SAMUND SAMAVE BUND MEIN
(0)
Author:
M. Dhinakaran, Amit, NituPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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"‘समुंद समावे बुंद में’ केरिपुबल के शूरवीरों केअदम्य साहस और बहादुरी की कथा है जिन्होंने एक पल में नियति अपने नाम कर, भविष्य की लहरों से लड़कर, प्रारब्ध का प्रारूप बदल दिया। यह गाथा केरिपुबल के रणबाँकुरों की वीरता और नेतृत्व क्षमता को बयाँ करती है। ‘‘आँधियों ने गोद में हमको खिलाया है न भूलो, कंटको ने सर हमें सादर झुकाया है न भूलो, सिंधु का मथ कर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए और हमारे तेज से सूरज लजाया है न भूलो।’’ "
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"‘समुंद समावे बुंद में’ केरिपुबल के शूरवीरों केअदम्य साहस और बहादुरी की कथा है जिन्होंने एक पल में नियति अपने नाम कर, भविष्य की लहरों से लड़कर, प्रारब्ध का प्रारूप बदल दिया। यह गाथा केरिपुबल के रणबाँकुरों की वीरता और नेतृत्व क्षमता को बयाँ करती है।
‘‘आँधियों ने गोद में
हमको खिलाया है न भूलो,
कंटको ने सर हमें
सादर झुकाया है न भूलो,
सिंधु का मथ कर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए
और हमारे तेज से
सूरज लजाया है न भूलो।’’
"
Book Details
-
ISBN9789390366804
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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