(0)
Author:
Arun PrakashPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
350
287 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
कुछ कहानीकार आलोचकों के प्रिय होते हैं, कुछ पाठकों के। अरुण प्रकाश पाठकों के ज़्यादा प्रिय लेखक रहे हैं। उनके लिखे की सराहना करने वाले पाठक बहुतायत मिलते हैं। भैया एक्सप्रेस, जल-प्रांतर, बेला एक्का लौट रही है, गज पुराण, नहान, भासा आदि उनकी बहुपठित-बहुचर्चित कहानियाँ रही हैं। इनकी 'हिचक' कहानी 'बहाव' पत्रिका में छापते हुए संपादक के रूप में अमरकांत ने लिखा था, 'छोटे-छोटे वाक्यों से रचना करना अरुण प्रकाश की विशेषता है जैसे चिडिय़ा अपार धैर्य के साथ तिनकों से खूबसूरत घोंसला बनाती है। इस कहानी में एक लड़की जूडो सीखना चाहती है और उसके माँ-बाप हिचक रहे हैं। मामूली जीवन से रचनाकार कुछ धागे निकालकर कला-कौशल से ऐसी कहानी बुनता है जिससे सार्थकता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं।' अरुण प्रकाश की कहानियों में हमारे समाज की विडंबना और विद्रुपता के चित्र अलग से नहीं दिखाए जाते बल्कि वे अंतर्गुम्फित होते हैं। सहजता के साथ गौरतलब और सार्थक बात कहना ही इस कथाकार की बड़ी विशेषता है। इस संग्रह में अरुण प्रकाश की आखरी दौर में लिखी गयी उन कहानियों को संकलित किया गया है जो उनके जीवनकाल में पुस्तकाकार नहीं आ पायी थीं। ये नयी सदी के आरंभिक काल में बदल रहे भारतीय समाज की कहानियाँ हैं। निश्चित रूप से इन कहानियों के बिना कथाकार अरुण प्रकाश पर समग्रता में बात नहीं हो सकती है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
कुछ कहानीकार आलोचकों के प्रिय होते हैं, कुछ पाठकों के। अरुण प्रकाश पाठकों के ज़्यादा प्रिय लेखक रहे हैं। उनके लिखे की सराहना करने वाले पाठक बहुतायत मिलते हैं। भैया एक्सप्रेस, जल-प्रांतर, बेला एक्का लौट रही है, गज पुराण, नहान, भासा आदि उनकी बहुपठित-बहुचर्चित कहानियाँ रही हैं। इनकी 'हिचक' कहानी 'बहाव' पत्रिका में छापते हुए संपादक के रूप में अमरकांत ने लिखा था, 'छोटे-छोटे वाक्यों से रचना करना अरुण प्रकाश की विशेषता है जैसे चिडिय़ा अपार धैर्य के साथ तिनकों से खूबसूरत घोंसला बनाती है। इस कहानी में एक लड़की जूडो सीखना चाहती है और उसके माँ-बाप हिचक रहे हैं। मामूली जीवन से रचनाकार कुछ धागे निकालकर कला-कौशल से ऐसी कहानी बुनता है जिससे सार्थकता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं।' अरुण प्रकाश की कहानियों में हमारे समाज की विडंबना और विद्रुपता के चित्र अलग से नहीं दिखाए जाते बल्कि वे अंतर्गुम्फित होते हैं। सहजता के साथ गौरतलब और सार्थक बात कहना ही इस कथाकार की बड़ी विशेषता है। इस संग्रह में अरुण प्रकाश की आखरी दौर में लिखी गयी उन कहानियों को संकलित किया गया है जो उनके जीवनकाल में पुस्तकाकार नहीं आ पायी थीं। ये नयी सदी के आरंभिक काल में बदल रहे भारतीय समाज की कहानियाँ हैं। निश्चित रूप से इन कहानियों के बिना कथाकार अरुण प्रकाश पर समग्रता में बात नहीं हो सकती है।
Book Details
-
ISBN9788196185831
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pratinidhi Kahaniyan : Arun Prakash
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
साहित्य के मौजूदा दौर में पाठ-सुख वाली कहानियाँ कम होती जा रही हैं। इस संकलन की कहानियों में पाठ-सुख भरपूर है। लेकिन यह सुख तात्कालिक नहीं है बल्कि ये निर्विवाद कहानियाँ देर तक स्मृति में बनी रहती हैं। लोकप्रियता और विचार-केन्द्रित कथा का मिज़ाज मुश्किल से मिलता है, पर इन कहानियों में यह सुमेल इसलिए सम्भव हो पाया, क्योंकि यहाँ पाठकों के प्रति गम्भीर सम्मान है। ये कहानियाँ पाठकों को उपभोक्ता नहीं, सहभोक्ता; श्रोता नहीं, संवादक बनने का अवसर देती हैं। इनमें विचार उपलाता नहीं, अन्तर्धारा की तरह बहता है, क्योंकि यह सृजन पाठक-लेखक सहभागिता पर टिका है। युग की प्रमुख आवाज़ों को सुरक्षित रखना इतिहास की ज़िम्मेवारी है, छोटी-छोटी अनुगूँजों को सहेजना साहित्य की। मनुष्य विरोधी मूल्यों, सत्ताओं और संगठित संघर्षों की बड़ी उपस्थिति के बावजूद लघु, असंगठित और प्राय: व्यक्तिगत संघर्षों की बड़ी दुनिया है। इन कहानियों में उसी की अनुगूँजें हैं। ये कहानियाँ किसी एक शैली में नहीं बँधी हैं, बल्कि हर कहानी का अलग और स्वतंत्र व्यक्तित्व नई भाषा, नई संरचना और आन्तरिक गतिशीलता के सहारे निर्मित किया गया है।
Bharat Main Laghu Udyog : Vikas Evam Sambhavnayen
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Bhaiya Express
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Short Stories
Jal Prantar
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Short Stories
Upanyas Ke Rang
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Critic
Kahani Ke Falak
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Critic
Gadya Ki Pahchan
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
अरुण प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि हिंदी में किस तरह 'विधा' का इस्तेमाल 'फॉर्म' और 'जेनर' दोनों अर्थों के लिए होता है। उनके अनुसार उपन्यास एक रूपबंध है जिसकी कई विधाएँ हो सकती हैं। मुख्य बात है, विधाओं या रूपबंधों की सैद्धांतिक कहानी उद्ïघाटित करना, जो 'गद्य की पहचान' में बड़े विस्तार और रोचक ढंग से है। पश्चिम के साहित्यिक सिद्धांतकारों ने फॉर्म और जेनर पर बड़े-बड़े काम किए हैं। मेरे देखने में हिंदी में इधर इस ढंग का यह पहला काम है, जिसमें कुछ बुनियादी सवाल उठाए गए हैं। इस संग्रह के निबंधों में अरस्तू से लेकर बाख्तिन, रोलां बार्थ, तोदोरोव, देरिदा आदि तक के विचारों पर चर्चा है। यह जानने की चीज है कि आखिरकार कोई रूपबंध क्यों अस्तित्व में आता है, किसी युग में कुछ खास रूपबंध या विधाएँ प्रधान क्यों हो उठती हैं, जीवनी जैसा प्राचीन रूपबंध अब भी क्यों जीवित है, जबकि महाकाव्य जैसा शक्तिशाली रूपबंध मर गया, क्या इस रूपबंध की कुछ सीमाएँ और नियम हैं, मिश्रण या संकरता क्यों घटित होती है, क्या नए रूपबंध या विधाएँ पुरातन के ही कायांतर हैं, चिर-परिचित रूपबंध पाठकीय मनोविज्ञान पर कैसा प्रभाव डालते हैं, साहित्यकार किसी रूपबंध से कितना रेजिमेंटेड होता है और कितना उसे तोड़कर नई जमीन देता है—अरुण प्रकाश ने ऐसे ढेरों प्रश्नों की रोशनी में गद्य की पहचान की है। शंभुनाथ (भूमिका से)
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Gyandan
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है। ‘ज्ञानदान’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘ज्ञानदानֺ’, ‘एक राज़’, ‘गण्डेरी’, ‘कुछ समझ न सका’, ‘दु:ख का अधिकार’, ‘पराया सुख’, ‘80/100’, या ‘सांई सच्चे!’, ‘ज़बरदस्ती’, ‘हलाल का टुकड़ा’, ‘मनुष्य’, ‘बदनाम’ और ‘अपनी चीज़’।
Mansarovar Vol. 7 : Jail Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द जहाँ भी समाज में अन्याय था, उसका प्रतिकार अपने ढंग से कर रहे थे। ईश्वर द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय ही नहीं, वे ग्रीक ट्रेजेडी नहीं लिख रहे थे, मनुष्य द्वारा मनुष्य के प्रति किया गया अन्याय, इसी समाज द्वारा इसी समाज में रहने वाले लोगों के प्रति किया गया अन्याय, उसे भी सतह पर लाकर दिखा रहे थे। जहाँ दमन और अन्याय था, उस अन्याय की व्यथा, पीड़ा सामने रख रहे थे और साथ ही उस व्यथा-पीड़ा का ऐसा चित्रण कर रहे थे, जो हमें आपको इस हद तक झकझोर दे कि हम स्वयं उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो सकें, जो अमानवीय है ग़ैरबराबरी पर खड़ी है, जिसको हम अनजाने संस्कारवश ढोए चले जा रहे हैं और कभी-कभी परम्परा के प्रति श्रद्धा के नाम पर हम जिसका पोषण-समर्थन करते हैं। —नामवर सिंह
Sandigdh
- Author Name:
Tejendra Sharma
- Book Type:


- Description:
पंद्रह बेहतरीन कहानियों का संग्रह।
Dharohar Kahaniyaan : Suryakant Tripathi ‘Nirala’
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description:
निराला के कथा-साहित्य में दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं। एक प्रवृत्ति काल्पनिक इच्छापूर्ति के सपने रचने की है, दूसरी वास्तविक जीवन-संघर्ष को चित्रित करने की। ‘देवी’ और ‘चतुरी चमार’ में कहानी का पुराना ढाँचा टूट गया है। कथानक लेकर चलने वाली, समस्या के समाधान, नायक-नायिका के विवाह से समाप्त होनेवाली कहानियाँ ये नहीं हैं। इनमें परिवेश, पात्र ज्यों के त्यों उठाकर कहानी में रख दिये गए हैं। उनकी कहानियाँ कथा-रचना में यथार्थवादी साहित्य के विकास में नया चरण हैं। —रामविलास शर्मा
Dharohar Kahaniyaan : Suryakant Tripathi ‘Nirala’
Suryakant Tripathi 'Nirala'
20% off₹ 250
₹ 200
Available
Nak Bani Musibat
- Author Name:
Naoya Shiga +4
- Book Type:

- Description:
‘नाक’ के प्रसंग लगभग हर सभ्यता और संस्कृति से जुड़े हैं। ‘नाक बनी मुसीबत’ एक व्यंग्यात्मक कहानी है। संग्रह की बाक़ी कहानियाँ गम्भीर हैं। ‘नन्हे का भगवान’ अध्यात्म से प्रभावित है तो ‘किनोसाकी से’ ज़िन्दगी और मौत की कशमकश पर शिगा नाओया का जीवन-दर्शन है। ‘एक और काली बिल्ली’ मनुष्य और जानवर के उभरते आत्मीय सम्बन्ध की भावनात्मक गाथा है जो जापान की समसामयिक रचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
Katha Saptak - Mamta Kalia
- Author Name:
Mamta Kalia
- Book Type:

- Description:
7 Short Stories
Mansarovar Vol. 3 : Uddhar Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती। —जैनेन्द्र कुमार
Mansarovar Vol. 2 : Lottery Aur Anya kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
प्रेमचन्द की रचनाएँ आधुनिक भारत को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्हीं के समय से भारतीय पुनर्जागरण का प्रारम्भ होता है, जिसके पैरों की आहट उनकी रचनाओं में महसूस होती है। राष्ट्रीय जीवन की परिवर्तनशीलता, क्रिया-प्रतिक्रिया, प्रगति एवं प्रतिक्रियावादिता, धर्म की, मानवता की परछाइयाँ प्रेमचन्द की रचनाओं में झलकती हैं। —डॉ. जाफ़र रज़ा
Achchhe Aadmee
- Author Name:
Phanishwarnath Renu +1
- Book Type:

- Description:
रेणु ने अपने आत्म-कथ्य में चित्रगुप्त महाराज द्वारा निर्मित भाग्य-लेख के अंशों में अपना परिचय देते हुए कहा है कि यह आदमी ‘एक ही साथ सुर और असुर, सुन्दर और असुन्दर, पापी और विवेकी, दुरात्मा और सन्त, आदमी और साँप, जड़ और चेतन—सब कुछ होगा।’ क्या यही परिचय अपने विविध और विस्तृत रूप में उनकी समस्त रचनाओं में नहीं लहरा रहा है? जड़ीभूत सौन्दर्याभिरुचि को गतिशील और व्यापक फ़लक प्रदान करनेवाली रेणु की कहानियों ने हिन्दी कथा-साहित्य को एक नई दिशा दी है—सामाजिक परिवर्तन ही एकमात्र विकल्प है। यह दिशा ही रेणु की रचनाओं की मूल सोच है। बड़े चुपके से कभी उनकी कहानियाँ किसानों और खेत मज़दूरों के कान में कह देती हैं कि ज़मींदारी प्रथा अब नहीं रह सकती और ज़मीन जोतनेवाले की ही होनी चाहिए। कभी मज़दूरों को यह सन्देश देने लगती हैं कि तुम्हारी मुक्ति में ही असली सुराज का अर्थ छिपा है—भूल-भुलैया में पड़ने की जरूरत नहीं। क्या कला, क्या भाषा, क्या अन्तर्वस्तु और विचारधारा, कोई भी कसौटी क्यों न हो, रेणु की कहानियाँ एकदम खरी उतरती हैं, लोगों का रुझान बदल देती हैं और यही रचनात्मक गतिविधि रेणु के साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान को अक्षुण्ण बनाती है। ‘अच्छे आदमी’ में संग्रहीत विधित रंगों की ये कहानियाँ रेणु की इसी विशिष्ट रचना-यात्रा का अगला पड़ाव हैं।
Anugoonj
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
‘माई’, ‘हमारा शहर उस बरस’, ‘तिरोहित’, ‘वैराग्य’ एवं ‘ख़ाली जगह’ जैसी विविध व सशक्त कृतियों की मार्फ़त पिछले पन्द्रह सालों में एक विशिष्ट पहचान बनी है गीतांजलि श्री की हिन्दी कथा-जगत में। ‘अनुगूँज’ में संकलित इन दस कहानियों से ही शुरू हुआ था इस पहचान का सिलसिला। एक नई संवेदना जो विद्रोह और प्रतिरोध को उजागर करते वक़्त भी उनको कमज़ोर बनाती हताशा को अनदेखा नहीं करती, इशारों और बिम्बों के सहारे चित्रण करनेवाला शिल्प, और शिक्षित वर्ग की आधुनिक मानसिकता को दिखाती उनकी बोलचाल की भाषा, ऐसे तत्त्वों से बनती है गीतांजलि श्री की लेखकीय पहचान। यूँ तो इन कहानियों का केन्द्र लगभग हर बार—एक ‘दरार’ को छोड़कर—बनता है शिक्षित मध्यवर्गीय नारियों से, पर इनमें वर्णित होते हैं हमारे आधुनिक नागरिक जीवन के विभिन्न पक्ष। जैसे वैवाहिक तथा विवाहेतर स्त्री-पुरुष सम्बन्ध, पारिवारिक परिस्थितियाँ, सामाजिक रूढ़ियाँ, हिन्दू-मुस्लिम समस्या, स्त्रियों की पारस्परिक मैत्री इत्यादि। यहाँ सीधा, सपाट कुछ भी नहीं है। हर स्थिति, हर सम्बन्ध, हर संघर्ष में व्याप्त रहते हैं परस्पर विरोधी स्वर। यही विरोधी स्वर रचते हैं हरेक कहानी का एक अलग राग।
Prawas Men Aaspaas
- Author Name:
Hansa Deep
- Book Type:

- Description:
Book
Ek Ladki, Paanch Deevane
- Author Name:
Harishankar Parsai
- Book Type:

- Description:
एक लड़की है जिसे उसके दीवानों ने और मुहल्ले-भर की भूखी नज़रों ने जवान और चतुर बना दिया; फिर एक चूहा है जो रोज़ रात में गृह-निवासी के सिरहाने तब तक सत्याग्रह करता रहा जब तक कि उसे नियमित खाना नहीं दिया जाने लगा; अकाल का उत्सव है जिसके लिए जमाखोर, मुनाफ़ाखोर और नौकरशाही सालभर अनुष्ठान कराते हैं कि कब अकाल पड़े, कब दिन फिरें...और फिर नाक है, एक नहीं कई-कई तरह की। कुछ कट जाती हैं, फिर बढ़ जाती हैं, कुछ ऐसी कि चाहे जो जतन करो, कटती ही नहीं; फिर एक आदमी है जिसके भीतर दो आदमी हैं; कभी एक ऊपर आ जाता है, कभी दूसरा हावी हो जाता है। आगे सड़े हुए आलू प्रवेश करते हैं। वे सुबह से टोकरे में पड़े हैं, पर बिक नहीं पाए। उनसे पूछा गया कि अब तुम क्या करोगे तो बोले कि हम विद्रोह करेंगे। चाहे आधी रात तक टोकरे में पड़े रहें, बिकेंगे नहीं। हम भी आत्मसम्मान रखते हैं। देखने में वे कुछ बुद्धिजीवी मालूम पड़ रहे थे लेकिन एक सस्ते होटल वाला आया और उन्हें ख़रीद ले गया। इनके अलावा भी इस किताब में कई पात्र और परिस्थितियाँ हैं जिन्हें परसाई जी की निर्मम लेखनी ने यहाँ संग्रहीत व्यंग्य-कथाओं में उनकी तमाम विडम्बनाओं और विकृतियों के साथ अंकित किया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book