Maqbool Fida Husain : Jivani Aur Vichar
Author:
AkhileshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Reviews
Price: ₹ 239.2
₹
299
Available
मक़बूल फ़िदा हुसेन समकालीन भारतीय चित्रकला के अकेले ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने समकालीनता को अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई और जीवन-भर इस दिशा में काम किया। प्रस्तुत पुस्तक में संगृहीत लेख उनकी इसी जीवटता, समर्पण, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम को रेखांकित करते हैं। वे न सिर्फ़ सक्रिय रहे, बल्कि उन्होंने अनेक चित्रकारों को प्रेरित भी किया। युवा चित्रकारों के लिए आज भी वे प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। उनकी चुम्बकीय उपस्थिति, उनका बेफ़िक्राना अन्दाज़, उनके सरोकार आदि सभी इतने व्यापक और पारम्परिक रहे कि उनमें आधुनिकता अपने उच्चतम रूप में प्रकट होती है। हुसेन के चित्रों को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो वह कुछ इस तरह का हो सकता है— “परम्परा अपनी आधुनिकता को हुसेन के चित्रों में सहजता से प्रकट करती है।”
हुसेन पर लिखे गए इन लेखों को एक जगह एकत्र करने के पीछे मेरी मंशा यह भी रही है कि अलग-अलग समय पर अन्यान्य कारणों से लिखे गए इन निबन्धों में हुसेन की बहुमुखी प्रतिभा का स्वाद पाठकगण ले सकें।
हुसेन निश्चित ही देश-काल, धर्म-विधर्म से परे अपनी रचनात्मकता में डूबे एक सच्चे कलाकार थे जिन्होंने जीवन-भर अपने को कसौटी पर कसे रखा। वे सक्रियता के पर्याय थे।
ISBN: 9789360866488
Pages: 192
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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जाबिर हुसेन अपनी डायरी के इन पन्नों को ‘बेख़ाब तहरीरें’ का नाम देते हैं। वो इन्हें अपने ‘वसीयतनामे का आख़िरी बाब’ भी कहते हैं। ये तहरीरें उनकी डायरी में दर्ज इबारतें हैं। इबारतें, जो समय की रेत पर अनुभूतियों की एक व्यापक दुनिया उकेरती हैं। इबारतें, जो किसी रचनाकार की क़लम को उसकी ज़िन्दगी के तल्ख़ आयामों से दूर ले जाती हैं। खुले आकाश तले, लम्बे, ऊँचे पेड़ों के अन्तहीन सिलसिलों की अजनबी अपनाइयत की ओर, जिससे निकलनेवाली रौशनी की किरणें उसे अपने जिस्म की गहराइयों में उतरती महसूस होती हैं। किरणें, जो उसे आत्मसम्मान और वफ़ादारी के साथ ज़िन्दा रहने का हौसला देती हैं।
जाबिर हुसेन अपनी रचनाओं में किसी काल्पनिक समाज की अच्छाइयाँ नहीं उभारते। वो अपने आस-पास के किरदारों, देखे-समझे, अनुभव की तपिश में परखे, लोगों की बाबत लिखते हैं। उनके सामाजिक सरोकार उनकी तमाम तहरीरों से बख़ूबी झलकते हैं। इनसानी रिश्तों के बीच पैदा होनेवाली दरारें, रंग और नस्ल की पहचान, सत्ता के औजार के रूप में पुलिस का इस्तेमाल, जैसी कुछ सच्चाइयों से जाबिर हुसेन अपनी तहरीरों का शिल्प तैयार करते हैं। शिल्प, जो डायरी की सामान्य परिभाषा से कहीं अलग है। और जो अपने प्रतीक और बिम्ब के कारण मर्मस्पर्शी, बल्कि रोमांचकारी बन जाता है। इस शिल्प में ज़िन्दगी की उदासियाँ भी विश्वास का संकेत बनकर उभरती हैं। तो फिर जाबिर हुसेन की ये तहरीरें उनके ‘बेख़ाब वसीयतनामे’ का आख़िरी बाब कैसे हैं? अतीत का चेहरा इस सवाल की परतें खोलता है।
Baat Un Dino Ki Hai
- Author Name:
Sriprakash Mani Tripathai
- Book Type:

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Description:
बात उन दिनों की है पुस्तक संस्मरण भी है और आत्मीय ग्रामबोध का आख्यान भी। पुस्तक में ग्रामीण जीवन की सहज, सरल और मुक्त प्रकृति का चित्र खींचा गया है। इन चित्रों की रचना में लेखक स्वयं भी सम्मिलित है इसलिए इसकी शैली और शिल्प में एक विशेष प्रकार की चुम्बकीयता है।
पुस्तक में यद्यपि व्यक्तिव्यंजक निबंध अंकित हैं, पर है यह गंवई सहजता का शब्दचित्र। ये शब्दचित्र छोटे-छोटे प्रसंगों में बांध कर रचे गए हैं। गाँव के विद्यालय, मेले, नदी-नाले ये सब पुस्तक में रोचक प्रसंग बनकर उभरे हैं। ग्रामीण खानपान का रसीला चित्र भी मिलेगा - नेनुआ की पनीली तरकारी के साथ गरम-गरम भात, होरहा, गट्टा, भुनी मटर हमें लोक जीवन का असली स्वाद चखाते हैं। कुछ व्यक्ति-चित्र और कुछ अतीत की वस्तुएँ जैसे बाइस्कोप, आनंद की सृष्टि करनेवाले हैं।
आनंद का भाव पूरी पुस्तक में व्याप्त है। वास्तव में यही ग्राम जीवन का स्थायी भाव है। गाँव का यह आनंदी स्वभाव इस पुस्तक की आत्मा है। तीस प्रसंगों में प्रस्तुत यह पुस्तक अत्यंत पठनीय है। लेखक के आत्मीय भाव ने प्रसंगों की संवेदना को दोबाला कर दिया है। इस आत्मीयता के कारण पूरी पुस्तक की शैली कहीं भी शिथिल नहीं होती, बल्कि पाठक को अपने साथ बहाये लिए जाती है। यह प्रवाहमयता इस पुस्तक के गद्य की विशिष्टता है।
Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Main Invest Karna
- Author Name:
Aryaman Dalmia
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक निवेश के उन मूलभूत सिद्धांतों को, वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करती है, जिन्हें वैज्ञानिक निवेश की पद्धति के जनक, बेंजामिन ग्राहम ने प्रतिप्रदित किया है। इसमें उन साधारण, किंतु बेहद कारगर दिशा-निर्देशों का भी विश्लेषण किया गया है, जिन्हें अपनाते हुए उनके सबसे मेधावी छात्र वॉरेन बफे ने निवेश की दुनिया की चुनौतियों को पार कर दुनिया के तीन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बनने का सफर तय किया। इसका भी वर्णन किया गया है कि विस्तृत विश्लेषण, स्वतंत्र सोच और अनुशासन की मदद से कैसे लाभ हासिल किया जा सकता है, तथा कैसे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए बाजार के रुझानों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। भारतीय बाजारों के सफलतम निवेशकों का भी उदाहरण के तौर पर इसमें जिक्र है—असाधारण रूप से सफल और क्रिस कैपिटल के संस्थापक आशीष धवन, मॉर्गन स्टेनले में इमर्जिंग मार्केट्स के पूर्व प्रमुख माधव धर; चैतन्य डालमिया, जिनकी स्वयं की कंपनी का प्रदर्शन तमाम दूसरी निधियों के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है, और संजय बख्शी, जो मूल्य निवेश की शिक्षा देते हैं तथा भारत के लिए एक विशिष्ट कोष भी चलाते हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि निवेशकों ने किस प्रकार ग्राहम और बफे के तरीकों को अपनाया और तर्कसंगत सोच के साथ असाधारण लाभ कमाया है।
Shri Satya Sai Baba : Vyaktitva Evam Sandesh
- Author Name:
Ganpatichandra Gupt
- Book Type:

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Description:
आन्ध्र प्रदेश के एक गाँव पुट्टापर्ती में 23 नवम्बर, 1926 को श्रीसत्य साईं ने जन्म लिया। इसके कुछ घंटों के बाद ही अगले दिन महर्षि अरविन्द ने अपनी दिव्य चेतना के बल पर घोषित किया कि दिव्य शक्ति धरती पर अवतरित हो गई है, वह समस्त मानवता का नेतृत्व करती हुई उसे विकास की उच्चतर मंज़िल तक ले जाएगी। अस्तु, 24 नवम्बर को अरविन्द आश्रम में ‘सिद्धि दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
क्या दिव्य सत्ता का यह अवतरण सत्य साईं के अवतरण की घटना का पर्याय है या और कुछ?
20 अक्टूबर, 1940 को सत्य ने विद्यालय से लौटकर अपना बस्ता फेंकते हुए घर वालों से कहा—‘मैं जा रहा हूँ। मेरे भक्त मुझे पुकार रहे हैं...अब मुझे समझाने-बुझाने का प्रयास छोड़ दो। माया हट गई है...याद रखो, मैं अब ‘साईं बाबा’ हूँ।’ 21 वर्ष की आयु में सत्य साईं ने अपने बड़े भाई के पत्र के उत्तर में लिखा—‘मेरे सामने एक महान कार्य है। मानव जाति को आनन्द प्रदान करके उसे विकसित करना। मेरा यह संकल्प है कि जो भी पथ-भ्रष्ट हैं, उन्हें सच्चाई के पथ पर लाकर उनका उद्धार कराना।...’‘भगवान सत्य साईं बाबा हमारी पीढ़ी के वरदान हैं। जहाँ वे चरण रखते हैं, वही भूमि पवित्र हो जाती है। जहाँ वे बैठते हैं, वहाँ दिव्य मन्दिर बन जाते हैं।...वस्तुतः ईश्वर की परम शक्ति का ही एक रूप मानवीय अवतार के रूप में प्रकट है।’
—वी.आर. कृष्ण अय्यर, भूतपूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
‘मैं उनसे मिला, उन्हें देखा और नतमस्तक हो गया।’
—कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी; भूतपूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश
Baliya Bisrat Nahin
- Author Name:
Ram Badan Rai
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक की प्रसव-पीड़ा ने मुझे दुख भी दिया है और अपार सुख भी। दुख इस बात का कि अतीत के वे सुनहरे पल अब पुन: लौटकर नहीं आने वाले। और सुख इस बात का कि थोड़े दिनों के लिए ही सही, उन मनहर सुनहरे क्षणों को मैंने ज्यों का त्यों इस कृति में जिया है। जीने का मजा लिया है। इसमें कुछ प्रसंग तो ऐसे आये हैं, जिन्हें उरेहते समय मैं सिर्फ सुखी ही नहीं, आनन्द विभोर हो उठा हूँ, यथा 'कथा कन्या कलावती की', 'हम नाहीं जइबें गवनवाँ हे रामा', 'जब देवी बनी दिदिया', 'एक लड़कीनुमा लड़के की अजीब दास्तान', 'जब मान्य मुरली मनोहर सनिचरी से मिले' तथा 'मेरे शुभेच्छु शिवशंकर गौरीशंकर' आदि और भी कुछेक प्रकरण। इस किताब में कुछ ऐसी बातें आ पायी हैं, जिन्हें मैं देना चाहता था। मसलन बलिया (खासकर गुदड़ी बाजार) की नाचने-गाने वाली मशहूर तवायफों का इतिहास, मानीखेज भाँड़ (नाच) मंडलियों का इतिहास, विभिन्न प्रकारीय लोक नर्तकों-गायकों, स्वाँग सर्जकों का इतिहास, कुछ करतबी किन्नरों का इतिहास, जो मेरी जानिब सिकन्दर पुर में ज्यादा पाये जाते हैं। इसी तरह देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों, उच्च स्तरीय खिलाडिय़ों, वैज्ञानिकों तथा तबला, पखावज, बेंजू, पिस्टीन (बैण्डवादक), बाँसुरी आदि के वादकों का नामोल्लेख तक मैं नहीं कर सका हूँ। पुस्तक के प्राय: प्रसंग जाने, सुने, देखे, समझे तथा भोगे हुए यथार्थ पर आधारित हैं। कहीं-कहीं इन्हें मैंने कल्पना और अनुमान की आँखों से भी आँकने-झाँकने की कोशिश की है, मसलन 'नफवा चला ददरी देखने' या 'किस्सा-ए-कोलकाता' आदि। (इसी किताब से)
Hindu Rashtra Darshan
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: A Hindu, to sum up the conclusions arrived at, is he who looks upon the land that extends from Sindhu to Sindhu, from the Indus to the seas, as the land of his forefathers, his pitrabhu, who inherited the blood of that race whose first discernible source is traced to the Vedic Saptasindhus, which, on its onward march, assimilated much that was incorporated and ennobling. The Hindus, who inherited and claimed as their own the culture of that race, as expressed chiefly in their common classic language, Sanskrit, and represented by a common history, a common literature, art and architecture, law and jurisprudence, rites and rituals, ceremonies and sacraments, fairs and festivals, and who, above all, address this land, this Sindhustan, as their punyabhu, as the holy land, the land of their saints and seers, of godmen and gurus, the land of piety and pilgrimage. These are the essentials of Hindutva – a common rashtra, a common jaati, and a common sanskriti. All these essentials could best be summed up by stating in brief that they are Hindu to whom Sindhustan is not only a pitrabhu but also a punyabhu. —Excerpts from this book This classic and unique book, Hindu Rashtra Darshan by Swatantrayaveer Savarkar, gives the true meaning and correct picture of the Hindu Rashtra, wherein everyone living on the land this side of Indus river is a Hindu by culture, by values and not by the religion in its narrow definition. The book is divided in three major parts—First part is Hindu Pad-Padshahi, Second is Hindu Rashtra Darshan and third part is Essentials of Hindutva. It is a must read book for all Bharatiyas.
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