Mirtaatma Ka Geet
Author:
Aabe Kobo, Unita Sachchidanand, Hayashi Fumiko, Sata IncoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
जापान में जब पूँजीवादी औद्योगीकरण की शुरुआत हुई तब समाज का सांस्कृतिक और राजनीतिक ढाँचा तेज़ी से बदलने लगा। पूँजीवादी समाज में विकास के नाम पर हाशिए पर धकेले गए प्रताड़ित लोगों के दु:ख–दर्द को मार्मिक स्पर्श दिया है जापान के तीन प्रगतिवादी लेखकों ने। इनकी सशक्त शैली और वैचारिक सघनता का प्रवाहपूर्ण हिन्दी अनुवाद मूल जापानी स्रोत से किया गया है।
ISBN: 9788126706143
Pages: 92
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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कुछ ही दिन पहले मेरी दो कहानियों पढ़कर दो पाठकों के क्रोध-भरे पत्र आए। एक ने लिखा था कि 'अपने लेखों और अन्य कार्यक्रमों में मैं स्त्री-मुक्ति और आत्मनिर्भरता की बात करती हूँ, जबकि इस कहानी की नायिका की घुटनभरी-दब्बू जिंदगी हमें कोई ऐसा ‘संदेश’ नहीं देती। दूसरे पाठक ने भी घुमा-फिराकर यही पूछा था कि ‘ठीक है, पात्रों की निजी दुनिया के दबावों और उनके सुख-दुख से कहानी हमारा साक्षात्कार तो कराती है, पर यह अन्त में आकर हमें ‘सिखाती’ क्या है?’ मुझे लगता है कि एक बोझिल हितोपदेशी पाठ्यक्रम की किताबों से ‘साहित्य’ पढ़कर निकले ऐसे पाठक रचनात्मक साहित्य की आत्मा से अपरिचित ही रह आए हैं। मुझे खेद है, मेरी कहानियाँ इनकी थोथी उपदेश-तृष्णा नहीं बुझा सकतीं।
हर कहानी या उपन्यास घटनाओं-पात्रों के जरिए सत्य से एक आशिक और कुतूहलभरा साक्षात्कार होता है। साहित्य हमें जीवन जीना सिखाने के बजाय टुकड़ा-टुकड़ा 'दिखाता' है, वे तमाम नर्क-स्वर्ग, वे राग-विराग, वे सारे उदारता और संकीर्णता-भरे मोड़, जिनका सम्मिलित नाम मानव-जीवन है। जो साहित्य उघाड़ता है, वह अन्तिम सत्य या सार्वभौम आदर्श नहीं, बहुस्तरीय यथार्थ होता है। हाँ, यदि जीवन में आदर्श या सत्य अनुपस्थित या अवहेलित हैं, तो उस विडंबना को भी यह जताता जाता है।
मेरी तहत साहित्य को रचना, परोक्ष रूप से सत्य से आंशिक साक्षात्कारों की ऐसी ही एक शृंखला पाठकों के लिए तैयार करना होता है, जिसके सहारे एक सहृदय व्यक्ति अपनी चेतना, अपनी संवेदना और अभिव्यक्ति-क्षमता का सहज ही कुछ और विस्तार होता पाए। चिंतनपरक लेख और रचनात्मक लेखन के बीच का फासला तर्कसंगत ज्ञान और संवेदनात्मक समझ के बीच का फासला है।
—मृणाल पाण्डे
Sukh Aur Dukh Ka Sath
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

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Description:
सामाजिक बाधाग्रस्त स्थितियों के प्रति प्रगीतात्मक दिलचस्पी अमरकान्त की कहानियों में प्रायः नहीं मिलेगी, इसके बावजूद भावनात्मक दुनिया की छोटी-बड़ी हलचलें हमें उद्वेलित करती रहती हैं। नाटकीयता घटना में भी होती है और रचनाकार के दृष्टिकोण में भी, और अमरकान्त ने घटना और दृष्टिकोण के सामंजस्य के द्वारा कुछ बेहद सार्थक परिस्थितियाँ गढ़ी हैं।
अमरकान्त के इस कथा-संसार को एक जीवित जाति की सम्पत्ति की तरह देखकर ही इस सम्भावना को बल मिलता है कि उनके कथाकार ने भय और त्रास के साथ ही जीवन की सम्भावनाओं के लिए अपने संघर्ष को जीवित रखा है। राष्ट्रीय जीवन की पहचान में इन कहानियों के संसार की एक केन्द्रीय भूमिका है। जीवित जाति अपनी लड़ाई रचना की सरहदों के भीतर लड़कर भी तय करती है, इसका विश्वास इन कहानियों को पढ़कर दृढ़ होता है।
Ghatshraadh
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description: प्रसिद्ध उपन्यासकार यू.आर. अनन्तमूर्ति की ये कहानियाँ अपनी प्रयोगधर्मिता, बौद्धिक संयम, अनूठी कथा-शैली और बेबाक आधुनिक दृष्टि के कारण कन्नड़ कथा-साहित्य में विशेष स्थान बना चुकी हैं। ‘घटश्राद्ध’ कहानी पर कन्नड़ में फ़िल्म भी बन चुकी है, जो काफ़ी चर्चित और पुरस्कृत हुई। इन कहानियों में प्रचलित रूढ़ियों के अनूठे चित्र और दिलचस्प चरित्र हैं जो आधुनिकता की मार खा-खाकर चरमरा रहे हैं, टूट रहे हैं, बिखर रहे हैं। उनके इस विघटन में निहित अनिवार्य त्रासदी मन को आलोड़ित करती है। कुछ प्रयोगधर्मी कहानियों में अनूठी फैंटेसियों का आकलन हुआ है, जो किसी गहरे आन्तरिक यथार्थ की प्रतीति कराती हैं। नारी के शोषण के अनेक चित्र इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। कंठ के भीतर घुटते उच्छ् वासों को रचनाकार ने अपनी विशेष सजीव और सहज शैली में उभारा है। भारतीय भाषाओं को ‘संस्कार’ जैसा आधुनिक क्लासिक उपन्यास देनेवाले रचनाकार का यह संकलन पढ़ना एक अनूठा अनुभव है।
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