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Kuchh Yaden, Kuchh Baten

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इस पुस्तक में हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार अमरकान्त के संस्मरणों, आलेखों तथा साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अत्यन्त दिलचस्प एवं महत्त्वपूर्ण हैं। इन रचनाओं में एक बड़े लेखक की परिवेश तथा सृजन-सम्बन्धी परिस्थितियों और संघर्ष-कथा के साथ, उन अग्रजों एवं साथी लेखकों को आदर और आत्मीयता के साथ याद किया गया है जिनसे उन्हें प्रेरणा, प्रोत्साहन और स्नेह मिला। यहाँ प्रगतिशील आन्दोलन तथा नई कहानी आन्दोलन की वे घटनाएँ, बहसें और विवाद भी हैं, जिनसे कभी साहित्य जगत् हिल गया था। परन्तु अमरकान्त जी ने इन आन्दोलनों की विशेषताओं और उपलब्धियों के साथ, उनके अन्‍तर्विरोधों तथा दुर्बलताओं का तर्क-सम्मत विश्लेषण भी प्रस्तुत किया है और परिवर्तित समय में कहानी तथा प्रगतिशील लेखन की नई भूमिका को भी रेखांकित किया है। इन रचनाओं के बीच कहानी लेखन की ओर प्रेरित करनेवाले अमरकान्त जी के शिक्षक बाबू राजेश प्रसाद तथा डॉ. रामविलास शर्मा हैं। इनके साथ भैरवप्रसाद गुप्त, प्रकाशचन्द्र गुप्त, शमशेर, मोहन राकेश, अमृत राय, रांगेय राघव, नामवर सिंह, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, शेखर जोशी आदि के अनूठे संस्मरण भी हैं। निश्चय ही प्रत्येक हिन्दी लेखक तथा साहित्य-प्रेमी पाठक के लिए यह जानना ज़रूरी है कि साहित्य-इतिहास के इन प्रतिष्ठित रचनाकारों के सम्बन्ध में अमरकान्त क्या सोचते हैं। मूल्यांकन की नई दृष्टि, हिन्दी के कथा-परिदृश्य पर डाली गई रोशनी और जीवन्त कथा-शैली के कारण यह संकलन जहाँ साहित्यिक कृति के रूप में उत्कृष्ट है, वहीं ऐतिहासिक दस्तावेज़ की तरह मूल्यवान भी।

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इस पुस्तक में हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार अमरकान्त के संस्मरणों, आलेखों तथा साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अत्यन्त दिलचस्प एवं महत्त्वपूर्ण हैं। इन रचनाओं में एक बड़े लेखक की परिवेश तथा सृजन-सम्बन्धी परिस्थितियों और संघर्ष-कथा के साथ, उन अग्रजों एवं साथी लेखकों को आदर और आत्मीयता के साथ याद किया गया है जिनसे उन्हें प्रेरणा, प्रोत्साहन और स्नेह मिला।

यहाँ प्रगतिशील आन्दोलन तथा नई कहानी आन्दोलन की वे घटनाएँ, बहसें और विवाद भी हैं, जिनसे कभी साहित्य जगत् हिल गया था। परन्तु अमरकान्त जी ने इन आन्दोलनों की विशेषताओं और उपलब्धियों के साथ, उनके अन्‍तर्विरोधों तथा दुर्बलताओं का तर्क-सम्मत विश्लेषण भी प्रस्तुत किया है और परिवर्तित समय में कहानी तथा प्रगतिशील लेखन की नई भूमिका को भी रेखांकित किया है।

इन रचनाओं के बीच कहानी लेखन की ओर प्रेरित करनेवाले अमरकान्त जी के शिक्षक बाबू राजेश प्रसाद तथा डॉ. रामविलास शर्मा हैं। इनके साथ भैरवप्रसाद गुप्त, प्रकाशचन्द्र गुप्त, शमशेर, मोहन राकेश, अमृत राय, रांगेय राघव, नामवर सिंह, राजेन्द्र यादव, कमलेश्वर, शेखर जोशी आदि के अनूठे संस्मरण भी हैं। निश्चय ही प्रत्येक हिन्दी लेखक तथा साहित्य-प्रेमी पाठक के लिए यह जानना ज़रूरी है कि साहित्य-इतिहास के इन प्रतिष्ठित रचनाकारों के सम्बन्ध में अमरकान्त क्या सोचते हैं।

मूल्यांकन की नई दृष्टि, हिन्दी के कथा-परिदृश्य पर डाली गई रोशनी और जीवन्त कथा-शैली के कारण यह संकलन जहाँ साहित्यिक कृति के रूप में उत्कृष्ट है, वहीं ऐतिहासिक दस्तावेज़ की तरह मूल्यवान भी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
4th
Publication year
2005
Weight
302 grams
ISBN-13
9788126709502
Pages
147
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

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