Pratinidhi Kahaniyan : Rajendra Singh Bedi
Author:
Rajendra Singh BediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
तरक़्क़ीपसन्द उर्दू कथाकारों में राजेंद्रसिंह बेदी का नाम अत्यन्त आदर के साथ लिया जाता है। उनकी रचनाओं की संख्या कम ज़रूर है लेकिन ज़मीन बहुत बड़ी है।
इस संग्रह में उनकी प्राय: सभी महत्त्वपूर्ण कहानियाँ शामिल हैं। इनसे जो सच्चाइयाँ उजागर हुई हैं, वे ज़िन्दगी को मात्र जी लेने से नहीं, उसमें कुछ तलाशने से ही सम्भव हैं। कहानी कहने के लिए बेदी के पास न तो बना-बनाया कोई साँचा है, न ही बुद्धिजीवी क़िस्म का कोई पूर्वग्रह। यही कारण है कि इन कहानियों से गुज़रते हुए हमारी अपनी संजीदगी बेदी की संजीदगी से एकमेक हो उठती है। उनकी अनुभवों की सच्चाई एक कलात्मक व्यवस्था के तहत हमारे भीतर उतर जाती है और शैली का संयम तथा भाषा की नज़ाकत हमें मुग्ध कर लेते हैं।
अपनी कहानियों की नारी को बेदी ने रूह तक जानने और रचने की कोशिश की है। इसलिए कल्याणी, लाजवन्ती, कीर्ति और इन्दु जैसे जीवन्त नारी-चरित्र पाठकों के दिलो-दिमाग़ पर सदा-सदा के लिए नक़्श हो जाने की क्षमता से परिपूर्ण हैं।
ISBN: 9788171789559
Pages: 142
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
‘गिरगिट’ कथा-संग्रह की सभी कहानियाँ जिज्ञासा, रोचकता, भाव-सबलता एवं युगबोध से सम्पन्न हैं। आधुनिक भावबोध से युग के सन्दर्भों के यथार्थ को सूक्ष्म विवेचन और विषय वैविध्य के साथ व्यापक बनाया गया है। सभी कहानियाँ वैचारिक एवं अनुमूल्यात्मक संयोग से युक्त एवं अत्यन्त लोकप्रिय हैं। जीवन के सन्दर्भों का यथार्थ चित्रण विषयगत विविधता परिवेशगत विस्तार, वैचारिक संयोग एवं शिल्पगत वैशिष्ट्य इस संग्रह की कहानियों की विशेषताएँ हैं। इसमें समाज में बदलते हुए सम्बन्धों का सूक्ष्म अध्ययन भी है, जिसकी अभिव्यक्ति चारुता से इन कहानियों में हुई है।
गिरगिट रंग बदलने के लिए प्रसिद्धि पा चुका है, किन्तु मानवाकृति को स्वयं से अधिक रंगों में देखकर स्वयं गिरगिट लज्जित बन पराजित है, यही अखिलेश निगम द्वारा विरचित कहानियों में दर्शनीय है।
इन सभी कहानियों का विषय राष्ट्रीय दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में मानव जीवन की समस्याओं से जुड़ा है। कहानीकार का उद्देश्य सर्वत्र सुधारवादी और आशावादी है। इन कहानियों में कहीं-कहीं एक ही पात्र एक समय में मन के विभिन्न स्तरों पर जीता है, जहाँ चारित्रिक विसंगतियाँ ही कहानी की विशेषता बन गई हैं।
Nibandh Evam Kahaniyan
- Author Name:
Anjum sharma
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- Description: Awating description for this book
Pratinidhi Kahaniyan : Kashinath Singh
- Author Name:
Kashinath Singh
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- Description: साठोत्तरी पीढ़ी के जिन प्रगतिशील कथाकारों ने हिन्दी कहानी को नई ज़मीन सौंपने का काम किया, काशीनाथ सिंह का नाम उनमें विशेष महत्त्व रखता है। इस संग्रह में उनकी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल की गई हैं। ध्वस्त होते पुराने समाज, व्यक्ति-मूल्यों तथा नई आकांक्षाओं के बीच जिस अर्थद्वन्द्व को जन-सामान्य झेल रहा है, उसकी टकराहटों से उपजी, भयावह अन्तःसंघर्ष को रेखांकित करती हुई ये कहानियाँ पाठक को सहज ही अपनी-सी लगने लगती हैं। इनमें हम वर्तमान राजनीतिक ढाँचे के तहत पनप रही मूल्य-भ्रंशता को भी देखते हैं और जीवन-मूल्यों की पतनशील त्रासदी को भी महसूस करते हैं। समकालीन यथार्थ की गहरी पकड़, भाषा-शैली की सहजता और एक ख़ास क़िस्म का व्यंग्य इस सन्दर्भ में पाठक की भरपूर मदद करता है। वह एक प्रगतिशील मूल्य-दृष्टि को अपने भीतर खुलते हुए पाता है, क्योंकि काशीनाथ सिंह के कथा-चरित्र विभिन्न विरोधी जीवन-स्थितियों में पड़कर स्वयं अपना-अपना अन्तःसंघर्ष उजागर करते चलते हैं और इस प्रक्रिया में लेखकीय सोच की दिशा सहज ही पाठकीय सोच से एकमेक हो उठती है।
Nakbesar Kaga Le Bhaga
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
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Description:
चन्द्रकिशोर जायसवाल की कहानियों में भारतीय जीवन का यथार्थ अपने उसी रूप में आता है, जिस रूप में वह हमारे रोज़मर्रा जीवन का हिस्सा होता है। कोई वाद या विचार उसे न विकृत करता है, न महिमामंडित।
इस संग्रह में उनकी चर्चित कहानी ‘नकबेसर कागा ले भागा’ के अलावा छह और कहानियाँ शामिल हैं जो जीवन के विभिन्न पक्षों और हमारे आसपास के चरित्रों के सामाजिक और मानसिक अन्तर्जीवन का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करती हैं।
चन्द्रकिशोर जायसवाल लोक, परिवेश और जीवन के उपेक्षित क्षेत्रों की गहरी समझ रखते हैं। यही वह चीज़ है जो उनकी कहानियों को विश्वसनीय और समाजशास्त्रीय विवेचन के लिहाज से प्रामाणिक बनाती है।
इस संग्रह की शीर्षक कथा में उन्होंने भिखारियों के रहन-सहन, उनकी भावनाओं, इच्छाओं और आपस में उनके रिश्तों को अंकित करते हुए मानवीय अनुभवों का एक मार्मिक और यथार्थपरक वितान रचा है।
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