Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa—Kaliashnath—Mansarovar)
Author:
Bimal MitraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues0 Ratings
Price: ₹ 360
₹
450
Available
सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
ISBN: 9788180315121
Pages: 364
Avg Reading Time: 12 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Chasing The Monk's Shadow
- Author Name:
Mishi Saran
- Rating:
- Book Type:

- Description: An Indian woman with a China craze retraces the footsteps of a Chinese monk with an Indian obsessionIn the seventh century AD, the Chinese monk Xuanzang (earlier spelt as Hiuen Tsang or Hsuan Tsang) set off on an epic journey to India to study Buddhist philosophy from the Indian masters. Travelling along the Silk Road, through the desolate wastes of the Gobi desert and the icy passes of Central Asia, braving brigands and blizzards, Xuanzang finally reached India, where his spiritual quest took him to Buddhist holy places and monasteries throughout the subcontinent. By the time he returned to China eighteen years later, carrying with him nearly 600 scriptures which he translated from Sanskrit into Chinese, Xuanzang had covered an astonishing 10,000 miles. He also left a detailed record of his journey, which remains a valuable source of historical information on the regions he traversed. Fourteen hundred years later, Mishi Saran follows in Xuanzang's footsteps to the fabled oasis cities of China and Central Asia, and the Buddhist sites and now-vanished kingdoms in India, Pakistan and Afghanistan that Xuanzang wrote about. Travelling seamlessly back and forth in time between the seventh century and the twenty-first, Saran uncovers the past with consummate skill even as she brings alive the present through her vivid and engaging descriptions of people and places. Her gripping chronicle includes an extraordinary eyewitness account of Kabul under the Taliban regime, just one month before 9/11. Running parallel to the account of her travels is the moving story of the author's inner journey towards a new understanding of her roots and her identity. With its riveting mix of lively reportage, high adventure, historical inquiry and personal memoir, this delightfully written book is a path-breaking travelogue.
Wah Bhi Koi Des Hai Mahraj
- Author Name:
Anil Yadav
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gufetla dev
- Author Name:
Sagar Solanke
- Rating:
- Book Type:

- Description: Marathi Travelogue
Raat Nau Baje Ka Indradhanush
- Author Name:
Brajesh Kanungo
- Book Type:

- Description: Book
Meri Ladakh Yatra
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: महापंडित राहुल सांकृत्यायन को हिन्दी यात्रा-साहित्य का पितामह कहा जाता है। यायावरी उनके लिए शौक नहीं धर्म जैसी अहमियत रखती थी। ज्ञान और प्राचीन ग्रंथों की खोज में वे दूर-दूर तक गए। ‘मेरी लद्दाख यात्रा’ में उनके कुछ यात्रा-वृत्तान्तों को संकलित किया गया है। उनके यात्रा-विवरणों की विशेषता यह है कि वे सिर्फ स्थानों का विवरण नहीं देते, बल्कि वहाँ की संस्कृति, समाज, परम्पराओं, धर्म, इतिहास और भौगोलिक विशेषताओं की विवेचना भी करते चलते हैं। इस पुस्तक में वे मेरठ, पंजाब, कश्मीर, लंका, तिब्बत, नेपाल आदि स्थानों की अपनी ज्ञान-यात्राओं का विवरण देते हुए अनेक दिलचस्प घटनाओं का वर्णन तो करते ही हैं, वहाँ के रहने वाले जनसाधारण के जीवन के सजीव शब्द-चित्र भी खींचते चलते है।
Andar Ka School
- Author Name:
Dr. Manohat Agnani
- Book Type:

- Description: In this fast paced world of ours, everyday life is a blur for many of us. We rarely stop to think, but Dr Manohar Agnani’ s book ‘Andar Ka School’ takes us back to the practice of valuing, cherishing and thinking about daily incidents; which has the power of transforming an ordinary incident into an extra ordinary and memorable lesson for life. As a master story teller he manages to keep the curiosity in us at the utmost level till the last paragraph of the story and then gives his frank opinion. And at times tells us the stark truth which many may not have the courage to put into words in public. The gender lens with which he very boldly examines himself, others and the society, gives an altogether different endearing flavour and makes the stories much more interesting and poignant Each story comes with its own characteristics and unique style but all of them have a winning combination of simplicity, curiosity and emotional appeal which make these stories super-readable. I was quite surprised to see my millennial friends reading, reciting and discussing the stories. The size of the stories is such that you hardly need 5-10 minutes to read one but then it leaves you with many thoughts and much emotion which keep lingering and coming back to you long after you have finished the book. These are the stories one would very much like to read time and again; simple and succinct; short yet very comprehensible, everyday but very touching… Thanks a lot for sharing your experiences. Eagerly awaiting the next book BY Mona
Ek Kam Sath - Rajurkar Raj
- Author Name:
Ramarao Vamankar
- Book Type:

- Description: This book has no description
Vilayat ke Ajoobe
- Author Name:
Mirza Sheikh Etesamuddin
- Book Type:

-
Description:
18वीं शताब्दी मुग़ल साम्राज्य के पतन के साथ-साथ यूरोपीय शक्तियों विशेष रूप से अंग्रेज़ों के उत्थान की शताब्दी है। पतन और उत्थान की यह सदी हिन्दुस्तान के सामंती ढाँचे के टूटने और उपनिवेश विस्तार की भी सदी मानी जाती है। उपनिवेशवादी षड्यंत्र और विस्तारवादी नीति से पहली बार इस महाद्वीप का सामना हो रहा था। हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार सामाजिक ढाँचा छिन्न-भिन्न होने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई थी। यह वही समय था जब मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने अपना सफ़रनामा ‘शिगुर्फ़नामा-ए-विलायत’ फारसी में लिखा था। यह यात्रा संस्मरण संभवतः किसी पहले हिन्दुस्तानी द्वारा लिखा गया यूरोप का पहला यात्रा संस्मरण है। इस सफ़रनामे का अध्ययन कई दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने यूरोप की यात्रा 1766 यानी राजा राममोहन राय से लगभग 65 साल पहले की थी। जबकि अब तक यही माना जाता था कि राजा राममोहन राय पहले पढ़े-लिखे व्यक्ति थे जिन्होंने यूरोप की यात्रा की थी।
मिर्ज़ा प्रसिद्ध शायर मीर तकी मीर के समकक्ष हैं। 18वीं शताब्दी में जिस प्रकार मीर ने दिल्ली के उजड़ने का दर्द बयान किया है उसी प्रकार के अक्स इस सफ़रनामे में भी देखे जा सकते हैं। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति दृढ़ विश्वास होने के बावजूद मिर्ज़ा साहब का अंग्रेज़ी संस्कृति से प्रभावित होने वाला प्रसंग हैरत पैदा करता है। इसके अतिरिक्त धर्म को लेकर वाद-विवाद प्रसंग भी बहुत रोचक और मज़ेदार है । दोनों संस्कृतियों में श्रेष्ठता का भाव भी देखने को मिलता है। इस यात्रा संस्मरण को पढ़ते हुए आप 18 वीं शताब्दी की समुद्री यात्रा का हैरतअंगेज़ और अद्भुत अनुभव कर सकते हैं। इस सफ़र से गुज़रने का अनुभव बहुत आह्लादकारी और रोमांचक है।
Siyahat Meri Syahi Se
- Author Name:
Atul Chaturvedi
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में कहानी है एक नौजवान की जिसने अपने घरेलू व्यापार से हटकर कुछ नया करने का स्वप्न देखा था। यह कहानी है उस कालखंड की जब भारत की अर्थव्यवस्था मुक्त अर्थव्यवस्था के शैशव काल में ही प्रवेश कर रही थी। यह यात्रा-संस्मरण भारत के हर उस नौजवान की इच्छाओं और आकांक्षाओं के प्रतीक हैं जो आगे बढ़कर अपनी हिम्मत से कुछ नया करना चाहते हैं। एक नया व्यापार-निर्यात व्यापार शुरू करने में क्या समस्याएँ आईं और उनको कैसे हल किया अर्थात् यह संस्मरण आपको निर्यात व्यापार की बारीकियों भी बताएगा तो साथ ही मध्य-पूर्व के देश जैसे दुबई, बहरीन, कतर, अफ्रीकी महाद्वीप के देश मिश्र अनेक यूरोपीय देश जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, हॉलैंड, बेल्जियम, इटली तथा अमेरिका आदि के विभित्र शहर, उनकी संस्कृति उनके सौन्दर्य, इतिहास, पर्यटन स्थल से भी परिचित कराएगा। यहाँ यह भी बताने की कोशिश की गई है कि कैसे एक समय था जब न तो यहाँ जानकारी थी न संसाधन और न ही अधिक विदेशी भी हमारे उत्पाद लेने को तैयार थे-अपनी दुकान में बैठाकर बात करने को भी तैयार नहीं थे। समय बदला और हमारे भारत के व्यापारियों ने विदेशों में अपने लिये एक सम्मानजनक स्थान बनाया। आज के दौर में जब देश के नौजवान रोज़गार के लिये परेशान हैं, वे सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के लिये भटकते हैं तो इस पुस्तक में उनके लिये यह सन्देश भी है कि आप एक सपना देखिए उद्यमी बनने का। हमारे देश में ऐसे सपने सच होते हैं। अपना सपना पूरा करके आप जॉब-सीकर के स्थान पर जॉब-गिवर बनिए।
Are Yayavar Rahega Yaad?
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Book Type:

-
Description:
कोई भी यात्रा मात्र व्यक्ति की यात्रा नहीं होती। अगर वह जिस रास्ते पर चल रहा है वह रास्ता भी यात्रा में शामिल है तो–और रास्ते शामिल हैं तो क्या कुछ नहीं शामिल! अरे यायावर रहेगा याद? अज्ञेय का एक ऐसा ही यात्रा-संस्मरण है जिसमें रास्ते शामिल हैं। इसलिए यह पुस्तक अपने काल के भीतर और बाहर एक प्रक्रिया, एक विचार और एक विमर्श भी है।
बग़ैर उद्घोष की यात्रा प्रकृति और भूगोल से गुज़रती हुई संस्कृति, समाज और सभ्यता से भी गुज़र रही होती है। अज्ञेय की यह पुस्तक इस मायने में एक कालातीत मिसाल लगती है कि इसके बहाने द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर पूरे हिन्दुस्तान की आज़ादी तक का वह भूगोल और कालखंड सामने आते हैं जहाँ जितने अधिक सपने थे उतने ही यातनाओं के मंजर भी। यह पुस्तक एक व्यक्ति के विपरीत नहीं, बल्कि समक्ष एक नागरिक और उसके एक मनुष्य होने की भी यात्रा-पुस्तक है।
अज्ञेय अपनी यात्रा में लाहौर, कश्मीर, पंजाब, औरंगाबाद, बंगाल, असम आदि प्रदेशों की प्रकृति और भूमि से गुज़रते हुए अपनी कथात्मक शैली और भाषा की ताज़गी से सिर्फ़ सौन्दर्य को ही नहीं रचते बल्कि सदियों हम जिनके ग़ुलाम रहे, उनके इतिहास के पन्ने भी पलटते हैं। वैज्ञानिकता और आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में उनके विकास, विस्तार और विध्वंस के गणित को हल करने का द्वन्द्व और अथक उद्यम इस पुस्तक को विरल कृति बनाते हैं।
पुस्तक में एलुरा, एलिफांटा, कन्याकुमारी, हिमालय आदि की यात्रा करते मिथकों, प्रतीकों और मूर्तियों की रचना को अपने यथार्थ और अयथार्थ के केन्द्र में देखा-परखा गया है जहाँ लेखक को पुराणों और इतिहास की वह सच्चाई नज़र आती है जो युगों तक गाढ़े रंगों के पीछे रही। अनदेखे और अछूते को यात्रा की अभिव्यक्ति और उसकी कला में मूर्त करना कोई सीखे तो अज्ञेय से सीखे।
अज्ञेय की यह दृष्टि ही थी कि यात्रा, भ्रमण के बजाय एक ऐसी घटना बन सकी जिसकी क्रिया-प्रतिक्रिया में अपना कुछ अगर खो जाता है तो बहुत कुछ मिल भी जाता है। अपना बहुत कुछ खोने, पाने और सृजन करने का नाम है–अरे यायावर रहेगा याद ?
Khushdesh Ka Safar
- Author Name:
Pallavi Trivedi
- Book Type:

-
Description:
हर इनसान के भीतर एक यायावर सोया होता है। लेकिन कम ही लोग होते हैं जो अपने भीतर सोये हुए यायावर को जगा पाते हैं; और उसकी उँगली पकड़कर घर से निकल पड़ते हैं। ज़्यादातर लोग ज़िन्दगी की ख़ुशहाली को बनी-बनाई हदों के भीतर तलाश करते हैं। अपने सुरक्षित दायरों के बाहर क़दम रखने से वे हिचकते हैं। इस तरह वे ज़िन्दगी के असल एडवेंचर का लुत्फ़ नहीं ले पाते। उनके विपरीत कुछ लोगों को बनी-बनाई हदें, दूसरों की बनाई लीकें क़तई मंजूर नहीं होतीं। वे न केवल अपनी हद ख़ुद तय करते हैं बल्कि उसको बार-बार तोड़ते हैं।
इस तरह के ‘एडवेंचर’ का माद्दा न हो तो यायावर होना मुश्किल है। हमारी ख़ुशक़िस्मती कि पल्लवी त्रिवेदी में यह माद्दा है। वह अपने भीतर के यायावर को सोने नहीं देतीं और हर-हमेशा नई-नई जगहों तक, अदेखे-अजाने प्रदेशों तक जाती रहती हैं। ‘ख़ुशदेश का सफ़र’ उनकी इसी अनूठी यायावरी का दिलकश दस्तावेज़ है। कोई और होता तो वह भूटान के लिए सीधे फ़्लाइट बुक करता, समय बचाता और पहले से टैक्सी और होटल सुनिश्चित कर इस ख़ुशदेश की दर्शनीय जगहों को अपना चेहरा दिखाकर लौट जाता—यह उन अनगिनत यात्राओं में से एक होती जिनमें दूसरों को बताने के लिए कुछ नहीं होता। पल्लवी ने पर्यटन की इस पुरानी लीक को पकड़ने के बजाय भूटान के अपने सैर-सफ़र के लिए जो रास्ता पकड़ा, उसका एक-एक क़दम उन्होंने ख़ुद गढ़ा है। यही वजह है कि इस किताब में दर्ज उसका वृत्तान्त न केवल किसी रोचक उपन्यास जैसा पठनीय बन गया है, बल्कि हर उस शख़्स के लिए एक ज़रूरत भी जो अपने भीतर सोये यायावर को जगाने की तरकीब ढूँढ़ रहे हैं।
—यूनुस खान
Ek Tha Zanskar : SuvaranKhudaiya Chiunton Ka Des
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description: अजय सोडानी प्रकृति की यात्रा करते हैं, लेकिन वे सिर्फ़ यात्रा नहीं करते—वे एक पक्षधर यात्रा करते हैं। एक ऐसी यात्रा जो प्रकृति के पवित्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और यह जानने के लिए आरम्भ होती है कि मनुष्य ने प्रकृति की इतनी विराट सभ्यता के ठीक मुक़ाबले पर अपनी यह सभ्यता खड़ी की तो क्यों, जिसमें सब तरफ क्षरण ही क्षरण है। वे प्रकृति के वकील की हैसियत से अपना झोला उठाते हैं। यह यात्रा-कथा है जाँस्कर की जहाँ आज 2900 हेक्टेयर में खेती होती है और कुल जनसंख्या है 13773। लद्दाख का यह हिस्सा न तो हमलावरों की नज़र में ज़्यादा पड़ा, न भारत आने वाले मुसाफ़िरों की। इसलिए वह विकास की मार से भी बचा रहा, अपनी जीवन शैली और संस्कृति के साथ। रेत के नीचे से सोना खोदने वाले चींटे भी अपना काम करते रहे यानी यहाँ से जुड़ी कथाएँ भी दूर देश के सैलानियों को आकर्षित करती रहीं। मंथर गति में एक समूचा जीवन जीने वाले जाँस्कर का यह सफ़र जुलाई 2013 में किया गया, जिसके बाद यात्रावृत्तकार को कहना पड़ा कि ‘नवपाषाण युग जैसे अभी-अभी ही व्यतीत हुआ हो इधर से।’ हिमालय की बर्फ़ीली दुनिया के इस यात्रावृत्त में रोमांच जितना है, उतने ही इतिहास और संस्कृति के हवाले भी हैं, कथाएँ-उपकथाएँ भी हैं। अर्थात इस पुस्तक को पढ़कर जब आप अपनी दुनिया में लौटते हैं तो सिर्फ़ दृश्यों के, जोखिमों के, थकानों और आश्चर्यों के दृश्य आपके साथ नहीं होते, ढेरों नए तथ्य और तर्क भी होते हैं। साथ ही सफ़रगोई की वह ताज़गी, कहन की वह रवानी भी जो अजय सोडानी की अपनी ईजाद है।
Paanv Ke Pankh
- Author Name:
Shikha Varshney
- Book Type:

- Description: travel
Aap Biti-Jag Biti
- Author Name:
Sandeep Bhutoria
- Book Type:

- Description: वास्तव में यात्रा करना और दृष्टि के साथ यात्रा करना, दो भिन्न बातें हैं। हम सभी यात्रा करते हैं, लेकिन कितने ऐसे होते हैं जो हमें सृजनात्मक अभिव्यक्ति का रूप देते हैं या सोद्देश्यपूर्ण बना पाते हैं। जब यात्रा-वृत्तान्त या सफ़रनामा सृजनात्मकता का स्पर्श करता है, तब यह यात्रा साहित्य के जगत में प्रवेश करने लगता है। संक्षेप में, यात्रा-वृत्तान्त परिचित या अपरिचित समाज व क्षेत्र को स्व-अवलोकन के माध्यम से जानने-समझने की एक सृजनात्मक प्रक्रिया है और जिज्ञासा इसकी कुतुबनुमा होती है। युवा जिज्ञासु संदीप भूतोड़िया ने अपनी पहली यात्रा-कथा ‘आपबीती-जगबीती’ में एक सजग व संवेदनशील यात्रा लेखक का परिचय देकर मुझे निःसन्देह चौंकाया है। क़रीब सात-आठ वर्ष पहले कोलकाता में स्व. डॉ. प्रभा खेतान के निवास पर संदीप से संक्षिप्त भेंट हुई थी। उस समय इतना ही बतलाया गया था कि संदीप की रुचि व्यापार में कम है और सामाजिक कार्यों में इनकी सक्रियता रहती है। विभिन्न अन्तरालों से हुई मुलाक़ातों से यह भी पता चला कि संदीप संयुक्त राष्ट्र से सम्बन्धित संस्थाओं से भी सम्बद्ध हैं और अपने कार्य के सिलसिले में देश-विदेश की यात्राएँ अक्सर करते रहते हैं। विभिन्न समाजों और जीवन-शैलियों का क़रीब से अवलोकन करना भी संदीप भूलते नहीं हैं। इस अवलोकन का ही परिणाम है प्रस्तुत पुस्तक। —रामशरण जोशी
Darra-Darra Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

- Description: — ‘दर्रा-दर्रा हिमालय’ एक परिवार की हिमालय पर घुमक्कड़ी का वृत्तान्त है। ऐसा परिवार जो फ़ुर्सत के क्षणों में विदेशों की सैर के बजाय बर्फ़ ढँके इन पहाड़ों को वरीयता देता है। इंदौर के अजय सोडानी को हिमालय की सर्द, मनोहारी और जानलेवा वादियों से गहरा अनुराग है। काल्पनिक से लगनेवाले सौन्दर्यशाली पहाड़ों पर सपरिवार चढ़ाई और बर्फ़ के गगनचुम्बी शिखरों को दर्रा-दर्रा महसूस करने के दौरान प्रकृति के मनोरम स्पर्श से भीगे तन-मन कई बार मौत के मुक़ाबिल भी रहे, लेकिन ज़िन्दगी के पन्ने पर हौसले की स्याही से साहस की गाथा रचनेवाले मौत की परवाह कहाँ करते। जनश्रुतियों और पौराणिक ग्रन्थों में चर्चित स्थलों और मार्गों की सत्यता को परखने, हिमालय और वहाँ के जनजीवन के विलुप्तप्राय सौन्दर्य को निहारने-समझने की उत्कंठा में क़रीब बीस हज़ार फ़ीट की ऊँचाई वाले कालिंदी खाल पास को लाँघते हुए भी मौत का भय बर्फ़ की तरह पिघलता रहा। हिमालय की घाटियों में विचरती वायु में जाने ऐसा क्या था कि अजय बार-बार वहाँ लौटे और हर बार हिमालय की दी हुई एक नई चुनौती को स्वीकार किया। 'दर्रा-दर्रा हिमालय' अपनी राष्ट्रीय धरोहरों और प्रतीकों के प्रति अनुरक्ति वाले मानस की साहसिक यायावरी की गाथा तो कहती ही है, साथ ही रोज़-ब-रोज़ बढ़ती प्रदूषण की समस्या और पर्यावरण संरक्षण पर उसकी चिन्ता से भी रू-ब-रू कराती है।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa - Kaliashnath - Mansarovar)
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Main Ghumakkar Vanon Ka
- Author Name:
Sherjung
- Book Type:

- Description: शिकार की कहानियाँ वनप्राणियों के जीवन को ही नहीं, बल्कि वनों के परिवेश और उनकी भिन्न-भिन्न स्थितियों को भी प्रदर्शित करती हैं। मनुष्य और जानवर, समय और स्थान तथा अन्य सब घटनाएँ जो शिकारी को वन-जीवन के निकट ले जाती हैं और किसी भी शिकार कथा का अभिन्न अंग हैं। जानवर का पीछा करने का अपना ही आनन्द है जिसके विचार मात्र से शिकारी की आँखों के सामने जंगल के अत्यन्त सुन्दर दृश्य नाचने लगते हैं, जैसे घने वृक्षों के नीचे धरती पर पड़ी उनकी गहरी और ठंडी छाया, प्रभात के शान्तिमय वातावरण में तूफ़ानी सागर की मतवाली लहरों की भाँति चारों ओर गूँजती शेरों की ऊँची एवं गहरी गर्जनाएँ हाथियों की तुरही-की-सी आवाज़ें, शोरगुल मचाते हुए जंगली साँड, मस्त चाल से चलता हुआ भालू, चोरों की तरह बिना ध्वनि किए छिप-छिपकर चलता हुआ बघेरा, द्रुत गति से भागते हुए साम्बर, शान से गर्दन उठाकर चलते हुए चीतल, एक-दूसरे के पीछे से अस्पष्ट दिखाई देती हुई पहाड़ियों के ऊपर इधर-उधर बिखरे हुए घास के मैदान और उन पहाड़ियों के पीछे बर्फ़ से ढके पहाड़, जिनमें यह सब कुछ मानो खो-सा जाता है। शिकार की इन कहानियों में लेखक ने अपने अनुभवों का यथासम्भव सही-सही वर्णन करने का प्रयास किया है। साथ ही अपने साथियों और जंगल में घटी घटनाओं का उल्लेख करते समय, उन्होंने उनसे प्राप्त सुख व दु:ख, प्यार और सहानुभूति के अनुभवों को भी अपने विवरणों का हिस्सा बनाया है।
Ghat Ghat Ka Pani
- Author Name:
Ambrish Kumar
- Book Type:

- Description: कहते हैं कि यात्राएँ हमें पुनर्जीवन देती हैं। शहरों में बसने और वहाँ की दैनिक आवाजाही में अनेक लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि जीवन कब बीत गया और कितनी बड़ी धरती उनकी कल्पना से भी अछूती रह गई। वे सौभाग्यवान होते हैं जिन्हें जीवन अवसर भी देता है और हौसला भी कि वे रोज़मर्रा की चक्की को रोककर बीच-बीच में कभी प्रकृति के विशाल वैभव से एकाकार हो जाएँ और कभी सुदूर नगरों में ही अपने ही जैसे लेकिन भिन्न ढंग से जीते-मरते लोगों से अपने सुख-दु:ख बाँट आएँ। इस पुस्तक के लेखक उन्हीं सौभाग्यवान और हौसलामन्द लोगों में हैं। घूमने का संस्कार उन्हें बचपन में ही मिल गया था जिसका निर्वाह वे अब तक कर रहे हैं। देश के लगभग हर हिस्से में हो आए हैं। यह पुस्तक उनकी उन्हीं यात्राओं का लेखा-जोखा है। अपनी सहज और अनुभवों से पकी भाषा में यहाँ वे अपने शुद्ध यात्री-रूप में उपस्थित हैं। उनकी इन यात्राओं को पढ़ते हुए उन लोगों को भी अपनी पहुँच से बाहर पड़ी उस विशाल प्रकृति, उस विराट जीवन का अनुभव होगा जो अब तक बस सोचते रहे हैं कि यार, कहीं घूम आया जाए। इस पुस्तक को पढ़कर वे अपने इरादों को और स्थगित नहीं कर पाएँगे।
Kinnar Desh Mein
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: महा घुमक्कड़ राहुल सांकृत्यायन ने हिमालय के तमाम अंचलों को अपनी आँखों से देखकर उनका परिचय लिखने का निश्चय किया था। उसी निश्चय का एक परिणाम है यह अनूठा भ्रमण-वृत्तान्त— ‘किन्नर देश में’। किन्नर देश से उनका आशय हिमाचल के उस रमणीय भू-भाग से है जो तिब्बत की सीमा पर सतलुज की घाटी में लगभग सत्तर मील की लम्बाई और प्रायः उतनी ही चौड़ाई में फैला हुआ है। यहाँ के प्राचीन निवासियों का ही जाति-नाम है किन्नर अथवा किंपुरुष। उन्हें देवयोनि माना जाता था। इस हिसाब से उनका प्रदेश देवलोक हुआ। स्वाभाविक ही उनके बारे में तमाम तरह की किंवदन्तियाँ और धारणाएँ अन्य समाजों में मौजूद रहीं। लेकिन राहुल ने पाया कि ‘जिस देश में कभी देवता रहते थे वहाँ पीछे पिछड़े मनुष्य रहने लगे’। इस पुस्तक में किन्नरों के समाज, संस्कृति, इतिहास, अर्थतंत्र, रीति-रिवाज, रहन-सहन, धर्म, मान्यताएँ, अन्धविश्वास आदि का विवरण दर्ज करते हुए वे उम्मीद जताते हैं कि इन पिछड़े मनुष्यों का देश फिर से देवलोक बन जाएगा। वस्तुतः इस पुस्तक में राहुल ऐसे एक भू-भाग का दर्शन करते हैं जो भारत का हिस्सा होते हुए भी अधिकतर भारतीयों के लिए अजाना या बहुत ही कम जाना हुआ है। कहना न होगा कि इस पुस्तक में साहित्य के सहृदय पाठकों के लिए एक अजाने-अनदेखे समाज और क्षेत्र का दिलचस्प वृत्तान्त है तो इतिहास, संस्कृति और मानवशास्त्र जैसे विषयों के अध्येताओं के लिए भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण जानकारी।
Jis Lahore Vekh Leya
- Author Name:
Preetpal Kaur
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book