Satya Ke Mere Prayog
(0)
Author:
Mohandas Karamchand GandhiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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विश्व के स्वप्नदर्शी और युगांतरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लांघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने, विचलित करनेवाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है।</p> <p>समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औज़ारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ़ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं, उनके लिए वह अपने अन्त:करण के पारदर्शी आइने में एक ऐसे नग्न प्रश्न के रूप में खड़ी थी, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है।</p> <p>इस चर्चित पुस्तक की पुनर्प्रस्तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। इस अनुवाद में प्रयास किया गया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना की रोशनी में पढ़ सके जो आज़ादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।
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विश्व के स्वप्नदर्शी और युगांतरकारी नेताओं में सर्वाधिक चर्चित और देश-काल की सीमाओं को लांघकर एक प्रतीक बन जानेवाले महात्मा गांधी की यह आत्मकथा न किसी परिचय की मुहताज है और न किसी प्रशंसा की। अनेक भाषाओं और देशों के असंख्य पाठकों के मन में राजनीति, समाज और नैतिकता से जुड़े सवालों को जगाने, विचलित करनेवाली इस पुस्तक का यह मूल गुजराती से अनूदित प्रामाणिक पाठ है।</p>
<p>समाज और राजनीति की धारा में गांधी जी ने असहयोग और अहिंसा जैसे व्यावहारिक औज़ारों से एक मानवीय हस्तक्षेप किया, वहीं अपने निजी जीवन को उन्होंने सत्य, संयम और आत्मबल की लगभग एक प्रयोगशाला की तरह जिया। नैतिकता उनके लिए सिर्फ़ समाजोन्मुख, बाहरी मूल्य नहीं, उनके लिए वह अपने अन्त:करण के पारदर्शी आइने में एक ऐसे नग्न प्रश्न के रूप में खड़ी थी, जिसका जवाब व्यक्ति को अपने सामने, अपने को ही देना होता है। अपने स्व की कसौटी ही जिसकी एकमात्र कसौटी होती है। यह पुस्तक गांधी जी के इसी अविराम नैतिक आत्मनिरीक्षण की विवरणिका है।</p>
<p>इस चर्चित पुस्तक की पुनर्प्रस्तुति यह बात ध्यान में रखते हुए की जा रही है कि महान कृतियों का अनुवाद बार-बार होते रहना चाहिए। इस अनुवाद में प्रयास किया गया है कि गांधी जी की इस सर्वाधिक पढ़ी जानेवाली कृति को आज का पाठक उस भाषा-संवेदना की रोशनी में पढ़ सके जो आज़ादी के बाद हमारी चेतना का हिस्सा बनी है।
Book Details
-
ISBN9788126724871
-
Pages368
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: ी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे डीपीटी की याद में उनके घनिष्ठ मित्रों की प्रस्तुति है। डीपीटी यानी देवी प्रसाद त्रिपाठी, जेएनयू के प्रसिद्ध छात्र नेता, राजीव गांधी के सलाहकार, शरद पवार की पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता, पूर्व राज्यसभा सांसद, कवि, लेखक और चिंतक, और इन सबसे ऊपर अपूर्व वक्ता व हाज़िरजवाब ज़िन्दादिल इंसान जिनके चाहनेवाले आपको हर जगह मिलेंगे। राजनीति में तो मिलेंगे ही हर पार्टी में, साहित्य में, पत्रकारिता में, रंगकर्मियों के बीच, फ़िल्म जगत में, हर जगह उनकी प्रतिभा के प्रति लोगों में गहरा आदर रहा और लोग उनसे बहुत प्यार से पेश आए। इस पुस्तक में डीपीटी से सम्बद्ध सभी जिज्ञासाओं का उत्तर है। वह कहाँ पैदा हुए, किस पृष्ठभूमि में उनकी पढ़ाई-लिखाई और परवरिश हुई, वह छात्र-जीवन में कैसे थे, किस तरह वह विलक्षण वक्ता बने और विभिन्न भाषाओं पर चमत्कारी अधिकार प्राप्त किया, इलाहाबाद और जेएनयू में कैसे प्रसिद्ध हुए, राजीव गांधी के क़रीब कैसे आए, क्या परिस्थितियाँ बनीं कि वह शरद पवार से जुड़े, राज्यसभा में उनका कार्यकाल कैसा रहा, और उनकी यारबाशी के सारे क़िस्से जो उन्हें महफ़िलों का जान बनाती थीं। चूँकि लेख सारे घनिष्ठ मित्रों के हैं, इसलिए सारे तथ्य प्रामाणिक और बातें भावभीनी हैं। इस पुस्तक का एक और बड़ा आकर्षण है, उन्नीस पृष्ठों में डीपीटी का लम्बा साक्षात्कार—जिनका डीपीटी से मिलने का संयोग न हुआ, उनकी डीपीटी से मुलाक़ात हो जाएग
APRATIM NAYAK DR. SYAMA PRASAD MOOKERJEE (PB)
- Author Name:
Tathagat Roy
- Book Type:

- Description: डॉ. श्यामाप्रसाद मुकर्जी (1901-1953) सर आशुतोष मुकर्जी के द्वितीय पुत्र एक बहुआयामी व्यक्तित्व के स्वामी ही नहीं, एक महान् शिक्षाविद्, देशभक्त, राजनेता, सांसद, अदम्य साहस के धनी और सहृदय मानवतावादी थे। बावन वर्षों से भी कम के जीवनकाल में और उसमें से भी राजनीति में सिर्फ चौदह साल में वे स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के पद तक पहुँचे; जिसे उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में हुए अल्पसंख्यक हिंदुओं के नरसंहार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से गंभीर मतभेद होने पर ठुकरा दिया। इससे पहले वे जिन्ना के पाकिस्तान से छीनकर बनाए गए पश्चिम बंगाल और पूर्वी पंजाब के अस्तित्व में आने के पीछे एक सक्रिय ताकत रहे। कैबिनेट मंत्री के पद को ठुकराने के बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसकी परिणति आज की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रूप में हुई। यह पुस्तक भलीभाँति शोध की हुई मातृभूमि के उस महान् सपूत की समग्र जीवनी है, जो उनके प्रेरणादायी जीवन का ज्ञान कराती है।
Ek Thi Ramrati
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

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Description:
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।
कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।
इस पुस्तक में ‘वाग्देवी का अदूभुत वरदान हे विदेशिनी!’, ‘हम तुम्हें पहचानते हैं’,‘...मुरलिया तू कौन गुमान भरी? जो मिले सुर स्वर-लय नटिनी’, ‘के रहीम अब बिरछ करूँ’, ‘माताहारी?’, ‘नदी जो मरुस्थल में खो गई’, ‘स्वरलय नटिनी’, ‘ननिया ने हाय राम’, ‘एक थी रामरती’, ‘चिरस्थायी शेर वन्दन’, ‘दाना मियाँ?’, ‘मत तोड़ो चटकाय’, ‘परमतृप्ति जन्मदिन’ आदि संस्मरण और रेखाचित्र शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।
The Sour Mango Tree
- Author Name:
P Lankesh +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: The Sour Mango Tree is a homage to a life less ordinary. Palya Lankesh was an author, journalist, screenplay writer, poet and translator. His multi-faceted and prolific oeuvre encompasses essays scripts and stories, among much else. This volume is a translation of his memoir, Hulimavina Mara which includes his prose and poetry and is a rare glimpse into the mind of the maverick. Twenty-five years after Lankesh left us, this volume enables us to truly appreciate the significance of his legacy.
Wo Tere Pyar Ka Gam
- Author Name:
Ishmadhu Talwar
- Book Type:

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Description:
दान सिंह का निधन मैलोडी के लिए बड़ा नुक़सान है। मैं उन्हें मूल्यों और गरिमा में गहरा विश्वास रखनेवाले इनसान के रूप में याद करता हूँ।
—गुलज़ार; मशहूर गीतकार
दान सिंह जी की धुनों से सजा गीत—‘वो तेरे प्यार का गम’—मेरे पिताजी (मुकेश) के गाये सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक था।
—नितिन मुकेश; प्रसिद्ध गायक
वरिष्ठ संगीतकार दान सिंह जी ने ‘माइ लव' के रूप में फ़िल्मी संगीत को ऐसा तोहफ़ा दिया है जिसकी चमक कोहिनूर हीरे जैसी है। जब भी अच्छे और पायेदार फ़िल्मी संगीत की बात होगी तो ‘माइ लव’ के संगीत को शायद नहीं भूला जाएगा। दान सिंह जी उन ख़ुशनसीबों में से थे जो बहुत कम समय फ़िल्म जगत में रहकर और बहुत कम काम करके अमर हो गए।
—इरशाद कामिल; मशहूर फ़िल्म गीतकार
जयपुर के पत्रकार ईशमधु तलवार ने किसी ज़माने में ख्याति पाए संगीतकार दान सिंह, जिनके मृत होने की अफ़वाह थी, को जीवित खोज निकाला और तनहा गुमशुदा-सी ज़िन्दगी के अँधेरों से वे बाहर आए।
—जयप्रकाश चौकसे; प्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक
दान सिंह जी के संगीत की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि वो अपने समय के सभी दिग्गजों के बीच अपनी अलग धारा चले, पक्की और मधुर धुनों के साथ-साथ दान सिंह ने कविता की ऊँचाई को भी क़ायम रखा।
—यूनुस ख़ान; मशहूर रेडियो एनाउंसर, विविध भारती, मुम्बई
Shyamal Ghat Amrit Kalash
- Author Name:
Vinamra Sen Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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