Vyomkesh Darvesh
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Author:
Vishwanath TripathiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन-काल में ही मिथक-पुरुष बन गए थे। हिन्दी में ‘आकाशधर्मा’ और ‘मिथक’ इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था। उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश-विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षों तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय-सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्वान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं। उनका जीवन-संघर्ष विस्थापित होते रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन-यात्रा के बारे में लिखना जितना ज़रूरी है उससे ज़्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निध्य और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया गया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य-मंडली, लेखक की मित्र-मंडली अनायास पुस्तक में आ गई है।
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आकाशधर्मा गुरु आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी अपने जीवन-काल में ही मिथक-पुरुष बन गए थे। हिन्दी में ‘आकाशधर्मा’ और ‘मिथक’ इन दोनों शब्दों के प्रयोग का प्रवर्तन उन्होंने ही किया था।
उनका रचित साहित्य विविध एवं विपुल है। उनके शिष्य देश-विदेश में बिखरे हैं। लगभग साठ वर्षों तक उन्होंने सरस्वती की अनवरत साधना की। उन्होंने हिन्दी साहित्य के इतिहास का नया दिक्काल एवं प्राचीन भारत का आत्मीय-सांस्कृतिक पर्यावरण रचा। हिन्दी की जातीय संस्कृति के मूल्यों की खोज की, उन्हें अखिल भारतीय एवं मानवीय मूल्यों के सन्दर्भ में परिभाषित किया। परम्परा और आधुनिकता की पहचान कराई। सहज के सौन्दर्य को प्रतिष्ठित किया। वे उन दुर्लभ विद्वान सर्जकों की परम्परा में हैं जिसके प्रतिमान तुलसीदास हैं और जिसमें पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी स्मरणीय हैं।
उनका जीवन-संघर्ष विस्थापित होते रहने का संघर्ष है। उनकी जीवन-यात्रा के बारे में लिखना जितना ज़रूरी है उससे ज़्यादा मुश्किल। इस पुस्तक के लेखक को दो दशकों से भी अधिक समय तक उनका सान्निध्य और शिष्यत्व प्राप्त होने का सौभाग्य मिला। इसलिए पुस्तक को संस्मरणात्मक भी हो जाना पड़ा है। प्रयास किया गया है कि प्रसंगों और स्थितियों को यथासम्भव प्रामाणिक स्रोतों से ही ग्रहण किया जाए। आदरणीयों के प्रति आदर में कमी न आने पावे। काशी की तत्कालीन साहित्य-मंडली, लेखक की मित्र-मंडली अनायास पुस्तक में आ गई है।
Book Details
-
ISBN9788126722020
-
Pages464
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: जिन यहूदियों ने भारत को अपना ठिकाना बनाया था, वे यहाँ किसी प्रतिकूल भेदभाव के बिना खूब फले-फूले । इनमे से बगदादी गडरिआ समुदाय की संख्या बहुत कम थी, लेकिन उसने भारत के महानतम समकालीन सिपाहियों में से एक लेफ्टिनेंट जनरल जैकब को पैदा किया | यह पुस्तक उन्हीं की रोमांचकारी कथा है । जैकब का जन्म एक यहूदी कारोबारी परिवार में हुआ था। जब द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो 1941 में जैकब अपने परिवार को सूचना दिए बिना नाजियों से लड़ने के लिए सेना में भरती हो गए। उन्हें भारतीय तोपखाने में कमीशन दिया गया था और उन्होंने मध्य-पूर्व, बर्मा एवं सुमात्रा में अनेक कारवाइयों में भाग लिया था। जैकब अत्यंत कुशाग्र बुद्धि थे। उन्होंने इन्फैंट्री एवं आर्टिलरी ब्रिगेडों की कमान सँभाली थी। वे तोपखाना विद्यालय के प्रधानाचार्य रहे और अंत में पूर्वी सेना के कमांडर-इन-चीफ भी रहे। यह एक ऐसे युवा यहूदी अधिकारी की दिलचस्प कहानी है, जिसने कोई समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों एवं मान्यताओं के आधार पर चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने कुछ ऐसे बहादुर एवं विश्वसनीय लोगों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम किया, जो उस समय भारतीय राजनीतिक एवं सैन्य अखाड़े के पहलवान माने जाते थे। उन्होंने ढाका के पतन की सफल रणनीति काररवाइयों का पर्यवेक्षण स्वयं किया और शत्रु को बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया, जो जनरल नियाजी एवं उनके 93,000 सैनिकों द्वारा किया गया इतिहास का एकमात्र बिना शर्त सार्वजनिक आत्मसमर्पण था। अत्यंत सुबोधगम्य शैली में लिखी इस आत्मकथा में एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में जीवन सजीव हो उठा है। यह मात्र एक महान् सैनिक की जीवनगाथा ही नहीं है, अपितु इसमें कुछ उन अत्यंत प्रभावशाली एवं देदीप्यमान व्यक्तित्वों की झलकियाँ भी हैं, जिन्होंने उन अशांत युगों का इतिहास लिखा था।
Delhi Ke Chatkhare
- Author Name:
Shahid Ahmed Dehalvi
- Book Type:

- Description: "दिल्ली के चटख़ारे" शाहिद अहमद देहलवी की उन मज़ामीन का मज्मूआ है जिनमें गुज़रे ज़माने के दिल्ली शहर को बड़े ही दिलचस्प तरीक़े से बयान किया गया है। इन मज़ामीन में दिल्ली के बाज़ार, कटरे, मुहल्ले की खिड़कियाँ, फेरी वालों की सदाएँ, देग़ों और भट्टियों से उठने वाली महक का ऐसा बयान है कि पढ़ते हुए सारा मंज़र आँखों के सामने आ जाता है।
Vivekanand
- Author Name:
Romain Rolland
- Book Type:

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Description:
महान् भारतीय सन्त एवं चिन्तक रामकृष्ण का आध्यात्मिक ज्ञान ग्रहण करके उनके चिन्तन के बीज-कणों को सारे संसार में वितरित करने और अपना कार्य सफलतापूर्वक सम्पादित करनेवाले विवेकानन्द का जीवन निश्चय ही अत्यन्त गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायक है। विवेकानन्द ने अपनी यात्राओं एवं रामकृष्ण मिशन की स्थापना द्वारा पूर्व और पश्चिम के बीच निश्चय ही एक आध्यात्मिक पुल का निर्माण किया है। विश्व-विख्यात फ्रांसीसी उपन्यासकार रोमां रोलां कृत विवेकानन्द की जीवनी का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत कराकर साहित्य अकादेमी ने एक बड़े अभाव की पूर्ति की है। विवेकानन्द के जीवन, कार्यों एवं विचारों का सम्यक् परिचय तो इसमें है ही, रामकृष्ण के जीवन एवं सिद्धान्तों को भी संक्षिप्त रूप में दे दिया गया है, जिससे इस कृति की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।
दो वर्ष भारत-भर में और अनन्तर तीन वर्ष विश्व-भर में उनका परिभ्रमण उनकी स्वतंत्र स्वाभाविक चेतना और सेवा-भावना का सहज ही यथेष्ट पूरक सिद्ध हुआ। वह घर-समाज के बंधन से मुक्त, स्वच्छंद, ईश्वर के साथ निरंतर अकेले घूमते रहे। उनके जीवन का कोई क्षण ऐसा न था जिसमें उन्होंने ग्राम में, नगर में, धनी के, निर्धन के जीवन-स्पन्दन की वेदना, लालसा, कुत्सा और पीड़ा से साक्षात् न किया हो। वह जन के जीवन से एकाकार हो गए। जीवन के महाग्रन्थ में उन्हें वह मिला जो पुस्तकालय की समस्त पोथियों में नहीं मिला था।
पथचारी शिक्षार्थी के रूप में कैसी अद्वितीय शिक्षा उनको मिली!... अस्तबल में या भिखारी-टोले में सो रहनेवाले जगत्-बन्धु ही नहीं थे, वह समदर्शी थे...आज अछूतों के आश्रय में पड़े तिरस्कृत मँगते हैं तो कल राजकुमारों के मेहमान हैं, प्रधानमन्त्रियों और महाराजाओं से बराबरी पर बात कर रहे हैं, कभी दीनबन्धु रूप में पीड़ितों की पीड़ा को समर्पित हो रहे हैं, तो कभी श्रेष्ठियों के ऐश्वर्य को चुनौती दे रहे हैं और उनके निर्मम मानस में दुखी जन के लिए ममता जगा रहे हैं। पंडितों की विद्या से भी उनका परिचय था और औद्योगिक एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उन समस्याओं से भी, जो जनजीवन की नियामक हैं। वह निरन्तर सीख रहे थे, सिखा रहे थे और अपने को धीरे-धीरे भारत की आत्मा, उसकी एकता और उसकी नियति का प्रतीक बनाते जा रहे थे। ये तत्त्व उनमें समाहित थे और सारे संसार ने इनके दर्शन विवेकानन्द में किये।
Nelson Mandela - A Complete Biography
- Author Name:
Dr. Gaurav Gupta
- Book Type:

- Description: Nelson Mandela remains an icon politician who led the struggle to replace an apartheid regime in South Africa with a multiracial democracy. He is remembered not so much for being the country's first black President, but for being the first to have galvanize an entire country against colonial oppression. Mandela's life is a lesson to those who fear hardship. He showed nothing worthwhile can be achieved without facing and indeed, surmounting hardships in life. He himself took all the hardships in his stride and saw the struggle through until the oppressive forces were compelled to yield. His charisma, self. deprecating sense of humour and above all, lack of bitterness over the harth treatment he endured are a testament to his towering global appeal. He never tried to take revenge, not even against those who tortured him. This book is a humble effort to trace Nelson Mandela's life, from his childhood and years in jail to his rise as President. It will inspire readers to follow the ideals and values of life cherished by this icon.
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