Azim Premji Ki Biography
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A.K. GandhiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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भारतीय व्यापार-जगत के एक चमकते सितारे अजीम प्रेमजी सफल व्यापारी, आई.टी. उद्योग के सिरमौर और निवेशक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत कर्तृत्व से सफलता का नया इतिहास लिखा है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’, ‘पदम भूषण’ तथा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत अजीम प्रेमजी को ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें दो बार 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। 1960 के दशक में जब विप्रो ने उपभोक्ता स्वास्थ्य उद्योग से हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत की तो अजीम प्रेमजी ने उसे सफलता दिलाई। व्यापारिक सफलता पाकर उन्होंने भारत की सनातन परंपरा ‘लोकोपकार’ को पुष्ट किया। ‘गिविंग प्लेज’ पर साइन किया है। परोपकार के लिए जाना जाता है। प्रेमजी ने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ को 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर का दान दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय काम किए हैं और एक ‘साक्षर भारत’ बनने की यात्रा में अपना अपूर्व योगदान किया है। उद्यमशीलता, नेतृत्व, कौशल, प्रशासनिक दक्षता, सहृदयता और परोपकार के प्रतीक अजीम प्रेमजी ने अपार धन-समृद्धि अर्जित की, पर मुक्त हाथों से उसे समाज को लौटाया भी। एक यशस्वी, लोककल्याणकारी व्यक्तित्व की यह प्रेरक जीवनगाथा समाज को मानवीयता और देने का महत्त्व बताएगी।
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भारतीय व्यापार-जगत के एक चमकते सितारे अजीम प्रेमजी सफल व्यापारी, आई.टी. उद्योग के सिरमौर और निवेशक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत कर्तृत्व से सफलता का नया इतिहास लिखा है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’, ‘पदम भूषण’ तथा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत अजीम प्रेमजी को ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें दो बार 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। 1960 के दशक में जब विप्रो ने उपभोक्ता स्वास्थ्य उद्योग से हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत की तो अजीम प्रेमजी ने उसे सफलता दिलाई।
व्यापारिक सफलता पाकर उन्होंने भारत की सनातन परंपरा ‘लोकोपकार’ को पुष्ट किया। ‘गिविंग प्लेज’ पर साइन किया है। परोपकार के लिए जाना जाता है। प्रेमजी ने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ को 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर का दान दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय काम किए हैं और एक ‘साक्षर भारत’ बनने की यात्रा में अपना अपूर्व योगदान किया है।
उद्यमशीलता, नेतृत्व, कौशल, प्रशासनिक दक्षता, सहृदयता और परोपकार के प्रतीक अजीम प्रेमजी ने अपार धन-समृद्धि अर्जित की, पर मुक्त हाथों से उसे समाज को लौटाया भी।
एक यशस्वी, लोककल्याणकारी व्यक्तित्व की यह प्रेरक जीवनगाथा समाज को मानवीयता और देने का महत्त्व बताएगी।
Book Details
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ISBN9789395386296
-
Pages168
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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हिन्दी में आत्मकथा-साहित्य के क्षेत्र में राहुल जी की 'मेरी जीवन-यात्रा’ एक अविस्मरणीय कृति है।
राहुल जी ने अपनी जीवन-यात्रा में, जन्म से लेकर तिरसठवाँ वर्ष पूरा करने तक का वर्णन किया है। उन्होंने आत्मचरित के लिए 'जीवन-यात्रा’ शब्द का प्रयोग किया है। इस विषय में उनका कथन है, ''मैंने अपनी जीवनी न लिखकर 'जीवन-यात्रा’ लिखी है, यह क्यों? अपनी लेखनी द्वारा मैंने उस जगत की भिन्न-भिन्न गतियों और विचित्रताओं को अंकित करने की कोशिश की है, जिसका अनुमान हमारी तीसरी पीढ़ी मुश्किल से करेगी।’’
'मेरी जीवन-यात्रा’ के प्रथम भाग के कालखंड के विस्तृत वर्ण्य-विषय को लेखक ने चार उपखंडों में विभाजित किया है, और पुस्तक के अन्त में महत्त्वपूर्ण परिशिष्ट भी दिया है। जीवनी के विभाजित खंडों के अनुसार—प्रथम उपखंड : बाल्य (1893-1909), द्वितीय उपखंड: तारुण्य (1910-1914), तृतीय उपखंड : नव प्रकाश (1915-1921), चतुर्थ उपखंड : राजनीति-प्रवेश (1921-1927) है। परिशिष्ट में 1922 की डायरी से कुछ पद्य-गद्य की पंक्तियाँ तथा सांकृत्यायन-वंशवृक्ष का वर्णन है, जिसमें (क) वैदिक काल, (ख) बौद्ध काल, (ग) मध्य काल और (घ) आधुनिक काल के अनुसार ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।
'जीवन-यात्रा’ के इस प्रथम भाग के अनुसार राहुल जी मुख्यत: भारत में ही रहे। बस, विदेश के नाम पर उन्होंने नेपाल की यात्रा की और वहाँ के कई प्रभावशाली लोगों से मिले।
कलकत्ता की दूसरी उड़ान में उन्होंने प्रसाद जी के प्रसिद्ध ख़ानदान ‘सुँघनी साहु’ की दुकान में काम किया था। काम क्या था, किस तरह उसे करते थे, इसका विशद वर्णन उन्होंने किया है। इसके माध्यम से हमें जयशंकर प्रसाद के ख़ानदान का इतिहास भी प्राप्त हो जाता है। इसी भाग में राहुल जी पर वैराग्य का भूत सवार हो जाता है। आर्यसमाज ने राहुल जी के जीवन की दिशा ही बदल दी थी।
Omkar The Stealth Warrior
- Author Name:
Balraj Tiwari
- Book Type:

- Description: ओंकार' एक गुमनाम देश-सेवक के संस्मरणों का संग्रह है। इसका कालखंड अस्सी के दशक के आखिरी वर्षों से लेकर नब्बे के दशक के मध्य तक का है। यह वह समय था, जब देश में राजनीतिक व आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से हालात काफी नाजुक थे।1 उस समय भारत के कई राज्यों में कट्टरपंथी ताकतें व आतंकवाद अपने चरम पर था। ऐसे समय में भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आतंकवाद से लड़ने के लिए अलग-अलग कदम उठाए गए। 'ओंकार' भी इन्हीं में से किसी एक टीम का सदस्य था, जिसने अपने छोटे से कार्यकाल में अलग-अलग तरह से व अलग-अलग जगहों पर जाकर कई ऑपरेशंस को अंजाम दिया था। वह समय ऐसा था, जब सीमित संसाधनों के सहारे ही गुप्त रूप से काम करने होते थे। संचार, यातायात व आश्रय के साधन बहुत सीमित होते थे। ओंकार का कार्यक्षेत्र उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों, जैसे पंजाब, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल व हरियाणा में रहा। हर तरह के मौसम, हालातों से जूझते हुए व अलग-अलग परिवेशों में उसने अपने कार्यों को पूरा किया। किसी भी इनसान का एक दोहरी जिंदगी को जीते हुए कार्य, परिवार व सामान्य जीवन में सामंजस्य बिठाना बहुत कठिन होता है। ओंकार ने अपने संस्मरणों में इस मनःस्थिति का भी जिक्र किया है। इस पुस्तक में ऐसे अनाम देशप्रेमी के संस्मरणों को संकलित कर हर भारतीय को प्रेरित करने का मंतव्य निहित है।
Bihar Ke Mere Pachchis Varsh
- Author Name:
Kalpana Sastri
- Book Type:

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Description:
जिस कालखंड में देश का पढ़ा-लिखा वर्ग बिहार जाने से डर रहा था और बिहार का पढ़ा-लिखा वर्ग राज्य से बाहर नहीं तो, गाँवों को छोड़ शहरों में अपनी जगह बनाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहा था, उस वक़्त कल्पना महाराष्ट्र के सुव्यवस्थित माहौल को छोड़कर स्वेच्छा से बिहार आईं और वहाँ किसी शहर में नहीं बल्कि धुर गाँवों में काम कर रही हैं।
बिहार में काम करने के माध्यम के रूप में इन्होंने एक संस्था बनाई और गाँव की मुसहर तथा दुसाध दलित महिलाओं के बीच काम शुरू किया। गांधीवादी विचार को माननेवाले समूहों के साथ चर्चा करने के लिए एक संगठन द्वारा इन्हें जर्मनी बुलाया गया। एक प्रसिद्ध शान्तिवादी संगठन आई.एफ़.ओ.आर. के स्वीडन सम्मेलन में शामिल हुईं और फिलाडेल्फ़िया के क्वेकर समूह द्वारा आयोजित लम्बे प्रशिक्षण कोर्स का भी अनुभव लिया। इन अनुभवों के साथ-साथ बिहार के गाँवों को भी देखना, समझना और वह भी अन्दर घुसकर सामाजिक कार्यों के माध्यम से—ख़ुद लेखिका के लिए भी—बहुत शिक्षाप्रद और रोमांचक रहा है।
इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँवों के झरोखों से जैसा देखा, वैसा लिखा है। अपने काम का ज़िक्र करते हुए वहाँ के समाज की आवश्यकताएँ बताई हैं, लोगों के स्वभाव बतलाए हैं और सम्बन्धों के पारिवारिक व सामाजिक ताने-बाने को खोलकर दिखाया है।
आशा है, विषय की गहराई में जानेवाले लोगों को यह किताब अच्छी लगेगी।
Charlie Chaplin
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Mamta Jha
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Kartavya Path
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- Description: "पुलिस सेवा में पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं के केंद्र में रहे लेखक की दृष्टि में देशभक्ति के मायने अपनी मातृभूमि के प्रति अपार श्रद्धा और असीम गौरव रखना एवं अपने कर्तव्य का ईमानदारी के साथ निर्वहन करना है, न कि संकीर्ण विचारधारा रखना। अपने देश से प्रेम, उसके प्रति निष्ठा, भारतवासी होने का आत्मगौरव, देश के लिए त्याग व बलिदान की भावना एवं पूर्ण सत्यनिष्ठा व परिश्रम के साथ अपने कर्तव्य का पालन करना ही राष्ट्रीयता के प्रमुख गुण हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने राष्ट्र के इतिहास में रुचि अवश्य लेनी चाहिए, इसके तीन लाभ निश्चित रूप से होते हैं। प्रथम, इतिहास को व्यक्ति सही अर्थों में समझता है। द्वितीय, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का विकास होता है एवं तृतीय, इतिहास के बोझ से मुक्ति मिल जाती है, परंतु इतिहास का इस ढंग से विश्लेषण हो कि वह वर्तमान के समान हमारे लिए सहज ग्राह्य हो जाए। पुलिस अधिकारी रहे श्री हरि प्रसाद शर्मा की यह आत्मकथा 'कर्तव्य पथ' युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, जीवन-मूल्यों, परंपराओं व मान्यताओं का संचार करेगी और उन्हें राष्ट्रकार्य में प्रवृत्त करेगी, ऐसा हमारा विश्वास है।"
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