Itihas Ka Sparshbodh : Ek Aatmakatha
(0)
Author:
Krishna Kumar BirlaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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‘‘हमारा परिवार बीसवीं सदी के आरम्भिक वर्षों से ही राजनीति से जुड़ा रहा है। पिताजी 1915 में गांधी जी के सम्पर्क में आए और स्वतंत्रता के संघर्ष में उन्होंने केन्द्रीय भूमिका निभाई। पिताजी के इस जुड़ाव के कारण परिवार में राजनीतिक जागरूकता का वातावरण था।’’ सुविख्यात बिड़ला परिवार के एक विशिष्ट सदस्य द्वारा लिखित यह आत्मकथा महात्मा गांधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय, जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई और बिधान चन्द्र रॉय जैसे दिग्गज राष्ट्रीय नेताओं के साथ परिवार के घनिष्ठ सम्बन्धों की अन्तरंग झलक प्रस्तुत करती है।</p> <p>पाठकों को बीसवीं सदी के भारत के भाग्य-निर्माताओं के व्यक्तित्वों के अन्तरंग पहलुओं से साक्षात्कार का अवसर मिलता है—एक ऐसे व्यक्ति की कलम के माध्यम से, जिसने इन सभी व्यक्तित्वों को बहुत निकट से और इस सदी की अधिकांश महत्त्वपूर्ण घटनाओं को मंच के पीछे से देखा। 1918 में, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद शान्ति-सन्धि के ऐतिहासिक दिन, घनश्यामदास बिड़ला के परिवार में जन्मे कृष्ण कुमार बिड़ला को एक ऐसी विरासत प्राप्त हुई जिसमें धन-सम्पदा के सृजन, परोपकारिता और राजनीतिक नेतृत्व को राष्ट्र-निर्माण के एक अंग के रूप में देखा जाता था, जिसमें आध्यात्मिक शक्ति और नैतिक मूल्य व्यक्तिगत योग्यता का हिस्सा थे। के.के. बिड़ला ने कोलकाता के राधाकृष्ण मन्दिर के साथ-साथ ऐसे अनेक संस्थानों की स्थापना की जिन्होंने भारतीय समाज के सांस्कृतिक सूत्रों को और अधिक सुदृढ़ और समृद्ध किया है। उन्होंने बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स), पिलानी का विस्तार करते हुए दुबई और गोवा में भी संस्थान के कैम्पसों की स्थापना की, और एक अन्य नया कैम्पस शीघ्र ही हैदराबाद में आरम्भ होने जा रहा है।</p> <p>‘इतिहास का स्पर्शबोध’ बहुत सरल भाषा और शैली में और पारदर्शी ईमानदारी के साथ राष्ट्रीय जीवन के एक महत्त्वपूर्ण युग को पुनर्जीवित करती है। समय के साथ बदलते सामाजिक चलनों, निगमीय प्रशासन के सिद्धान्तों, अटूट पारिवारिक मूल्यों और जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच व्यक्तिगत जीवट की लोमहर्षक गाथा इस पुस्तक के अध्ययन को एक सम्मोहन भरा अनुभव बना देती है।
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‘‘हमारा परिवार बीसवीं सदी के आरम्भिक वर्षों से ही राजनीति से जुड़ा रहा है। पिताजी 1915 में गांधी जी के सम्पर्क में आए और स्वतंत्रता के संघर्ष में उन्होंने केन्द्रीय भूमिका निभाई। पिताजी के इस जुड़ाव के कारण परिवार में राजनीतिक जागरूकता का वातावरण था।’’ सुविख्यात बिड़ला परिवार के एक विशिष्ट सदस्य द्वारा लिखित यह आत्मकथा महात्मा गांधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय, जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई और बिधान चन्द्र रॉय जैसे दिग्गज राष्ट्रीय नेताओं के साथ परिवार के घनिष्ठ सम्बन्धों की अन्तरंग झलक प्रस्तुत करती है।</p>
<p>पाठकों को बीसवीं सदी के भारत के भाग्य-निर्माताओं के व्यक्तित्वों के अन्तरंग पहलुओं से साक्षात्कार का अवसर मिलता है—एक ऐसे व्यक्ति की कलम के माध्यम से, जिसने इन सभी व्यक्तित्वों को बहुत निकट से और इस सदी की अधिकांश महत्त्वपूर्ण घटनाओं को मंच के पीछे से देखा। 1918 में, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद शान्ति-सन्धि के ऐतिहासिक दिन, घनश्यामदास बिड़ला के परिवार में जन्मे कृष्ण कुमार बिड़ला को एक ऐसी विरासत प्राप्त हुई जिसमें धन-सम्पदा के सृजन, परोपकारिता और राजनीतिक नेतृत्व को राष्ट्र-निर्माण के एक अंग के रूप में देखा जाता था, जिसमें आध्यात्मिक शक्ति और नैतिक मूल्य व्यक्तिगत योग्यता का हिस्सा थे। के.के. बिड़ला ने कोलकाता के राधाकृष्ण मन्दिर के साथ-साथ ऐसे अनेक संस्थानों की स्थापना की जिन्होंने भारतीय समाज के सांस्कृतिक सूत्रों को और अधिक सुदृढ़ और समृद्ध किया है। उन्होंने बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स), पिलानी का विस्तार करते हुए दुबई और गोवा में भी संस्थान के कैम्पसों की स्थापना की, और एक अन्य नया कैम्पस शीघ्र ही हैदराबाद में आरम्भ होने जा रहा है।</p>
<p>‘इतिहास का स्पर्शबोध’ बहुत सरल भाषा और शैली में और पारदर्शी ईमानदारी के साथ राष्ट्रीय जीवन के एक महत्त्वपूर्ण युग को पुनर्जीवित करती है। समय के साथ बदलते सामाजिक चलनों, निगमीय प्रशासन के सिद्धान्तों, अटूट पारिवारिक मूल्यों और जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच व्यक्तिगत जीवट की लोमहर्षक गाथा इस पुस्तक के अध्ययन को एक सम्मोहन भरा अनुभव बना देती है।
Book Details
-
ISBN9788126717552
-
Pages652
-
Avg Reading Time22 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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सुरेश जी वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी हैं। अपनी दीर्घकालीन सेवा के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश एवं अन्य राज्यों में विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन किया है। इस अवधि में भाँति-भाँति के लोगों से उनका साक्षात्कार हुआ है, क़िस्म-क़िस्म की समस्याओं से उन्होंने मुठभेड़ की है और तरह-तरह की घटनाओं का वे हिस्सा बने हैं। कहीं संघर्ष, कहीं सहानुभूति, कहीं कृतज्ञता का भाव। इस पुस्तक में संकलित रचनाएँ ऐसे
व्यक्तियों, परिस्थितियों, घटनाओं, अनुभवों और भावों का साक्षात्कार हैं, जो संवाद के इच्छुक हैं। ये संस्मरण एक ऐसे चैतन्य प्रशासक की रागात्मक अभिव्यक्ति हैं, जिसका चित्त शुद्ध और संवेदना जाग्रत
है।इन रचनाओं की सहजता और कथ्य के स्तर पर बरती गई ईमानदारी के माध्यम से अभिव्यक्ति की सच्चाई को परखा जा सकता है। इसे एक प्रशासक के अनुभव का निचोड़ कहा जा सकता है। यह निचोड़ ‘हम सिंगल ही अच्छे थे’ में प्रशासकों के बँगलों पर स्थायी समस्या के रूप में उपस्थित ‘अच्छे’ अथवा ‘अनुकूल’ भूत्या की तलाश के रोचक प्रसंग के रूप में देखा जा सकता है। ‘दिल में जो तमन्ना थी’, ‘कैसे नहीं लिखूँ’, ‘बाक़ी सब ठीक है’, ֹ‘कटी नाक की अमर कहानी’, ‘कलेक्टर साहब के बँगले की गाय’ आदि संस्मरण भी रोचक मुहावरों, प्रसंगों और घटनाओं की सार्थक भूमिका के साथ किसी ज्वलन्त समस्या और उसके निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की प्रशासनिक सूझ से जुड़ते हैं।
इन संस्मरणों के मार्फ़त तत्कालीन मध्य प्रदेश के दूरस्थ अंचलों, ख़ास तौर पर जनजाति बहुल ज़िलों की विषम स्थितियों, कठिन जीवन-संघर्ष और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविकता का पता भी चलता है।
Selected Readings of Sri Ramanuja
- Author Name:
S Ranganath
- Rating:
- Book Type:

- Description: An anthology on Sri Ramanuja in English edited by S.Ranganath.
Daughter Of The Soil President Droupadi Murmu
- Author Name:
Dr. Rashmi Saluja +1
- Book Type:

- Description: "This book celebrates the extraordinary life of Droupadi Murmu, India's first tribal President. Born into a humble family, her journey from a remote village to the highest office is a testament to resilience and determination. Tracing her path from being a school teacher to a successful politician, the biography highlights Murmu's unwavering commitment to empowering marginalised communities. Her rise shattered glass ceilings, inspiring millions with her courage and compassion. Beyond her political achievements, the book delves into Murmu's advocacy for women's rights and her tireless efforts to uplift the underprivileged. It offers a glimpse into the remarkable woman who defied odds and became a beacon of hope for the nation. Through her incredible story, this biography reminds us that no dream is too big when pursued with passion and perseverance."
Kuchh Yaden, Kuchh Baten
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार अमरकान्त के संस्मरणों, आलेखों तथा साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अत्यन्त दिलचस्प एवं महत्त्वपूर्ण हैं। इन रचनाओं में एक बड़े लेखक की परिवेश तथा सृजन-सम्बन्धी परिस्थितियों और संघर्ष-कथा के साथ, उन अग्रजों एवं साथी लेखकों को आदर और आत्मीयता के साथ याद किया गया है जिनसे उन्हें प्रेरणा, प्रोत्साहन और स्नेह मिला।
यहाँ प्रगतिशील आन्दोलन तथा नई कहानी आन्दोलन की वे घटनाएँ, बहसें और विवाद भी हैं, जिनसे कभी साहित्य जगत् हिल गया था। परन्तु अमरकान्त जी ने इन आन्दोलनों की विशेषताओं और उपलब्धियों के साथ, उनके अन्तर्विरोधों तथा दुर्बलताओं का तर्क-सम्मत विश्लेषण भी प्रस्तुत किया है और परिवर्तित समय में कहानी तथा प्रगतिशील लेखन की नई भूमिका को भी रेखांकित किया है।
इन रचनाओं के बीच कहानी लेखन की ओर प्रेरित करनेवाले अमरकान्त जी के शिक्षक बाबू राजेश प्रसाद तथा डॉ. रामविलास शर्मा हैं। इनके साथ भैरवप्रसाद गुप्त, प्रकाशचन्द्र गुप्त, शमशेर, मोहन राकेश, अमृत राय, रांगेय राघव, नामवर सिंह, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, शेखर जोशी आदि के अनूठे संस्मरण भी हैं। निश्चय ही प्रत्येक हिन्दी लेखक तथा साहित्य-प्रेमी पाठक के लिए यह जानना ज़रूरी है कि साहित्य-इतिहास के इन प्रतिष्ठित रचनाकारों के सम्बन्ध में अमरकान्त क्या सोचते हैं।
मूल्यांकन की नई दृष्टि, हिन्दी के कथा-परिदृश्य पर डाली गई रोशनी और जीवन्त कथा-शैली के कारण यह संकलन जहाँ साहित्यिक कृति के रूप में उत्कृष्ट है, वहीं ऐतिहासिक दस्तावेज़ की तरह मूल्यवान भी।
Virat Kohli : A Complete Biography | An Indian International Crickter
- Author Name:
Pushkar Kumar
- Book Type:

- Description: This book takes you into the extraordinary Life of a cricketer who redefined the spirit of the game and captured the hearts of millions. From his early days as a determined boy in Delhi to becoming one of the greatest icons in international cricket, this is the story of grit, passion and relentless pursuit of excellence. Follow Virat's journey through his record-breaking performances, fearless leadership and unwavering commitment to fitness that revolutionised modern cricket. Witness the highs of his remarkable centuries, the challenges he faced both on and off the field and his transformation into a global superstar. But there's more to Virat than the fiery batsman we see on the pitch. This biography explores his personal triumphs, his deep bond with family and his inspiring transition from a cricketing prodigy to a symbol of resilience and determination. Packed with inspiration and riveting detail, this book paints a vivid portrait of a legend who continues to inspire, both in sport and in life.
Jo Kuchh Rah Gaya Ankaha
- Author Name:
Kedarnath Pandey
- Book Type:

- Description: ‘जो कुछ रह गया अनकहा’ लेखक के जीवन संघर्षों की औपन्यासिक गाथा है। इसे पढ़ते हुए लेखक के जीवन से ही नहीं, युग-युग के उस सच से भी अवगत हो सकते हैं जो अपनी प्रक्रिया में एक दिन एक मिसाल बनता है। उत्तर प्रदेश के ज़िला ग़ाज़ीपुर का गाँव वीरपुर, जहाँ लेखक का जन्म हुआ, यह खाँटी बाँगर मिट्टी का क्षेत्र है। यहाँ सिंचाई के अभाव में तब मुश्किल से ज्वार, बाजरा की फ़सल उपजती। लेखक ने खेती करते हुए पढ़ाई की तो आजीविका के लिए भटकाव की स्थिति से गुज़रना पड़ा। सबसे पहले कानपुर में 60 रुपए मासिक वेतन की नौकरी की, यह नौकरी रास नहीं आई तो नौ माह पश्चात् ही घर आ गए और गाँव के निजी संस्कृत विद्यालय में अध्यापन का कार्य सँभाला। पढ़ने की ललक निरन्तर बनी रही तो धीरे-धीरे एम.ए., एम.एड. तक की शिक्षा प्राप्त कर ली। फिर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के ज़िला सचिव का पद मिला। 1977 में सीवान में अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन हुआ तो सीवान ज़िला इकाई का सचिव पद मिला। फिर 1992 में मुज़फ़्फ़रपुर राज्य संघ में महासचिव हुए। 2008 में अखिल भारतीय शान्ति एकजुटता संगठन के सौजन्य से वियतनाम में आयोजित द्वितीय भारत वियतनाम मैत्री महोत्सव में शिष्टमंडल के सदस्य रहे। समय तेज़ी से परिवर्तित होता गया, लेखक को वह दौर भी देखने को मिला जब दुनिया-भर में शिक्षा और शिक्षकों के समक्ष एक ही प्रकार की चुनौतियाँ आईं। शिक्षा पर निजीकरण और व्यावसायीकरण का ख़तरा मँडराया, जब शिक्षकों के संवर्ग को समाप्त कर अल्पवेतन, अल्प योग्यताधारी शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षा को पूर्णतः बाज़ार के हवाले कर देने की योजना को बढ़ावा मिला। लेखक इससे विचलित तो नहीं हुआ परन्तु शारीरिक तौर पर अस्वस्थता ने जीवन-नौका को डुबाने की कगार पर ला दिया। अन्ततः एन्जियोप्लास्टी के कष्ट को भी झेलना पड़ा। एक बार फिर जीवन संघर्षों से जूझने को बाध्य हो गया। तब लगा कि जीवन संघर्षों से ही निखरता है जैसे सोना अग्नि में तपकर चमकता है। हम कह सकते हैं कि यह पुस्तक अपने आख्यान में जीवन्त तो है ही, अपने पाठ में जीने और जीतने की कला भी सिखाती है।
Wo Tere Pyar Ka Gam
- Author Name:
Ishmadhu Talwar
- Book Type:

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Description:
दान सिंह का निधन मैलोडी के लिए बड़ा नुक़सान है। मैं उन्हें मूल्यों और गरिमा में गहरा विश्वास रखनेवाले इनसान के रूप में याद करता हूँ।
—गुलज़ार; मशहूर गीतकार
दान सिंह जी की धुनों से सजा गीत—‘वो तेरे प्यार का गम’—मेरे पिताजी (मुकेश) के गाये सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक था।
—नितिन मुकेश; प्रसिद्ध गायक
वरिष्ठ संगीतकार दान सिंह जी ने ‘माइ लव' के रूप में फ़िल्मी संगीत को ऐसा तोहफ़ा दिया है जिसकी चमक कोहिनूर हीरे जैसी है। जब भी अच्छे और पायेदार फ़िल्मी संगीत की बात होगी तो ‘माइ लव’ के संगीत को शायद नहीं भूला जाएगा। दान सिंह जी उन ख़ुशनसीबों में से थे जो बहुत कम समय फ़िल्म जगत में रहकर और बहुत कम काम करके अमर हो गए।
—इरशाद कामिल; मशहूर फ़िल्म गीतकार
जयपुर के पत्रकार ईशमधु तलवार ने किसी ज़माने में ख्याति पाए संगीतकार दान सिंह, जिनके मृत होने की अफ़वाह थी, को जीवित खोज निकाला और तनहा गुमशुदा-सी ज़िन्दगी के अँधेरों से वे बाहर आए।
—जयप्रकाश चौकसे; प्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक
दान सिंह जी के संगीत की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि वो अपने समय के सभी दिग्गजों के बीच अपनी अलग धारा चले, पक्की और मधुर धुनों के साथ-साथ दान सिंह ने कविता की ऊँचाई को भी क़ायम रखा।
—यूनुस ख़ान; मशहूर रेडियो एनाउंसर, विविध भारती, मुम्बई
Manavata Ke Praneta : Maharshi Arvind
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: महर्षि अरविंद एक महान् दार्शनिक, महान् स्वाधीनता सेनानी, प्रकांड विद्वान्, अद्भुत कवि, राजनेता व लेखक थे। उन्होंने सुप्त भारतीय जनमानस को जगाने का सफलतम प्रयास किया और उनके भीतर एक नए आत्मविश्वास का संचार करने में सफलता पाई। वे भारतीय राजनीति यानी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में 1905 से 1910 तक केवल पाँच वर्ष रहे और इतनी अल्पावधि में देश के जनमानस को राजनीतिक रूप से इतना समर्थ बना दिया कि वह अपनी वास्तविक हस्ती को पहचान सके और अपने अतीत की खोई गरिमा और महिमा को पुनः अर्जित करने के लिए समर्पित हो। महर्षि अरविंद पहले एक राजनीतिज्ञ, क्रांतिकारी नेता थे लेकिन दैवीय विधान के चलते वे अध्यात्म की ओर मुड़ गए, क्योंकि उन्होंने यह जाना कि आध्यात्मिक उत्थान के बगैर भारत की स्वतंत्रता अर्थहीन है। इसीलिए उन्होंने भारत को आध्यात्मिक रूप से एक करने के लिए वेद, उपनिषद् व भारतीय ज्ञान-परंपरा की पताका विश्वभर में फैलाई ताकि भारतीयों में अपने ज्ञान के प्रति गौरव-महसूस हो सके। जनसांख्यकीय लाभांश के चलते भारत युवा देश है। आज के परिदृश्य में भारत को उसका पुराना वैभव दिलाने और देश को ज्ञान-आधारित महाशक्ति बनाने हेतु श्रीअरविंद के विचार अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। नवभारत के निर्माण की जिम्मेदारी हमारी युवाशक्ति पर है। देश के शिक्षा मंत्री द्वारा इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी गई है।
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