Vish ke Daant Tatha Anya Kahaniyan
About the book
नलिन जी कहानी को ‘शोधना’ समझते थे। उनके मुताबिक कहानीकार बिन्दु में केन्द्रित विराट और पूर्ण सत्य का उद्घाटन करता है। कहानीकारों के दो काम होते हैं—बिन्दु फैले नहीं और बिन्दु पर से निगाह विचले नहीं। पिंड में ब्रह्मांड का सत्य देख लेना कृच्छ्र-साधना है, यह संत ही नहीं कहानीकार भी जानते हैं।' यही उनके कहानीकार की आधार-भूमि थी। जितने समय में कुछ लोगों ने उपन्यास पूरे कर लिए उतना समय उन्होंने एक-एक कहानी को दिया। उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों में फैला है। इस दौरान कई कहानी आन्दोलन चले लेकिन उन्होंने खुद को उनसे अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की ग्रन्थियाँ, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं। लेखन-काल की दृष्टि से देखें तो उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों का है। इस दरम्यान कई कहानी-आन्दोलन चले, उन आन्दोलनों से उन्होंने अपने को अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की ग्रन्थि, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं। ‘विष के दाँत’ उनकी प्रसिद्ध सामाजिक कहानी है। मुख्यधारा में ‘विष के दाँत’ कहानी की चर्चा कम हुई है। लेकिन कथ्य और शिल्प, दोनों दृष्टियों से यह एक कालजयी कहानी है। इसमें बहुत सहजता से कुलीन वर्ग की हिप्पोक्रेसी और शोषण को उजागर किया गया है। संग्रह में शामिल ‘एक चाबुक पीछे’ और ‘पीढ़ियाँ’ बाल-मनोविज्ञान की कहानियाँ हैं। स्त्री-मनोग्रन्थि को चित्रित करनेवाली कहानियों में ‘अली और कली’ एक उल्लेखनीय कहानी है। ‘प्रकृति और पाप’, ‘बन्दर का खेल’, ‘बाँध और धारा’ आदि कहानियाँ पुरुष-मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखती हैं। इसके अलावा ‘ये बीमार लोग’, ‘समय और आदमी’, ‘जानी हुई चीजें’ और ‘पराजित’ धीरेन सीरीज की कहानियाँ हैं। इन कहानियों का नायक धीरेन है। दरअसल, वे एक प्रयोगवादी उपन्यास लिख रहे थे। उनकी योजना थी कि पाठक अगर अलग-अलग पढ़े तो उसे कहानी का आस्वाद मिले और पूरा पढ़ने पर उपन्यास का। यह श्रृंखला पूरी नहीं हो सकी थी लेकिन एक प्रयोग के रूप में आज भी इसका अपना महत्त्व है।
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About the Book
नलिन जी कहानी को ‘शोधना’ समझते थे। उनके मुताबिक कहानीकार बिन्दु में केन्द्रित विराट और पूर्ण सत्य का उद्घाटन करता है। कहानीकारों के दो काम होते हैं—बिन्दु फैले नहीं और बिन्दु पर से निगाह विचले नहीं। पिंड में ब्रह्मांड का सत्य देख लेना कृच्छ्र-साधना है, यह संत ही नहीं कहानीकार भी जानते हैं।' यही उनके कहानीकार की आधार-भूमि थी। जितने समय में कुछ लोगों ने उपन्यास पूरे कर लिए उतना समय उन्होंने एक-एक कहानी को दिया। उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों में फैला है। इस दौरान कई कहानी आन्दोलन चले लेकिन उन्होंने खुद को उनसे अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की ग्रन्थियाँ, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं।
लेखन-काल की दृष्टि से देखें तो उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों का है। इस दरम्यान कई कहानी-आन्दोलन चले, उन आन्दोलनों से उन्होंने अपने को अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की ग्रन्थि, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं। ‘विष के दाँत’ उनकी प्रसिद्ध सामाजिक कहानी है। मुख्यधारा में ‘विष के दाँत’ कहानी की चर्चा कम हुई है। लेकिन कथ्य और शिल्प, दोनों दृष्टियों से यह एक कालजयी कहानी है। इसमें बहुत सहजता से कुलीन वर्ग की हिप्पोक्रेसी और शोषण को उजागर किया गया है। संग्रह में शामिल ‘एक चाबुक पीछे’ और ‘पीढ़ियाँ’ बाल-मनोविज्ञान की कहानियाँ हैं। स्त्री-मनोग्रन्थि को चित्रित करनेवाली कहानियों में ‘अली और कली’ एक उल्लेखनीय कहानी है। ‘प्रकृति और पाप’, ‘बन्दर का खेल’, ‘बाँध और धारा’ आदि कहानियाँ पुरुष-मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखती हैं। इसके अलावा ‘ये बीमार लोग’, ‘समय और आदमी’, ‘जानी हुई चीजें’ और ‘पराजित’ धीरेन सीरीज की कहानियाँ हैं। इन कहानियों का नायक धीरेन है। दरअसल, वे एक प्रयोगवादी उपन्यास लिख रहे थे। उनकी योजना थी कि पाठक अगर अलग-अलग पढ़े तो उसे कहानी का आस्वाद मिले और पूरा पढ़ने पर उपन्यास का। यह श्रृंखला पूरी नहीं हो सकी थी लेकिन एक प्रयोग के रूप में आज भी इसका अपना महत्त्व है।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2024
- Weight
- 100 grams
- ISBN-13
- 9788119989782
- Pages
- 143
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 13.5 × 20.5 cm
- Language
- Hindi
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