🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Mohan Gata Jayega

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘लेकिन इन पहाड़ों में मानव जीवन विकट है।...मैं इस विकट पहाड़ में रच-बस गया। इसे छोड़कर कहीं भाग जाने की बात नहीं सोची। अपनी रचनाओं में मैं इस पहाड़ की सीमाओं के अन्दर घिरा रहा। टिहरी से बाहर नहीं निकला। निकलूँगा भी नहीं।’ (इसी पुस्तक में लेखक के वक्तव्य का अंश)। ‘मोहन गाता जाएगा’ में कथा-शिल्पी विद्यासागर नौटियाल ने पहाड़ के जीवन, टिहरी की ज़िन्दगी के दर्द, उससे लगाव, अपने छात्र-जीवन, जन-आन्दोलन, राजनीतिक सक्रियता, मानवीय सम्बन्धों और मित्रता की ऊष्मा को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा, व्यापक अनुभव, सजग दृष्टि के साथ टुकड़े-दर-टुकड़े, हरफ़-ब-हरफ़ अद्भुत सांगीतिक गद्य में कहने का सहज प्रयास किया है। उन्नीस सौ छप्पन से दो हज़ार तक चार दशक से ऊपर के समय में टिहरी, काशी, लखनऊ, देहरादून में लिखी और उपलब्ध ये रचनाएँ महज़ ‘यत्र-तत्र’ टिप्पणियाँ, वक्तव्य, वृत्तान्त या आत्मपरक रचना-अंश नहीं हैं बल्कि अपने समय के सामाजिक जीवन का अलग-अलग प्रसंगों में निजी स्पर्श भी हैं। ‘मो०हन गाता जाएगा’ दरअसल विद्यासागर नौटियाल का ‘आदमीनामा’ है, जिसमें वे रचनाकार की संवेदना और उसकी चेतना, उसकी ज़िन्दगी में आए लोगों, पढ़ी-लिखी गई रचनाओं, राजनीतिक गतिविधियों, यात्राओं, डायरी और सम्बोधनों आदि के माध्यम से अपने विलक्षण मित-कथनों में अपनी स्मृतियों, विचारों और आकांक्षाओं को बेहद जीवन्त, आत्मीय, रोचक और प्रामाणिक ढंग से अतिरिक्त प्रासंगिकता देते हैं। —मुहम्मद हम्माद फ़ारूक़ी

Read more

₹ 300

240 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
Mohan Gata Jayega This book ₹240
Saroj Ka Sannipat Vidya Sagar Nautiyal ₹90
Swarg Dadda! Pani, Pani Vidya Sagar Nautiyal ₹100
3 books selected ₹490 ₹430
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘लेकिन इन पहाड़ों में मानव जीवन विकट है।...मैं इस विकट पहाड़ में रच-बस गया। इसे छोड़कर कहीं भाग जाने की बात नहीं सोची। अपनी रचनाओं में मैं इस पहाड़ की सीमाओं के अन्दर घिरा रहा। टिहरी से बाहर नहीं निकला। निकलूँगा भी नहीं।’ (इसी पुस्तक में लेखक के वक्तव्य का अंश)।

‘मोहन गाता जाएगा’ में कथा-शिल्पी विद्यासागर नौटियाल ने पहाड़ के जीवन, टिहरी की ज़िन्दगी के दर्द, उससे लगाव, अपने छात्र-जीवन, जन-आन्दोलन, राजनीतिक सक्रियता, मानवीय सम्बन्धों और मित्रता की ऊष्मा को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा, व्यापक अनुभव, सजग दृष्टि के साथ टुकड़े-दर-टुकड़े, हरफ़-ब-हरफ़ अद्भुत सांगीतिक गद्य में कहने का सहज प्रयास किया है। उन्नीस सौ छप्पन से दो हज़ार तक चार दशक से ऊपर के समय में टिहरी, काशी, लखनऊ, देहरादून में लिखी और उपलब्ध ये रचनाएँ महज़ ‘यत्र-तत्र’ टिप्पणियाँ, वक्तव्य, वृत्तान्त या आत्मपरक रचना-अंश नहीं हैं बल्कि अपने समय के सामाजिक जीवन का अलग-अलग प्रसंगों में निजी स्पर्श भी हैं।

‘मो०हन गाता जाएगा’ दरअसल विद्यासागर नौटियाल का ‘आदमीनामा’ है, जिसमें वे रचनाकार की संवेदना और उसकी चेतना, उसकी ज़िन्दगी में आए लोगों, पढ़ी-लिखी गई रचनाओं, राजनीतिक गतिविधियों, यात्राओं, डायरी और सम्बोधनों आदि के माध्यम से अपने विलक्षण मित-कथनों में अपनी स्मृतियों, विचारों और आकांक्षाओं को बेहद जीवन्त, आत्मीय, रोचक और प्रामाणिक ढंग से अतिरिक्त प्रासंगिकता देते हैं।

—मुहम्मद हम्माद फ़ारूक़ी

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2004
Weight
522 grams
ISBN-13
9788171198771
Pages
276
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp