Sanskar Ramayan
(0)
Author:
Dr. Vinod Bala ArunPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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'संस्कार रामायण’ अपने ढंग की अनोखी कृति है। इसमें आयोजनों और अवसरों के अनुरूप पाठ करने के लिए रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का चयन किया गया है। इससे सत्संगों में अवसर के अनुरूप विषयवस्तु निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है। बहुत दिनों से जीवन के सुख-दुःख में अपने घरों में रामायण सत्संग आयोजित करनेवाले भक्त और रामायण-पाठ करनेवाले व्यक्ति एवं संगठन यह जानना चाहते थे कि किस अवसर पर किस प्रसंग का पाठ किया जाए। रामायण सेंटर ने इस पर गंभीरता से विचार किया। ‘संस्कार रामायण’ का प्रकाशन इसी का फल है। रामायण प्रेमियों की आकांक्षा की संपूर्ति के लिए जीवन के सुख-दुःख को सात मुख्य शीर्षकों में बाँटा गया है। जन्म और जन्मदिन, विद्यारंभ, विवाह और विवाह की वर्षगाँठ, गृह-प्रवेश, शुभ अवसर, संकट-आपदा तथा मृत्यु और पुण्यतिथि—इन्हीं के भीतर प्रायः जीवन की सारी गतिविधियाँ समाहित होती हैं। ‘संस्कार रामायण’ अवसर के अनुरूप रामायण के प्रसंगों के पाठ की सुविधा प्रदान करेगी और जीवन को संस्कारित करने की प्रेरणा भी देगी। हर रामायण-प्रेमी के पास ‘संस्कार रामायण’ की एक प्रति अवश्य होनी चाहिए।
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'संस्कार रामायण’ अपने ढंग की अनोखी कृति है। इसमें आयोजनों और अवसरों के अनुरूप पाठ करने के लिए रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का चयन किया गया है। इससे सत्संगों में अवसर के अनुरूप विषयवस्तु निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।
बहुत दिनों से जीवन के सुख-दुःख में अपने घरों में रामायण सत्संग आयोजित करनेवाले भक्त और रामायण-पाठ करनेवाले व्यक्ति एवं संगठन यह जानना चाहते थे कि किस अवसर पर किस प्रसंग का पाठ किया जाए। रामायण सेंटर ने इस पर गंभीरता से विचार किया। ‘संस्कार रामायण’ का प्रकाशन इसी का फल है।
रामायण प्रेमियों की आकांक्षा की संपूर्ति के लिए जीवन के सुख-दुःख को सात मुख्य शीर्षकों में बाँटा गया है। जन्म और जन्मदिन, विद्यारंभ, विवाह और विवाह की वर्षगाँठ, गृह-प्रवेश, शुभ अवसर, संकट-आपदा तथा मृत्यु और पुण्यतिथि—इन्हीं के भीतर प्रायः जीवन की सारी गतिविधियाँ समाहित होती हैं।
‘संस्कार रामायण’ अवसर के अनुरूप रामायण के प्रसंगों के पाठ की सुविधा प्रदान करेगी और जीवन को संस्कारित करने की प्रेरणा भी देगी। हर रामायण-प्रेमी के पास ‘संस्कार रामायण’ की एक प्रति अवश्य होनी चाहिए।
Book Details
-
ISBN9789350488713
-
Pages328
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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बसवेश्वर की वचन रचना का उद्देश्य ही सुखी समाज की स्थापना करना था। चोरी, असत्य, अप्रामाणिकता, दिखावा, आडम्बर एवं अहंरहित समाज की स्थापना बसव का परम उद्देश्य था, जो निम्न एक वचन से स्पष्ट होता है—
चोरी न करो, हत्या न करो, झूठ मत बोलो
क्रोध न करो, दूसरों से घृणा न करो,
स्वप्रशंसा न करो, सम्मुख ताड़ना न करो,
यही भीतरी शुद्धि है और यही बाहरी शुद्धि है,
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हठ चाहिए शरण को पर-धन नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को पर-सती नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को अन्य देव को नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को लिंग-जंगम को एक कहने का, हठ चाहिए शरण को प्रसाद को सत्य कहने का, हठहीन जनों से कूडलसंगमदेव कभी प्रसन्न नहीं होंगे॥
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