Jagdamba Babu Gaon Aa Rahe Hai
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Author:
Chitra Mudgal, Amar GoswamiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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चित्रा जी की कलम की पगडंडी चेतना की पगडंडी है। यह केवल उनके ही डग भरने के लिए नहीं है। सैकड़ों, हजारों पाँवों के नीचे भीगी दूब बिछाने के लिए है। उनका कथा साहित्य वादों, नारों एवं आन्दोलनों से अधिक अपने समय और समाज के सच और अन्तर्विरोधों में दुबकती मानवीय संवेदना का रचनात्मक आख्यान है। उनकी रचना दृष्टि में विचारहीनता की परिधि से बाहर निकलने का संकल्प है; पराधीनता को कुचलनेवाली विवेक दृष्टि को जागृत करने का हठ है।</p> <p>साहित्य का सांस्कृतिक कार्यक्षेत्र मनुष्य का मानसिक जगत है। लुकाच की मान्यता है कि साहित्य मनुष्य के विवेक को वाणी देता है। स्वयं लेखिका मुर्दों के गाँव में चेतना की पगडंडी बनना चाहती हैं। उनकी कहानियाँ पढ़ते हुए जो बिम्ब बनते हैं, उनका अन्तर्निहित अर्थ एक प्रकाशपूर्ण क्षण में उद्घाटित होकर ग्रहण होता है। कहानी की प्रकृति जनतांत्रिक होती है और उसका रसास्वादन अनुभवपरक बोध से होता है। चित्रा मुद्गल की कहानियाँ अनुभवपरक बोध से पाठक को कहानी के पुनर्सृजन में लीन कर विविध अर्थों का निर्माण करती हैं। प्रकाशपूर्ण ये क्षण संवेदनाओं के सघन, सार्थक क्षण हैं, जो अनुभव का, संवेदनाओं का विस्तार करते हैं और कहानी एक समग्र प्रभाव को संप्रेषित करती है...</p> <p>मनुष्य जब अपनी क्षुद्रताओं, कमजोरियों और छलावों को स्वीकार करता है तो इस स्वीकार से वह आत्मोन्नयन करता है। गौरतलब है, उनकी कहानियाँ उपदेशात्मक या निर्देशात्मक नहीं, निर्णयात्मक और क्रियात्मक संकल्पों से सम्पन्न हैं।</p> <p>—डॉ. भूपेन्द्र कलसी
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About the Book
चित्रा जी की कलम की पगडंडी चेतना की पगडंडी है। यह केवल उनके ही डग भरने के लिए नहीं है। सैकड़ों, हजारों पाँवों के नीचे भीगी दूब बिछाने के लिए है। उनका कथा साहित्य वादों, नारों एवं आन्दोलनों से अधिक अपने समय और समाज के सच और अन्तर्विरोधों में दुबकती मानवीय संवेदना का रचनात्मक आख्यान है। उनकी रचना दृष्टि में विचारहीनता की परिधि से बाहर निकलने का संकल्प है; पराधीनता को कुचलनेवाली विवेक दृष्टि को जागृत करने का हठ है।</p>
<p>साहित्य का सांस्कृतिक कार्यक्षेत्र मनुष्य का मानसिक जगत है। लुकाच की मान्यता है कि साहित्य मनुष्य के विवेक को वाणी देता है। स्वयं लेखिका मुर्दों के गाँव में चेतना की पगडंडी बनना चाहती हैं। उनकी कहानियाँ पढ़ते हुए जो बिम्ब बनते हैं, उनका अन्तर्निहित अर्थ एक प्रकाशपूर्ण क्षण में उद्घाटित होकर ग्रहण होता है। कहानी की प्रकृति जनतांत्रिक होती है और उसका रसास्वादन अनुभवपरक बोध से होता है। चित्रा मुद्गल की कहानियाँ अनुभवपरक बोध से पाठक को कहानी के पुनर्सृजन में लीन कर विविध अर्थों का निर्माण करती हैं। प्रकाशपूर्ण ये क्षण संवेदनाओं के सघन, सार्थक क्षण हैं, जो अनुभव का, संवेदनाओं का विस्तार करते हैं और कहानी एक समग्र प्रभाव को संप्रेषित करती है...</p>
<p>मनुष्य जब अपनी क्षुद्रताओं, कमजोरियों और छलावों को स्वीकार करता है तो इस स्वीकार से वह आत्मोन्नयन करता है। गौरतलब है, उनकी कहानियाँ उपदेशात्मक या निर्देशात्मक नहीं, निर्णयात्मक और क्रियात्मक संकल्पों से सम्पन्न हैं।</p>
<p>—डॉ. भूपेन्द्र कलसी
Book Details
-
ISBN9789395328036
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है। ‘ज्ञानदान’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘ज्ञानदानֺ’, ‘एक राज़’, ‘गण्डेरी’, ‘कुछ समझ न सका’, ‘दु:ख का अधिकार’, ‘पराया सुख’, ‘80/100’, या ‘सांई सच्चे!’, ‘ज़बरदस्ती’, ‘हलाल का टुकड़ा’, ‘मनुष्य’, ‘बदनाम’ और ‘अपनी चीज़’।
Prawas Men Aaspaas
- Author Name:
Hansa Deep
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