Upnishadon ki kahaniya
(0)
Author:
Rampratap Tripathi ShastriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
299
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उपनिषदों का दूसरा नाम ‘रहस्यविद्या’ बतलाया गया है। उपनिषदें वह रहस्यविद्या हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय संस्कृति की सभी विचारधाराओं को जीवन-दान करती हैं। वे इतनी रहस्यमयी हैं कि उनका सर्वस्व जानने का अधिकारी कोई एक व्यक्ति कभी नहीं रहा। यदि कोई एक ऐसा व्यक्ति रहा भी हो तो उसका मत ही सर्वमान्य नहीं रहा। इस ‘रहस्यविद्या' को जानने का अधिकार प्राप्त करने के लिए 'नचिकेता' के समान सर्वस्व त्याग करना पड़ता था। उपनिषदों में उस काल की अध्यात्म एवं दर्शन-सम्बन्धी सामग्रियों के भव्य चित्र ही नहीं सँजोए गए हैं, प्रत्युत भारतीय जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं का गम्भीर विवेचन भी उनमें किया गया है। मानव-जीवन में ही नहीं, इस निखिल विश्व में व्याप्त सत्य की जिज्ञासा एवं उसके अन्वेषण के लिए उपयोगी साधन की ऐसी उत्कट उत्कंठा उनमें व्यक्त है, जो विश्व के विस्तृत वाङ्मय में अन्यत्र दुर्लभ है। मानवीय प्रतिभा एवं पहुँच का इनसे बढ़कर कोई दूसरा उदाहरण इस रूप में अभी तक नहीं बन सका है। सचमुच, मानव की उत्कृष्ट कल्पना का ऐसा शाश्वत एवं कल्याणकारी रूप विश्व-साहित्य में अभी तक दूसरा नहीं दिखाई पड़ता। यही कारण है कि आर्य धर्म न माननेवाले भी उन पर तन-मन से निछावर हैं।</p> <p>उपनिषदों में दी गई शिक्षाओं में वह दिव्य तेज़ है जिसे व्यावहारिक रूप में लाकर कोई भी व्यक्ति, कोई भी समाज अवनति के गर्त में कभी नहीं गिर सकता, प्रचुर दुःख-दैन्य से छुटकारा पा सकता है। विद्वेश और घृणा की आग से उसे कोई भय नहीं हो सकता और न भौतिक अभाव के कारण उसे दर-दर भटकना ही पड़ेगा। काम-क्रोधादि विकारों को दूर करने की इनमें अमोघ शक्ति है, आत्म-ज्योति को पहचानने के लिए इनसे बढ़कर कोई दूसरा साधन नहीं है।</p> <p>उपनिषदें शाश्वत ज्ञान की अक्षय भंडार हैं। सारे संसार में ऐसा कोई दर्शन नहीं है, विचारधारा</p> <p>नहीं, जो इनसे प्रभावित नहीं हुई है।</p> <p>प्रस्तुत पुस्तक में उन्नीस कहानियाँ संगृहीत हैं। इनकी भाषा में सरलता लाने की चेष्टा की गई है तथा कुछ महत्त्वपूर्ण अवतरण बढ़ा दिए गए हैं जिससे पुस्तक की उपयोगिता और बढ़ गई है। आशा है, प्रस्तुत संस्करण छात्रों, शोधार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।
Read moreAbout the Book
उपनिषदों का दूसरा नाम ‘रहस्यविद्या’ बतलाया गया है। उपनिषदें वह रहस्यविद्या हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय संस्कृति की सभी विचारधाराओं को जीवन-दान करती हैं। वे इतनी रहस्यमयी हैं कि उनका सर्वस्व जानने का अधिकारी कोई एक व्यक्ति कभी नहीं रहा। यदि कोई एक ऐसा व्यक्ति रहा भी हो तो उसका मत ही सर्वमान्य नहीं रहा। इस ‘रहस्यविद्या' को जानने का अधिकार प्राप्त करने के लिए 'नचिकेता' के समान सर्वस्व त्याग करना पड़ता था। उपनिषदों में उस काल की अध्यात्म एवं दर्शन-सम्बन्धी सामग्रियों के भव्य चित्र ही नहीं सँजोए गए हैं, प्रत्युत भारतीय जीवन-दर्शन के सभी पहलुओं का गम्भीर विवेचन भी उनमें किया गया है। मानव-जीवन में ही नहीं, इस निखिल विश्व में व्याप्त सत्य की जिज्ञासा एवं उसके अन्वेषण के लिए उपयोगी साधन की ऐसी उत्कट उत्कंठा उनमें व्यक्त है, जो विश्व के विस्तृत वाङ्मय में अन्यत्र दुर्लभ है। मानवीय प्रतिभा एवं पहुँच का इनसे बढ़कर कोई दूसरा उदाहरण इस रूप में अभी तक नहीं बन सका है। सचमुच, मानव की उत्कृष्ट कल्पना का ऐसा शाश्वत एवं कल्याणकारी रूप विश्व-साहित्य में अभी तक दूसरा नहीं दिखाई पड़ता। यही कारण है कि आर्य धर्म न माननेवाले भी उन पर तन-मन से निछावर हैं।</p>
<p>उपनिषदों में दी गई शिक्षाओं में वह दिव्य तेज़ है जिसे व्यावहारिक रूप में लाकर कोई भी व्यक्ति, कोई भी समाज अवनति के गर्त में कभी नहीं गिर सकता, प्रचुर दुःख-दैन्य से छुटकारा पा सकता है। विद्वेश और घृणा की आग से उसे कोई भय नहीं हो सकता और न भौतिक अभाव के कारण उसे दर-दर भटकना ही पड़ेगा। काम-क्रोधादि विकारों को दूर करने की इनमें अमोघ शक्ति है, आत्म-ज्योति को पहचानने के लिए इनसे बढ़कर कोई दूसरा साधन नहीं है।</p>
<p>उपनिषदें शाश्वत ज्ञान की अक्षय भंडार हैं। सारे संसार में ऐसा कोई दर्शन नहीं है, विचारधारा</p>
<p>नहीं, जो इनसे प्रभावित नहीं हुई है।</p>
<p>प्रस्तुत पुस्तक में उन्नीस कहानियाँ संगृहीत हैं। इनकी भाषा में सरलता लाने की चेष्टा की गई है तथा कुछ महत्त्वपूर्ण अवतरण बढ़ा दिए गए हैं जिससे पुस्तक की उपयोगिता और बढ़ गई है। आशा है, प्रस्तुत संस्करण छात्रों, शोधार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।
Book Details
-
ISBN9788180314957
-
Pages233
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Gajanan Madhav Muktibodh
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- Description: इस संकलन की लगभग सभी कहानियाँ प्रवासी भारतीयों के जीवन-संघर्ष, अनुभव और ऊहापोह की कहानियाँ हैं; लेकिन भारत की मिट्टी की सुगंध हर कहानी में रची-बसी है, चाहे वह लत हो, तमाशा खत्म हो या काल सुंदरी। घर का ठूँठ की चन्नी विभाजन, टूटन और बिखराव की पीड़ा के चलते तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद ठूँठ होकर रह जाती है। पराया देश का नायक रंग और नस्ल भेद के दमघोंटू वातावरण में जी रहा है। अभिशप्त का नायक प्रवासी जीवन से तालमेल न बिठा पाने के संकट से ग्रस्त है तो सुबह की स्याही लंदन की स्याह और संकीर्ण मानसिकता का परिचय कराती है। पुराना घर, नए वासी में पश्चिमी संस्कृति में अपनी पहचान के गुम हो जाने का दर्द है तो सर्द रात का सन्नाटा में अपनों से छले जाने की पीड़ा। आदमखोर उपभोक्ता संस्कृति की स्वार्थांधता की परतें खोलती है तो फिर कभी सही... भौतिक मूल्यों और मानव-मन की भटकन का विश्लेषण करती है। इस बार कहानी..., बुधवार की छुट्टी, बेघर, एक मुलाकात और चाँदनी भी प्रवासी मन की पीड़ाओं का सघन ब्यौरा देने वाली कहानियाँ हैं। अपने देश से बाहर रहते हुए अपने देश की मिट्टी से जुड़ने की ललक से भरे रचनाकारों की ये कहानियाँ निश्चय ही हिंदी के कथा-जगत् में अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं।
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