Shri Guru Granth-Darshan
Author:
Jairam MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
‘गुरुग्रन्थ’ की अधिकांश रचनाएँ उन सिक्ख गुरुओं की हैं जो सीधे गुरु नानक देव की शिष्य-परम्परा में आते हैं तथा जिन्हें क्रमश: उन्हीं की ‘ज्योति का प्रतिरूप’ रहते आने के कारण, 'नानक' संज्ञा द्वारा अभिहित करने की परिपाटी भी चली आई है।</p>
<p>इसमें संगृहीत वाणियों के रचयिताओं की चेष्टा अधिकतर यही जान पड़ती है कि जो कुछ वास्तविक सत्य के रूप में अनुभूत हो उसे स्वयं अपने जीवन में भी उतारा जाए तथा वैसा ही करने का परामर्श किसी दूसरे को भी दिया जाए। वैसे सत्य का स्वरूप सदा एकरस एवं विश्वजनीन ही हो सकता है।</p>
<p>‘गुरुग्रन्थ' की एक ऐसी अन्य विशेषता, उसमें संगृहीत विविध रचनाओं के क्रमदान में भी पाई जा सकती है। उसमें आए हुए पदों को कोई ऐसा शीर्षक भी दिया हुआ नहीं मिलता जो विषयानुसार निश्चित किया गया हो तथा जिसके सहारे हमें उस मत-विशेष का परिचय मिल सके जिसे उनके रचयिताओं ने प्रकट किया होगा। उनका क्रम केवल रागानुसार ही स्थिर किया गया जान पाता है जिससे इस विषय में, हमें कोई भी सहायता नहीं मिल पाती। हमें यहाँ प्रत्यक्षत: केवल इतना ही पता चल पाता है कि सिक्ख गुरुओं ने, तथा कतिपय सन्तों, भक्तों ने एवं सूफियों तक ने भी एक ही प्रकार के गीत गाए होंगे।
ISBN: 9789388211604
Pages: 304
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Shrimadbhagwadgita Prashnottari
- Author Name:
Dr. Jitendra Singh
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी' में लेखक द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के अठारह अध्यायों से 300 महत्त्वपूर्ण व वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का चयन किया गया है। प्रश्नों की प्रकृति अत्यंत सरल है। एक सामान्य जन के साथ-साथ एक छोटी कक्षा का बालक भी इन प्रश्नों को आसानी से समझकर कंठस्थ कर सकता है। इसके साथ-साथ विद्यार्थीगण श्रीमद्भगवद्गीता से संबंधित आध्यात्मिक प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए इस पुस्तक का अध्ययन कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। पाठक की सुविधा के लिए हर अध्याय के सभी प्रश्नों से संबंधित उत्तर इस पुस्तक के अंत में दिए गए हैं। इसके साथ-साथ लेखक द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता पर अनेक विद्वानों द्वारा लिखी महत्त्वपूर्ण टीकाओं की सूची भी पुस्तक में दी गई है। यदि कोई जिज्ञासु विद्यार्थी या सामान्यजन गीता के मर्म को अत्यंत सूक्ष्मता से जानने का इच्छुक है तो वह इन टीकाओं का अध्ययन कर अपने भौतिक व आध्यात्मिक जीवन को सफल बना सकता है। हमें विश्वास है कि यह पुस्तक निश्चित रूप से अध्यात्म के क्षेत्र में रुचि रखने वाले जिज्ञासुओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। 'श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी' के लेखन का एकमात्र लक्ष्य देश व प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा प्रथम से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान से परिचित करवाना है।
Hanumat-Katha
- Author Name:
Krishan Mohan Mishra
- Book Type:

- Description: वाल्मीकि रामायण के अनुशीलन से श्रीराम तथा हनुमान की आध्यात्मिक शक्तियों के दिग्दर्शन होते हैं ।सामान्यतया इतिहास लेखन में आध्यात्मिक शक्तियों पर विचार नहीं किया जाता है, परंतु प्राचीनकाल से ही विश्व के बहुत से समुदायों में कुछ विशिष्ट मानवों में आध्यात्मिक शक्तियों की उपस्थिति के उल्लेख मिलते रहे हैं। अत: आध्यात्मिक तथा अतींद्रिय शक्तियों की अवहेलना उचित नहीं है। इस कृति में श्रीराम तथा हनुमान आदि को ऐतिहासिक समझते हुए उनकी इन शक्तियों का भी कुछ अंश तक परिज्ञान लिया गया है प्रस्तुत उपन्यास मुख्य रूप से वाल्मीकि रामायण तथा सद्गुरुओं के विचारों के आधार पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से लिखा गया है| अस्तु, यदि प्रस्तुत कृति में कुछ अच्छा है, तो वह महान् कवि वाल्मीकि का प्रसाद है और निर्विवाद प्रतीति यह है कि बिना केसरीनंदन हनुमान की कृपा के तो रामकथा अथवा उसका कोई अंश लिखा ही नहीं जासकता। श्री हनुमान के समर्पण, भक्ति, पराक्रम, पौरुष और त्याग का दिग्दर्शन करवाता अत्यंत पठनीय उपन्यास ।
Gurudev Ki Pavitra Vani "गुरुदेव की पवित्र वाणी" | Speeches on Dharma & Self-Realization | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: "गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद को पढ़िए। उनमें आप सबकुछ सकारात्मक ही पाएंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं ।” रोम्या रोलाँ ने स्वामी विवेकानंद के बारे में कहा था— 'उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असंभव है। वे जहाँ भी गए, सर्वप्रथम हुए...हर कोई उनमें अपने नेता का दिग्दर्शन करता था। वे ईश्वर के प्रतिनिधि थे तथा सब पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेना ही उनकी विशिष्टता थी। हिमालय प्रदेश में एक बार एक अनजान यात्री उन्हें देख, ठिठककर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा- ' शिव !' यह ऐसा हुआ, मानो उस व्यक्ति के आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो।‘ प्रस्तुत पुस्तक ‘गुरुदेव की पवित्र वाणी' में स्वामीजी ने सरल शब्दों में अपने गुरु परम पूजनीय श्रीरामकृष्ण के दैनंदिन उपदेशों का संकलन किया है। ये उपदेश उनके लिए भी प्रेरक और मार्गदर्शक बने। इनके माध्यम से हर व्यक्ति अपने आध्यात्मिक जीवन को प्रशस्त कर मानव जीवन को सार्थक कर सकता है।"
Temples Tour: West India
- Author Name:
Rajiv Aggarwal
- Book Type:

- Description: Temples Tour is a book of compilation of major Temples in India and it is compiled with the help of official website of 739 districts of the country (till March 2020), website of Ministry of Tourism of Government of India and all states, website of Archaeological Survey of India, Wikipedia, official website of Temples, other religious websites, Facebook, Twitter, many books and articles. In this compilation, I have covered Temples from Andaman to Ajmer, Bodhgaya to Sarnath, Jagannath Puri to Kedarnath, Kanyakumari to Ksheer Bhavani, Koteshwar to Kamakhya, Lakshadweep to Leh, Sammedshikhar to Shravanbelgola and Somnath to Kashi Vishwanath. There are various types of Temples such as Ashtavinayak Temples, Buddhist Temples, Char Dham, Chota Char Dham, Eight Mahakshetras of Lord Vishnu, Hot/Perennial Sulphur Springs, ISKCON Temples, Jain Temples, Jyotilinga, Nag Devta Temples, Nava Narasimhas, Nava Thirupathi, Panch Badri, Panch Dwarka, Panch Kannan Kshetrams, Panch Kedar, Panch Prayag, Pancha Narasimha Kshetras, Pancharama Kshetras, Pancha Bhoota Sthalam, Panch Sabhai Temples, Sapta Puris, Seven Baithaks of Pushtimarg (Thakurji), Seven Thakurji of Vrindavan, Shakti Peetha, Shani Parihara Temples, Sindhi Temple, Six Abodes of Lord Murugan, Sun Temples, Trilinga Kshetras and other Temples, ponds/lakes, trees, saints and statues of more than 50 foot height.
Urilinga Peddi-Kaalavve
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shri Ramayana Mahanveshanam : Vols.1-2
- Author Name:
M. Veerappa Moily
- Book Type:

-
Description:
अतीत के दीपक से वर्तमान को प्रकाशित करने का प्रयत्न है ‘श्रीरामायण महान्वेषणम्’।
—नीरज जैन प्रतिष्ठित हिन्दी कवि, सतना (म.प्र.)
“I have no doubt that ‘Sri Ramayana Mahanveshanam’ will remain a milestone not only in the history of Kannada literature or Hindi literature, but in the history of Indian literature also. It is his distinct contribution to Ramayana literature.”
—Indira Goswami Professor, Modern Indian Languages & Literary Studies, Delhi University
‘‘मोइली जी को इतनी बड़ी साहित्यिक परियोजना पर सोचने के लिए, उसे पूरा करने के लिए, और भारतीय परम्परा में उसके उचित सन्निवेश के हेतु प्रयास करने के लिए बधाई देना चाहता हूँ...।
—डॉ. वागीश शुक्ल कवि, दार्शनिक, समालोचक तथा प्रोफ़ेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
Kailas: Shiva's Abode
- Author Name:
Hemant Sharma +2
- Rating:
- Book Type:

- Description: Wanderlust and the desire to know the land and society more had been fueling my wish to visit Kailas. There were many curiosities. All our major rivers have their source in the region. The largest reservoir of fresh water on earth is situated there. The celestial swans are found there. I recall that how in my childhood, my Grandmother used to describe Kailas as being akin to a dreamland. According to her, Shri Krishna has said in the Gita – Meruru shikhirinamaham – ‘Among mountains I am Kailas!’ It was Sage Mandhata who first set foot on this sacred soil. Adi Shankaracharya shed his mortal body here. Guru Nanak meditated here and Swaminarayana, the founder of the sect that bears his name, saw the vision of god here. The Ramayana and the Mahabharata mention Kailas. This is where Ravana had worshipped Lord Shiva. He wanted to take Kailas with him. Shiva guilefully dissuaded him from doing so. Arjuna performed penance here and received the Pashupata Astra from Shiva. Yudhishthir proceeded heavenwards via this route. One by one, all the family members fell by the roadside; only the faithful dog kept company. Bhasmasur, the Rakshas, a devotee of Shiva was reduced to cinders here. Today the dark shadow of civilisation has begun to fall even on Mansarovar. This lake is shrinking. The sacred water body, that once stretched across 410 square kilometres, is now shrunk to only 10 square kilometres. Consider this the rage of Nature. Had Kalidasa been alive, he would have been deeply saddened to see his beloved Himalaya in this state. Is it the same Himalaya that is described in Raghuvamsham and Kumar Sambhavam? Civilisation has reached a point where the divine dimensions of Himalaya are disturbed.
Dharam Ke Naam Par
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

-
Description:
धर्म के सही चरित्र एवं स्वरूप से परिचित हुए बिना विवेकहीनता, अन्धविश्वासों एवं भ्रान्तियों से मुक़ाबला नहीं किया जा सकता। इस दिशा में यह पुस्तक एक सार्थक प्रयास है। लेखक ने निष्पक्ष दृष्टि से बिना किसी पूर्वग्रह के तीन धर्मों—हिन्दू, ईसाई और इस्लाम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए हिंसा, नारी और दासत्व के सन्दर्भ में संक्षिप्त पर तथ्यपरक व वस्तुगत विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
धर्म का बीभत्स और बर्बर रूप आज हम देख रहे हैं। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और अफ़ग़ानिस्तान में धर्म के रक्तरंजित इतिहास को दोहराया जा रहा है। धार्मिक-स्थल अपराधियों के शरण-स्थल बने हुए हैं। धर्म का अपराध के साथ गठजोड़ चिन्तित करता है। भजन-कीर्तन-प्रवचन के आयोजनों और धार्मिक-स्थलों के निर्माण में बेशुमार वृद्धि हुई है, वहीं हत्या, बलात्कार, उत्पीड़न और भ्रष्टाचार बढ़े हैं। स्वयं मनुष्य अपनी नियति तथा भाग्य का निर्माता है। समता, स्वतंत्रता और न्याय प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। कोई भी ऐसी व्यवस्था जो मनुष्य को इन अधिकारों से वंचित करती है, वह मानव-विरोधी है, चाहे वह धर्म हो या साम्राज्यवाद या फासीवाद या निजी स्वार्थों पर आधारित विकृत तथा जनविरोधी जनतंत्र। मनुष्य सर्वोपरि है, उसके ऊपर कोई नहीं, न धर्म न ईश्वर।
Treasures of Lakshmi
- Author Name:
Namita Gokhale +1
- Book Type:

- Description: Treasures of Lakshmi is the culmination of the much-loved goddess series, brilliantly curated and edited by Namita Gokhale and Malashri Lal. This trilogy, which began with In Search of Sita and continued with Finding Radha, examines the mystical realms of Hindu thought and practice, celebrating the essence of the sacred feminine. Whether it is Lakshmi’s 108 names or a sahasranama of a thousand appellations, her blessings are multidimensional and eternal. as the third and final instalment of this remarkable trilogy, Treasures of Lakshmi takes readers on a unique journey of exploration, unravelling the compelling narrative of ‘the goddess who gives’.
Baal Shri Ram
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description: इस किताब में श्रीराम का जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं को सुंदर चित्रांकन और सरल भाषा में बताया गया है।
Shri Ramcharitmanas : Saptam Sopan Uttar Kand
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Shri Ramcharitmanas : Saptam Sopan Uttar Kand Literary Criticism Ram Sahitya
Upnishdon Ke Samvad
- Author Name:
Shobha Nigam
- Book Type:

-
Description:
उपनिषद् भारत के गौरव-ग्रंथ हैं। ये वेदों के अंतिम भाग हैं। वैसे तो ये विश्वप्रसिद्ध ग्रंथ हैं, किंतु दुःख की बात है कि इनसे हम भारतीय ही बहुत कम परिचित हैं। अत्यंत सरल किंतु ओजस्वी भाषा में ये ग्रंथ दार्शनिक समस्याओं पर विचार करते हैं, ऐसी दार्शनिक समस्याओं पर जो मानवजीवन से जुड़ी हुई हैं। ये भारत को श्रेष्ठ मार्ग तो दिखाते ही हैं...प्रेरित करते हैं...चेतावनी भी देते हैं कि यदि हमने इसे नहीं अपनाया तो जीवन में महान हानि निश्चित है।
इस तरह उपनिषदों की शिक्षा सदियों से मानव पर उपकार करती आई है। उपनिषदों ने न केवल भारतीयों को अथवा हिंदुओं को प्रभावित किया है वरन् इन्होंने अन्य देश एवं धर्म के लोगों को भी प्रभावित किया है। अनेक विदेशी विद्वान भी इनके मुरीद हुये हैं। इनसे न केवल परवर्ती आस्तिक दर्शन सिंचित हुये हैं वरन् नास्तिक दर्शन भी सिंचित हुये हैं।
उपनिषदों की एक बड़ी विशेषता यह भी रही है कि वेदों के कर्मकांड की ओर बढ़ते कदमों को रोककर यहां के तेजस्वी ऋषियों ने ज्ञानकांड की गंगा बहाकर भारतीय दर्शन, भारतीय समाज और भारतीय धर्म को एक नई दिशा की ओर मोड़ा है। भगवत्गीता पर उपनिषदों का अत्यंत प्रभाव पड़ा है। गीता को इसीलिये उपनिषदों का सार कहा जाता है।
उपनिषदों के विचार मुख्यतः गुरु और शिष्य के मध्य संवाद रुप में प्रस्तुत हुये हैं। वैसे तो उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है किंतु इस ग्रंथ में हमने 11 प्रमुख उपनिषदों में आये संवादों को 31 अध्यायों में प्रस्तुत किया है। बृहदारण्यक एवं छांदोग्य उपनिषद् से सर्वाधिक संवाद लिये गये हैं जो इन उपनिषदों का बृहत् आकार देखते हुये स्वाभाविक है।
Nanak Vani
- Author Name:
Jairam Mishra
- Book Type:

-
Description:
नानक वाणी में धार्मिक, लौकिक और लौकिक-धार्मिक काव्य का सहज समन्वय है। इसमें कर्ममार्ग, योगमार्ग, भक्तिमार्ग और ज्ञानमार्ग का विशद निरूपण है। नानक वाणी में शान्त, शृंगार, करुण, वीर, हास्य आदि रसों का अद्भुत परिपाक है। उनका प्रकृति चित्रण अत्यन्त मोहक और आकर्षक है। उनकी भाषा पूर्वी पंजाबी है, परन्तु उसमें ब्रजभाषा और खड़ी बोली का भी पुट है। मुहावरों और कहावतों का प्रचुर प्रयोग है। नानक के अनुसार परमात्मा एक है वह कर्तार है, वह भय से रहित है, बैर से रहित है, मूर्तिमान है, काल से रहित है, योनि के अन्तर्गत नहीं आता। नानक वाणी में जहाँ एक ओर गुरु गाम्भीर्य और ज्ञान-वैराग्य भक्ति का अमृत मन्थन है वहाँ उनकी भाषा में अद्भुत ओज और भक्ति है। उनकी रचना-शैली में काव्य का लालित्य, माधुर्य, विचार सम्पन्नता सब कुछ है। नानक वाणी हृदय और मस्तिष्क को स्पर्श ही नहीं करती प्रत्युत उन्हें अनुप्राणित भी करती है।
नानक वाणी में उन्नीस राग प्रयुक्त हुए हैं : राग श्री, माझ, गौरी, आसा, गुजरी, वडहंस, सोरठि, धनासिरी, तिलंग, सूही, बिलावल, रामकली, मारू, दुखारी, भैरउ, बसंत, सागर, मलार तथा प्रभाती। नानक वाणी संगीतमय है, विचारोत्तेजक है। नानक वाणी का यह संस्करण अपनी विशद् सारगर्भित भूमिका के कारण अधिक सुबोध और उपयोगी हो गया है। श्रीगुरु नानक देव की सम्पूर्ण वाणी का यह मूल्यवान संग्रह उनके सभी भक्तों और प्रेमियों के पास अवश्य होना चाहिए।
Andhshraddha Ki Gutthi
- Author Name:
Narendra Dabholkar
- Book Type:

-
Description:
विश्वास और अंधविश्वास में अंतर समझते समय मूल दिक्कत यह आती है कि एक समय में जिस विश्वास को सराहा जाता था वही दूसरे समय में अंधविश्वास बन जाता है। समाज का एक हिस्सा जिसे अंधविश्वास मानता है, वही किसी दूसरे समूह को पवित्र लगता है। सती प्रथा और मेलों में दी जानेवाली बलि ऐसी ही परंपराएँ थीं। एक सदी पूर्व का यह विश्वास आज नृशंस अंधविश्वास की श्रेणी में आ गया है।
इसीलिए श्रद्धाओं की जाँच करनी पड़ती है। विज्ञान के विकास का इतिहास ऐसी ही श्रद्धाओं की जाँच करने का इतिहास है। कोपर्निकस, गैलिलियो ने इन श्रद्धाओं को जाँचा, और जो पाया, उसे व्यक्त करने पर यातना भी सही। क्या समाज सुधार का इतिहास भी ऐसा ही नहीं है? इस पर गौर करें तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि श्रद्धा की जाँच करना और जिन्हें वह श्रद्धा सामाजिक जीवन के लिए अनिष्ट व अनुचित लगती है, उन्हें उन श्रद्धाओं के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए संगठित करने की आजादी आज की बड़ी जरूरत है।
अंधविश्वास उन्मूलन के बारे में सुधीजन एक सलाह और देते हैं कि असहमति जताओ लेकिन विरोध मत करो। लेकिन सामाजिक परिवर्तन के लिए असहमति तक सीमित रहना संभव नहीं है। उसके लिए सक्रिय आंदोलन की जरूरत होती है। सचेत संघर्ष की जरूरत होती है। इस पुस्तक में ऐसे ही संघर्षों का विवरण डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने अपने शब्दों में दिया है। ‘बोलता पत्थर’, ‘लंगर का चमत्कार’, ‘कमर अली दरवेश की पुकार’, ‘अनुराधा देवी की बंद मुट्ठी’ और अन्य ऐसी ही अंधविश्वास-पूर्ण गतिविधियों के विरुद्ध डॉ. नरेंद्र दाभोलकर और उनके संगठन के ये आंदोलन निस्संदेह पठनीय है।
Magh Mela
- Author Name:
Vincent Van Ross +2
- Book Type:

- Description: This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad. Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh. Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows. The month of Magh begins with Paush Purnima and ends with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons. Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus. Separate chapters are devoted to the most auspicious months of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month. The most important ritual for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan). Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
Aaydakki Marayya-Aaydakki Lakkamma
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

-
Description:
अहंकार की भक्ति से धन का नाश
क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश
दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा
दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥
कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से
दासोह कर सकते हैं कभी?
इक मन से लाकर इक मन से ही
मन बदलने से पहले ही
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को
समर्पित करना चाहिए मारय्या॥
जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की ग़रीबी हो सकती है,
चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले
सद्भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग की सेवा में लगे रहने तक॥
—लक्कमा
कायक में मग्न हो तो
गुरुदर्शन को भी भूलना चाहिए।
लिंग पूजा को भी भूलना चाहिए।
जंगम सामने होने पर भी उसके दाक्षिण्य में न पड़ना चाहिए।
कायक ही कैलास होने के कारण
अमरेश्वरलिंग को भी कायक करना है॥
—मारय्या
दो नयनों की भक्ति एक दृष्टि में देखने की तरह सती-पति एक भक्ति में देखने से गुहेश्वर को भक्ति स्वीकार है।
Divine Spiritual Mala
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Divine Spiritual Mala is a book written by author and spiritual coach, Dr.Sanjay Rout. The book offers an in-depth exploration of the power of mala beads as a tool for meditation and spiritual growth. In it, she explains how to use malas to open up your consciousness and connect with the divine energy within you. She also provides practical guidance on how to create your own personal mala or purchase one that fits with your individual needs. Dr.Sanjay Rout has been teaching spirituality since 1966 when she founded her organization, Ananda Marga Yoga Ashram in Canada’s British Columbia province where she still resides today. She has traveled extensively throughout India giving lectures on yoga philosophy while continuing her work as an internationally recognized teacher of Eastern spirituality practices including mantra chanting, kirtan (devotional singing) as well as japa (repetition) meditations using sacred mantras such as Om Namah Shivaya or Hare Krishna Mahamantra . In Divine Spiritual Mala Dr.Sanjay guides readers through each step necessary for creating their own personalized mala experience – from selecting appropriate materials like wood or gemstones; stringing them together into meaningful patterns; learning techniques such asspacing out prayer beads along its length ;and finally connecting spiritually with words , prayers ,or affirmations during meditation sessions . By following these steps readers can discover greater peace within themselves by tapping into the healing power found at their very core .
Shri Leela Ramayan
- Author Name:
Bhanushankar Mehta
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक ‘श्रीलीला रामायण’ में तुलसी की रामकथा है, उनका मानस है और गद्य-पद्य में उन्हीं की पंक्तियाँ हैं। प्रत्येक प्रसंग का मानस के अनुसार स्वरूप दिया गया है। यदि लीला करनेवाले चाहें तो उनका कवित्त-छन्द रीति से शृंगार कर सकते हैं, पर ध्यान रहे अतिरेक न हो, कथा का रस भंग न हो। क्षेपक जोड़ने से कथा का विस्तार होगा और यदि समय अनुमति दे तो वैसा कर सकते हैं। इस लीला-संग्रह में कोई दुराग्रह नहीं है, कोई बाध्यता नहीं है पर जो केवल तुलसी के ‘रामचरितमानस’ को रूपायित करना चाहते हैं, उनके लिए यह उपयोगी होगा। इसका पाठ आपको ‘रामचरितमानस’ के संक्षिप्त पाठ का सुख देगा। रामजी की प्रेरणा से यह लिखा गया और उन्हीं के युगल चरणों में अर्पित है।
Sanskrtik Virasat Ke Dhani : Bharat Aur Japan
- Author Name:
Shila Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: "जापान में भी ईश्वर की पूजा-अर्चना, सेवा, देवों का आह्वान करने की रीतियाँ भारतीय जीवन से बहुत कुछ मिलती-जुलती हैं। भारत की तरह जापान में भी मकान बनाने से पहले भूमि-पूजन करते हैं। परिवार के मंगल के लिए पितरों से आशीर्वाद लेते हैं। गुरु-शिष्य परंपरा का दर्शन वहाँ भी होता है। जापान की पौराणिक कहानियों में पत्थर में परिवर्तित हुई लड़की अपने श्रीरामचरितमानस की अहल्या जैसी ही लगती है और जापान की सूर्य उपासना की पद्धति भारत के सूर्य नमस्कार के जैसी ही है। जिस प्रकार हिंदू कोई धर्म नहीं है, एक जीवन पद्धति है, उसी प्रकार शिंतो भी प्रकृति और मनुष्य के साहचर्य की जीवन पद्धति है, जिसका किसी दर्शन, धर्म, ग्रंथ अथवा उपदेश से साम्य नहीं है, बस वह रहन-सहन का एक तरीका भर है। जापान में भी दीपावली की तरह जगमगाहट है; होली की तरह रंगों की फुहार है; पतंगों के उत्सव में भिन्न-भिन्न प्रकार के पतंगों से रँगा हुआ पूरा आसमान है; शादी-विवाह के मौकों पर संगीत से सजी हुई महफिलें हैं तो साकुरा के बागों तले फूलों की अल्हड़ बरसात है; कठपुतलियों के नृत्य हैं। काबुकी के रंग-मंच में अभिनय के रंगों में रँगी हुई कोमल भावनाएँ हैं और भारत से मिलता-जुलता हर जगह बहुत कुछ है। यह पुस्तक इन्हीं अनुभवों पर आधारित एक प्रतिबिंब है, जिसमें जापान के अनेक रंगों को समेटने का प्रयास किया गया है। "
Ramlila Ki Utpatti Tatha Vikas
- Author Name:
Mohan Ram Yadav
- Book Type:

-
Description:
राम के जीवन में भारतीय आदर्शों के चरम विकास के दर्शन होते हैं। भक्ति-सम्प्रदाय में वे भगवान के अवतार माने जाते हैं। अतः उनके चारित्रिक गुण एवं जीवन का ज्ञान बड़े उत्साह से प्राप्त किया जाता है। रामलीला का आयोजन भारत में तो अत्यन्त प्राचीन काल से होता ही रहा है, विदेशों में भी सहस्रों वर्षों से बसे भारतीय इसे अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। इस प्रकार रामलीला ने विदेशों में स्थापित भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध को ऐसा दृढ़ बना दिया है कि सहस्रों वर्षों तक निरन्तर प्रयत्न करते रहने पर भी काल उसे नष्ट करने में समर्थ नहीं हो सका है। इसमें सांस्कृतिक जीवन की ऐसी महत्त्वपूर्ण झाँकी मिलती है जो इस युग में भी समस्त क्षेत्रों में मानव का पथ-प्रदर्शन करने में सर्वथा समर्थ है।
देश के कोने-कोने में रामलीला के आयोजन की चर्चा अनेक धार्मिक तथा ऐतिहासिक ग्रन्थों में हुई। किन्तु किसी में उसका सम्यक् निरूपण प्राप्त नहीं होता। रामलीला का आयोजन प्रायः भक्ति-साधना के रूप में होता रहा है। अतएव भौतिकता से दूर रहनेवाले साधु-महात्मा इसके विश्लेषणात्मक इतिहास को धर्म-विरुद्ध समझ इससे दूर ही रहे। उन्हें तो रामलीला के दर्शन मात्र से प्रयोजन था। गोस्वामी जी राम का व्यापक प्रचार करना चाहते थे। उनके मत से तात्कालिक व्याधियों का सबसे बड़ा उपचार रामचरित था। जहाँ उन्होंने प्रचार के अनेक साधन अपनाए वहाँ मानस की रामलीला का आयोजन धूम-धाम से किया। रामलीला प्रचार का बड़ा उपयुक्त साधन है। कथा-वार्ता, मन्दिर या अखाड़ों में तो वह व्यक्ति जाता है जिसमें उस प्रकार की प्रवृत्ति रहती है, किन्तु रामलीला के कारण ऐसे जन भी उनकी ओर आकृष्ट होते हैं जिनकी सम्भावना नहीं की जाती। इसमें मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी मिलती हैं। प्रत्यक्ष दर्शन का प्रभाव श्रव्यकाव्य या उपदेश की अपेक्षा अधिक तथा स्थायी होता है।
गोस्वामी जी के पूर्व से वाल्मीकीय ‘रामायण’ के अनुसार रामलीला होती थी। उसके प्रति जनता में आस्था भी थी। वाल्मीकीय ‘रामायण’ के निर्माण काल की सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक परिस्थिति तत्कालीन समय से भिन्न थी। वाल्मीकीय ‘रामायण’ के आधार पर होनेवाली रामलीला में धार्मिक भावना की प्रधानता थी। वह मुसलमानी शासन तथा इस्लाम धर्म के कारण उस युग में उपादेय सिद्ध नहीं हो सकती थी। गोस्वामी जी उसको नया तथा उपयोगी स्वरूप प्रदान करना चाहते थे। यह रामलीला का आन्दोलन था। रामलीला के आयोजन से जनता में नव-चेतना जग पड़ी। उनके सामने एक उदाहरण प्रत्यक्ष रूप में आ गया। राम की भाँति विपत्तियों में धैर्य रखने तथा पराक्रम द्वारा कार्य करने से राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश हो सकता है। भारतीय संस्कृति का मूर्त रूप पाकर जनता ने अपने हृदय का परिष्कार किया तथा चरित्र सुधारा। गोस्वामी जी की रामलीला की लहर सारे उत्तरी भारत में फैलती हुई दक्षिण में भी जा पहुँची। सारा देश राममय हो गया। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तथा अटक से लेकर कटक तक रामलीला का आन्दोलन व्याप्त हो गया। इस क्षेत्र में गोस्वामी जी को अपूर्व सफलता मिली।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book