K Kahani ka
Author:
Manish VaidyaPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
Description Awaited
ISBN: shivna20276
Pages: 140
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 11-18
Country of Origin: India
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- Description: मिनी और अन्य कहानियाँ अवधेश प्रीत की नई कहानियों का संग्रह है। एक कथाकार के रूप में उन्होंने समाज, राजनीति और निरन्तर बदलते भारतीय यथार्थ को व्यावहारिक भाषा और शिल्प के साथ अंकित किया है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ मौजूदा समय के कई सवालों से रू-ब-रू होते हुए उन्हें हमारे विचार के दायरे में लाती हैं। संग्रह की शीर्षक कथा ‘मिनी’ का फलक इतना व्यापक है जिसमें नए रूप में ढलती स्त्री-चेतना से लेकर समकालीन पत्रकारिता तक कई मुद्दों की तरफ़ हमारा ध्यान जाता है। इसी प्रकार दूसरी कहानी ‘नग्न’ में पुलिस तंत्र में व्याप्त ग़ैर-ज़िम्मेदारी को बहुत कौशल के साथ रेखांकित किया गया है। यह कहानी बताती है कि न्याय की प्रक्रिया में पुलिस की अरुचि के चलते कैसे एक युवती को न सिर्फ़ इंसाफ नहीं मिलता, बल्कि वह अपने जीवन से भी हाथ धो बैठती है। भाषा में स्थानीय लहजे और शब्दों का प्रयोग अवधेश प्रीत की कहानियों को उसी तरह बेहद पठनीय और यथार्थवादी बनाता है, जैसे कहानी से सम्बन्धित सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों का ज्ञान उन्हें प्रामाणिक बनाता है। ‘मिनी और अन्य कहानियाँ’ संग्रह में उनकी बारह कहानियाँ संकलित हैं जिनमें व्यापक सामाजिक सरोकारों को चिन्हित करने वाली कहानियों के साथ-साथ ‘कॉफ़ी’ जैसी कहानियाँ भी हैं जहाँ दो बुज़ुर्ग पति-पत्नी पुराने दिनों की याद करते हुए एक भाव-भीगी शाम बिता रहे हैं।
Nrishans
- Author Name:
Avinash Kalla
- Book Type:

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Description:
अवधेश प्रीत को समय और समाज से संवादरत ऐसे लेखक के रूप में जाना जाता है, जो सच को सच की तरह कहता ही नहीं, बल्कि कई–कई अनुद्घाटित सच्चाइयों से भी परिचित कराता है। उनकी कहानियों से गुज़रना दुर्लभ अनुभवों के वर्जित क्षेत्र में प्रवेश करना है, जिसकी फ़िज़ा में आदिम गन्ध तैरती रहती है। लेकिन कथाकार इनसे बचने के लिए नाक पर रूमाल नहीं रखता, वरन् उनके कारणों और परिणामों की, चीड़–फाड़ करता है।
शीर्षक कथा ‘नृशंस’ समेत संग्रह की तमाम कहानियाँ मौजूदा समय में स्खलित होती संवेदना और सामाजिक सम्बन्धों के बीच चौड़ी होती दरारों की तरफ़ हमारा ध्यान खींचती हैं। भाषा की सहजता, शिल्प की सजगता और कथानक की व्यापकता इन कहानियों की ख़ूबियाँ हैं। ‘नृशंस’ नक्सलवाद के बहाने पूरे तंत्र पर तीक्ष्ण प्रहार करती है तो ‘अली मंज़िल’ भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों की पीड़ा को सहानुभूतिपूर्वक उभारती है। ‘ग्रासरूट’ सामाजिक विकृति के आयामों से सम्पृक्त होकर मानवीय चरित्र को चतुष्कोणीय दृष्टि से देखने का प्रयास करती है। ‘फलितार्थ’ एक छतरी को केन्द्र में रखकर भारतीय किसान–मज़दूर की जद्दोजेहद को विस्तार देती है। यह कहानी किसान की आर्थिक दिक़्क़तों, नए दौर में पुरानी चीज़ों के प्रति मोह, संस्कृति एवं परम्पराओं से जुड़ी अन्तरंग भावनाओं के आयामों के दम तोड़ते समय को अंकित करने में सफल है। ग्रामीण जीवन को रेखांकित करते समय क्षेत्रीय बोलियों का यथोचित इस्तेमाल तथा किसान, मज़दूरों की धड़कन की गहरी अनुभूति कथाकार को एक विशिष्ट दर्जा प्रदान करती है।
अधिकांश कहानियाँ अपनी ताज़गी, सादगी और बेबाकी के कारण चर्चित और प्रशंसित हुर्इं और अपनी सम्प्रेषणीयता, व्यापकता और ग्राह्यता के चलते इन्होंने नाट्य–निर्देशकों को भी आकर्षित किया है। ‘ग्रासरूट’, ‘नृशंस’, ‘तालीम’ और ‘फलितार्थ’ कहानियों का पटना से दिल्ली तक हुआ सफल मंचन इसका प्रमाण है।
Panchvan Dasta Aur Saat Kahaniyan
- Author Name:
Amritlal Nagar
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- Description: Awating description for this book
Chaudah Left-Chaudah Right
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Chandra Shekhar Varma
- Book Type:

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Description:
‘चौदह लेफ़्ट-चौदह राइट’ रोचकता के ताने-बाने में बुनी गई 21 कहानियों का संग्रह है। इसकी हर कहानी अनेक मोड़ों से गुज़रते हुए एक चौंका देने वाले अन्त तक पहुँचती है। कथासागर के कैनवस पर समाज के कुछ अनछुए पहलुओं का दिलचस्प चित्रण है यह संग्रह।
इस किताब में संग्रहीत कहानियों की विविधता एवं नवीनता अभूतपूर्व है। एक ही संग्रह में कॉलेज के रोमांस की भीनी ख़ुशबू ,भाग्य के खेल के उतार-चढ़ाव, ज़िन्दगी की रेस की हार-जीत, शक्की पत्नी के पति की व्यथा, प्राइवेट नौकरी की अनिश्चितता, पत्रों का आदान-प्रदान, सेवानिवृत्त शिक्षिका की आत्मनिर्भरता, लालच और लापरवाही के बीच ऊँचे ओहदों पर बैठे ईमानदार और भ्रष्ट अफ़सरों की जद्दोजहद, रेल दुर्घटना की विभीषिका के साथ-साथ और भी बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा। जीवन्त, सरल और सरस भाषा में कहानी का जामा पहने जीवन की ये विषमताएँ आपको गुदगुदाएँगी, झिंझोड़ेंगी और सम्भव है कि रुलाएँ भी।
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