Aaydakki Marayya-Aaydakki Lakkamma
(0)
Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
300
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Available
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अहंकार की भक्ति से धन का नाश</p> <p>क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश</p> <p>दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा</p> <p>दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी</p> <p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥</p> <p>कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से</p> <p>दासोह कर सकते हैं कभी?</p> <p>इक मन से लाकर इक मन से ही</p> <p>मन बदलने से पहले ही</p> <p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को</p> <p>समर्पित करना चाहिए मारय्या॥</p> <p>जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की ग़रीबी हो सकती है,</p> <p>चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले</p> <p>सद्भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी</p> <p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग की सेवा में लगे रहने तक॥</p> <p>—लक्कमा</p> <p> </p> <p>कायक में मग्न हो तो</p> <p>गुरुदर्शन को भी भूलना चाहिए।</p> <p>लिंग पूजा को भी भूलना चाहिए।</p> <p>जंगम सामने होने पर भी उसके दाक्षिण्य में न पड़ना चाहिए।</p> <p>कायक ही कैलास होने के कारण</p> <p>अमरेश्वरलिंग को भी कायक करना है॥</p> <p>—मारय्या</p> <p> </p> <p>दो नयनों की भक्ति एक दृष्टि में देखने की तरह सती-पति एक भक्ति में देखने से गुहेश्वर को भक्ति स्वीकार है।
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अहंकार की भक्ति से धन का नाश</p>
<p>क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश</p>
<p>दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा</p>
<p>दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी</p>
<p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥</p>
<p>कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से</p>
<p>दासोह कर सकते हैं कभी?</p>
<p>इक मन से लाकर इक मन से ही</p>
<p>मन बदलने से पहले ही</p>
<p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को</p>
<p>समर्पित करना चाहिए मारय्या॥</p>
<p>जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की ग़रीबी हो सकती है,</p>
<p>चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले</p>
<p>सद्भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी</p>
<p>मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग की सेवा में लगे रहने तक॥</p>
<p>—लक्कमा</p>
<p> </p>
<p>कायक में मग्न हो तो</p>
<p>गुरुदर्शन को भी भूलना चाहिए।</p>
<p>लिंग पूजा को भी भूलना चाहिए।</p>
<p>जंगम सामने होने पर भी उसके दाक्षिण्य में न पड़ना चाहिए।</p>
<p>कायक ही कैलास होने के कारण</p>
<p>अमरेश्वरलिंग को भी कायक करना है॥</p>
<p>—मारय्या</p>
<p> </p>
<p>दो नयनों की भक्ति एक दृष्टि में देखने की तरह सती-पति एक भक्ति में देखने से गुहेश्वर को भक्ति स्वीकार है।
Book Details
-
ISBN9788194364894
-
Pages80
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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