Chhayavadi Kavya-Kosh
About the book
छायावाद हिन्दी कविता का एक समृद्ध कालखंड है। प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी की इस दौर की कविताओं से प्रविष्टियाँ लेकर इस कोश का निर्माण किया गया है। शब्द और पदबंध के साथ काव्य-पंक्तियाँ दी गयी हैं ताकि छायावादी काव्य-प्रयोगों को व्यवस्थित रूप दिया जा सके। शब्द और पदबंध के प्रासंगिक अर्थ-निर्धारण का प्रयास किया गया है ताकि काव्यार्थ की दिशा को समझने में मदद मिल सके। प्रयुक्त शब्द और पदबंध से जुड़ी काव्य-पंक्तियों के सन्दर्भों को रचनावली/ग्रंथावली की पृष्ठ संख्या के साथ दर्शाया गया है। यह भी दर्ज किया गया है कि काव्य-पंक्ति किस कविता या पुस्तक से ली गयी है। छायावाद शतायु को प्राप्त कर चुका है। इसकी काव्य-भाषा आकर्षक भी है और शास्त्रीय भी! बदलते दौर में इस काव्य-भाषा को समझने के लिए काव्य-कोश की आवश्यकता बढ़ती जाएगी। छायावादी काव्य के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ‘छायावादी काव्य-कोश’ मददगार होगा। कोश का निर्माण वर्णानुक्रम से तो किया ही जाता है, इस कोश में काव्य-प्रयोगों को यथासंभव कालानुक्रम से भी रखने का प्रयास किया गया है। छायावादी कवियों के काव्य-प्रयोगों को तुलनात्मक रूप से समझने की प्रभूत सामग्री यह कोश प्रदान करता है। इस कोश की भूमिका और परिशिष्ट में कई तरह की सूचियाँ दी गयी हैं जिनकी मदद से छायावाद को नये ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
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About the Book
छायावाद हिन्दी कविता का एक समृद्ध कालखंड है। प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी की इस दौर की कविताओं से प्रविष्टियाँ लेकर इस कोश का निर्माण किया गया है। शब्द और पदबंध के साथ काव्य-पंक्तियाँ दी गयी हैं ताकि छायावादी काव्य-प्रयोगों को व्यवस्थित रूप दिया जा सके। शब्द और पदबंध के प्रासंगिक अर्थ-निर्धारण का प्रयास किया गया है ताकि काव्यार्थ की दिशा को समझने में मदद मिल सके। प्रयुक्त शब्द और पदबंध से जुड़ी काव्य-पंक्तियों के सन्दर्भों को रचनावली/ग्रंथावली की पृष्ठ संख्या के साथ दर्शाया गया है। यह भी दर्ज किया गया है कि काव्य-पंक्ति किस कविता या पुस्तक से ली गयी है।
छायावाद शतायु को प्राप्त कर चुका है। इसकी काव्य-भाषा आकर्षक भी है और शास्त्रीय भी! बदलते दौर में इस काव्य-भाषा को समझने के लिए काव्य-कोश की आवश्यकता बढ़ती जाएगी। छायावादी काव्य के पाठकों, अध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए ‘छायावादी काव्य-कोश’ मददगार होगा।
कोश का निर्माण वर्णानुक्रम से तो किया ही जाता है, इस कोश में काव्य-प्रयोगों को यथासंभव कालानुक्रम से भी रखने का प्रयास किया गया है। छायावादी कवियों के काव्य-प्रयोगों को तुलनात्मक रूप से समझने की प्रभूत सामग्री यह कोश प्रदान करता है।
इस कोश की भूमिका और परिशिष्ट में कई तरह की सूचियाँ दी गयी हैं जिनकी मदद से छायावाद को नये ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2024
- Weight
- 900 grams
- ISBN-13
- 9788197927164
- Pages
- 664
- Reading time
- ~22 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 18.5 × 25 cm
- Language
- Hindi
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