Dilli Shahar Dar Shahar
(0)
Author:
Nirmala JainPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
एक वक़्त के बाद कोई भी शहर वहाँ रहने वालों के लिए सिर्फ़ शहर नहीं, जीने का तरीक़ा हो जाता है। जिस तरह हम धीरे-धीरे शहर को बनाते हैं, बाद में उसी तरह शहर हमें बनाने लगता है और हम ‘दिल्ली वाले’, ‘मुम्बई वाले’ या ‘आगरा वाले’ कहे जाने लगते हैं।</p> <p>सुपरिचित आलोचक निर्मला जैन की यह कृति एक दिल्ली वाले की तरफ़ से अपने शहर को दिया गया उपहार है। बराबर सजग और चुस्त उनकी लेखनी से उतरी हुई यह किताब बीसवीं शताब्दी की दिल्ली के स्याह-सफ़ेद और ऊँचाइयों-नीचाइयों के साथ न सिर्फ़ उसके विकास-क्रम को रेखांकित करती है, बल्कि उन दिशाओं की तरफ़ भी इशारा करती है जिधर यह शहर जा रहा है, और जिन्हें सिर्फ़ वही आदमी महसूस कर सकता है जिसे अपने शहर से प्यार हो।</p> <p>सांस्कृतिक ‘मेल्टिंग पॉट’ बनी आज की दिल्ली के हम बाशिन्दे, जिन्हें अपने मतलब-भर से ज़्यादा दिल्ली को न देखने की फ़ुरसत है, न समझने की जिज्ञासा, नहीं जानते कि आज से मात्र 60-70 साल पहले यह शहर कैसा था, कैसी ज़िन्दगी पुरानी और असली दिल्ली की गलियों में धड़कती थी। हममें से अनेक यह भी नहीं जानते कि आज जिस नई दिल्ली की सत्ता देश को नियंत्रित करती है उसकी कुशादा, शफ़्फ़ाफ़ सड़कें कैसे वजूद में आईं, और दोनों दिल्लियों के बीच हमने क्या खोया और क्या पाया!</p> <p>निर्मला जी की यह किताब 40 के दशक से सदी के लगभग अन्त तक की दिल्ली का देखा और जिया हुआ लेखा-जोखा है। इसमें साहित्य और शिक्षा के मोर्चों पर आज़ादी के बाद खड़ा होता हुआ देश भी है, और वे तमाम राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रियाएँ भी जिन्हें हमारे भवितव्य का श्रेय दिया जाना है।
Read moreAbout the Book
एक वक़्त के बाद कोई भी शहर वहाँ रहने वालों के लिए सिर्फ़ शहर नहीं, जीने का तरीक़ा हो जाता है। जिस तरह हम धीरे-धीरे शहर को बनाते हैं, बाद में उसी तरह शहर हमें बनाने लगता है और हम ‘दिल्ली वाले’, ‘मुम्बई वाले’ या ‘आगरा वाले’ कहे जाने लगते हैं।</p>
<p>सुपरिचित आलोचक निर्मला जैन की यह कृति एक दिल्ली वाले की तरफ़ से अपने शहर को दिया गया उपहार है। बराबर सजग और चुस्त उनकी लेखनी से उतरी हुई यह किताब बीसवीं शताब्दी की दिल्ली के स्याह-सफ़ेद और ऊँचाइयों-नीचाइयों के साथ न सिर्फ़ उसके विकास-क्रम को रेखांकित करती है, बल्कि उन दिशाओं की तरफ़ भी इशारा करती है जिधर यह शहर जा रहा है, और जिन्हें सिर्फ़ वही आदमी महसूस कर सकता है जिसे अपने शहर से प्यार हो।</p>
<p>सांस्कृतिक ‘मेल्टिंग पॉट’ बनी आज की दिल्ली के हम बाशिन्दे, जिन्हें अपने मतलब-भर से ज़्यादा दिल्ली को न देखने की फ़ुरसत है, न समझने की जिज्ञासा, नहीं जानते कि आज से मात्र 60-70 साल पहले यह शहर कैसा था, कैसी ज़िन्दगी पुरानी और असली दिल्ली की गलियों में धड़कती थी। हममें से अनेक यह भी नहीं जानते कि आज जिस नई दिल्ली की सत्ता देश को नियंत्रित करती है उसकी कुशादा, शफ़्फ़ाफ़ सड़कें कैसे वजूद में आईं, और दोनों दिल्लियों के बीच हमने क्या खोया और क्या पाया!</p>
<p>निर्मला जी की यह किताब 40 के दशक से सदी के लगभग अन्त तक की दिल्ली का देखा और जिया हुआ लेखा-जोखा है। इसमें साहित्य और शिक्षा के मोर्चों पर आज़ादी के बाद खड़ा होता हुआ देश भी है, और वे तमाम राजनीतिक और सामाजिक प्रक्रियाएँ भी जिन्हें हमारे भवितव्य का श्रेय दिया जाना है।
Book Details
-
ISBN9788126727483
-
Pages188
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Hum Hushmat : Vol. 2
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
लगभग बीस बरसों बाद ‘हम हशमत– 2’ प्रस्तुत कर रही हैं कृष्णा सोबती। समकालीनों के संस्मरणों के बहाने, इस शती पर फैला हिन्दी साहित्य समाज, अपने वैचारिक और रचनात्मक विमर्श के साथ उजागर है।
इस शताब्दी की प्रमुख हिन्दी साहित्यिक हस्तियाँ नामवर सिंह, अशोक वाजपेयी, अज्ञेय, अश्क, श्रीकान्त वर्मा, नेमिचन्द्र जैन, मंटो, अरविन्द कुमार, बलवन्त सिंह, राजेन्द्र सिंह बेदी, उमाशंकर जोशी, सत्येन कुमार, मंज़ूर एहतेशाम, सौमित्र मोहन, स्वदेश दीपक, प्रयाग शुक्ल, कमलेश्वर, नासिरा शर्मा और कन्हैयालाल नंदन मात्र फ़ोटोग्राफ़ी मुखाकृति में ही नहीं, बाक़ायदा अपनी-अपनी अदबी शख़्सियत में मौजूद हैं।
‘हम हशमत’ के पहले भाग में जो लेखक-गुच्छा प्रस्तुत किया गया था उसमें थे निर्मल वर्मा, भीष्म साहनी, कृष्ण बलदेव वैद, अमजद भट्टी, महेन्द्र भल्ला, गोविन्द मिश्र, मनोहर श्याम जोशी, नागार्जुन, शीला संधू, नितिन सेठी, रमेश पटेरिया, सुधीर पंत, मियाँ नसीरुद्दीन और सरदार जग्गा सिंह।
हिन्दी के सुधी पाठकों और आलोचकों ने ‘हम हशमत’ को संस्मरण विधा में मील का पत्थर माना था। ‘हम हशमत’ की विशेषता है तटस्थता। कृष्णा सोबती के भीतर पुख़्तगी से जमे ‘हशमत’ की सोच और उसके तेवर विलक्षण रूप से एक साथ दिलचस्प और गम्भीर हैं। नज़रिया ऐसा कि एक समय को साथ-साथ जीने के रिश्ते को निकटता से देखे और परिचय की दूरी को पाठ की बुनत और बनावट जज़्ब कर ले। ‘हशमत’ की औपचारिक निगाह में दोस्तों के लिए आदर है, जिज्ञासा है, जासूसी नहीं। यही निष्पक्षता नए-पुराने परिचय को घनत्व और लचक देती है और पाठ में साहित्यिक निकटता की दूरी को भी बरकरार रखती है।
‘हम हशमत’ हमारे समकालीन जीवन-फलक पर एक लम्बे आख्यान का प्रतिबिम्ब है। इसमें हर चित्र घटना है और हर चेहरा कथानायक। ‘हशमत’ की जीवन्तता और भाषायी चित्रात्मकता उन्हें कालजयी मुखड़े के स्थापत्य में स्थित कर देती है।
Chaitanya Mahaprabhu
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव वैष्णव धर्म के विकास में एक चमत्कारी घटना है। एक गहरे आवेश और भावनात्मकता के साथ सारे जनसामान्य तक वैष्णव धर्म को पहुँचाने का काम पहले बंगाल में और बाद में सम्पूर्ण देश में, चैतन्य महाप्रभु ने किया। मधुर भाव की नाम–संकीर्तन पद्धति चैतन्य की देन है। इसी के साथ वैष्णव धर्म ने एक नए युग में प्रवेश किया। प्रस्तुत पुस्तक में पहली बार चैतन्य के व्यक्तित्व के इस योगदान को सम्पूर्णता के साथ उजागर किया गया है।
लेकिन इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना ही नहीं है। विद्वान लेखक ने चैतन्य के व्यक्तित्व को तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों में भी रखकर देखा है। अपने समय के इतिहास में चैतन्य का व्यक्तित्व एक चुनौती की तरह उभरा और पराजित हिन्दू जाति को एक नई आस्था और नए आलोक से संयुक्त करने का काम भी चैतन्य ने किया।
उपन्यासकार नागर जी की लेखनी से प्रस्तुत चैतन्य की यह जीवनी पढ़ने पर एक उपन्यास का मज़ा तो देती है, साथ ही वैष्णव धर्म के उदार पथ के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण और अद्वितीय योगदान भी सामने लाती है।
The Life and Times of Subhash Chandra Bose
- Author Name:
Praveen Bhalla
- Book Type:

- Description: Give me blood, and I’ll give you freedom’, declared Subhash Chandra Bose. This was exactly what he believed in. The moderate ways of the Congress were not for him. Therefore, he formed the Azad Hind Fauj to overthrow the British. Burning with patriotic zeal, he tried his best to oust the British from his motherland. He was respectfully addressed as ‘Netaji’ and dedicated his entire life to his country's freedom. The annals of history have not done justice to this great patriot. It is time he is known to the people of India and given his due recognition. This book attempts to bring his life into the spotlight and illuminate it so that the reader is conversant with it and appreciates his efforts.
The World As I See It
- Author Name:
Albert Einstein
- Book Type:

- Description: The World as I See It is a book by Albert Einstein, translated from the German by A. Harris. The Bodley Head (London). The original German book is “Mein Weltbild” by Albert Einstein. Composed of assorted articles, addresses, letters, interviews, and pronouncements, it includes Einstein’s opinions on the meaning of life, ethics, science, society, religion, and politics. Albert Einstein believed in humanity, in a peaceful world of mutual helpfulness, and in the high mission of science. This book is intended as a plea for this belief at a time that compels every one of us to overhaul his mental attitude and his ideas.
The Incomparable Guru Golwalkar
- Author Name:
Ranga Hari
- Book Type:

- Description: Time and history have proved that among the modern India’s organisers of men and movements, Rashtriya Swayamsevak Sangh’s Second Sarsanghchalak, Shri Guruji Golwalkar, occupies a place among the top few. For more than three decades till his death, he, with no respite and rest, covered the entire length and breadth of this vast country on wheels, wings or legs with no unfortunate occasion to cancel any scheduled programme. Never in his life did he arrive late to a programme. With a diligent team as unfailing as himself, he built up the largest organisation of our times, Rashtriya Swayamsevak Sangh, with a very wide network. With an absolutely self-reliant structure and a unique working system evolved from native genius, this organisation today is nothing short of a phenomenon, comparable only to itself. Any inquisitive mind, candid and unprejudiced, would like very much to delve deep into the lives of men who built up such a movement. In the case of Shri Guruji, the attention is bound to be more compelling because here was a person maligned and cursed throughout by the powers that be, but who, despite them, unflinchingly and relentlessly paced towards his cherished goal. Golwalkar was truly ‘Goal Walker’, come what may. This is a comprehensive, well-referenced biography of spiritual and social stalwart Shri Guruji that will inspire and motivate millions.
Selected Readings of Sri Ramanuja
- Author Name:
S Ranganath
- Rating:
- Book Type:

- Description: An anthology on Sri Ramanuja in English edited by S.Ranganath.
Abra Kya Chiz Hai? Hawa Kya Hai?
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
कृष्ण बलदेव वैद की डायरियों की जो पुस्तकें इससे पहले प्रकाशित हुई हैं, उन्हें अपनी बेबाकी, लेखक के निर्मम आत्मालोचन, व्यक्तियों और घटनाओं पर तात्कालिक प्रतिक्रियाओं, अनेक देशी-विदेशी लेखकों और कृतियों के आस्वादन और प्रासंगिक आकलन के लिए याद किया जाता है। उनका अनौपचारिक गद्य, फिर भी, एक बड़े लेखक का गद्य है और ये डायरियाँ अपने समय-समाज-साहित्य आदि को देखने, गुनने का एक लेखकीय उपक्रम। उसके वितान में मित्र, लेखक, कलाकार आदि सब आते हैं और उसमें आपबीती रोचक ढंग से परबीती बनती जान पड़ती है।
—अशोक वाजपेयी
Ranjish Hi Sahi…
- Author Name:
Kumar Pankaj
- Book Type:

-
Description:
संस्मरण ने विधा के रूप में हिन्दी में जो छवि अर्जित की है, वह सामान्यतः ऐसे गद्य का संकेत देती है जिसे लिखना कुछ-कुछ स्मृतियों के धवल-सजल संसार को शब्दबद्ध करना होता है। पढ़नेवाला भी उसे इसी मंशा से पढ़ने जाता है कि हल्के-फुल्के श्रद्धा-विगलित विवरणों के साथ कुछ जानकारी भी मिल जाए। लेकिन इधर इस विधा में एक सशक्त गद्य की रचना का प्रयास दिखाई देने लगा है जो काशीनाथ सिंह के संस्मरणों में प्रबल रूप में सामने आया था। जहाँ संस्मरण के पात्रों की प्रस्तुति कहानी-उपन्यास के पात्रों की तरह बहुपार्श्विक होती है।
कुमार पंकज के ये संस्मरण भी इस दृष्टि से श्लाघनीय हैं। विश्वविद्यालय में अध्यापन से जुड़े कुमार पंकज ने इन संस्मरणों में उन व्यक्तियों के चित्र तो आँके ही हैं जिन्हें वे याद कर रहे हैं, विश्वविद्यालयों और विशेष रूप से हिन्दी विभागों के गुह्य-जगत पर भी एकदम सीधी और तीखी रोशनी यहाँ पड़ती हैं। इन संस्मरणों को पढ़ना हिन्दी साहित्य के उस पार्श्व को जानना है, जो हो सकता है कि एकबारगी किसी नए साहित्य-उत्साही का मोहभंग कर दे, लेकिन सम्भवतः आत्मालोचना का यही तेवर शायद भविष्य में भाषा के ज्यादा काम आए। यहाँ सिर्फ़ चुटकियाँ नहीं हैं; स्पष्ट आलोचना है, जो सिर्फ़ मनोरंजन की छवियों को थोड़ा और वस्तुनिष्ठ होकर देखने को कहती है।
Wo Tere Pyar Ka Gam
- Author Name:
Ishmadhu Talwar
- Book Type:

-
Description:
दान सिंह का निधन मैलोडी के लिए बड़ा नुक़सान है। मैं उन्हें मूल्यों और गरिमा में गहरा विश्वास रखनेवाले इनसान के रूप में याद करता हूँ।
—गुलज़ार; मशहूर गीतकार
दान सिंह जी की धुनों से सजा गीत—‘वो तेरे प्यार का गम’—मेरे पिताजी (मुकेश) के गाये सर्वश्रेष्ठ गीतों में से एक था।
—नितिन मुकेश; प्रसिद्ध गायक
वरिष्ठ संगीतकार दान सिंह जी ने ‘माइ लव' के रूप में फ़िल्मी संगीत को ऐसा तोहफ़ा दिया है जिसकी चमक कोहिनूर हीरे जैसी है। जब भी अच्छे और पायेदार फ़िल्मी संगीत की बात होगी तो ‘माइ लव’ के संगीत को शायद नहीं भूला जाएगा। दान सिंह जी उन ख़ुशनसीबों में से थे जो बहुत कम समय फ़िल्म जगत में रहकर और बहुत कम काम करके अमर हो गए।
—इरशाद कामिल; मशहूर फ़िल्म गीतकार
जयपुर के पत्रकार ईशमधु तलवार ने किसी ज़माने में ख्याति पाए संगीतकार दान सिंह, जिनके मृत होने की अफ़वाह थी, को जीवित खोज निकाला और तनहा गुमशुदा-सी ज़िन्दगी के अँधेरों से वे बाहर आए।
—जयप्रकाश चौकसे; प्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक
दान सिंह जी के संगीत की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि वो अपने समय के सभी दिग्गजों के बीच अपनी अलग धारा चले, पक्की और मधुर धुनों के साथ-साथ दान सिंह ने कविता की ऊँचाई को भी क़ायम रखा।
—यूनुस ख़ान; मशहूर रेडियो एनाउंसर, विविध भारती, मुम्बई
Smriti Mein Jeevan
- Author Name:
Kedarnath Singh
- Book Type:

- Description: v data-content-type="html" data-appearance="default" data-element="main">स्मृतियाँ शक्ति देती हैं और स्मृतियों के सहारे प्रतिरोध की रचना भी हुई है। आकस्मिक नहीं कि नयी शताब्दी में संस्मरण लेखन में अभूतपूर्व सक्रियता देखी गई है। गद्य की ललित विधाओं में संस्मरण का दुर्निवार आकर्षण पाठकों के साथ लेखकों में भी रहा है। फिर यह गद्य कवि का हो तो इसका आकर्षण और अधिक हो जाता है। विख्यात कवि केदारनाथ सिंह के संस्मरणों की इस कृति की रूपरेखा स्वयं कवि ने तैयार कर दी थी जो अब पाठकों के हाथ में है। यहाँ कवि का अपना जीया-देखा समय-समाज है तो अनेक विभूतियों के अंतरग और हार्दिक चित्र भी। कवि की दृष्टि उन लोगों पर भी गई है जो भले ही बड़े नाम न थे किन्तु कवि के संपर्क में आए और किसी विशिष्ट गुण अथवा गतिविधि ने कवि के मन में स्थाई आवास बना लिया। पिछली पीढ़ी के अनेक लेखकों यथा भिखारी ठाकुर, अज्ञेय, हजारीप्रसाद द्विवेदी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, त्रिलोचन, भीष्म साहनी, रघुवीर सहाय और नामवर सिंह के संस्मरण वरेण्य खंड में दिए गए हैं। कवि के सहचर रहे श्रीकांत वर्मा, सोमदत्त, देवेंद्र कुमार बंगाली, विजय मोहन सिंह और वरयाम सिंह पर लिखे स्मृति आलेखों को दूसरे खंड में रखा गया है। तीसरे खंड में कुछ अनाम लोग हैं जिनका प्रभाव कवि पर पड़ा। ‘स्मृति में जीवन’ की ख़ास बात यह है कि केदारनाथ सिंह की उन कविताओं को भी इन संस्मरणों के साथ दे दिया गया है जिनकी संरचना में स्मृति है अथवा इन संस्मरणों से जुड़ी कोई शख़्सियत। कवि की अनुपस्थिति में ये संस्मरण कवि की नयी उपस्थिति संभव कर रहे हैं जिसके आलोक में हमारा आज और बेहतर दिखाई देता है। सम्पादक द्वय ने कवि के गद्य संसार में से स्मृति के ये ख़ास प्रसंग चुनकर पाठकों के लिए रख दिए हैं, कहना न होगा कि इन संस्मृतियों में जीवन की उष्मा भरी हुई है।
Mahamanav Mahapandit
- Author Name:
Kamla Sankrityayan
- Book Type:

-
Description:
'महामानव महापण्डित’ शीर्षक यह कृति भारतीय साहित्य के अप्रतिम क्रान्तिधर्मी रचनाकार राहुल सांकृत्यायन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित है। लेकिन इसका महत्त्व सिर्फ़ यही नहीं है, बल्कि यह भी है कि राहुल-व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को उनकी ही अन्तरंग आँखों ने देखा और लेखा है। ज़ाहिर है, कमला सांकृत्यायन की क़लम से लिखे गए ये संस्मरणात्मक और मूल्यांकनपरक लेख एक गहरी आत्मीयता से तो आप्लावित हैं ही, अपनी पारदर्शिता में भी विशिष्ट हैं। आकस्मिक नहीं कि पुस्तक के नाम में पहले 'महामानव’ शब्द है और फिर 'महापण्डित’।
पुस्तक में कुल पन्द्रह लेख हैं। इनमें से कुछ तो राहुल जी के लेखकीय, बौद्धिक कर्म का विवेचन करते हैं और कुछ उनके स्वभाव, पारिवारिक जीवनचर्या एवं रुचियों आदि को उजागर करते हैं। ऐसा करते हुए इन लेखों में जो श्रद्धाभाव है, उसके साथ एक प्रकार की नि:संगता भी है, जिससे यह कृति अनावश्यक भावुकता से मुक्त रह सकी है।
कहने की आवश्यकता नहीं कि इस पुस्तक से गुजरते हुए पाठकगण राहुल जी को अपने बहुत निकट महसूस कर सकेंगे।
Cyber Encounters
- Author Name:
Ashok Kumar, IPS::O.P. Manocha
- Book Type:

- Description: जैसे-जैसे तकनीक विकसित हुई, वैसे-वैसे अपराध ने भी तरक्की कर ली। डिजिटल तकनीकें अपने साथ ऑनलाइन किए जानेवाले अनेक अपराधों को लेकर आई हैं, जिनमें भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपए ठगे जाते हैं, नकली वेबसाइटों पर झूठे विज्ञापनों का झाँसा दिया जाता है, पेमेंट गेटवे के माध्यम से संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है, और उन ऐप्स को डाउनलोड कराया जाता है, जिससे दूर बैठे अपराधी उनके उपकरण तक अपनी पहुँच बना लेते हैं। क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से लेकर फिशिंग तक की यह सूची अंतहीन है। ‘साइबर एनकाउंटर्स’ पुस्तक साइबर अपराध की गहराइयों में जाकर बारह रोचक कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत करते हैं। उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी अशोक कुमार राज्य में साइबर अपराध के विरुद्ध योजनाबद्ध लड़ाई लडऩे का अनुभव रखते हैं, और ओ.पी. मनोचा डी.आर.डी.ओ. के पूर्व वैज्ञानिक हैं। दोनों हर कहानी में एक खास किस्म के साइबर अपराध के बारे में बताते हैं, जो एक सच्ची घटना पर आधारित होती है। अपराध, उसकी जाँच और अपराधियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी से भरपूर, आँखें खोल देनेवाली यह पुस्तक सभी को अवश्य पढऩी चाहिए।
Martin Luther King
- Author Name:
Dinkar Kumar
- Book Type:

- Description: अमेरिका में सन् 1950 और 1960 के दशक में रंगभेद के खिलाफ मार्टिन लूथर किंग जूनियर की अगुवाई में अहिंसक प्रतिरोध अपनाते हुए जो नागरिक अधिकार आंदोलन चलाया गया, उसकी दास्तान युगों-युगों तक मानव जाति को प्रेरणा देती रहेगी। इस पुस्तक में मार्टिन लूथर किंग के जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। नई पीढ़ी के लिए किंग की जीवन-कथा से अवगत होना उपयोगी साबित होगा। किंग ने अमेरिका के दक्षिणी और फिर उत्तरी हिस्सों में रंगभेद के खिलाफ अहिंसक आंदोलन चलाते हुए इतिहास की दिशा को मोड़ देने में सफलता हासिल की थी। महात्मा गांधी के अहिंसक प्रतिरोध को अपना अस्त्र बनाकर उन्होंने रंगभेद और गरीबी की जंजीरों से अश्वेत जनता को मुक्ति दिलाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया। इस आंदोलन के लिए किंग को अपने जीवन का बलिदान करना पड़ा। इसके बावजूद इन्होंने साबित कर दिखाया कि मानवता को बचाने के लिए हर तरह के संकट को हँसते-हँसते झेला जा सकता है और शासन तंत्र को चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने घृणा को प्रेम व भाईचारे से जीतने का प्रयास किया और रंगभेद के समर्थकों का हृदय-परिवर्तन करने पर लगातार जोर देते रहे। ऐसे महामानव की जीवनी सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए निश्चय ही उपयोगी एवं प्रेरक सिद्ध होगी।
Jab Se Aankh Khuli Hain
- Author Name:
Leeladhar Mandaloi
- Book Type:

- Description: हिन्दी के वरिष्ठ कवि-गद्यकार लीलाधर मंडलोई की यह आत्मकथा ‘जब से आँख खुली हैं’ केवल उनकी नहीं बल्कि सतपुड़ा के जंगलों में विस्थापित होकर पहुँचे खान-मज़दूरों, दलित-अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों की भी कथा है। कोरकू, गोंड़ और भारिया आदिवासियों के जीवन के स्याह चित्र भी इसमें आपको मिलेंगे। वेस्टर्न कोल्ड फ़ील्ड के छिन्दवाड़ा और दमुआ जिलों में कोयला-खानों की एक बड़ी शृंखला है। एक में कोयला ख़त्म हुआ तो दूसरी, तीसरी, चौथी और यह प्रक्रिया चलती रहती है जिसमें मज़दूरों को बार-बार उजड़ना पड़ता है। न पक्की नौकरी, न अस्पताल, न स्कूल, न मकान; बस भूख, ग़रीबी, अकाल मृत्यु, दुर्घटनाएँ और दुखों का असीम संसार। ओपनकास्ट और अंडर ग्राऊंड खदानों में बाल-मज़दूर का जीवन जीते हुए लेखक ने यह सब बचपन में ही देख-जी लिया था। आस-पास का जीवन त्रासद था लेकिन जीवन की प्रतिकूलताओं में बनी सामुदायिकता ने वहाँ संघर्ष, जिजीविषा और आनन्द की एक पारिस्थितिकी भी निर्मित की थी जिसमें गोंडवाना, बुन्देलखंड और बाहर से आए लोगों की बोली-बानी, भाषा, खानपान, रहन-सहन और संगीत की समावेशी संस्कृति दिखाई देती थी। इस आत्मकथा को पढ़ते हुए हम जान पाते हैं कि खदानों की गहराइयों ने खदानों को कैसे खोखला कर दिया, कैसे जल-स्तर हज़ारों फ़ीट नीचे चला गया, पानी का संकट गहराया और जंगल उजड़ने लगा। जंगल का जीव-जगत समाप्त होने लगा। कई प्रजातियाँ खो गईं। आदिवासियों का विस्थापन शुरु हुआ। उनकी संस्कृति लुप्त होने लगी। इसके अलावा प्राइवेट कम्पनी के कार्यकाल में शोषण, अनाचार, उपेक्षा, शोषण आदि के आख्यान भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं।
Azim Premji Ki Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: भारतीय व्यापार-जगत के एक चमकते सितारे अजीम प्रेमजी सफल व्यापारी, आई.टी. उद्योग के सिरमौर और निवेशक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत कर्तृत्व से सफलता का नया इतिहास लिखा है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’, ‘पदम भूषण’ तथा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत अजीम प्रेमजी को ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें दो बार 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। 1960 के दशक में जब विप्रो ने उपभोक्ता स्वास्थ्य उद्योग से हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत की तो अजीम प्रेमजी ने उसे सफलता दिलाई। व्यापारिक सफलता पाकर उन्होंने भारत की सनातन परंपरा ‘लोकोपकार’ को पुष्ट किया। ‘गिविंग प्लेज’ पर साइन किया है। परोपकार के लिए जाना जाता है। प्रेमजी ने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ को 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर का दान दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय काम किए हैं और एक ‘साक्षर भारत’ बनने की यात्रा में अपना अपूर्व योगदान किया है। उद्यमशीलता, नेतृत्व, कौशल, प्रशासनिक दक्षता, सहृदयता और परोपकार के प्रतीक अजीम प्रेमजी ने अपार धन-समृद्धि अर्जित की, पर मुक्त हाथों से उसे समाज को लौटाया भी। एक यशस्वी, लोककल्याणकारी व्यक्तित्व की यह प्रेरक जीवनगाथा समाज को मानवीयता और देने का महत्त्व बताएगी।
Moortein : Mati Aur Sone Ki
- Author Name:
Nandkishore Naval
- Book Type:

-
Description:
नवल जी कहते रहे हैं कि संस्मरण एक थकी हुई विधा है, यद्यपि वे युवा-काल में भी स्फुट संस्मरण लिखते रहे हैं। उदाहरण के लिए नागार्जुन पर लिखे गए उनके संस्मरण ‘लौट आ ओ फूल की पंखड़ी’ को देखा जा सकता है। अब जाकर उन्होंने उसका उत्तरार्ध इस पुस्तक में लिखा है।
इस पुस्तक की भूमिका में उन्होंने संस्मरण लिखने की कठिनाइयों की ओर संकेत भी किया है। यह वस्तुतः साहित्य की सबसे नाजुक विधा है, जिसकी रचना में यह ख़तरा बराबर बना रहता है कि कहीं ऐसा न हो कि ‘लिखत सुधाकर गा लिखि राहू’। संस्मरण के चरित्रों की स्मृतियाँ भले क्रमबद्ध रूप में सामने न आएँ, पर उनमें संजीदगी के साथ एक खुलापन तो होना ही चाहिए। दूसरे, कमल पूर्णतः प्रस्फुटित हो, पर उसकी पंखुरियों पर जल का दाग न लगे। वस्तुतः संस्मरण लिखना ‘तलवार की धार पर धावनो है’। पाठक देखेंगे कि नवल जी सत्य का अलाप न करते हुए भी इसमें सफल हुए हैं।
संस्मरणों की इस पुस्तक के दो खंड हैं। पहले खंड में घर और गाँव के पाँच चरित्र हैं। ये सारे चरित्र अपने वैशिष्ट्य से युक्त हैं, जिन्हें लेखक ने विलक्षण कुशलता से चित्रित किया है। उनके चित्रण में यथास्थान बज्जिका के शब्दों के प्रयोग से माटी की ख़ुशबू उठती है और चतुर्दिक् फैल जाती है। दूसरे खंड में हिन्दी के पाँच महत्त्वपूर्ण लेखकों को विषय बनाया गया है। कितना अन्तर है इन दोनों प्रकार के संस्मरणों में! जैसे धरती के ऊपर आकाश का नक्षत्रों से जड़ित नीला तनोवा तना हो। इस पुस्तक की एक अतिरिक्त ख़ूबी यह है कि इससे आप जितना लेखक के विषय में जानेंगे, उतना ही विषय को भी, पर बिना किसी आत्मप्रक्षेपण के। अब आप पुस्तक को उठाएँ और उसकी माटी और सोने की धूलों से स्नात हो जाएँ।
Bhagwan Budh : Jeewan Aur Darshan
- Author Name:
Damodar Dharmanand Kosambi
- Book Type:

-
Description:
इस ग्रन्थ के मूल लेखक धर्मानन्द कोसम्बी पालि भाषा और साहित्य के प्रकांड पंडित थे। बौद्ध धर्म-सम्बन्धी तमाम मौलिक साहित्य का गहरा अध्ययन करके वे अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वान बने। लेकिन उनका सारा प्रयास केवल विद्वत्ता पाने के लिए नहीं था। वे बुद्ध भगवान के अनन्य भक्त थे। इसीलिए उन्होंने जो कुछ पाया, जो कुछ किया और साहित्य-प्रवृत्ति द्वारा जो कुछ दिया, वह सब का सब ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ था।
धर्मानन्द कोसम्बी द्वारा लिखित यह चरित्र शायद पहला ही चरित्र ग्रन्थ है, जो किसी भारतीय व्यक्ति ने मूल पालि बौद्ध ग्रन्थ ‘त्रिपिटिक’ तथा अन्य आधार-ग्रन्थों का चिकित्सापूर्ण दोहन करके, उसी के आधार पर लिखा हो। इस प्राचीन मसाले में भी जितना हिस्सा बुद्धि-ग्राह्य था उतना ही उन्होंने लिया। पौराणिक चमत्कार, असम्भाव्य वस्तु सब छोड़ दी, और जो कुछ भी लिखा, उसके लिए जगह-जगह मूल प्रमाण भी दिए। इस तरह बौद्ध-साहित्य में उनके काल की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक जो कुछ भी जानकारी मिल सकती थी, उससे लाभ उठाकर इस ग्रन्थ में बुद्ध भगवान के काल की परिस्थिति पर नया प्रकाश डाला गया है। भगवान बुद्ध के बारे में प्रामाणिक जानकारी देनेवाली महत्त्वपूर्ण कृति।
Bharat Ki Pratham Mahilayen
- Author Name:
Asharani Vohra
- Book Type:

- Description: भारत की प्रथम महिलाएँ—आशा रानी व्होरादूसरों की बनाई राह पर तो सभी चलते हैं। परंपराओं की गिट्टियाँ तोड़, रूढ़ियों के काँटे बीनते हुए नई पगडंडी तैयार करना सचमुच बड़े साहस और जोखिम का काम होता है। भारतीय नारी की मुक्ति और उसे वर्तमान स्तर पर लाने के लिए न जाने कितनी स्त्रियों ने यह जोखिम उठाया है। एक-एक पगडंडी तैयार करने के लिए वर्षों-वर्षों के अंतराल से एक-एक कदम उठा, ठिठका, लड़खड़ाया, फिर सँभलकर दृढ़ता से गति पकड़ता गया। यह जानने की जिज्ञासा स्वाभाविक है कि कौन थीं वे अग्रणी महिलाएँ? कौन सी थीं वे राहें? किसने, किस तरह, किस नई राह को चुना या उसका निर्माण किया? यह पुस्तक इस जिज्ञासा का समाधान ही नहीं, उन महती विभूतियों के प्रति एक विनम्र श्रद्धांजलि भी है, जिन्होंने रूढ़ि तोड़, अपने अद्भुत साहस का परिचय दे किसी भी क्षेत्र में ‘पहल’ की है। जब कभी किसी महिला ने किसी क्षेत्र में पहल की—वह प्रथम विमान-चालिका बनी, प्रथम आई.पी.एस., प्रथम जज या प्रथम विधायक, तब समाचार-पत्रों ने एक समाचार प्रकाशित किया, कभी चित्र भी—और फिर लोग भूल गए। प्रस्तुत प्रेरणाप्रद पुस्तक में भारत की उन निडर, अडिग और अग्रणी महिलाओं की संघर्ष-यात्रा को अत्यंत रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। निश्चय ही हर आयु वर्ग के पाठकों, विशेषकर महिलाओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं पठनीय पुस्तक।
Madam Curie
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: "पोलैंड के एक अति सामान्य परिवार में जनमी मैडम क्यूरी, दुनिया के श्रेष्ठतम वैज्ञानिकों में से एक अपने आप में विलक्षण प्रतिभा थीं— • फ्रांस की प्रथम डॉक्टरेट पानेवाली महिला • दुनिया के किसी भी भाग में भौतिकी में डॉक्टरेट पानेवाली प्रथम महिला • सोरबोन विश्वविद्यालय की पहली महिला प्रोफेसर • भौतिकी में नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम महिला • दूसरा नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम व्यक्तित्व। उपर्युक्त असाधारण प्रदर्शन करने-वाली मैरी क्यूरी को अत्यंत गरीबी, निरादर, अभावों का सामना करना पड़ा। खुले, खतरनाक व असुविधाजनक शेड में अपर्याप्त उपकरणों के उन्होंने दुनिया का विलक्षण तत्त्व ‘रेडियम’ खोज निकाला। अनुसंधान ही नहीं, सादगी, दान व सेवा में भी वे प्रथम रहीं। वे एक आदर्श पुत्री, आदर्श पत्नी, आदर्श पुत्रवधू, आदर्श माता, आदर्श सास बनीं। वे एक असाधारण शिक्षिका भी थीं। उन्होंने अनेक विद्वान् व वैज्ञानिक तैयार किए। हालाँकि उनके बाद आठ और महिलाओं को नोबल पुरस्कार मिला, पर मैडम की तुलना में अब भी कोई नहीं है। उन्होंने इस बात को भी प्रमाणित किया कि शांति-काल में वैज्ञानिक सारी दुनिया का होता है, पर युद्ध-काल में वह अपने देश का ही होता है। विश्वास है, मैडम क्यूरी के जीवन से प्रेरणा प्राप्त युवा पीढ़ी, विशेषत: युवतियाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान आदि के क्षेत्र में अपूर्व योगदान करेंगी।
Jhansi Ki Rani Laxmibai
- Author Name:
Kalpana Ganguly
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में रानी लक्ष्मीबाई के महान् व्यक्तित्व के अनेक देखे-अनदेखे पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है और उनकी प्रसिद्धि पर नए कोण से दृष्टिकोण किया गया है। रानी लक्ष्मीबाई नारी सशक्तीकरण का अद्भुत उदाहरण थीं। उनके जीवन को समर्पित इस पुस्तक से आधुनिक भारतीय पारी को नैतिक और मानसिक बल मिलना चाहिए। इसमें समेटे गए रानी लक्ष्मीबाई के जीवन के तमाम पहलुओं का यदि पूरी तरह नहीं तो कुछ हद तक अपने जीवन में उतारने की हमें कोशिश करनी चाहिए, जिससे कि हमारा जीवन भी सार्थक हो सके। रानी लक्ष्मीबाई का जीवनकाल यद्यपि छोटा रहा; लेकिन वह आज भी हमे प्रेरणा देता है और आगे आनेवाली पीढि़यों को भी प्रेरणा देता रहेगा। ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसीवाली रानी थी’ को इस पुस्तक के माध्यम से विनम्र श्रद्धांजलि।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book