Antim Sataren
(0)
Author:
Anita RakeshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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कथाकार मोहन राकेश के साथ बिताए अपने समय को लेकर अनीता राकेश के संस्मरणों की दो पुस्तकें हिन्दी पाठकों की प्रिय पुस्तकों में पहले से शामिल हैं—'चन्द सतरें और' तथा 'सतरें और सतरें'। उसी शृंखला में यह उनकी अगली पुस्तक है जिसे उन्होंने 'अन्तिम सतरें' नाम दिया है। इस पुस्तक में उन्होंने जितना अपने बीते समय का अवलोकन किया है, उतने ही चित्र अपने वर्तमान से भी प्रस्तुत किए हैं। बीते दिनों की यादों में जहाँ राकेश के साथ हुई कुछ झड़पें उन्हें याद आती हैं, वहीं राकेश की माताजी के साथ गुजरे अपने सबसे पूर्ण, सबसे आर्द्र क्षणों को भी वे याद करती हैं। बहैसियत लेखक राकेश जब अपने पति और पिता रूप के साथ लगभग नाइंसाफ़ी पर उतर आते, तब उन्हें अपने सिर पर अम्मा का ही साया मिलता, राकेश जब अपने कमरे का दरवाज़ा बन्द कर इनसानी रिश्तों की पेचीदगियों को सुलझाने की लेखकीय कोशिशें कर रहे होते, अनीता जी अम्मा के स्नेह के उसी साये तले रहतीं, खातीं-पीतीं, सोतीं, बीमार होतीं और फिर ठीक होतीं। इस समय वे अपने एक बेटे के साथ दिल्ली में रहती हैं। इस पुस्तक में राकेश और अम्मा के अलावा सबसे ज्यादा जगह उसी को मिली है। यह पुस्तक राकेश के व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं से हमें परिचित कराती है, लेकिन उससे ज़्यादा इस समय में जबकि साहित्य और पुस्तकों का बाज़ार बाक़ी बाज़ारों से मुक़ाबला करने के लिए तरह-तरह की मुद्राओं से लगभग खिजा रहा है, लेखकों और लेखकों के आश्रितों की स्थिति पर हमें सोचने पर विवश करती है।
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कथाकार मोहन राकेश के साथ बिताए अपने समय को लेकर अनीता राकेश के संस्मरणों की दो पुस्तकें हिन्दी पाठकों की प्रिय पुस्तकों में पहले से शामिल हैं—'चन्द सतरें और' तथा 'सतरें और सतरें'। उसी शृंखला में यह उनकी अगली पुस्तक है जिसे उन्होंने 'अन्तिम सतरें' नाम दिया है। इस पुस्तक में उन्होंने जितना अपने बीते समय का अवलोकन किया है, उतने ही चित्र अपने वर्तमान से भी प्रस्तुत किए हैं। बीते दिनों की यादों में जहाँ राकेश के साथ हुई कुछ झड़पें उन्हें याद आती हैं, वहीं राकेश की माताजी के साथ गुजरे अपने सबसे पूर्ण, सबसे आर्द्र क्षणों को भी वे याद करती हैं। बहैसियत लेखक राकेश जब अपने पति और पिता रूप के साथ लगभग नाइंसाफ़ी पर उतर आते, तब उन्हें अपने सिर पर अम्मा का ही साया मिलता, राकेश जब अपने कमरे का दरवाज़ा बन्द कर इनसानी रिश्तों की पेचीदगियों को सुलझाने की लेखकीय कोशिशें कर रहे होते, अनीता जी अम्मा के स्नेह के उसी साये तले रहतीं, खातीं-पीतीं, सोतीं, बीमार होतीं और फिर ठीक होतीं। इस समय वे अपने एक बेटे के साथ दिल्ली में रहती हैं। इस पुस्तक में राकेश और अम्मा के अलावा सबसे ज्यादा जगह उसी को मिली है। यह पुस्तक राकेश के व्यक्तित्व के कुछ पहलुओं से हमें परिचित कराती है, लेकिन उससे ज़्यादा इस समय में जबकि साहित्य और पुस्तकों का बाज़ार बाक़ी बाज़ारों से मुक़ाबला करने के लिए तरह-तरह की मुद्राओं से लगभग खिजा रहा है, लेखकों और लेखकों के आश्रितों की स्थिति पर हमें सोचने पर विवश करती है।
Book Details
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ISBN9788183618724
-
Pages127
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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गौतम हालदार महाशय ने इसे असितकुमार हालदार का जीवनालेख्य कहा है। पर यह सिर्फ़ असितकुमार के जीवन प्रसंगों को ही हमारे सामने नहीं लाती है। इसमें अवनीन्द्रनाथ द्वारा प्रवर्तित बंगाल के नवजागरण से उद्भूत कला आन्दोलन के विभिन्न पर्व, अजन्ता और बाघगुहा से चित्रों की प्रतिकृतियों के अभियान में नन्दलाल और असितकुमार का योगदान, अजन्ता की प्रतिकृतियाँ बनायी जायें इसके पीछे भगिनी निवेदिता की प्रेरणा, चित्रशिल्पी रोथेंस्टाइन, हेवेल और रूसी चित्रकार रोरिक की भारतीय कला के प्रति रुचि, रवीन्द्रनाथ, गगनेन्द्रनाथ, द्विजेन्द्रनाथ और कलागुरु अवनीन्द्रनाथ की कला, असितकुमार द्वारा लखनऊ राजकीय कला महाविद्यालय के द्वारा शिल्प और हस्तशिल्प में किया गया योगदान, कला के प्रति उनके विचार-बिन्दु, बचपन से ही चित्रकला के प्रति उनकी रुचि, जयपुर महाराजा कला और हस्तशिल्प विद्यालय की प्रगति में उनका योगदान इस 'रंगेर कवि असितकुमार हालदार' जैसी जीवनी में एक कलारसिक पाठक को सब कुछ मिलेगा। कुछ व्यक्ति केवल चित्रकार होते हैं, शिल्पी अथवा मूर्तिकार या स्थपति, असितकुमार एक संगीतकार, नाटककार, अभिनेता, मूर्तिकार, हस्तशिल्पी, गायक, गीत रचयिताऔर साहित्यकार सभी कुछ थे।
इसमें कोई सन्देह नहीं इस ग्रन्थ के लेखक गौतम हालदार ने काफ़ी परिश्रम के साथ इस ग्रन्थ की रचना की है। चित्रकला और एक व्यक्ति की जीवनी लिखने में उन्होंने पूरे ऐतिहासिक परिवेश का चित्रण कर इसे कला-इतिहास का एक ग्रन्थ भी बना दिया है।
Hundred Petalled Lotus
- Author Name:
Gadiyaram Ramakrishna Sarma +1
- Book Type:

- Description: This book is English translation by M V Chalapathi Rao of Gadiyaram Ramakrishna Sarma's Sahitya akademi award winning Telugu Autobiography,Satapatramu, Sahitya Akademi.
Kya Hain Kalam?
- Author Name:
R. Ramanathan
- Book Type:

- Description: "डॉ. कलाम क्या हैं, कौन हैं? वह सभी के प्रेम, सम्मान तथा प्रशंसा के पात्र क्यों हैं? वे कौन सी बातें हैं, जो उन्हें लोकप्रिय बनाती हैं? कौन सी विशेषताएँ उन्हें दूसरों से भिन्न बनाती हैं? यह पुस्तक इन प्रश्नों का सर्वथा सही, उचित और सार्थक उत्तर देने का प्रयास करती है । यह न तो पारंपरिक अर्थों में जीवनी है, न ही आलोचनात्मक विश्लेषण । यह पुस्तक सामान्य रूप से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पीजे. अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व को उनके साथ निकट रूप से काम कर चुके व्यक्ति की नजरों से देखने का प्रयास करती है । यह डॉ. कलाम के व्यक्तित्व तथा जीवन के अप्रकट पहलुओं पर प्रकाश डालती है और पाठक को उनके व्यक्तित्व के बारे में एक गहरी समझ विकसित करने में मदद करती है । इस पुस्तक के माध्यम से डॉ. कलाम का बहुपक्षीय दूरद्रष्टा व्यक्तित्व हमारे सामने आता है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा राष्ट्र के विकास के अलावा संगीत, साहित्य एवं पर्यावरण में भी रुचि रखते हैं । उनके व्यक्तित्व की जो विशेषता सबसे अधिक प्रेरक है, वह है उनकी मानवीय संवेदना ।
Irfan
- Author Name:
Ajay Brahmatmaj
- Rating:
- Book Type:

- Description: इरफान की बातों और यादों को समेटती ' ... और कुछ पन्ने कोरे रह गए : इरफान' सभी फिल्म और इरफान प्रेमियों के लिए एक जरूरी पुस्तक है। यह उनकी जीवनी नहीं है। इसमें उनके साक्षात्कार और उन पर लिखे संस्मरण हैं। यह पुस्तक इरफान के अनोखे व्यक्तित्व को उन्हीं के शब्दों में उभारती है। उनके मित्रों-परिचितों के संस्मरण उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को व्यक्त करते हैं। इरफान को जानने-समझने के लिए यह एक अंतरंग पुस्तक है।
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