Sharnarthi Shivir Mein Viwah-Geet
(0)
₹
250
200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
ललित सुरजन के साथ कहीं घूमने-फिरने का अनुभव अपने आपमें अनूठा है। वे हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि, पत्रकार, संवेदनशील चिन्तक तो हैं ही परन्तु इन सभी भूमिकाओं से बढ़कर एक सरल प्रकृति के दिलचस्प आदमी हैं जो तमाम जगहों में घूमते हैं और वहाँ की प्राकृतिक छटा, ऐतिहासिक वैभव और वर्तमान की तमाम तामीरों पर गौर करते हैं, और इससे भी ज़्यादा इन जगहों को आबाद करनेवाले लोगों के साथ एक सतत आशिकाना सलूक करते हुए चलते हैं।</p> <p>साधारण-से-साधारण चीजशें या लोगों की मौजूदगी या बर्ताव से वे पूरे देश के एक होने को दर्शा देते हैं वहीं छोटी-से-छोटी जगहों में भी ऐसी विविधताएँ ढूँढ़ लेते हैं कि आप देखते रह जाते हैं। पूरी दुनिया की छोटी-बड़ी जगहें इस किताब में सजीव हो उठी हैं। इस संकलन में सम्मिलित सारे यात्रा-वृत्तान्त ‘देशबंधु’ में प्रकाशित हुए हैं। वे किसी जगह अकेले नहीं जाते हैं, अपने साथ लिये जाते हैं ‘देशबंधु’ के पाठकों को और उन पाठकों के माध्यम से जो भी हिन्दी-भाषी हैं, उन सभी को लगातार आमंत्रण देते हुए चलते हैं। ऐसा करते हुए वे अपने चिन्तक या कवि होने को कभी भी अपने नज़रिए या लेखन पर इस तरह हावी नहीं होने देते कि एक सामान्य पाठक का साथ छूट जाए या वे स्वयं किसी भी जगह पर जाने के मज़े से वंचित हो जाएँ। ये सारे वृत्तान्त बहुत ही मज़े में लिखे गए हैं। इस तरह का मज़े में लेखन हिन्दी में लगभग गायब हो गया है और ज़्यादातर लेखक कुछ-न-कुछ प्रमाणित करने में जुट गए हैं। ललित सबको केवल यह बताते हुए चलते हैं कि आसपास देखो, घूमो और तमाम जीती जा रही ज़िन्दगियों के साथ नए रिश्ते ढूँढ़ो क्योंकि कोई भी जगह महज़ पर्यटकों के लिए नहीं है, वहाँ साकिन लोगों के लिए रची या बसाई गई है। उनका विस्मय कभी ख़त्म नहीं होता। ललित सुरजन के साथ घूमकर चश्मे-हैराँ की हैरानी नहीं जाती।
Read moreAbout the Book
ललित सुरजन के साथ कहीं घूमने-फिरने का अनुभव अपने आपमें अनूठा है। वे हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि, पत्रकार, संवेदनशील चिन्तक तो हैं ही परन्तु इन सभी भूमिकाओं से बढ़कर एक सरल प्रकृति के दिलचस्प आदमी हैं जो तमाम जगहों में घूमते हैं और वहाँ की प्राकृतिक छटा, ऐतिहासिक वैभव और वर्तमान की तमाम तामीरों पर गौर करते हैं, और इससे भी ज़्यादा इन जगहों को आबाद करनेवाले लोगों के साथ एक सतत आशिकाना सलूक करते हुए चलते हैं।</p>
<p>साधारण-से-साधारण चीजशें या लोगों की मौजूदगी या बर्ताव से वे पूरे देश के एक होने को दर्शा देते हैं वहीं छोटी-से-छोटी जगहों में भी ऐसी विविधताएँ ढूँढ़ लेते हैं कि आप देखते रह जाते हैं। पूरी दुनिया की छोटी-बड़ी जगहें इस किताब में सजीव हो उठी हैं। इस संकलन में सम्मिलित सारे यात्रा-वृत्तान्त ‘देशबंधु’ में प्रकाशित हुए हैं। वे किसी जगह अकेले नहीं जाते हैं, अपने साथ लिये जाते हैं ‘देशबंधु’ के पाठकों को और उन पाठकों के माध्यम से जो भी हिन्दी-भाषी हैं, उन सभी को लगातार आमंत्रण देते हुए चलते हैं। ऐसा करते हुए वे अपने चिन्तक या कवि होने को कभी भी अपने नज़रिए या लेखन पर इस तरह हावी नहीं होने देते कि एक सामान्य पाठक का साथ छूट जाए या वे स्वयं किसी भी जगह पर जाने के मज़े से वंचित हो जाएँ। ये सारे वृत्तान्त बहुत ही मज़े में लिखे गए हैं। इस तरह का मज़े में लेखन हिन्दी में लगभग गायब हो गया है और ज़्यादातर लेखक कुछ-न-कुछ प्रमाणित करने में जुट गए हैं। ललित सबको केवल यह बताते हुए चलते हैं कि आसपास देखो, घूमो और तमाम जीती जा रही ज़िन्दगियों के साथ नए रिश्ते ढूँढ़ो क्योंकि कोई भी जगह महज़ पर्यटकों के लिए नहीं है, वहाँ साकिन लोगों के लिए रची या बसाई गई है। उनका विस्मय कभी ख़त्म नहीं होता। ललित सुरजन के साथ घूमकर चश्मे-हैराँ की हैरानी नहीं जाती।
Book Details
-
ISBN9788126712311
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Meri Europe Yatra
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description:
राहुल सांकृत्यायन की ‘मेरी यूरोप यात्रा’ अपने गहन पर्यवेक्षण और विद्वत्तापूर्ण विवरणों के चलते आज भी उतनी ही लोकप्रिय है, जितनी अपने पहले संस्करण के समय थी। भदन्त आनन्द कौसल्यायन के साथ अकस्मात शुरू की गई इस यात्रा में राहुल जी ने अपनी लम्बी समुद्र यात्रा का लोमहर्षक और ज्ञानवर्धक विवरण तो दिया ही है, यूरोप की संस्कृति और रहन-सहन की सूक्ष्म विशिष्टतओं का उल्लेख भी किया है, और भारत व यूरोप की तुलना करते हुए कुछ निष्कर्ष भी प्रस्तुत करते चले हैं। ‘लंदन में साढ़े तीन मास’ आलेख में लंदन म्यूजियम और उसके पुस्तकालय की सुव्यवस्था का जिक्र करते हुए वे इच्छा जाहिर करते हैं कि अपने यहाँ भी अध्ययन-मनन का ऐसा ही माहौल, ऐसी ही स्वच्छता हो तो कितना अच्छा हो। पुस्तक में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बाद पेरिस और जर्मनी के संस्मरण भी अत्यन्त पठनीय और दृष्टि प्रदायक बन पड़े हैं।
Rahiman Pani Rakhiye
- Author Name:
Mridula Sinha
- Book Type:

- Description:
जीवन-पथ पर चलते हुए कितने लोग, कितनी स्थितियाँ, विविध प्रसंग, विविध रसों का रसास्वादन, भिन्न-भिन्न शहरों और निर्जन स्थलों पर अनेकानेक भावों के संवाद और स्वरों के गान सुनने को मिलते हैं। वहीं विरोधाभाषी स्पर्शों की अनुभूति भी होती है। कुछ स्पर्श ऐसे, जो कोमल और कठोर, कुछ भी हों, भुलाए नहीं भूलते। कुछ प्रसंगों को हम दूसरों को बार-बार सुनाते हैं। उसमें हर बार कुछ-न-कुछ नवीनता जुड़ती जाती है। पर मूल प्रसंग तो वही रहता है। प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. मृदुला सिन्हाजी के दायित्व का तकाजा घुमक्कड़ी था; वे पिछले चालीस वर्षों में देश-विदेश घूमती ही रहीं। अतीव संवेदनशील होने के कारण अपनी अनुभूतियों को सँजो लेती थीं। उनकी लेखनी और कोरे कागज उनके जीवन-संगी थे ही। ट्रेन में हों या प्लेन में, प्रसंग उनके मानस से उतरकर कोरे कागज को भरते रहे। इन लेखों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, प्रादेशिक और समाज में स्थित राष्ट्रीय एकता की पहचान संबंधित आलेख भी आ गए। सुदूर अंडमान निकोबार में कोई घटना घटी, उसकी रिपोर्ट ‘दुनिया मेरे आगे’ में छपने के बाद कश्मीर के लोगों को भी अपने आसपास की घटना लगी। तभी तो सब ओर के पाठक उल्लसित होते रहे और इन लेखों की लोकप्रियता लेखिका के लिए समाज के गुण-दोषों, रिश्ते-नातों के विभिन्न तासीर के आकलन का एक माध्यम बन गई। इन लेखों में मनुष्य जीवन ही नहीं, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी की कहानियाँ हैं। अपने आकार-प्रकार में भले ही ये आलेख बहुत बड़े नहीं हैं, फिर भी इनकी गहराई और गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता। हास्य-व्यंग्य है तो सोचने के लिए विवश करनेवाले प्रसंग भी। विश्वास है कि अब एक सूत्र में गूँथकर हर मौसम में खिलनेवाले विभिन्न सुगंधों और रंगों के फूलों से बना अनुभूतियों का गुच्छा पाठकों को अवश्य आनंद देगा।
Suitcase Mein Zindagi
- Author Name:
Hemant Dwivedi
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Hindi Yatra-Sahitya
- Author Name:
Shashi Shekhar Tiwari
- Book Type:

- Description:
मनुष्य की सृजनात्मक कृतियों में यात्रा संस्मरणों की बहुमूल्य सहभागिता और अक्षय अवदान को पाश्चात्य साहित्य के साथ - साथ हिन्दी साहित्य में भी स्वीकार किया गया है । किन्तु हिन्दी में , उसे अपेक्षित प्रतिष्ठा नहीं मिली है । निःसन्देह यह अपने बलबूते एक स्वतन्त्र विधा होने का सामर्थ्य रखता है । इसके कई कारणों में एक भारतीयों की आत्ममुग्धाता न होकर , उनका वह जीवन दर्शन है , जिसमें परम देव - सत्ता को ही सब - कुछ मान लिया जाता है । ' सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज , श्रीमद्भगवद्गीता , 18 वाँ अध्याय किन्तु इस महान् देश की चेतना और संवेदना , समस्त सृष्टि में परिव्याप्त सत्यम् शिवम् और सुन्दरम् को भी अपनी स्पन्दित स्मृतियों में सँजोती - सँवारती रही है । फलस्वरूप आधुनिक हिन्दी साहित्य में गद्य का विकास , आवागमन और मुद्रण की सुविधा एवं पत्र पत्रकारिता के प्रसार के साथ भूमण्डलीय सम्पर्क तथा संचार साधनों की वृद्धि के कारण हुआ । इससे , विशेषतः हिन्दी - साहित्य के अन्तर्गत , यात्रा संस्मरण के लेखन - क्षेत्र में निरन्तर अपूर्व सक्रियता दिखायी देती रही है । निःसन्देह हिन्दी का यात्रा - साहित्य भी काल क्रम में हिन्दी का ही नहीं , राष्ट्र की बहुमूल्य निधि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है ।
Kachchh Katha
- Author Name:
Abhishek Srivastava
- Book Type:

- Description:
‘कच्छ कथा’ बीते दो सौ वर्षों में दो भीषण भूकम्प झेल चुके कच्छ की वास्तविक झलक सामने लाती है। यह किताब घुमन्तू स्वभाव के पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की पिछले ग्यारह साल के दौरान कच्छ क्षेत्र में बार-बार की गई यात्राओं से हासिल उनकी जानकारियों और समझ का कुलजमा है। इस रोमांचक यात्रा-आख्यान में वह सब तो है ही जो कच्छ के भूगोल में आँखों से सहज दिखाई देता है, बल्कि वह भी है जिसे देखने के लिए सिर्फ़ आँखों की नहीं, नज़र की ज़रूरत पड़ती है। इसमें समाज और संस्कृति की जितनी शिनाख़्त है, उतनी ही सियासत की पड़ताल भी; अतीत और इतिहास का जितना उत्खनन है, उतना ही मिथकों-मान्यताओं का विश्लेषण भी; जितनी चिन्ता विरासत की है, उतना बहस विकास को लेकर भी है; गुज़रे समय के निशानों की रौशनी में आने वाले समय की सूरत का अनुमान भी इस पुस्तक में है।
हज़ारों साल पुरानी सभ्यता का पालना रहे धोलावीरा से लेकर लखपत तक, नाथपन्थी गुरु धोरमनाथ से लेकर आकबानी तक, शासक महारावों से लेकर नमक की खेती में लगे मज़दूरों तक; अनगिनत जगहों, स्मारकों और लोगों का वृत्तान्त समेटे यह किताब जितना कच्छ के बारे में है, उतना ही गुजरात और हिन्दुस्तान के बारे में भी।
वास्तव में यह किताब एक ऐसी टाइममशीन की तरह सामने आई है जो पूर्णिमा की रात में चमकते नमक के अछोर मैदान के रूप में मशहूर कच्छ के हवाले से हमें हमारे सुदूर अतीत के साथ-साथ आने वाले दौर की भी यात्रा कराती है।
सरस, प्रवाहपूर्ण भाषा और दिलचस्प अन्दाज़ में एक अविस्मरणीय कृति।
Kuchh Idhar Zindagi Kuchh Udhar Zindagi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description:
Book
Canada Nama
- Author Name:
Chitra Rana Raghav
- Book Type:

- Description:
Travlouge By Chitra rana raghav
Ek Kadam Hazar Afsane
- Author Name:
Partha Sarthi Sen Sharma
- Book Type:

- Description:
दुनिया के सभी बड़े शहरों के व्यक्तित्व में कई पहलू होते हैं और वे केवल उसी पहलू को प्रकट करते हैं, जिन्हें एक दर्शक या यात्री देखना चाहता है। इक्कीसवीं सदी में यात्रा करने का अर्थ सिर्फ चेक-इन करना, सेल्फीज पोस्ट करना या हैशटैग्स के साथ स्टेटस मैसेज लिखना नहीं है। आज इसका अर्थ है—उन स्थानों पर जाना, जिनके बारे में आपने सिर्फ पढ़ा होता है, फिल्मों में देखा होता है या सुना होता है; किसी लैंडमार्क (सीमा चिह्न) पर खड़े होकर कुछ असाधारण महसूस करना, पुरानी यादों को ताजा करना और कुछ नई यादें बनाना। ‘एक कदम हजार अफसाने’ सिर्फ स्मारकों और परिदृश्यों के बारे में एक यात्रा-वृत्तांत ही नहीं है। यह सिर्फ लंदन, पेरिस और रोम जैसे प्रसिद्ध शहरों के बारे में नहीं है, बल्कि अंग्रेजी ग्रामीण इलाके के किसी गाँव की सड़क पर अकेले टहलने के बारे में, गंगा में एक शांत नौका-विहार और अनजान गंतव्यों तक की लंबी ट्रेन-यात्राओं के बारे में भी है। यह बार्सिलोना के एक कैफे में कॉफी की चुस्की लेने के साथ-साथ भारत के किसी दूर-दराज के भूले-बिसरे रेलवे स्टेशन पर कुल्हड़ में चाय का मजा लेने के बारे में भी है। पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दुनिया भर में और साथ ही अपनी मातृभूमि में यात्रा करते हुए सभी घटनाओं, विचारों, स्मृतियों, संस्मरणों और भावनाओं का एक जटिल केलिडोस्कोप तैयार किया है, जो अंततः शब्दों में क्रिस्टलीकृत होकर विभिन्न स्थानों का एक अद्वितीय परिप्रेक्ष्य देता है—ब्रिटेन, कॉण्टिनेंटल यूरोप, तुर्की, मोरक्को और बेशक भारत के।
Swarg Yatra : Ek Lok Se Doosare Lok
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

- Description:
प्रकृति में पर्वत मुझे विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। और सौभाग्य से हिमालय हमारे पास है! फिर और क्या चाहिए। यह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक न जाने किस-किस नाम और रूप में फैला हुआ है। मध्य में स्थित हिमाचल प्रदेश में कुछ एक साल रहने का अवसर मिला था तो उस दौरान किन्नौर से लेकर लाहौल स्पीती, रोहतांग पास की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ लद्दाख़ के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था। कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी हुई कि उत्सुकतावश वहाँ जाने की इच्छा हुई थी।
लद्दाख़ वो क्षेत्र है जो आज भी दुर्गम है। आम भारतीय पर्यटक की कल्पना और चाहत से बाहर। मगर इस क्षेत्र में सदियों से विदेशी आ रहे हैं। ख़ासकर यह जानकर अचम्भा होता है कि यूरोप के कई विद्वान यहाँ तब से आ रहे हैं, जब यहाँ कोई भी साधन नहीं था। हज़ारों साल से यह पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और आगे यारकंड व तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रहा है। बौद्ध भिक्षु ईसा पूर्व इस क्षेत्र में आने लगे थे। और यही नहीं, इस क्षेत्र को उन्होंने बुद्धमय कर दिया था। सोचिए, एक ऐसा प्रदेश जो आज भी दूर दिखाई देता है वहाँ शताब्दियों से बौद्धधर्म विराजमान है। इन सब धार्मिक व बौद्धिकजनों के साथ-साथ व्यापारियों और सेनाओं का काफ़िला, कश्मीर से होता हुआ ही आता-जाता रहा। कश्मीर और लद्दाख़, हिमालय की दो विशिष्ट घाटियाँ हैं। दो पारम्परिक व समृद्ध सभ्यताएँ। प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सौन्दर्य के दो अति महत्त्वपूर्ण केन्द्र, इतने नज़दीक!!! इसे प्रकृति और मानवीय इतिहास का संयोग ही कहेंगे।
संक्षेप में कहूँ तो यह यात्रा प्रकृति के बीच क़दमताल करने जैसी थी। मुश्किलों से सामना हुआ, तो क्या!! प्रकृति भी तो अपने नग्न रूप में उपस्थित हुई। मूल रंग में। पूरे वैभव के साथ। विराट। मुश्किल इस बात की हुई है कि सौन्दर्य को देखते ही मन-मस्तिष्क स्थिर हो गया। उठ रहे विचारों का अहसास तो हुआ मगर व्यक्त कर पाना मुमकिन न हो सका। विस्तार इतना कि वर्णन सम्भव नहीं। असल में आँखें ही देख सकती हैं, कैमरे व्यर्थ हो जाते हैं।
Main Ghumakkar Vanon Ka
- Author Name:
Sherjung
- Book Type:

- Description:
शिकार की कहानियाँ वनप्राणियों के जीवन को ही नहीं, बल्कि वनों के परिवेश और उनकी भिन्न-भिन्न स्थितियों को भी प्रदर्शित करती हैं। मनुष्य और जानवर, समय और स्थान तथा अन्य सब घटनाएँ जो शिकारी को वन-जीवन के निकट ले जाती हैं और किसी भी शिकार कथा का अभिन्न अंग हैं। जानवर का पीछा करने का अपना ही आनन्द है जिसके विचार मात्र से शिकारी की आँखों के सामने जंगल के अत्यन्त सुन्दर दृश्य नाचने लगते हैं, जैसे घने वृक्षों के नीचे धरती पर पड़ी उनकी गहरी और ठंडी छाया, प्रभात के शान्तिमय वातावरण में तूफ़ानी सागर की मतवाली लहरों की भाँति चारों ओर गूँजती शेरों की ऊँची एवं गहरी गर्जनाएँ हाथियों की तुरही-की-सी आवाज़ें, शोरगुल मचाते हुए जंगली साँड, मस्त चाल से चलता हुआ भालू, चोरों की तरह बिना ध्वनि किए छिप-छिपकर चलता हुआ बघेरा, द्रुत गति से भागते हुए साम्बर, शान से गर्दन उठाकर चलते हुए चीतल, एक-दूसरे के पीछे से अस्पष्ट दिखाई देती हुई पहाड़ियों के ऊपर इधर-उधर बिखरे हुए घास के मैदान और उन पहाड़ियों के पीछे बर्फ़ से ढके पहाड़, जिनमें यह सब कुछ मानो खो-सा जाता है। शिकार की इन कहानियों में लेखक ने अपने अनुभवों का यथासम्भव सही-सही वर्णन करने का प्रयास किया है। साथ ही अपने साथियों और जंगल में घटी घटनाओं का उल्लेख करते समय, उन्होंने उनसे प्राप्त सुख व दु:ख, प्यार और सहानुभूति के अनुभवों को भी अपने विवरणों का हिस्सा बनाया है।
O Maria Peeta Che
- Author Name:
Pratibha Adhikari
- Book Type:

- Description:
Book
Ek Kam Sath - Rajurkar Raj
- Author Name:
Ramarao Vamankar
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Whose Samosa is it Anyway?
- Author Name:
Sonal Ved
- Book Type:

- Description:
In this book, accompany Sonal Ved on a journey of taste through the various timelines across the Indian subcontinent. We go from the banks of the Indus in 1900 bc to the great kingdoms of the north many centuries later; from the time of the Mauryans to when the Mughal Sultanate reigned supreme. Meet the Europeans merchants desperate to trade in Indian treasures, be it the deep-blue indigo or the pricey pepper. On this trip discover answers to such questions as What are the origins of chutney or of the fruit punch, and how are they connected to India? Who taught us how to make ladi pav and kebabs, and how did the Burmese khow suey land up on the wedding menus of Marwaris? The author takes us through the food history and traditions from the mountains in Kashmir to the backwaters of Kanyakumari; from the ports of the Bay of Bengal to the shores of the Arabian Sea, where traders and travellers arrived from the world over. And, finally, we find out whose samosa it truly is . . .
Shahargoi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description:
Book
Ras Bhang
- Author Name:
Akshaya Bahibala
- Book Type:

- Description:
1998 से 2008 तक, अक्षय बहिबाला भाँग की गिरफ़्त में थे–गाँजा पीते, भाँगे खाते और पीते, पुरी के समुद्री तट पर विदेशियों, हिप्पियों, बैकपैकर्स और दूसरे भगोड़ों के साथ व्यसन में कभी भंड तो कभी बेहद अवसाद में! फिर वह उस किनारे से लौटते हैं, जिसके आगे जीवन में कोई राह नहीं थी। वह जीने की कोशिश करते हैं, कभी वेटर बनकर, कभी सेल्समैन तो कभी पुस्तक-विक्रेता के रूप में वापसी की कोशिशें करते हैं। इस असाधारण किताब की शुरुआत वह अपने व्यसन के दौर के टूटे-बिखरे किरचों को जोड़ते हुए करते हैं। वहाँ से ओडिशा के सुदूर कोनों में बैठे लोगों की कहानियों तक पहुँचते हैं, जिनकी ज़िन्दगी भाँग, गाँजा और अफ़ीम के गिर्द घूमती है। इनमें एक सरकारी लाइसेंसशुदा भाँग की दुकान वाला है जो सबसे शुद्ध भाँग देने की गर्वीली घोषणा करता है और ज़ोर देकर कहता है कि भाँग तो लोगों को यीशु बना सकता है। एक अफ़ीम कटर है जिसने अपने बचपने में अफ़ीम के ढेर को सरसों तेल से ढीला कर छोटे टैबलेट बनाना सीखा। एक लड़की भी है, जिसने अफ़ीम चाटकर हैजा को मात दी और फिर आजीवन एडिक्ट रही। गाँजे की खेती करनेवाला भी है, तो आबकारी विभाग के लोगों की कहानी भी जो गाँजे की खेती को नष्ट करने जाते हैं और गुस्साए गाँववाले उनको पीट देते हैं। इन कहानियों के साथ गुँथे हैं—गाँजे और अफ़ीम की ज़ब्ती और नष्ट करने के सरकारी आँकड़े, भाँग के औषधीय उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और भाँग लड्डू और शर्बत बनाने की रेसिपी भी। भारत के शायद सबसे लोकप्रिय नशों में एक की यादों, क़िस्सों, तथ्यों और आँकड़ों का नशीला, अलहदा और बेहद मनोरंजक सफ़र!
Myriad Destinations
- Author Name:
Virag Shivpuri
- Book Type:

- Description:
A captivating collection of short stories that takes readers on a journey across the globe. With real people, raw emotions, and genuine destinations, each story offers a glimpse into the lives of those who call these places home. The tales are expertly crafted with a perfect blend of suspense, nostalgia, and surprise. From the bustling streets of Mumbai to the romantic boulevards of Paris, the majestic peaks of Garhwal to the cosmopolitan city of Frankfurt, each locale is vividly brought to life, making readers feel as though they are right there alongside the characters. With each turn of the page, readers will be transported to a new destination and swept away by the stories’ depth, heart, and humanity.
Yadon Ka Laal Galiyara : Dantewara
- Author Name:
Ramsharan Joshi
- Book Type:

- Description:
रामशरण जोशी की यह पुस्तक ज़िन्दा यादों की एक विरल गाथा है। उन ज़िन्दा यादों की जिनमें हरे-भरे कैनवस पर ख़ून के छींटे दूर-दूर तक सवालों की तरह दिखाई देते हैं। ऐसे सवालों की तरह एक देश के पूरे नक़्शे पर, जिन्हें राजसत्ता ने अपने आन्तरिक साम्राज्यवाद प्रेरित विकास और विस्तार के लिए कभी सुलझाने का न्यायोचित प्रयास नहीं किया, बल्कि ‘ग्रीन हंट’ और ‘सलवा जुडूम’ के नाम पर राह में आड़े आनेवाले 'लोग और लोक' दोनों को ही अपराधी बना दिया। और यातनाओं को ऐसे दु:स्वप्न में बदला कि दुनिया-भर के इतिहासों के साक्ष्य के बावजूद छत्तीसगढ़, झारखंड, ओड़िसा, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि के वनांचलों का भविष्य अपने आगमन से पहले लहकता रहा, 'लाल गलियारा' बनता रहा।
यह पुस्तक राजसत्ता और वैश्विक नव-उपनिवेशवादी चरित्र से न सिर्फ़ नक़ाब हटाती है बल्कि आदिवासियों यानी हाशिए के संघर्ष का वैज्ञानिक विश्लेषण भी करती है। रेखांकित करती है कि ‘हाशिए के जन का अपराध केवल यही रहा है कि प्रकृति ने उन्हें सोना, चाँदी, लोहा, मैगनीज, ताँबा, एलुमिनियम, कोयला, तेल, हीरे-जवाहरात, अनन्त जल-जंगल-ज़मीन का स्वाभाविक स्वामी बना दिया; समता, स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और न्यायपूर्ण जीवन की संरचना से समृद्ध किया। इसलिए इस जन ने अन्य की व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया। यदि अन्यों ने किया तो इस जन ने उसका प्रतिरोध भी ज़रूर किया। इस आत्म-रक्षात्मक प्रतिरोध का मूल्य इस जन को पलायन, परतंत्रता, शोषण और उत्पीड़न के रूप में चुकाना पड़ा।
अपने काल-परिप्रेक्ष्य में ‘यादों का लाल गलियारा : दंतेवाड़ा' पुस्तक बस्तर, जसपुर, पलामू, चन्द्रपुर, गढ़चिरौली, कालाहांडी, उदयपुर, बैलाडीला, अबूझमाड़, दंतेवाड़ा सहित कई वनांचलों के ज़मीनी अध्ययन और अनुभवों के विस्फोटक अन्तर्विरोध की इबारत लिखती है। लेखक ने इन क्षेत्रों में अपने पड़ावों की ज़िन्दा यादों की ज़मीन पर अवलोकन-पुनरवलोकन से जिस विवेक और दृष्टि का परिचय दिया है, उससे नई राह को एक नई दिशा की प्रतीति होती है। यह पुस्तक हाशिए का विमर्श ही नहीं, हाशिए का विकल्प-पाठ भी प्रस्तुत करती है।
Log Jo Mujhmein Rah Gaye
- Author Name:
Anuradha Beniwal
- Book Type:

- Description:
एक लड़की जो अलग-अलग देशों में जाती है और अलग-अलग जींस और जज़्बात के लोगों से मिलती है। कहीं गे, कहीं लेस्बियन, कहीं सिंगल, कहीं तलाक़शुदा, कहीं भरे-पूरे परिवार, कहीं भारत से भी ‘बन्द समाज’ के लोग। कहीं जनसंहार का—रोंगटे खड़े करने और सबक देने वाला—स्मारक भी वह देखती है जिसमें क्रूरता और यातना की छायाओं के पीछे ओझल बेशुमार चेहरे झलकते हैं।
उनसे मुख़ातिब होते हुए उसे लगता है, सब अलग हैं लेकिन सब ख़ास हैं। दुनिया इन सबके होने से ही सुन्दर है। क्योंकि सबकी अपनी अलहदा कहानी है। इनमें से किसी के भी नहीं होने से दुनिया से कुछ चला जाएगा। अलग-अलग तरह के लोगों से कटकर रहना हमें बेहतर या श्रेष्ठ मनुष्य नहीं बनाता। उनसे जुड़ना, उनको जोड़ना ही हमें बेहतर मनुष्य बनाता है; हमारी आत्मा के पवित्र और श्रेष्ठ के पास हमें ले जाता है। ऐसे में उस लड़की को लगता है—मेरे भीतर अब सिर्फ़ मैं नहीं हूँ, लोग हैं। लोग—जो मुझमें रह गए!
लोग जो मुझमें रह गए—‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ कहने और जीने वाली अनुराधा बेनीवाल की दूसरी किताब है। यह कई यात्राओं के बाद की एक वैचारिक और रूहानी यात्रा का आख्यान है जो यात्रा-वृत्तान्त के तयशुदा फ्रेम से बाहर छिटकते शिल्प में तयशुदा परिभाषाओं और मानकों के साँचे तोड़ते जीवन का दर्शन है।
‘यायावरी आवारगी’ श्रृंखला की यह दूसरी किताब अपनी कंडीशनिंग से आज़ादी की एक भरोसेमन्द पुकार है।
Surya Ka Jalavtaran
- Author Name:
Satish Jayaswal
- Book Type:

- Description:
पूर्वोत्तर भारत की यात्राओं का यह वृत्तान्त-संकलन ‘सूर्य का जलावतरण’ हमें भारतीय राष्ट्र राज्य के उन क्षेत्रों से परिचित कराता है, जो अपने रहन-सहन, बोली-भाषा और संस्कृति के लिहाज से उस उत्तर व मध्य भारत से नितान्त भिन्न हैं, जिसे हम अपनी रोजमर्रा की निगाह से सम्पूर्ण भारत के रूप में देखने के आदी हैं।
इस पुस्तक से गुजरते हुए हमें एक बहु-सांस्कृतिक विराट भारत को जानने का अवसर मिलता है, और अपने उन लोगों को जानने का भी जो धर्म, रीति-रिवाज और वेशभूषा के फर्क के बावजूद भारत को सम्पूर्ण भारत बनाते हैं।
नगालैंड, जो म्यांमार के साथ अपनी सीमा साझा करता है और जहाँ दिन-भर साधारण नगा और बर्मी लोग सीमा के आर-पार अपनी छोटी-छोटी व्यापारिक गतिविधियाँ करते हैं, लेखक ने इस विवरण को बहुत नजदीक से देखकर यहाँ अंकित किया है।
इसी तरह मणिपुर की सीमाएँ भी म्यांमार से गुँथी हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मिजोरम और सिक्किम भी अपनी तमाम विविधता और सौन्दर्य के साथ इस पुस्तक में मौजूद हैं।
इन यात्रा-विवरणों में लेखक ने राजनीतिक विडम्बनाओं को भी नजरन्दाज नहीं किया है, जो इन क्षेत्रों में अकसर गम्भीर रूप लेती रही हैं। मसलन मणिपुर की वर्तमान समस्या।
लेकिन लेखक का खास जोर उस सौन्दर्य पर है जो यहाँ की प्रकृति और जन-जीवन में साक्षात् होता है; एक स्वप्निल सौन्दर्य जिसे हर कोई अपनी आँखों से देखना चाहेगा।
Yayawar Hain, Awara Hain, Banjare Hain...
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description:
Book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book