Amlghaat
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अम्लघात या एसिड अटैक शब्द सुनते ही रूह काँप जाती है। भीतर दर्द की एक लहर लहरा जाती है। पीड़िता से उसका चेहरा और अंग ही नहीं उसका आत्मसम्मान, इंसान और नागरिक होने का मूल अधिकार, ईश्वर प्रदत्त उसका स्वरूप छीन लिया जाता है, जिसे छीनने का हक़ 'किसी को' भी नहीं है। कानून भी अपराध पर दंड देता है। अम्लघात के शिकार तो अक्सर निरपराधी होते हैं, फिर उन्हें किस अपराध की सज़ा दी जाती है और क्यों ? कौन दोषी है इसके लिए.... परिवार, समाज या कानून? एसिड अटैक पर कहानियाँ भेजने की सूचना मैंने अपनी फ़ेसबुक वॉल की एक पोस्ट में पोस्ट की थी, जिसे पढ़कर अनगिनत कहानियाँ आईं। शिवना प्रकाशन की टीम ने उनमें से बीस कहानियाँ चुनी। मैं उषाकिरण खान जी, कादम्बरी मेहरा जी, गीताश्री जी, आकांक्षा पारे काविश जी, रजनी मोरवाल जी, विकेश निझावन जी, अरुण अर्णव खरे जी, ज्योति जैन जी, आनंदकृष्ण जी, हर्षबाला शर्मा जी, रेनू यादव जी, डॉ. ऋतु भनोट जी, डॉ. निरुपमा राय जी, राधेश्याम भारतीय जी, रोचिका अरुण शर्मा जी , प्रबोध कुमार गोविल जी, पूनम मनु जी, सत्य शर्मा 'कीर्ति' जी, रेणु वर्मा जी, डॉ. लता अग्रवाल जी की आभारी हूँ, जिन्होंने इस हवन में खूबसूरत कहानियों की सामग्री डाली। इस पुस्तक का संपादन करते समय मैं बहुत तनाव से गुज़री हूँ, अम्लघात से पीड़ित स्त्री-पुरुषों का दर्द महसूस किय
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About the Book
अम्लघात या एसिड अटैक शब्द सुनते ही रूह काँप जाती है। भीतर दर्द की एक लहर लहरा जाती है। पीड़िता से उसका चेहरा और अंग ही नहीं उसका आत्मसम्मान, इंसान और नागरिक होने का मूल अधिकार, ईश्वर प्रदत्त उसका स्वरूप छीन लिया जाता है, जिसे छीनने का हक़ 'किसी को' भी नहीं है। कानून भी अपराध पर दंड देता है। अम्लघात के शिकार तो अक्सर निरपराधी होते हैं, फिर उन्हें किस अपराध की सज़ा दी जाती है और क्यों ? कौन दोषी है इसके लिए.... परिवार, समाज या कानून? एसिड अटैक पर कहानियाँ भेजने की सूचना मैंने अपनी फ़ेसबुक वॉल की एक पोस्ट में पोस्ट की थी, जिसे पढ़कर अनगिनत कहानियाँ आईं। शिवना प्रकाशन की टीम ने उनमें से बीस कहानियाँ चुनी। मैं उषाकिरण खान जी, कादम्बरी मेहरा जी, गीताश्री जी, आकांक्षा पारे काविश जी, रजनी मोरवाल जी, विकेश निझावन जी, अरुण अर्णव खरे जी, ज्योति जैन जी, आनंदकृष्ण जी, हर्षबाला शर्मा जी, रेनू यादव जी, डॉ. ऋतु भनोट जी, डॉ. निरुपमा राय जी, राधेश्याम भारतीय जी, रोचिका अरुण शर्मा जी , प्रबोध कुमार गोविल जी, पूनम मनु जी, सत्य शर्मा 'कीर्ति' जी, रेणु वर्मा जी, डॉ. लता अग्रवाल जी की आभारी हूँ, जिन्होंने इस हवन में खूबसूरत कहानियों की सामग्री डाली। इस पुस्तक का संपादन करते समय मैं बहुत तनाव से गुज़री हूँ, अम्लघात से पीड़ित स्त्री-पुरुषों का दर्द महसूस किय
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Shivna Prakashan
- Weight
- 250 grams
- ISBN-13
- 9788194426653
- Pages
- 120
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 19 × 21 cm
- Language
- Hindi
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