Magh Mela
Author:
Vincent Van Ross, Rakesh Kumar Shukla, Sanjay KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 796
₹
995
Available
This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad.
Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh.
Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows.
The month of Magh begins with Paush Purnima and ends
with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons.
Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus.
Separate chapters are devoted to the most auspicious months
of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month.
The most important ritual
for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan).
Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
ISBN: 9789353220402
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: Hindutva is a geo-cultural concept that embodies respect, a sense of place, and the feeling of coexistence for everyone. This synchronicity-oriented cultural consciousness has made it quite liberal, tolerant, and flexible. The situation deteriorated when external invaders took advantage of the liberality of this overly tolerant culture and started to cut at its very roots. The excessive permissiveness of Hindutva was misinterpreted as cowardice, leading to a concerted effort to destroy all its fundamental elements. Even today, various conspiracies are being devised with a similar aim. Forbearance has rendered the supporters and followers of ‘Hindutva’, or ‘Indianness’, indifferent, impotent, and fatalistic. The common-good-oriented philosophy of self-righteousness does not imply that, in this world and in our behavior, we should forget our duty to ourselves and neglect self-defense. The policy of abandonment in the face of invaders has nothing to do with the philosophy and principle of coexistence and tolerance. Every time Hindutva failed to confront invading enemies, its supporters not only suffered humiliation but also lived under subjugation. Hindutva is so devoted to the pursuit of truth that it does not compromise on any account. For Hindutva, the existence of this world is not the ultimate truth; rather, it is an illusion. In other words, what exists in reality is simply a manifestation of an eternal and true non-dual Brahman. —From this book
Shri Hanuman Chalisa Rahasy
- Author Name:
Shailesh Tiwari
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- Description: Book
Dhyan Aur Iski Vidhiyan "ध्यान और इसकी विधियाँ" | Philosophy Self-Realization & Enlightenment | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
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- Description: "स्वामी विवेकानंद की गहन और अंतर्दृष्टि से परिपूर्ण यह पुस्तक ध्यान और इसकी विधियाँ, आत्म-खोज और आध्यात्मिक जागृति के मार्ग पर एक मार्गदर्शक की भाँति प्रकाश डालती है। विश्वविख्यात आध्यात्मिक विभूति एवं दार्शनिक स्वामी विवेकानंद ने ध्यान की परिवर्तनकारी शक्ति को पहचाना और दुनिया में इसके ज्ञान को फैलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। ध्यान पर उनकी शिक्षाएँ अनगिनत लोगों को आत्म- साक्षात्कार की प्रेरणा देती; मार्गदर्शन करती हैं । इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद ध्यान के मार्ग पर लोगों के सामने आनेवाली चुनौतियों और गलत धारणाओं के विरुद्ध सच्चा मार्गदर्शन करते हैं । वे एक नियमित ध्यान के अभ्यास का क्रम स्थापित करने, विकर्षणों को दूर करने और गहन एकाग्रता की स्थिति विकसित करने के बारे में व्यावहारिक परामर्श प्रदान करते हैं। इसके अलावा वे ध्यान के परिवर्तनकारी प्रभावों पर मूल्यवान अंतर्टृष्टि प्रदान करते हैं, जिसमें हमारे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और भावनात्मक संतुलन पर इसका प्रभाव सम्मिलित है। ध्यान पर स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएँ सैद्धांतिक अवधारणाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके अपने व्यक्तिगत अनुभवों में गहराई से निहित हैं। मानव-मन और अस्तित्व के आध्यात्मिक आयामों की उनकी गहरी समझ इस पुस्तक के प्रत्येक पृष्ठ में झलकती है।"
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