Apani Dhun Mein
(0)
Author:
Ruskin BondPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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यह ज़िन्दगी का ऐसा सुचिंतित और भावपूर्ण आख्यान है, जिसमें प्रकृति की उत्कृष्ट छवियाँ हैं, और छोटे-बड़े लोगों की गर्मजोशी से भरी यादें टँकी हुई हैं। - दि इंडियन एक्सप्रेस बॉन्ड अपनी ज़िन्दगी और हमारे आसपास की दुनिया के प्रति ऐसा सद्भावपूर्ण नज़रिया रखते हैं कि पढ़नेवालों को महसूस होने लगता है कि आख़िरकार यह दुनिया इतनी ख़राब जगह भी नहीं है! —दि ट्रिब्यून पिछले सात दशकों से, बड़े-छोटे शहरों, गाँव और क़स्बों में आबाद हर उम्र के बेशुमार पढ़नेवालों के लिए रस्किन बॉन्ड बेहतरीन साथी रहे हैं। अपनी किताबों और कहानियों से वह हमें रिझाते आए हैं। उनकी जादुई क़िस्सागोई सम्मोहन जगाती है। कभी-कभार डराती भी है और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की ख़ूबसूरती और प्रकृति के टटके सौन्दर्य से हमारा परिचय कराती है। उनकी इस अनूठी आत्मकथा में आप उस पृष्ठभूमि को जान पाएँगे जहाँ से उन्होंने वे कहानियाँ और क़िस्से उठाए हैं। एक पुरअसर सपने से शुरुआत करके पाठकों को वह अरब सागर के किनारे बसे जामनगर में अपने ख़ुशनुमा बचपन में ले जाते हैं, जहाँ उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी और फिर 1940 के दशक की नई दिल्ली में, जहाँ हुए तज़ुर्बों के हवाले से उन्होंने अपनी पहली कहानी लिखी थी। यह उनकी ख़ुशियों का मुख़्तसर-सा दौर था, जो उनके माता-पिता के अलगाव और बेहद अज़ीज़ पिता की असामयिक मृत्यु के साथ ख़त्म हो गया था। बेहद आत्मीयता और साफ़गोई के साथ, वे शिमला में अपने बोर्डिंग स्कूल के दिनों और देहरादून में सर्दियों की उन छुट्टियों को याद करते हैं, जब उन्होंने अपने अकेलेपन से उबरने की कोशिश की, दोस्त बनाए और उन्हें खोया भी, महत्त्वपूर्ण किताबें खोजीं और अपनी ज़िन्दगी का मक़सद भी तलाश किया। लेखक बनने के अपने मज़बूत इरादे के साथ उन्होंने इंग्लैंड में मुश्किल-भरे चार साल बिताए। वहाँ की अपनी एकाकी ज़िन्दगी और दिल टूटने के वाक़ियों के बारे में उन्होंने ख़ासा मर्मस्पर्शी आख्यान रचा है। मगर इस सबके बावजूद उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा और एक उपन्यास, ‘द रूम ऑन द रूफ़’ लिखकर लेखक बनने की दिशा में पहला निर्णायक क़दम उठाया। किशोरवय का यह क्लासिक उपन्यास भारत के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है। आत्मकथा के आख़िरी खंड में वह अपने भटकाव से छुटकारे और मसूरी की पहाड़ियों में आबाद होने के बाद ज़िन्दगी में आए ठहराव के बारे में लिखते हैं। मसूरी, जहाँ चारों तरफ़ हरियाली है, धूप और धुंध है, परिन्दों का कलरव और मायावी तेन्दुए हैं, नए दोस्तों और विलक्षण लोगों की सोहबत है, और एक ऐसा परिवार भी है जो धीरे-धीरे उनका अपना परिवार बन गया। दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारत का माहौल और स्वतंत्रता-प्राप्ति के समय देश के दिनोंदिन बदलते हालात के कुछ दुर्लभ विवरण भी आप इस आत्मकथा में पाते हैं।
Read moreAbout the Book
यह ज़िन्दगी का ऐसा सुचिंतित और भावपूर्ण आख्यान है, जिसमें प्रकृति की उत्कृष्ट छवियाँ हैं, और छोटे-बड़े लोगों की गर्मजोशी से भरी यादें टँकी हुई हैं।
- दि इंडियन एक्सप्रेस
बॉन्ड अपनी ज़िन्दगी और हमारे आसपास की दुनिया के प्रति ऐसा सद्भावपूर्ण नज़रिया रखते हैं कि पढ़नेवालों को महसूस होने लगता है कि आख़िरकार यह दुनिया इतनी ख़राब जगह भी नहीं है!
—दि ट्रिब्यून
पिछले सात दशकों से, बड़े-छोटे शहरों, गाँव और क़स्बों में आबाद हर उम्र के बेशुमार पढ़नेवालों के लिए रस्किन बॉन्ड बेहतरीन साथी रहे हैं। अपनी किताबों और कहानियों से वह हमें रिझाते आए हैं। उनकी जादुई क़िस्सागोई सम्मोहन जगाती है। कभी-कभार डराती भी है और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी की ख़ूबसूरती और प्रकृति के टटके सौन्दर्य से हमारा परिचय कराती है। उनकी इस अनूठी आत्मकथा में आप उस पृष्ठभूमि को जान पाएँगे जहाँ से उन्होंने वे कहानियाँ और क़िस्से उठाए हैं।
एक पुरअसर सपने से शुरुआत करके पाठकों को वह अरब सागर के किनारे बसे जामनगर में अपने ख़ुशनुमा बचपन में ले जाते हैं, जहाँ उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी और फिर 1940 के दशक की नई दिल्ली में, जहाँ हुए तज़ुर्बों के हवाले से उन्होंने अपनी पहली कहानी लिखी थी। यह उनकी ख़ुशियों का मुख़्तसर-सा दौर था, जो उनके माता-पिता के अलगाव और बेहद अज़ीज़ पिता की असामयिक मृत्यु के साथ ख़त्म हो गया था।
बेहद आत्मीयता और साफ़गोई के साथ, वे शिमला में अपने बोर्डिंग स्कूल के दिनों और देहरादून में सर्दियों की उन छुट्टियों को याद करते हैं, जब उन्होंने अपने अकेलेपन से उबरने की कोशिश की, दोस्त बनाए और उन्हें खोया भी, महत्त्वपूर्ण किताबें खोजीं और अपनी ज़िन्दगी का मक़सद भी तलाश किया। लेखक बनने के अपने मज़बूत इरादे के साथ उन्होंने इंग्लैंड में मुश्किल-भरे चार साल बिताए। वहाँ की अपनी एकाकी ज़िन्दगी और दिल टूटने के वाक़ियों के बारे में उन्होंने ख़ासा मर्मस्पर्शी आख्यान रचा है। मगर इस सबके बावजूद उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा और एक उपन्यास, ‘द रूम ऑन द रूफ़’ लिखकर लेखक बनने की दिशा में पहला निर्णायक क़दम उठाया। किशोरवय का यह क्लासिक उपन्यास भारत के प्रति उनके लगाव को दर्शाता है।
आत्मकथा के आख़िरी खंड में वह अपने भटकाव से छुटकारे और मसूरी की पहाड़ियों में आबाद होने के बाद ज़िन्दगी में आए ठहराव के बारे में लिखते हैं। मसूरी, जहाँ चारों तरफ़ हरियाली है, धूप और धुंध है, परिन्दों का कलरव और मायावी तेन्दुए हैं, नए दोस्तों और विलक्षण लोगों की सोहबत है, और एक ऐसा परिवार भी है जो धीरे-धीरे उनका अपना परिवार बन गया। दूसरे विश्वयुद्ध के समय भारत का माहौल और स्वतंत्रता-प्राप्ति के समय देश के दिनोंदिन बदलते हालात के कुछ दुर्लभ विवरण भी आप इस आत्मकथा में पाते हैं।
Book Details
-
ISBN9789360861674
-
Pages328
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: ‘बिनपटाची चौकट' दोन खांबांवर उभी आहे.एक खांब आहे, ऋजुतेचा आणि दुसरा खांब आहे, क्रूरतेचा.या दोन्ही अनुभवांतूनइंदूचे आयुष्य आकाराला आले आहेआणि म्हणून ते विदारक आहे.सरळसोट जगणे असते तर‘बिनपटाची चौकट' उभीच राहिली नसती.पट नसलेली चौकट समाजव्यवस्थेची आहे,मनुष्यसमूहाची आहे आणिआतल्या आत खदखदणाऱ्याआत्मप्रत्ययी अनुभवांची आहे.इंदूमती जोंधळे यांची ‘बिनपटाची चौकट'यातनामय परिक्रमेचानितळ आविष्कार आहे.गेल्या दशकातील मराठी निर्मितीनेज्याचा अक्षरवाङ्मयात गौरवाने समावेश करावाअसे हे आत्मकथन आहे.‘स्मृतीचित्रा'पेक्षाही हे अधिक दाहक आहे.- डॉ. गंगाधर पानतावणे(फेबु्रवारी, 1999) Binpatachi Chaukat | Indumati Jondhale बिनपटाची चौकट | इंदुमती जेोंधळे
Lokmanya Mayanand
- Author Name:
Deoshankar Navin
- Book Type:

- Description: मैथिलीक प्रसिद्ध आ चर्चित त्रिपुंड मे सँ एक मायानंद मिश्र अपन प्रचुर रचनात्मकताक बलें मैथिल पाठकक जीह पर सतत उच्चरित होइबला एक अनिवार्य नाम थिक। कथा हो वा उपन्यास, कविता हो वा गीत, आलोचना हो वा दर्शन, इतिहास हो वा चिन्तन, रेडियो हो वा मंच, सभठाम मायानंद अपन अखंड प्रतिभाक कारणें उच्चासन पर विराजमान छथि। एक दिस साहित्य आ दोसर दिस मैथिली आन्दोलन आ मंच लेल हुनक जीवन समर्पित छलनि। अपन जीवन काल मे ओ जतेक साहित्य सृजन कयलनि, ताहि सँ थोड़बो कम ओ मैथिली आन्दोलन आ मंच लेल नहि कयलनि। मैथिली आन्दोलन आ मंचक लाथें जन जागरण आ चेतना स्फुरण क' महत्तर कार्यक ओ सम्पादन कयलनि। ओ मैथिली मंचक सम्राट छलाह। हुनक उपस्थिति मात्र सँ मैथिली मंच गौरवान्वित होइत छल। हुनक जीवन आ बहुआयामी साहित्य पर लिखल 'लोकमान्य मायानंद' डा. देवशंकर नवीनक अमूल्य कृति थिक। एहि पोथी मे विस्तृत रूपें मायानंद मिश्रक जीवन आ साहित्य केँ अत्यंत गंभीरता, संलग्नता, सम्बद्धताक संग डा. नवीन विश्लेषित कयलनि अछि जे हुनक गहनता, दृष्टि सम्पन्नता आ गंभीरता केँ अखंड रूपें प्रतिष्ठापित करैत अछि। —केदार कानन
Maharshi Vitthal Ramji Shinde : Jeevan Aur Karya
- Author Name:
G.M. Pawar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nitish Kumar Aur Ubharta Bihar
- Author Name:
Arun Sinha
- Book Type:

- Description: ‘नीतीश कुमार और उभरता बिहार’ में वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिन्हा ने विपरीत परिस्थितियों में बिहार का शासन सँभालने वाले नीतीश बाबू की उस कर्मठ एवं जुझारू कार्यशैली का बेबाक वर्णन किया है, जिसने बिहार को एक नई दिशा दी, एक नई पहचान दी। उन्होंने बिहार के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में नीतीश कुमार के उदय की कहानी बताई है और 1960 के दशक के आखिर से शुरू हुए समतावादी आंदोलनों तथा इनके फलस्वरूप 1990 में हुए सत्ता-परिवर्तन का विस्तार से वर्णन किया है। नीतीश कुमार शुरू में लालू प्रसाद यादव के साथ भी रहे, लेकिन बाद में उन्होंने अस्मिता की राजनीति को खारिज करते हुए यह महसूस किया कि बिहार को आगे बढ़ना है तो जाति की राजनीति से ऊपर उठना होगा। इस ग्रंथ में भारतीय राजनीति का स्पष्ट और गहन अध्ययन है। इसमें राजनीतिक नाटकबाजी को सामने लाया गया है तथा राज्य के उथल-पुथल भरे सफर की कड़वी सच्चाई और गहन अध्ययन को प्रस्तुत किया गया है। अरुण सिन्हा ने बिहार की राजनीति की जटिलता के बीच नीतीश कुमार के उदय और कानून-व्यवस्था, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार करने को विस्तार से समझाया है। सामंतवाद से जातीय अस्मिता और अंततः विकास के पथ पर आकर बिहार ने भारत की स्वतंत्रता के बाद की यात्रा में स्वयं को आदर्श साबित किया है। नीतीश बाबू के नेतृत्व में बिहार की राजनीति एवं वहाँ हो रहे ताजा विकास को जानने-समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।
Cyber Encounters
- Author Name:
Ashok Kumar, IPS::O.P. Manocha
- Book Type:

- Description: जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई, वैसे-वैसे अपराध ने भी तरक्की कर ली। डिजिटल तकनीकें अपने साथ ऑनलाइन किए जानेवाले अनेक अपराधों को लेकर आई हैं, जिनमें भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपए ठगे जाते हैं, नकली वेबसाइटों पर झूठे विज्ञापनों का झाँसा दिया जाता है, पेमेंट गेटवे के माध्यम से संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है, और उन ऐप्स को डाउनलोड कराया जाता है, जिससे दूर बैठे अपराधी उनके उपकरण तक अपनी पहुँच बना लेते हैं। क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से लेकर फिशिंग तक की यह सूची अंतहीन है। ‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक साइबर अपराध की गहराइयों में जाकर बारह रोचक कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत करते हैं। उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी अशोक कुमार राज्य में साइबर अपराध के विरुद्ध योजनाबद्ध लड़ाई लडऩे का अनुभव रखते हैं, और ओ.पी. मनोचा डी.आर.डी.ओ. के पूर्व वैज्ञानिक हैं। दोनों हर कहानी में एक खास किस्म के साइबर अपराध के बारे में बताते हैं, जो एक सच्ची घटना पर आधारित होती है। अपराध, उसकी जाँच और अपराधियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी से भरपूर, आँखें खोल देनेवाली यह पुस्तक सभी को अवश्य पढऩी चाहिए।
Atma Parichaya
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

- Description: औराही-हिंगना नामक गाँव में जिस आदमी को ‘धरती की माँग पर विशेष रूप से’ भेजा गया था, बाद में वही फणीश्वरनाथ रेणु के नाम से जाना गया, जिसकी चर्चा उसने स्वयं अपनी कलम से यत्र-तत्र की है। भारत यायावर द्वारा संकलित-सम्पादित यह पुस्तक रेणु की ऐसी ही रचनाओं को एक साथ प्रस्तुत करती हैं जिनमें उन्होंने अपने जीवन और अपने लेखन को लेकर लिखा। पूरी पुस्तक चार खंडों में संयोजित है—आत्म-रचना, आत्म-संस्मरण, आत्म-वक्तव्य और व्यक्तिगत निबन्ध। इन रचनाओं से गुजरते हुए हम लेखक के जीवन और जीवनचर्या, परिवेश और रचनागत विस्तार तथा समाज के प्रति उसके व्यापक एवं गहरे सरोकार से परिचित होते हैं। एक जागरूक लेखक के रूप में कभी वे लेखन और राजनीति के नाजुक रिश्ते पर विचार करते हुए दिखते हैं, कभी अपनी रचनाओं की समकालिक पृष्ठभूमि को लेकर हुई आलोचनाओं को झेलते हैं, कभी ‘आंचलिक लेखक’ बना दिए जाने की साहित्यिक राजनीति का खुलासा करते हैं, तो कभी ‘प्रेमचन्द के बाद' जैसे फतवों से हुए नुकसान से बेचैन दिखाई देते हैं। लेकिन यह सब लिखते हुए भी वे नितान्त व्यक्तिगत नहीं हो जाते, उनकी रचनात्मकता के खास-खास गुण उनका साथ नहीं छोड़ते और उनकी भाषा एवं शिल्प-भंगिमा सब कहीं मौजूद रहती है। यह पुस्तक हमें रेणु को उनके बड़े समय-संदर्भ में समझने का अवसर देती है।
Bharat Ki Pratham Mahilayen
- Author Name:
Asharani Vohra
- Book Type:

- Description: भारत की प्रथम महिलाएँ—आशा रानी व्होरादूसरों की बनाई राह पर तो सभी चलते हैं। परंपराओं की गिट्टियाँ तोड़, रूढ़ियों के काँटे बीनते हुए नई पगडंडी तैयार करना सचमुच बड़े साहस और जोखिम का काम होता है। भारतीय नारी की मुक्ति और उसे वर्तमान स्तर पर लाने के लिए न जाने कितनी स्त्रियों ने यह जोखिम उठाया है। एक-एक पगडंडी तैयार करने के लिए वर्षों-वर्षों के अंतराल से एक-एक कदम उठा, ठिठका, लड़खड़ाया, फिर सँभलकर दृढ़ता से गति पकड़ता गया। यह जानने की जिज्ञासा स्वाभाविक है कि कौन थीं वे अग्रणी महिलाएँ? कौन सी थीं वे राहें? किसने, किस तरह, किस नई राह को चुना या उसका निर्माण किया? यह पुस्तक इस जिज्ञासा का समाधान ही नहीं, उन महती विभूतियों के प्रति एक विनम्र श्रद्धांजलि भी है, जिन्होंने रूढ़ि तोड़, अपने अद्भुत साहस का परिचय दे किसी भी क्षेत्र में ‘पहल’ की है। जब कभी किसी महिला ने किसी क्षेत्र में पहल की—वह प्रथम विमान-चालिका बनी, प्रथम आई.पी.एस., प्रथम जज या प्रथम विधायक, तब समाचार-पत्रों ने एक समाचार प्रकाशित किया, कभी चित्र भी—और फिर लोग भूल गए। प्रस्तुत प्रेरणाप्रद पुस्तक में भारत की उन निडर, अडिग और अग्रणी महिलाओं की संघर्ष-यात्रा को अत्यंत रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। निश्चय ही हर आयु वर्ग के पाठकों, विशेषकर महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं पठनीय पुस्तक।
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