Mahatirth Ke Kailasbaba
(0)
Author:
Bimal Mitra, Bimal Dey, Prem KapoorPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues₹
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तिब्बत की रहस्यमयी भैरवी माताजी के निर्देश पर कैलासबाबा की खोज में मैं गया था चौरासी महासिद्ध श्मशान और फिर पार किया पाप-परीक्षा-पत्थर। पुण्यभूमि शिवस्थल, कैलासनाथ के चरण-कमल में बैठकर चित्ताकाश में पाया था नर्मदा नाम, किन्तु हाय, गँदले मन की स्थिरता के अभाव में उस महासत्य को न जान पाया। इशारा पाने के बावजूद आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में मन में आए उस आकस्मिक विचार को पकड़कर नहीं रख पाया। मेरी राय में ज्ञानगंज के एक भिखारी लामा ही ज्ञानीगुरु थे, जिन्होंने मुझे देखते ही मन्तव्य दिया था कि मेरा मन ही है 'गँदला पानी'। शिवस्थल के स्थान माहात्म्य के प्रभाव में चित्ताकाश के नर्मदा नाम को मैं प्रश्रय न दे पाया। दरअसल सत्य को पकड़कर रखने की क्षमता मुझमें नहीं थी। इसके बाद देखते-देखते गुज़र गए दो साल। मैं भले ही भूल जाऊँ पर काल की पोथी में अंकित था मेरा प्राप्य। सन् 2009 में मिल गया 'दर्शन'—मिट गईं सारी इच्छाएँ। महातीर्थ के वही कैलासबाबा वर्तमान में परमपूज्य कायकल्पी बर्फ़ानी दादाजी हैं। उन्हीं की कृपा से प्रकाशित हुई है यह पुस्तक 'महातीर्थ के कैलासबाबा'।</p> <p>—भूमिका से
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तिब्बत की रहस्यमयी भैरवी माताजी के निर्देश पर कैलासबाबा की खोज में मैं गया था चौरासी महासिद्ध श्मशान और फिर पार किया पाप-परीक्षा-पत्थर। पुण्यभूमि शिवस्थल, कैलासनाथ के चरण-कमल में बैठकर चित्ताकाश में पाया था नर्मदा नाम, किन्तु हाय, गँदले मन की स्थिरता के अभाव में उस महासत्य को न जान पाया। इशारा पाने के बावजूद आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में मन में आए उस आकस्मिक विचार को पकड़कर नहीं रख पाया। मेरी राय में ज्ञानगंज के एक भिखारी लामा ही ज्ञानीगुरु थे, जिन्होंने मुझे देखते ही मन्तव्य दिया था कि मेरा मन ही है 'गँदला पानी'। शिवस्थल के स्थान माहात्म्य के प्रभाव में चित्ताकाश के नर्मदा नाम को मैं प्रश्रय न दे पाया। दरअसल सत्य को पकड़कर रखने की क्षमता मुझमें नहीं थी। इसके बाद देखते-देखते गुज़र गए दो साल। मैं भले ही भूल जाऊँ पर काल की पोथी में अंकित था मेरा प्राप्य। सन् 2009 में मिल गया 'दर्शन'—मिट गईं सारी इच्छाएँ। महातीर्थ के वही कैलासबाबा वर्तमान में परमपूज्य कायकल्पी बर्फ़ानी दादाजी हैं। उन्हीं की कृपा से प्रकाशित हुई है यह पुस्तक 'महातीर्थ के कैलासबाबा'।</p>
<p>—भूमिका से
Book Details
-
ISBN9789347043215
-
Pages284
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मानवता के इतिहास में ऐसे व्यक्ति विरल हैं जिन्होंने देशकाल की सीमाओं का अतिक्रमण कर समूचे विश्व को प्रेरित-प्रभावित किया है। ‘वियतनाम जनतांत्रिक गणतंत्र’ का महास्वप्न साकार करनेवाले जननायक हो चि मिन्ह ऐसे ही महान व्यक्ति थे। हो चि मिन्ह का नाम आज पूरे विश्व में समता-न्याय-स्वतंत्रता के लिए अनथक संघर्ष करनेवाले जनयोद्धा के रूप में आदर के साथ लिया जाता है। वस्तुतः हो के विषय में जानना व उनके व्यक्तित्व और विचारों का विश्लेषण करना प्रत्येक सचेत व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। ‘जननायक हो चि मिन्ह और भारत’ पुस्तक में प्रबुद्ध लेखक गीतेश शर्मा ने हो के जीवन का प्रामाणिक परिचय देते हुए उनके अविस्मरणीय योगदान को रेखांकित किया है! लेखक के अनुसार, ‘भारत में हो चि मिन्ह की प्रशस्ति तो बहुत की गई, उनकी याद में कसीदे पढ़े गए, पर हो के दर्शन, उनकी जीवन-शैली, सिद्धन्तों-आदर्शों पर न तो कोई गम्भीर पुस्तक आई, न ही उन्हें सही परिप्रेक्ष्य में समझने की गम्भीर चेष्टा की गई।’
प्रस्तुत पुस्तक हो को समझने का एक गम्भीर उपक्रम है। हो का भारत के साथ भी एक अद्भुत सम्बन्ध रहा है। जनोन्मुख राजनीति करनेवालों, बुद्धिजीवियों व ज़िम्मेदार पाठकों के मन में हो की स्मृतियाँ जीवन्त हैं। गीतेश शर्मा ने हो और भारत के वैचारिक रिश्तों का प्रभावपूर्ण वर्णन किया है। हो के व्यक्तित्व और कृतित्व का यह लेखा-जोखा समस्त पाठकों को नई ऊर्जा से सम्पन्न करेगा। प्रतिबद्ध राजनीति से जुड़े व्यक्तियों को हो के विचार आज भी सकारात्मक दिशा दिखा सकते हैं।
सहज व पारदर्शी भाषा-शैली में लिखी गई यह पुस्तक आज के वैश्विक परिदृश्य में एक आलोक स्तम्भ की तरह है।
Itihaskaar Ka Matantar
- Author Name:
Mubarak Ali +1
- Book Type:

- Description:
पाकिस्तान के पाठ्यक्रम में इतिहास की जो पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं, उनमें भारत और हिन्दुओं का उल्लेख एक शत्रु देश और शत्रु के रूप में किया गया है। उनमें पाकिस्तान का इतिहास शुरू होता है मुहम्मद–बिन–कासिम के भारत आक्रमण से। भगत सिंह, अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ, महात्मा गांधी, सुभाषचन्द्र बोस, ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ाँ जैसे स्वाधीनता–सेनानियों का उनमें कोई उल्लेख नहीं। स्वाधीनता–सेनानियों के रूप में इक़बाल, मुहम्मद अली ज़िन्ना, लियाक़त अली ख़ाँ जैसे लोगों का ही नाम है जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध न तो कोई जंग की, न ही जेल गए। वहाँ के इतिहास में औरंगजेब को महानायक तथा अकबर को खलनायक के रूप में चित्रित किया गया है। इतिहास को तोड़–मरोड़कर पेश करने की परम्परा केवल पाकिस्तान में ही नहीं, हमारे देश में भी रही है। फ़र्क़ केवल मात्रा का है। वहाँ यह मानसिकता प्रचुर मात्रा में है तो यहाँ अल्प। मसलन हिन्दू कट्टरवादियों द्वारा बाबर को भारत पर आक्रमणकारी तथा हिन्दू विरोधी के रूप में चित्रित किया जाता है और आज भी भारतीय मुसलमानों को बाबर की सन्तान कहकर कोसा जाता है।
Vishay : Nar-Nari
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत उपन्यास में सुशीतल चटर्जी और अल्का नायर का प्रेम है जो सुशीतल के संयमित और प्रतिज्ञाबद्ध विद्यार्थी जीवन से आरम्भ होकर सुशीतल के पक्के जुआरी और शराबी होने तक जाता है, और दूसरी तरफ़ अल्का के एक मान की ऊँची छवि में स्थापित होने तक जो सुशीतल की दूसरी पत्नी से हुए बेटे की पढाई पर अपने जमा पैसे बिना हिचक खर्च कर देती है। दूसरा चरण सरपति राय के ख़ानदान का क़िस्सा है जो पुनः स्त्री-पुरुष सम्बन्ध के झोंकों में ही झूल जाता है। तीसरे उपन्यास में कुसमिया है—एक ईमानदार और सेवा-भाव से सम्पन्न सेविका जिसे अन्त में अपनी मालकिन के बेटे के ख़ून के इल्ज़ाम में फाँसी की सज़ा होती है।
‘विषय नर-नारी’ में बिमल मित्र ने जैसे लेखक होने की अपनी पहचान को भी बार-बार रेखांकित किया और जिया है। स्वतंत्र रूप से लेखन को ही अपना जीवन-ध्येय बनानेवाले उस ज़माने के ऐसे लेखकों की रचनाएँ स्वयं लेखन की प्रतिष्ठा हैं जिससे जनसाधारण पाठक के रूप में एक सजीव उपस्थिति की तरह जुड़ा रहता था। इस लिहाज़ से भी साहित्य की थाती में सुरक्षित ऐसी रचनाओं को
पढ़ा जाना चाहिए।
Surya Pranam
- Author Name:
Bimal Dey +1
- Book Type:

- Description:
र्य प्रणाम’ का स्थान-काल, पात्र तथा घटनाएँ सभी वास्तविक हैं। मैं पर्यटक हूँ वास्तविक घटनाओं का उल्लेख करना ही मेरा धर्म है। यथार्थ के वर्णन में एकरसता आ जाती है। मैं एक पथिक हूँ अपनी यात्राओं के दौरान जो भी मैं देखता हूँ मुझे जो अनुभव होता है, उसी को मैं अपने पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न करता हूँ। मैंने अपनी यात्राओं के दौरान बहुत से मन्दिर, मठ और पूजास्थल देखे हैं, बहुत से तीर्थों में जाकर शीश नवाया है। हिमालय के बहुतेरे तीर्थस्थलों में मैंने देव-स्पर्श पाया, हिमालय की पुण्यभूमि में ही पुण्यात्माओं का आविर्भाव सम्भव है। एंडीज की यात्रा ने मुझे तपस्या की अन्तिम सोपान पर पहुँच दिया था। एंडीज तथा मध्य व दक्षिणी अमरीका की प्राचीन सभ्यता में ज्यों सूर्य को मूल देवता का स्थान प्राप्त था, त्यों ही जापान का मूल देवता भी सूर्य है। जापान के सम्राट को सूर्य का प्रतिनिधि मानते हैं, जापानी पताका का प्रतीक चिह्न भी सूर्य है। सूर्य का प्रभाव जापानियों के चरित्र में भी दिखाई देता है। सूर्य शक्ति और ओज का प्रतीक है। ‘सूर्य प्रणाम’ ग्रन्थ सूर्य-देवता के प्रति मेरा अर्घ्य है। सूर्य को देवता माननेवाले जापान और एंडीज में मैंने जो कुछ देखा, सुना और जाना, उसी अनुभव को मैं इस लेखन के ज़रिए अपने पाठकों तक पहुँचा रहा हूँ। —इसी पुस्तक की भूमिका
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