संगीत पर उन्होंने एकाधिक जगह और बहुत लगाव के साथ लिखा है। समाज, संस्कृति और सामाजिक इतिहास को समेटते इन निबन्धों को अच्छे और समर्थ गद्य के रूप में भी पढ़ा जाना ज़रूरी है।
The Self & The World: Autobiographical Readings In Hindi
- Author Name:
Rupert Snell
- Book Type:

- Description:
Autobiographical writing in Hindi is a personal and intimate genre that rewards both the Hindi reader and the learner of the language. Each author paints a unique picture of life in India – and indeed of life in general; many of the fifty-one extracts given in this book are by professional writers, but we also meet painters, poets, patriots, politicians, musicians, academics, a station-master and a prisoner on death row. There is joy here, and much laughter; but also pain, unease, and torment. Reader beware!
An introduction on language and style begins the book, frequently referencing the original texts that follow; each Hindi excerpt has a two-page introduction in English and a detailed facing-page glossary-cum-commentary for those who need it.
The Self & The World: Autobiographical Readings In Hindi
Rupert Snell
20% off₹ 1895
₹ 1516
Out of Stock
Nelson Mandela - A Complete Biography
- Author Name:
Dr. Gaurav Gupta
- Book Type:

- Description:
Nelson Mandela remains an icon politician who led the struggle to replace an apartheid regime in South Africa with a multiracial democracy. He is remembered not so much for being the country's first black President, but for being the first to have galvanize an entire country against colonial oppression. Mandela's life is a lesson to those who fear hardship. He showed nothing worthwhile can be achieved without facing and indeed, surmounting hardships in life. He himself took all the hardships in his stride and saw the struggle through until the oppressive forces were compelled to yield. His charisma, self. deprecating sense of humour and above all, lack of bitterness over the harth treatment he endured are a testament to his towering global appeal. He never tried to take revenge, not even against those who tortured him. This book is a humble effort to trace Nelson Mandela's life, from his childhood and years in jail to his rise as President. It will inspire readers to follow the ideals and values of life cherished by this icon.
Bihar Ke Mere Pachchis Varsh
- Author Name:
Kalpana Sastri
- Book Type:

- Description:
जिस कालखंड में देश का पढ़ा-लिखा वर्ग बिहार जाने से डर रहा था और बिहार का पढ़ा-लिखा वर्ग राज्य से बाहर नहीं तो, गाँवों को छोड़ शहरों में अपनी जगह बनाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहा था, उस वक़्त कल्पना महाराष्ट्र के सुव्यवस्थित माहौल को छोड़कर स्वेच्छा से बिहार आईं और वहाँ किसी शहर में नहीं बल्कि धुर गाँवों में काम कर रही हैं।
बिहार में काम करने के माध्यम के रूप में इन्होंने एक संस्था बनाई और गाँव की मुसहर तथा दुसाध दलित महिलाओं के बीच काम शुरू किया। गांधीवादी विचार को माननेवाले समूहों के साथ चर्चा करने के लिए एक संगठन द्वारा इन्हें जर्मनी बुलाया गया। एक प्रसिद्ध शान्तिवादी संगठन आई.एफ़.ओ.आर. के स्वीडन सम्मेलन में शामिल हुईं और फिलाडेल्फ़िया के क्वेकर समूह द्वारा आयोजित लम्बे प्रशिक्षण कोर्स का भी अनुभव लिया। इन अनुभवों के साथ-साथ बिहार के गाँवों को भी देखना, समझना और वह भी अन्दर घुसकर सामाजिक कार्यों के माध्यम से—ख़ुद लेखिका के लिए भी—बहुत शिक्षाप्रद और रोमांचक रहा है।
इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँवों के झरोखों से जैसा देखा, वैसा लिखा है। अपने काम का ज़िक्र करते हुए वहाँ के समाज की आवश्यकताएँ बताई हैं, लोगों के स्वभाव बतलाए हैं और सम्बन्धों के पारिवारिक व सामाजिक ताने-बाने को खोलकर दिखाया है।
आशा है, विषय की गहराई में जानेवाले लोगों को यह किताब अच्छी लगेगी।
Jivan Jaisa Jiya
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

- Description:
पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की यह आत्मकथा सिर्फ़ उनकी निजी ज़िन्दगी की कहानी नहीं है। यह उनके समय का प्रामाणिक दस्तावेज़ भी है। वे आज़ादी के बाद की निर्णायक राजनैतिक घटनाओं से जुड़े रहे। उन घटनाओं को एक निश्चित दिशा देने में उन्होंने ऐतिहासिक भूमिका भी निभाई। इसलिए उनकी इस आत्मकथा में उनके दौर का अनुद्घाटित इतिहास सुरक्षित है। अपने समय के अनेक व्यक्तित्वों और घटनाओं के बारे में उन्होंने ऐसी जानकारियाँ भी दी हैं जिनसे समकालीन राजनैतिक-सामाजिक इतिहास को समझने के लिए नए तथ्य प्राप्त होते हैं।
बलिया के एक किसान परिवार में जनमे चन्द्रशेखर अपनी जीवन-यात्रा में अनेक पड़ावों से गुज़रे। स्वाधीनता-आन्दोलन में शिरकत की। आज़ादी के बाद समाजवाद के लिए चलाए जानेवाले संघर्ष को आगे बढ़ाया। कांग्रेस को प्रगतिशील बनाने के लिए नए कार्यक्रम रखे। आपातकाल की जेल-यात्रा के बाद जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष बने। जनता दल की सरकार के जाने के बाद देश के प्रधानमंत्री पद पर पहुँचे और समझौताविहीन व्यक्तित्व के कारण अन्तत: इस्तीफ़ा दिया। उदारीकरण और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नव-साम्राज्यवाद का वे विरोध करते रहे। उनकी इस आत्मकथा में बाहरी संसार के अलावा उनके व्यक्तित्व की गहरी संवेदनशीलता और मानवीय पक्ष का वृत्तान्त भी शामिल है। हिन्दी में आत्मकथा साहित्य की परम्परा में चन्द्रशेखर की यह आत्मकथा एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
Pratibimban : Vyakti, Vichar aur Samaj
- Author Name:
Ramsharan Joshi
- Book Type:

- Description:
रामशरण जोशी का लेखन-संसार एक आयामी नहीं, विविध आयामी है। मूलतः पत्रकार होने के बावजूद लेखक जोशी ने अपनी चिन्तन व लेखन-परिधि को निरन्तर विस्तार दिया है। वे पत्रकार होने के साथ-साथ समाजविज्ञानी, सक्रिय समाजकर्मी, मीडिया शिक्षक और सतत हस्तक्षेपधर्मी हैं। सातवें दशक में आदिवासियों, बन्धक श्रमिकों जैसी उत्पीड़ित व उपेक्षित मानवता पर उनका ज़मीनी लेखन हिन्दी जगत में चर्चित रहा है। रीचा ज़िले की ‘लँगड़े गाँव की कहानी’ जैसे उनके अध्ययन की गूँज संसद तक पहुँची। 2009 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘अर्जुन सिंह : एक सहयात्री इतिहास का’ राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो चुकी है।
रामशरण जोशी एक प्रतिबद्ध लेखक हैं। वामपन्थी होने के बावजूद उन्होंने ‘व्यक्ति, विचार और समाज’ को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा है। प्रस्तुत पुस्तक में उनकी बहुरंगी दृष्टि एवं सरोकारों की छटा उद्घाटित हुई है। जहाँ इसमें बॉलीवुड का अभिनेता है, वहीं समाजशास्त्री, लेखक, पत्रकार, प्रशासक जैसे पात्र भी हैं। इन हैसियतमन्दों के बीच एक अकिंचित्, अजाना पात्र भी मौजूद है—‘छीतर खाँ’। इस पात्र के माध्यम से लेखक ने अल्पसंख्यक वर्ग और भारतीय राज्य के आपसी रिश्तों की सर्जनात्मक रूप में पड़ताल की है। पुस्तक में सम्मिलित विमर्शमूलक समीक्षाओं में प्रसिद्ध समाजशास्त्री
डॉ. पी.सी. जोशी, अंग्रेज़ी के विख्यात पत्रकार शामलाल, मानवशास्त्री व प्रशासक डॉ. कुमार सुरेश सिंह जैसे व्यक्तित्वों के लेखन की थाह भी ली गई है। ‘अपने-अपने नंदीग्राम’, ‘बूधन की मुक्ति का सवाल’, ‘हरसूद की डूब’ जैसे लेखों में विकास की विसंगतियों से साक्षात्कार कराया है।लेखक जोशी ने राजेन्द्र यादव, मनोहर श्याम जोशी, डॉ. श्यामाचरण दुबे, पंकज बिष्ट, इब्बार रब्बी, अरुण प्रकाश, सुदीप बनर्जी जैसे रचनाकारों के साथ अपने सम्बन्धों को आत्मीय लेखन के साथ याद किया है। इस संग्रह में लेखक की 1960 से इस सदी के पहले दशक तक की अनुभव-राशि छितरी हुई है।
Madam Bhikaji Cama
- Author Name:
Rachna Bhola 'Yamini'
- Book Type:

- Description:
This book does not have any description.
Aamne-Saamne
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

- Description:
नामवर सिंह अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका बोला-बताया अब भी ऐसा बहुत कुछ है जो सामने आना बाकी है। लम्बे समय तक उन्होंने व्यवस्थित ढंग से कुछ नहीं लिखा था; व्याख्यानों और वक्तव्यों के रूप में ही उन्होंने आलोचना के नए-नए पैमाने तोड़े और बनाए। युवाओं, वरिष्ठों, छात्रों-पत्रकारों और समकालीन रचनाकारों को दिए साक्षात्कारों में भी उन्होंने सदैव एक उत्तरदायी आलेचकीय चेतना को अभिव्यक्ति दी। उनकी आश्चर्यजनक स्मृति, वैचारिक स्पष्टता और आस्वादपरक समीक्षा के चलते व्याख्यानों की तरह उनके साक्षात्कार भी सदैव चर्चित रहे। इस पुस्तक में उनके ऐसे साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अब तक किसी और पुस्तक में नहीं आए थे। कई वरिष्ठ और कनिष्ठ रचनाकारों और सम्पादकों के साथ हुए ये वार्तालाप उनकी आलोचना-दृष्टि, समकालीन रचनात्मकता पर उनके विचारों और सरोकारों को रेखांकित करते हैं। इनमें से कुछ साक्षात्कार इसलिए और भी दिलचस्प है कि इनमें उन्होंने किसी एक ही रचनाकार या कृति पर केन्द्रित प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। मसलन स्वयं प्रकाश, त्रिलोचन, काशीनाथ सिंह का ‘काशी का अस्सी’ आदि पर केन्द्रित बातचीत। साक्षात्कारकर्ताओं में भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोग हैं; जिन्होंने अपने-अपने ढंग से उनसे अपनी जिज्ञासाओं पर विचार-विनिमय किया है।
Sunita Williams
- Author Name:
Kali Shankar +1
- Book Type:

- Description:
"सुनीता विलियम्स एक असाधारण महिला की अदम्य इच्छाशक्ति, समर्पण, उत्साह तथा आत्मविश्वास का पर्याय है। इन्हीं गुणों ने एक पशु-चिकित्सक बनने की महत्त्वाकांक्षा रखनेवाली छोटी बालिका सुनीता विलियम्स को एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान सुनीता विलियम्स दुनिया भर के लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। 29 घंटे 17 मिनट में कुल चार स्पेस वॉक (अंतरिक्ष में चलने का कार्य) पूरा करके उन्होंने महिलाओं के लिए ‘असाधारण वाहनीय गतिविधि’ का एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। सुनीता के अंतरिक्ष प्रवास ने विश्व में भारत का सम्मान और बढ़ा दिया। सुनीता समुद्रों में तैराकी कर चुकी हैं, महासागरों में गोताखोरी कर चुकी हैं, युद्ध और मानव-कल्याण के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं; अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से अब वापस धरती पर आ चुकी हैं; सचमुच, एक जीवित किंवदंती हैं वे। पे्ररणादायी सुनीता के जीवन से हर बालक-बालिका प्रेरणा लेकर किसी भी क्षेत्र के आकाश को छुए, यही इस पुस्तक के प्रकाशन का उद्देश्य है।
Elon Musk : CEO Series
- Author Name:
Ashish Mishra
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में हम जानेंगे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जिसने सिर्फ पैसे कमाने के लिए ही नहीं, बल्कि बदलाव की दिशा में नेतृत्व किया। यह एक कहानी है उस आदमी की, जिसने अपने संघर्षों को आत्मविश्वास में बदला और दुनिया को अद्वितीय रूप से स्पर्श किया। इस आदमी ने बचपन में पिता की छाया में पिड़ित होने के बावजूद, स्कूल में दबंग लड़कों की ज़ुल्मी सत्ता से सामना किया। साथ ही, उसने दक्षिण अफ्रीका से शुरू करके कनाडा और फिर अमेरिका तक का सफर किया, जहां उसने अपनी तमाम कमजोरियों को परास्त करने का संकल्प किया। इस पुस्तक में हम उसके संघर्षों, सफलता की कहानी, और दुनिया के सबसे अमीर आदमी बनने की राह में उन रहस्यों को जानेंगे जिन्होंने उसे आगे बढ़ने में मदद की। आज की दुनिया में जब हर दिन कुछ नया हो रहा है, तो इस पुस्तक के माध्यम से हम ईलॉन मस्क की विचारशीलता, नए विचार, और नेतृत्व की कला से परिचित हो सकते हैं। इसमें उनके सपनों की मिसाल है, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। अगर आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं, तो इस पुस्तक को पढ़कर उस उत्साह, साहस, और निरंतरता की मिसाल से आभास करें। इस पुस्तक से आपको नये सोचने का संबोधन होगा और आप भी अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल हो सकते हैं।
Ekatma Manavvad Bhajapa Ka Sankalp
- Author Name:
Basant Kumar
- Book Type:

- Description:
बीसवीं शताब्दी में, जहाँ दुनिया में अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई, परंतु किस प्रकार की आर्थिक व्यवस्था हो, इस विषय में संशय की स्थिति बनी रही। भारत भी इस संशय की स्थिति से अपने आपको अलग न रख सका और साम्यवाद व पूँजीवाद को मिलाकर मिक्स्ड इकोनॉमी की व्यवस्था को अपनाया, जिससे देश में महात्मा गांधी की अवधारणा को पूर्ण रूप से भुला दिया गया। ऐसे में पं. दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म मानववाद’ नामक परिकल्पना दी, जिसका केंद्रबिंदु मानव-कल्याण है। विषय का स्वरूप, उसकी व्याप्ति और उसकी गहराई को ध्यान में रख इसे ‘वाद’ के बजाय ‘दर्शन’ कहा गया। इस कृति का निर्माण ‘सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय’ एवं सर्वत्र राष्ट्रीयता का भाव जगाने हेतु किया जा रहा है। इस पुस्तक में एकात्म मानव-दर्शन का निरालापन, इसकी प्रासंगिकता तथा भारतीय जन संघ एवं बाद में भाजपा का संकल्प कैसे है, यह बताया गया है। एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रेरणाप्रद जीवन तथा उनके व्यक्तित्व, कृतित्व व विचारों को लोगों तक पहुँचाने में सक्षम अत्यंत पठनीय कृति।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book