Shri Guru Granth-Darshan
(0)
Author:
Jai Ram Mishra, Jairam MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
300
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‘गुरुग्रन्थ’ की अधिकांश रचनाएँ उन सिक्ख गुरुओं की हैं जो सीधे गुरु नानक देव की शिष्य-परम्परा में आते हैं तथा जिन्हें क्रमश: उन्हीं की ‘ज्योति का प्रतिरूप’ रहते आने के कारण, 'नानक' संज्ञा द्वारा अभिहित करने की परिपाटी भी चली आई है।</p> <p>इसमें संगृहीत वाणियों के रचयिताओं की चेष्टा अधिकतर यही जान पड़ती है कि जो कुछ वास्तविक सत्य के रूप में अनुभूत हो उसे स्वयं अपने जीवन में भी उतारा जाए तथा वैसा ही करने का परामर्श किसी दूसरे को भी दिया जाए। वैसे सत्य का स्वरूप सदा एकरस एवं विश्वजनीन ही हो सकता है।</p> <p>‘गुरुग्रन्थ' की एक ऐसी अन्य विशेषता, उसमें संगृहीत विविध रचनाओं के क्रमदान में भी पाई जा सकती है। उसमें आए हुए पदों को कोई ऐसा शीर्षक भी दिया हुआ नहीं मिलता जो विषयानुसार निश्चित किया गया हो तथा जिसके सहारे हमें उस मत-विशेष का परिचय मिल सके जिसे उनके रचयिताओं ने प्रकट किया होगा। उनका क्रम केवल रागानुसार ही स्थिर किया गया जान पाता है जिससे इस विषय में, हमें कोई भी सहायता नहीं मिल पाती। हमें यहाँ प्रत्यक्षत: केवल इतना ही पता चल पाता है कि सिक्ख गुरुओं ने, तथा कतिपय सन्तों, भक्तों ने एवं सूफियों तक ने भी एक ही प्रकार के गीत गाए होंगे।
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‘गुरुग्रन्थ’ की अधिकांश रचनाएँ उन सिक्ख गुरुओं की हैं जो सीधे गुरु नानक देव की शिष्य-परम्परा में आते हैं तथा जिन्हें क्रमश: उन्हीं की ‘ज्योति का प्रतिरूप’ रहते आने के कारण, 'नानक' संज्ञा द्वारा अभिहित करने की परिपाटी भी चली आई है।</p>
<p>इसमें संगृहीत वाणियों के रचयिताओं की चेष्टा अधिकतर यही जान पड़ती है कि जो कुछ वास्तविक सत्य के रूप में अनुभूत हो उसे स्वयं अपने जीवन में भी उतारा जाए तथा वैसा ही करने का परामर्श किसी दूसरे को भी दिया जाए। वैसे सत्य का स्वरूप सदा एकरस एवं विश्वजनीन ही हो सकता है।</p>
<p>‘गुरुग्रन्थ' की एक ऐसी अन्य विशेषता, उसमें संगृहीत विविध रचनाओं के क्रमदान में भी पाई जा सकती है। उसमें आए हुए पदों को कोई ऐसा शीर्षक भी दिया हुआ नहीं मिलता जो विषयानुसार निश्चित किया गया हो तथा जिसके सहारे हमें उस मत-विशेष का परिचय मिल सके जिसे उनके रचयिताओं ने प्रकट किया होगा। उनका क्रम केवल रागानुसार ही स्थिर किया गया जान पाता है जिससे इस विषय में, हमें कोई भी सहायता नहीं मिल पाती। हमें यहाँ प्रत्यक्षत: केवल इतना ही पता चल पाता है कि सिक्ख गुरुओं ने, तथा कतिपय सन्तों, भक्तों ने एवं सूफियों तक ने भी एक ही प्रकार के गीत गाए होंगे।
Book Details
-
ISBN9789388211604
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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रामचन्द्र गाँधी एक ऐसे भारतीय दार्शनिक थे जिनकी साहित्य और कलाओं में गहरी दिलचस्पी थी : उनका चिन्तन अक्सर अध्यात्म, कला और साहित्य को अपनी समझ के भूगोल में समाविष्ट करता था। अपने जीवन में उनका अपने समय के कई बड़े लेखकों और कलाकारों से सम्पर्क और दोस्ताना था। चित्रकार तैयब मेहता के एक त्रिफलक से प्रेरित होकर रामचन्द्र गाँधी ने यह अद्भुत पुस्तक लिखी है। सम्भवत: किसी कलाकृति पर ऐसी विचार-सघन पुस्तक कम से कम भारत में दूसरी नहीं है। उसमें जितने दार्शनिक आशय कला के खुलते हैं, उतने ही अभिप्राय स्वयं रामचन्द्र गाँधी के चिन्तन के भी। यह सीमित अर्थों में कलालोचना नहीं है पर यह दिखाती है कि गहरा कलास्वादन उतने ही गहरे मुक्त चिन्तन को उद्वेलित कर सकता है। तैयब मेहता रज़ा साहब के घनिष्ठ मित्र थे। इस पुस्तक का आलोचक मदन सोनी द्वारा बड़े अध्यवसाय से किया गया हिन्दी अनुवाद उस कला-मैत्री को एक प्रणति भी है। —अशोक वाजपेयी
Prayagraj Aur Kumbh : Sanskritik Vaibhav Ki Abhinav Gatha
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Zilani Bano +1
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यागराज को तीर्थराज कहा गया है। यह भारत का सर्वप्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र होने के साथ ही भारतीय सात्त्विकता का सर्वोत्तम प्रतीक भी है। यह हिन्दू-आस्था का एक महान केन्द्र तो है ही, यह हमारे देश की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रबिन्दु भी है। प्रयागराज के माहात्म्य का विस्तृत वर्णन मत्स्य, पद्म और कूर्म पुराण के कई अध्यायों में मिलता है। कुम्भ के दौरान संगम तीर्थ पर एक स्नान-दिवस पर भक्तिभाव से कई बार इतने लोग जमा हो जाते हैं कि उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक होती है। उन श्रद्धालुओं को कभी कोई निमंत्रण नहीं देता, वे श्रद्धा और भक्ति की एक अदृश्य डोर में बँधकर वहाँ खिंचे चले आते हैं। हमारी सनातन सस्कृति का यह चुम्बकीय आकर्षण अनादिकाल से यथावत् बना हुआ है। श्रद्धा और आस्था का यह आवेग सदियों से चली आ रही हमारी परम्परा का हिस्सा है। यह परम्परा हमें अपनी मूल संस्कृति से जोड़े रखने के साथ ही सांस्कृतिक एकीकरण का पथ भी प्रशस्त करती है। स्वाभाविक रूप से प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानना-समझना एक सुखद अनुभूति है। बहरहाल, अभिलेखीय और साहित्यिक स्रोतों के आधार पर प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास को इस पुस्तक में बहुत ही सरस ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रामाणिकता और रोचकता का मणि-कांचन संयोग है। यह पुस्तक हमारे देश के सांस्कृतिक वैभव की एक अभिनव गाथा लेकर आई ह
Dr. Kalam : Prerna Ki Udaan
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Dr. Unnat Pandit
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ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक, विचारक, दाशर्निक और शिक्षक के रूप में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने प्रत्येक भारतीय को सदैव प्रेरित किया है। उनके जीवन, कॅरियर और लेखन ने कोटि-कोटि भारतीयों का मार्गदर्शन किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया है। वे हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन हर भारतीय के हृदय में हमेशा उनका स्थान रहेगा। वे समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर हमारे मन में सदैव ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे। प्रस्तुत पुस्तक ‘डॉ. कलाम : प्रेरणा की उड़ान’ उनके सहज-सरल, अनुकरणीय जीवन का एक विशद् विवेचन करती है। इस पुस्तक का उद्देश्य भारत के सर्वांगीण विकास के डॉ. कलाम के स्वप्न को साकार करने की प्रबल इच्छाशक्ति जाग्रत् कराना है, ताकि भारत के छात्र-युवा-आमजन प्रेरणा ले सकें। यह पुस्तक पढ़कर छात्रों को भारतीय रक्षा और अनुसंधान विकास में एरोनॉटिकल इंजीनियर, मिसाइल इंजीनियरिंग, उपग्रह प्रक्षेपण यान तकनीक के क्षेत्र में डॉ. कलाम के अनगिनत योगदानों के विषय में और ज्यादा जानने का अवसर मिलेगा। स्वप्न देखकर उन्हें साकार करने की क्षमता प्राप्त करने की उड़ान भरने में यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी।
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