Kavita Ka Ganit
Author:
Prakash ThapliyalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Available
‘कविता का गणित’ प्रकाश थपलियाल का दूसरा कहानी-संग्रह है। इसमें जहाँ कई वाकयों को कथाकार नये नजरिये के साथ पेश करता है वहीं उनका व्यंग्य भी पाठक को अन्दर तक उद्वेलित करता है। जीविका और श्रद्धा के बीच का द्वन्द्व ‘लाल सलाम’ जैसी कहानियों में खुलकर उभरता है तो ‘बोरी’ और ‘मजमा’ जैसी कहानियों में राजनीति और बाजार की सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते पात्र दिखाई देते हैं। ‘कीड़ा-जड़ी की खोज में’ कहानी कथाकार की किस्सागोई की अपनी ही तकनीक और बुनावट सामने लाती है। कुल मिलाकर इस कथा-संग्रह में हर कहानी का अपना ही सलीका और रंग है।<br>‘गाली’ कहानी को पढ़कर पाठक सोचने को मजबूर हो जाता है कि ऐसा क्यों है कि गाली हमेशा औरत को केन्द्र में रखकर ही दी जाती है। ‘लाल सलाम’ कहानी विचार को श्रेष्ठतम और अक्षुण्ण बताने वालों से सवाल करती है तो ‘भगवान इनसान’ में लेखक भगवान और इनसान के बीच का फर्क आसानी से सामने रख जाता है।<br>‘मजमा’ पैसे की ताकत की तरफ इंगित करती है और बताती है कि बाजार में कीमती वह चीज नहीं है जो ज्यादा काम की है बल्कि वह है जिसे ज्यादा काम की बताया जाता है। मुकाबला इसमें है कि बताने के इस फन में कौन कितना माहिर है।<br>थपलियाल का कहानी कहने का भी अपना भिन्न तरीका है जिसमें वे जब-तब प्रयोग करते दिखाई देते हैं। अपनी कहानियों के बारे में स्वयं उनकी धारणा है कि हिन्दी मुख्यधारा में पर्वतीय परिवेश के शब्दों की बहुत कमी है और पर्वतीय बोली-भाषा से अधिक से अधिक संवाद द्वारा यह कमी दूर की जा सकती है। इन कहानियों में उन्होंने यह संवाद बनाने की भी कोशिश की है। वे घटनाधर्मिता को कहानी की आत्मा मानते हैं और उनकी कहानियों की पठनीयता इसी घटनाधर्मिता से बनती है जिसे वे बिना हिंसा और मार-धाड़ के, मासूमियत से निभा जाते हैं और पाठक को नई दिशा में सोचने को प्रेरित करते हैं।
ISBN: 9788126721405
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Gupt Dhann : Vol. 1-2
- Author Name:
Amrit Rai
- Book Type:

- Description: Cyclopedia
Aakash Deep
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत कहानी-संग्रह 'आकाश-दीप' में कहानी की संरचना केन्द्रीभूत नहीं है, बल्कि बुनावट की दृष्टि से भावकेन्द्रित है और वह भाव है चम्पा की 'मानसिक स्थिति' का संकेत जो सारे कथ्य को लोककथा की तरह संकेन्द्रित करती है, परन्तु, लोककथाओं की तरह मुक्त नहीं करती है, बल्कि चिन्तित और व्याकुल करती है। यही वह अन्तर है जो प्रसाद के योगदान को महत्त्वपूर्ण बना देता है।
‘आकाश-दीप' संग्रह 'प्रतिध्वनि' की तुलना में न केवल मानव-मन की पर्तों के उद्घाटन और अँधेरों की पहचान में सफल है बल्कि सामाजिक सच्चाई को अधिक सटीक ढंग से संकेतित करने में भी सफल है। इस संग्रह में संकलित ‘आकाश-दीप’, ‘पुरस्कार’, ‘ममता’, ‘अपराधी’, ‘स्वर्ग के खँडहर’, ‘बनजारा' कहानियाँ अपने में निष्कर्षात्मक नहीं है, परन्तु जिस प्रकार की विकल्पहीनता और भावसंघर्ष को व्यक्त करती हैं, वह उस युग के भारतीय मध्यवर्ग की सृजनात्मक अभिव्यक्ति है।
Apni Si Rang Dinhin Re
- Author Name:
Sapna Singh
- Book Type:

- Description: Sapna Singh Famous Stories Collection
Katha Saptak - Jayanti Rangnathan
- Author Name:
Jayanti Rangnathan
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Suraksha Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Shrilal Shukla
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी साहित्य में श्रीलाल शुक्ल का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है।‘राग दरबारी’, ‘सीमाएँ टूटती हैं’ तथा ‘पहला पड़ाव’ आदि उपन्यासों और ‘अंगद का पाँव’, ‘यहाँ सेवहाँ’ तथा ‘उमरावनगर में कुछ दिन’ आदि व्यंग्य–संग्रहों के माध्यम से उन्होंने अपने पाठकों के साथजो तादात्म्य स्थापित किया है, वह हिन्दी साहित्य की एक विरल घटना है।
‘सुरक्षा और अन्य कहानियाँ’ शुक्ल जी की चर्चित कहानियों का महत्त्वपूर्ण संकलन है। सामाजिकसरोकारों से सुगुम्फित ये कहानियाँ हमें भावोद्वेलित ही नहीं करतीं, सामाजिक विद्रूपताओं से रू–ब–रू भी कराती हैं। श्रीलाल जी उपन्यासकार और व्यंग्यकार के रूप में ही जाने जाते रहे, यह कहानी–संग्रह शुक्ल जी को एक सशक्त कहानीकार के रूप में समादृत करता है।
The Scarecrow Chronicles
- Author Name:
Pathik Mitra
- Rating:
- Book Type:

- Description: Look into the mirror of the sciety and all you see is a scarecrow!" An anthology that mirrors the society at large. Thirteen stories that take you to the streets of Kabul to the paddy fields in rural Bengal, from a chirstmas in Paris to a famine in Orissa, from the lavish life futility of a rockstar to the aspiring dreams of a prostitute from artistic nudity to meeting God. This anthology has it all. The roller coaster ride of emotions will justify life is nor black , nor white but mostly grey!! And the scarecrow in some paddy field will keep mocking the society and it's futile taboos!! Can we be the scarecrow? An anthology you may love or hate but can't ignore for sure!!
Beej-Bhoji
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description: बीज-भोजी' किसान आत्महत्या और अभाव से हो रही मौतों की दुखभरी गाथा है। किसान होना किसी व्यक्ति के जीवट की मुकम्मल गवाही है। वह किसान अंत तक जूझता है और अंतत: कर्ज और भूख में दबकर मर जाता है। यह मौत हमारी सभ्यता के मृत होने की मुखर घोषणा है। 'पैमाइश' कहानी एक तरफ गाँव की पतनशीलता का आख्यान है तो दूसरी तरफ दुस्साहसी, स्वच्छंद तथा कर्मठ स्त्री 'संन्यासिन' के डायन में तब्दील होने का लोमहर्षक दस्तावेज़ भी। कोई प्रखर और परिश्रमी स्त्री क्यों गाँव-भर में डायन बताई जाने लगती है, इसके पीछे कौन-सा क्षुद्र स्वार्थ छुपा होता है इसे 'पैमाइश' पढ़कर अच्छी तरह जाना जा सकता है। इसी प्रकार 'एक एकाउण्टेंट की डायरी में मिट्टी की गंध' कहानी का नायक महानगरीय जीवन की तमाम सुख-सुविधाओं को हासिल कर लेने के बावजूद बचपन से प्राणों में घुली मिट्टी की गंध पाने के लिए बदहवास फिरता है, जबकि उसके घर के लोग उसे मिट्टी से दूर रखने की जी-तोड़ कोशिशें करते हैं। 'तर्पण' कहानी गाँव के भीतर ही अपने मन में बसे गाँव को बचाए रखने की असफल कोशिशों को सामने लाती है और यह भी बताती है कि किस तरह शहरीकरण का दैत्य गाँव को गाँव नहीं रहने देने के लिए बेताब है। 'बीज-भोजी' गौरीनाथ का तीसरा कहानी संग्रह है.
Nahan
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description: कुछ कहानीकार आलोचकों के प्रिय होते हैं, कुछ पाठकों के। अरुण प्रकाश पाठकों के ज़्यादा प्रिय लेखक रहे हैं। उनके लिखे की सराहना करने वाले पाठक बहुतायत मिलते हैं। भैया एक्सप्रेस, जल-प्रांतर, बेला एक्का लौट रही है, गज पुराण, नहान, भासा आदि उनकी बहुपठित-बहुचर्चित कहानियाँ रही हैं। इनकी 'हिचक' कहानी 'बहाव' पत्रिका में छापते हुए संपादक के रूप में अमरकांत ने लिखा था, 'छोटे-छोटे वाक्यों से रचना करना अरुण प्रकाश की विशेषता है जैसे चिडिय़ा अपार धैर्य के साथ तिनकों से खूबसूरत घोंसला बनाती है। इस कहानी में एक लड़की जूडो सीखना चाहती है और उसके माँ-बाप हिचक रहे हैं। मामूली जीवन से रचनाकार कुछ धागे निकालकर कला-कौशल से ऐसी कहानी बुनता है जिससे सार्थकता व आनंद दोनों प्राप्त होते हैं।' अरुण प्रकाश की कहानियों में हमारे समाज की विडंबना और विद्रुपता के चित्र अलग से नहीं दिखाए जाते बल्कि वे अंतर्गुम्फित होते हैं। सहजता के साथ गौरतलब और सार्थक बात कहना ही इस कथाकार की बड़ी विशेषता है। इस संग्रह में अरुण प्रकाश की आखरी दौर में लिखी गयी उन कहानियों को संकलित किया गया है जो उनके जीवनकाल में पुस्तकाकार नहीं आ पायी थीं। ये नयी सदी के आरंभिक काल में बदल रहे भारतीय समाज की कहानियाँ हैं। निश्चित रूप से इन कहानियों के बिना कथाकार अरुण प्रकाश पर समग्रता में बात नहीं हो सकती है।
Hatheli Bhar Kahaniyan
- Author Name:
Kawabata Yasunari
- Book Type:

- Description: दिल्ली विश्वविद्यालय की जापानी साहित्य की छात्राओं द्वारा अनूदित और उनीता सच्चिदानन्द द्वारा सम्पादित पुस्तक है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जापान के अग्रणी साहित्यकार कावाबाता यासुनारी का कहानी-संग्रह ‘हथेली भर कहानियाँ’ कथा साहित्य के क्षेत्र में एक अनोखा प्रयोग है। इसे कथा-साहित्य का ‘हाइकू’ कहें तो गलत न होगा। ‘हथेली भर कहानियाँ’ का कोई प्लॉट नहीं, शुरू या अंत नहीं, बस जीवन की सामान्य अनुभूतियों की एक अविरल धारा है जो हर मुश्किलें लाँघती, चलती ही जाती है लेकिन मनुष्य इन अनुभूतियों से सदा अनभिज्ञ रहता है।
Indian Short Stories 1900 To 2000
- Author Name:
E. V. Ramakrishnan
- Rating:
- Book Type:

- Description: The 43 stories collected from 21 languages in this anthology showcase the rich diversity and intricacies of life in India. They range from the turmoil and mass hysteria of partition to the suppressed anger and self-pity of those ensnared in fractured homes. These narratives reveal both the external and internal experiences of Indian society. The sacred and the profane, as well as the elite and the subaltern, feature prominently in these complex narratives, serving as metaphors for self-reflection. Collectively, these stories chart a transformative century in which our country emerged as a unified nation. The evocative imagery from the troubled depths of the 20th century is both unsettling and enlightening.
Main Kaise Hasun
- Author Name:
Sushant Supriy
- Book Type:

- Description: Collection Of Short stories
Sapne
- Author Name:
Rajendra Kumar Kanojiya
- Book Type:

- Description: Short Stories
Pitri Rin
- Author Name:
Prabhu Joshi
- Book Type:

-
Description:
प्रभु जोशी, कदाचित् हिन्दी के ऐसे कथाकार-चित्रकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक मौलिकता के बलबूते पर, कला बिरादरी में भी राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर, कई सम्मान अर्जित कर, एक निश्चित पहचान बनाई है।
प्रस्तुत संग्रह में प्रभु जोशी की वे कहानियाँ हैं, जो सन् 1973 से 77 के बीच लिखीं-छपीं और जिन्होंने आज से कोई पैंतीस वर्ष पूर्व अपने गहरे आत्म-सजग, चित्रात्मक और लगभग एक सिस्मोग्राफ़ की तरह 'संवेदनशील भाषिक मुहावरे’ के चलते, 'धर्मयुग’, 'सारिका’, 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान’ के विशाल पाठक-समुदाय के बीच, एक विशिष्ट सम्मानजनक जगह बनाई थी। और कहने की ज़रूरत नहीं कि ये कहानियाँ, समय के इतने लम्बे अन्तराल के बाद, आज भी, अपने पढ़े जाने के दौरान, बार-बार यह बताती हैं कि 'विचार’ और 'संवेदना’ को, कैसी अपूर्व दक्षता के साथ, एक अविभाज्य कलात्मक-यौगिक की तरह रखा जा सकता है।
हालाँकि, ये कहानियाँ मूल रूप से सम्बन्धों की ही कहानियाँ हैं, लेकिन इनमें सर्वत्र व्याप्त, वे तमाम दारुण दु:ख, हमारे ‘समय’ और ‘समाज’ के भीतर घटते उस यथार्थ को उसकी समूची ‘क्रूरता और करुणा’ के साथ प्रकट करते हैं, जो इस दोगली अर्थव्यवस्था का गिरेबान पकड़कर पूछते हैं कि 'कल के विरुद्ध बिना किसी कल के’ खड़े आदमी को, कौन इस अन्ध-नियति की तरफ़ लगातार ढकेलता चला आ रहा है?
बेशक, इन कहानियों में पात्र किसी ख़ास ‘विचारधारा’ के शौर्य से तमतमाए हुए नहीं हैं, लेकिन वे लड़ रहे हैं। और उनकी लड़ाई का प्राथमिक कारण, वह ‘सामाजिक कोप’ है, जो उनके वर्ग की नियति को बदलने के इरादे से, उनके स्वभाव की अनिवार्यता बन गया है। इसलिए निपट ‘देशज शब्द और मुहावरे’ कथा के भीतर की ‘हलातोल’ में, जीवन की कचड़घांद के त्रास को, पूरी पारदर्शिता के साथ रखते हैं।
इन कहानियों की भाषा, निश्चय ही, यों तो किसी दु:साध्य कलात्मक अभियान की ओर ले जाने की ज़िद प्रकट नहीं करती है, लेकिन उस 'अर्ध-विस्मृत गद्य के वैभव’ का अत्यन्त प्रीतिकर ढंग से पुन:स्मरण कराती है, जो पाठकीय विश्वसनीयता का अक्षुण्ण आधार रचने के काम में बहुधा एक कारगर भूमिका अदा करता है।
हो सकता है, कि कहानियों में व्याप्त ‘आत्मकथात्मक तत्त्व’, कहानी के परम्परागत ढाँचे की इरादतन की गई अवहेलना में, शिल्प की रूढ़-रेखाओं को लाँघकर, वहाँ ऐसे वर्ज्य इलाक़ों में लिए जाते हों, जहाँ कला नहीं, जीवन ही जीवन अपने हलाहल के साथ हो, लेकिन जब अभिव्यक्ति की सच्चाई ही रचना का अन्तिम प्रतिपाद्य बन जाए तो ऐसी अराजकताएँ, निस्सन्देह सर्वथा सहज, नैसर्गिक और एक अनिवार्य से 'विचलन’ का स्वरूप अर्जित कर लेती हैं। और कहना न होगा कि यह 'विचलन’ यहाँ प्रभु जोशी की इन कहानियों में, 'हतप्रभ’ करने की सीमा तक उपस्थित है और पूरी तरह स्वीकार्य भी। हाँ, हमें हतप्रभ तो यह भी करता है कि ऐसे कथा-समर्थ रचनाकार ने कथा-लेखन से स्वयं को इतने लम्बे समय तक क्यों दूर किए रखा?
Aasha ki nanhi kirane
- Author Name:
Bruno Pilorget
- Book Type:

- Description: मलाला, केसज, सांड्रा, ओम, मायरा, बरुआनी, मेमरी, क्रेग ने जीवन की मुश्किलों से लड़ने के लिए कभी स्वयं को अकेला या कमज़ोर नहीं माना। अपनी इच्छा शक्ति से इन्होंने अपनी किस्मत बदली और अपने जैसे दूसरों बच्चों को राह दिखाई। दुनिया के अलग अलग कोनों से आए इन लड़के-लड़कियों की कठोर संघर्ष का उल्लेख है, एक बेहतर दुनिया की उम्मीद में।
Alice Ekka Ki Kahaniyan
- Author Name:
Vandana Tete
- Book Type:

-
Description:
आदिवासी स्त्री लेखकों की रचनाएँ न सिर्फ़ भारतीय समाज के अदेखे बहुभाषायी और बहुसांस्कृतिक संसार को दर्ज करती हैं, बल्कि पूर्वग्रहों और ग़ैर-बराबरी से मुक्त एक स्वस्थ लोकतांत्रिक समाज की पुनर्रचना के लिए उत्प्रेरित भी करती हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आदिवासी स्त्री-लेखन न तो नारीवाद के प्रभाव से उपजा है और न ही दलितवाद की तरह किसी एक ख़ास सामाजिक वर्ग से मुक्ति चाहता है। आदिवासियों का सच एक अलग सांस्कृतिक विश्व है जहाँ आदिवासी स्त्रियाँ अपनी विशिष्ट स्त्रीगत समस्याओं पर बात करते हुए भी ग़ैर-आदिवासी स्त्री-लेखन की तरह 'देह' की मुक्ति या 'पुरुष-सत्ता' के सवालों को नहीं उठातीं, बल्कि अपनी सामूहिक आदिवासी चेतना के कारण वे सीधे-सीधे उस विश्व से टकराती हैं जो श्रम और सृष्टि की अवमानना करता है। जो इंसानी समाज का नस्लों, धर्मों, जातियों के आधार पर—रंग, भाषा और लिंग के आधार पर—भेदभाव करता है, उसका संकुचन व संक्षेपण करता है; जैसाकि रोज केरकेट्टा सहजता से इस सच्चाई को उद्घाटित करती हैं : 'स्कूल के दिनों में ही साहित्य के विषय में हमें संक्षेपण करना सिखाया जाता है। स्त्रियों के बारे में समाज भी हमें ऐसा ही नज़रिया देता है। हमारा समाज, इतिहास और साहित्य जीवन के हर क्षेत्र में स्त्रियों का संक्षेपण करता है—विशेषकर, हम आदिवासी स्त्रियों का। हमारा लेखन ऐसे संक्षेपण के ख़िलाफ़ है।'
Name Plate
- Author Name:
Kshama Sharma
- Book Type:

-
Description:
क्षमा शर्मा की 28 कहानियों का यह संग्रह स्त्री की दुनिया के जितने आयामों को खोलता है, उसके जितने सम्भवतम रूपों को दिखाता है, स्त्री के बारे में जितने मिथों और धारणाओं को तोड़ता है, ऐसा कम ही कहानीकारों के कहानी-संग्रहों में देखने को मिलता है।
क्षमा शर्मा हिन्दी लेखकों की आम आदत के विपरीत अपेक्षया छोटी कहानियाँ लिखती हैं जो अपने आप में सुखद हैं। उनकी लगभग हर कहानी स्त्री-पात्र के आसपास घूमती ज़रूर है मगर क्षमा शर्मा उस किस्म के स्त्रीवाद का शिकार नहीं हैं जिसमें स्त्री की समस्याओं के सारे हल सरलतापूर्वक पुरुष को गाली देकर ढूँढ़ लिए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वह पुरुषों या पुरुष वर्चस्ववाद को बख़्शती हैं, उसकी मलामत वे ज़रूर करती हैं और ख़ूब करती हैं, मगर उनकी तमाम कहानियों से यह स्पष्ट है कि उनके एजेंडे में स्त्री की तकलीफ़ें, उसके संघर्ष और हिम्मत से स्थितियों का मुक़ाबला करने की उसकी ताक़त को उभारना ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है।
वह इस मिथ को तोड़ती हैं कि सौतेली माँ, असली माँ से हर हालत में कम होती है या एक विधुर बूढ़े के साथ एक युवा स्त्री के सम्बन्धों में वह प्यार और चिन्ता नहीं हो सकती, जो कि समान वय के पुरुष के साथ होती है। वह देह पर स्त्री के अधिकार की वकालत करती हैं और किसी विशेष परिस्थिति में उसे बेचकर कमाने के विरुद्ध कोई नैतिकतावादी रवैया नहीं अपनातीं। उनकी कहानियों में लड़कियाँ हैं तो बूढ़ी औरतें भी हैं, दमन की शिकार वे औरतें हैं जो एक दिन चुपचाप मर जाती हैं तो वे भी हैं जो कि लगातार संघर्ष करती हैं लेकिन स्त्री की दुनिया के अनेक रूपों को हमारे सामने रखनेवाली ये कहानियाँ किसी और दुनिया की कहानियाँ नहीं लगतीं, हमारी अपनी इसी दुनिया की लगती हैं बल्कि लगती ही नहीं, हैं
भी।इनके पात्र हमारे आसपास, हमारे अपने घरों में मिलते हैं। बस हमारी कठिनाई यह है कि हम उन्हें इस तरह देखना नहीं चाहते, देख नहीं पाते, जिस प्रकार क्षमा शर्मा हमें दिखाती हैं और एक बार जब हम उन्हें इस तरह देखना सीख जाते हैं तो फिर वे एक अलग व्यक्ति, एक अलग शख़्सियत नज़र आती हैं और हम स्त्री के बारे में सामान्य क़िस्म की उन सरल अवधारणाओं से जूझने लगते हैं जिन्हें हमने बचपन से अब तक प्रयत्नपूर्वक पाला है, संस्कारित किया है। क्षमा शर्मा की कहानियों की यह सबसे बड़ी ताक़त है, उनकी भाषा और शैली की पुख़्तगी के अलावा।
Dastangoi 2
- Author Name:
Mahmood Farooqui
- Book Type:

- Description: महमूद फ़ारूक़ी, अनुषा रिजवी और उनके मुटूठी-भर साथियों ने दुनिया को दिखा दिया कि दास्तान अब भी ज़िन्दा है, या ज़िन्दा की जा सकती है। लेकिन उसके लिए दो चीज़ों की ज़रूरत थी; एक तो कोई ऐसा शख़्स जो दास्तान को बख़ूबी जानता हो और उससे मोहब्बत करता हो। ऐसा शख़्स आज बिलकुल मादूम नहीं तो बहुत ही कामयाब ज़रूर है। दूसरी चीज़ जो अहिया-ए-दास्तान के लिए लाजिम थी, वह था ऐसा शख़्स जो उर्दू ख़ूब जानता हो, फ़ारसी बकदरे-ज़रूरत जानता हो, और उसे अदाकारी में भी ख़ूब दर्क हो, यानी उसे बयानिया और मकालमा को ड्रामाई तीर पर अदा करने पर कुदरत हो। उसे उर्दू अदब की, दास्तान की, और ख़ास कर के हमारी ख़ुशनसीबी तसव्वुर करना चाहिए कि दास्तानगोई के दुबारा जन्म की दास्तान के लिए नागुज़िर मोतज़क्किरह वाला किरदार एक वक़्त में और एक जगह जमा हो गए। महमूद फ़ारूक़ी और मोहम्मद काजिम अपनी कही हुई दास्तानों पर मुश्तमिल एक और किताब बाज़ार में ला रहे हैं तो दास्तानगोई का एक जदीद रूप भी सामने आ चुका है। –शम्मुर्रहमान फ़ारूकी वक़्त का तक़ाज़ा था कि अमीर हमज़ा के मिज़ाज के अलावा और भी तरह की दास्तानें लोगों को सुनाई जाएँ। इसकी शुरुआत तो 2007 में ही हो गई थी जब मैं और अनुषा ने मिलकर तक़सीम-ए-हिन्द पे एक दास्तान मुरत्तब की थी जो पहली जिल्द में शामिल है। अमीर हमज़ा की दास्तानों का जादू हमेशा सर चढ़कर बोला है और आगे भी बोलता रहेगा। मगर आज के ज़माने में उन दास्तानों के अलावा भी बहुत से ऐसे अफ़साने हैं जो सुनाए जाने का तक़ाज़ा करते हैं। इसलिए रवायती दास्तानों को इख़्तियार करने के साथ-साथ मैंने और ऐसी चीज़ें तशकील दी हैं जिन्हें दास्तानजादियाँ कहें तो नामुनासिब ना होगा। ये दास्तानजादियाँ बिलवासता हमारे अहद को और दीगर सच्चाइयों और पहलुओं पर रोशनी डालती हैं जिन्हें हमारे सामईन और नाज़िरीन बेतकल्लुफ़ समझ सकते हैं। –महमूद फ़ारूकी
Varshingtan Postmarch
- Author Name:
Oka Shuzo
- Book Type:

- Description: जापान के सुप्रसिद्ध साहित्यकार ओका शूज़ो की पुस्तक ‘मेरी दीदी’ और ‘वाशिंगटन पोस्टमार्च’ का हिन्दी अनुवाद मानसिक और शारीरिक रूप से अविकसित बच्चों के सामाजिक परिवेश का एक संवेदनशील संग्रह है जिसे डॉ. उनीता सच्चिदानन्द और जापान की योशिको ओकागुची ने मिलकर सम्पन्न किया है। दो भागों में प्रकाशित इस कथा-संग्रह में ऐसे बच्चों की सहज इच्छाओं और अनुभूतियों का सघन चित्रण है। ‘वाशिंगटन पोस्टमार्च’ पर फ़िल्म भी बन चुकी है।
Manus
- Author Name:
Gourinath
- Book Type:

- Description: मानुस की कहानियों में पेड़-पल्लव, नदी-नाले, ताल-तलैया और तालमखाने, बालू के ढूह और विस्तार, रोहू, झींगा, टेंगरा, मांगुर, गरई और अन्है मछलियों की बहार है और इन्हीं के बीच बिना किसी शिकवा-शिकायत के अपने जीवन को भोगते आम गरीब लोग हैं। इन रचनाओं में कहीं रास है तो कहीं हास, कहीं दुःख है तो कहीं सुख-स्वाद।
Badalta Hua Desh : Swarndesh Ki Lok Kathayen
- Author Name:
Manoj Kumar Pandey
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत कहानियों के रचनाकार मनोज कुमार पांडेय अब तक हिन्दी जगत में अपनी पक्की पहचान बना चुके हैं। इनके पहले के तीन कहानी-संग्रह पुख़्ता सबूत हैं कि इक्कीसवीं सदी के इस युवा रचनाकार ने कहानी का दामन मज़बूती से थाम रखा है। मनोज के लेखन का सबसे ग़ौरतलब पहलू यह है कि ये कहानी–लेखन के ढर्रे और फ़्रेम को लगातार चुनौती देते चलते हैं। ख़ुद तोड़-फोड़ करते हैं और कहानी की कहन को कई क़दम आगे ले जाते हैं।
इन कहानियों की प्रतीक-योजना बड़ी प्रत्यक्ष प्रणाली से उजागर है। लेखक ने हर कहानी में नए सिरे से जोखिम उठाया है। स्थितिगत व्यंग्य की विद्रूपता अन्य किसी प्रणाली से व्यक्त की भी नहीं जा सकती। कहानियों को इस परिप्रेक्ष्य में समझे जाने की ज़रूरत है। इन कहानियों में यदि आख्यान की सादगी है तो कबीर की तरह उद्देश्य की खड़ी चोट भी है। कहानी केवल राजा और प्रजा की नहीं रहती, वरन् यह जन और तंत्र की हो जाती है। इन्हें पढ़कर लगता है कि आज के समय की आँख में उँगली डालकर सच्चाई दिखाने का काम लेखक के ज़िम्मे है। ये कहानियाँ अपनी सरलता में जटिल यथार्थ की दस्तावेज़ हैं। मनोज समय के सघन अँधेरों पर रचनाओं की रोशनी और रोशनाई डाल कर बताते हैं; बचो, बचो, इस फैलते अन्धकार से बचो। यही एक लेखक का कर्तव्य होता है।
–ममता कालिया
गहरे प्रेक्षण, बदलावों को पकड़नेवाली अचूक संवेदनशीलता और समर्थ कथा-भाषा से मनोज कुमार पांडेय ने इक्कीसवीं सदी में उभरे कहानीकारों के बीच अपनी ख़ास पहचान बनाई है। 'पानी' और 'शहतूत' जैसी कहानियों का यह लेखक अपनी रचनाओं के लिए कभी बहुत लम्बा इन्तज़ार नहीं करवाता। बावजूद इसके, हर बार उसके पास कहने के लिए कोई नई बात होती है; साथ ही, कहने की अलग भंगिमा भी। इस बार मनोज जिस स्वर्णदेश की कहानियाँ सुना रहे हैं, वह उनके अब तक के लेखन से इस मायने में बिलकुल जुदा है कि यहाँ क़िस्सागोई वाले अन्दाज़ में एक ऐसा दिक्काल उपस्थित है जो अपनी सूरत में हमारा न होकर भी सीरत में सौ फ़ीसद हमारा है। यह अन्योक्ति वाली युक्ति में गहा हुआ हमारे समय का सार है। पढ़कर हम आश्वस्त होते हैं कि अतीत-प्रेमी राजा ने भले ही स्वर्णदेश की भाषा में घुस आए विजातीय शब्दों की छँटनी करके उसे दिव्यांग बना दिया हो, और लोग कुछ भी बोलने-लिखने में असमर्थ हो चले हों, हमारी भाषा का दमखम अभी बचा हुआ है। यह कथा-शृंखला इसका ज़िन्दा सबूत है।
–संजीव कुमार
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book