Lohe Ki Kamarpetiyan
Author:
Tapi Dharma RaoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 20
₹
25
Unavailable
स्वर्गीय तापी धर्माराव के लेखन का फ़ोकस मुख्यत: समाज सुधार रहा है। तेलगू में इनकी पुस्तकें लोकप्रियता के शिखर पर रही हैं। इस पुस्तक में विख्यात लेखक ने कमरपेटियों की परम्परा और इतिहास को अपना विषय बनाया है।</p>
<p>कमरपेटियाँ हमारी परम्परा में जड़ी यौन–वर्जनाओं, पुरुष–वर्चस्व और शुद्धतावादी नैतिक आग्रहों की चरम और सर्वाधिक नृशंस अभिव्यक्ति हैं। इस पुस्तक में कमरपेटियों के इतिहास, उनके समाज–नीतिशास्त्र और वर्तमान में उनके लोक–प्रचलित अवशेषों का सरल, जनसाधारण की भाषा में विवरण दिया गया है। लेखक बताते हैं कि मरुगुबिल्लाओं (लाज–रक्षक पदक) के रूप में आज आन्ध्र में जो आभूषण प्रचलित है, वह कमरपेटियों का ही इमिटेशन है। उसके अलावा पुरातात्त्विक सर्वेक्षणों और खुदाइयों में मिली कमरपेटियों, उनके प्रकारों और उनसे जुड़ी किंवदन्तियों के बारे में प्रामाणिक जानकारी इस पुस्तक में है।
ISBN: 9788171196166
Pages: 79
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Vaidik Dharm Evam Shraman Parampara
- Author Name:
Akhand Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
वैदिक धर्म एवं श्रमण परम्परा में प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमूलक धर्म के कालगत प्रवाह व प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है जो विश्वविद्यालय स्तर पर स्नातकोत्तर के छात्रों का मार्गदर्शन कराने में सर्वथा उपयोगी है। पुस्तक में साहित्यिक व पुरातात्त्विक साक्ष्यों का यथास्थान उपयोग, तथ्य एवं चिन्तन का सन्निवेश, शोधपरक दृष्टि का समावेश और संस्कृतनिष्ठ भाषा का निर्वहन है।
इस पुस्तक का उद्देश्य ताम्राश्म काल (ई.पू. तृतीय सहस्त्राब्दी) से लेकर 12वीं, 13वीं शती ईस्वी सन् अर्थात् पूर्वमध्यकाल तक हुए धर्म-दर्शन के विकास का कालक्रमानुसार विवेचन है।
प्रामाणिक इतिहास हेतु जहाँ एक ओर वैदिक संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद् एवं पुराण साहित्य आदि का आश्रय लिया गया, वहीं दूसरी ओर पुरातात्त्विक सामग्रियों जैसे, मुहरें, मूर्तियाँ, मुद्राएँ एवं भित्ति-चित्रों से प्राप्त सूचनाओं का समावेश किया गया है।
Shri Guru Granth-Darshan
- Author Name:
Jairam Mishra
- Book Type:

-
Description:
‘गुरुग्रन्थ’ की अधिकांश रचनाएँ उन सिक्ख गुरुओं की हैं जो सीधे गुरु नानक देव की शिष्य-परम्परा में आते हैं तथा जिन्हें क्रमश: उन्हीं की ‘ज्योति का प्रतिरूप’ रहते आने के कारण, 'नानक' संज्ञा द्वारा अभिहित करने की परिपाटी भी चली आई है।
इसमें संगृहीत वाणियों के रचयिताओं की चेष्टा अधिकतर यही जान पड़ती है कि जो कुछ वास्तविक सत्य के रूप में अनुभूत हो उसे स्वयं अपने जीवन में भी उतारा जाए तथा वैसा ही करने का परामर्श किसी दूसरे को भी दिया जाए। वैसे सत्य का स्वरूप सदा एकरस एवं विश्वजनीन ही हो सकता है।
‘गुरुग्रन्थ' की एक ऐसी अन्य विशेषता, उसमें संगृहीत विविध रचनाओं के क्रमदान में भी पाई जा सकती है। उसमें आए हुए पदों को कोई ऐसा शीर्षक भी दिया हुआ नहीं मिलता जो विषयानुसार निश्चित किया गया हो तथा जिसके सहारे हमें उस मत-विशेष का परिचय मिल सके जिसे उनके रचयिताओं ने प्रकट किया होगा। उनका क्रम केवल रागानुसार ही स्थिर किया गया जान पाता है जिससे इस विषय में, हमें कोई भी सहायता नहीं मिल पाती। हमें यहाँ प्रत्यक्षत: केवल इतना ही पता चल पाता है कि सिक्ख गुरुओं ने, तथा कतिपय सन्तों, भक्तों ने एवं सूफियों तक ने भी एक ही प्रकार के गीत गाए होंगे।
Shriramcharitmanas By Tulsidas (English)
- Author Name:
Tulsidas
- Book Type:

- Description: Lord Ram’s life and exploration is so popular that the story has been translated in many languages and versions of Ramcharitmanas. It has a historical enigma, spiritual aura and moral ideals. It’s a treasure of deep inside education, views and unparalleled virtues of righteousness. Many Ram devotees in India could recite the complete verses of the holy book.
Dharam Ka Marm
- Author Name:
Akhilesh Mishra
- Book Type:

-
Description:
संस्कृत, पालि, अंग्रेज़ी, प्राकृत, उर्दू, अर्थशास्त्र, खगोलशास्त्र, गणित और भाषाविज्ञान आदि भाषाओं और विषयों के अधिकारी विद्वान अखिलेश मिश्र के बौद्धिक व्यक्तित्व की विशेषता यह थी कि उन्होंने ज्ञान को कर्म से जोड़ा। जीवन-भर वे ज्ञान, कर्म, वाणी और लेखनी की एकाग्र शक्ति के साथ जनसंघर्षों में संलग्न रहे। अस्सी के दशक में जब साम्प्रदायिक शक्तियाँ उभार पर थीं, उन्होंने अपनी पूरी ताक़त साम्प्रदायिकता विरोधी संघर्ष में झोंक दी। साक्षरता और जन-शिक्षण में उनकी बहुत गहरी और निजी दिलचस्पी थी।
इस पुस्तक में उनके राष्ट्रीय सहारा में जनवरी 1997 से दिसम्बर 1998 तक ‘धर्म-संस्कृति’ के अन्तर्गत लिखे गए निबन्धों को संकलित किया गया है। ये निबन्ध साबित करते हैं कि मिश्र जी हिन्दी के स्वतन्त्रचेता और विवेकशील विचारकों की गौरवशाली परम्परा की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी थे।
डॉ. नामवर सिंह के शब्दों में : ‘उनके विचार से धर्म गुण है और हर वस्तु की तरह मनुष्य का गुण धर्म होता है जिसे मनुष्यता अथवा मानवता कहते हैं।’ और, ‘जो गुण धर्म का मर्म के लेखक के प्रति श्रद्धावनत होने को विवश करता है वह है उसकी निर्भयता।’
धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र आदि पदों को लेकर आज पैदा की जा रही धुन्ध के बीच ये निबन्ध हमें निश्चय ही रोशनी दिखाएँगे।
A Complete Guide To Astrology
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: This book is a complete guide to astrology. It provides readers with an impartial, objective and well-constructed understanding of the science of astrology so that they can make decisions based on their inner knowledge rather than belief-based superstitions.
Basaveshwara : Samata Ki Dhwani
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

-
Description:
निर्बलों की सहायता करना ही सबलों का कर्तव्य है। उसी से सुखी समाज की स्थापना हो सकती है। सभी धर्मों के मूल में दया की भावना ही प्रमुख है। बसवेश्वर के एक वचन का यही भाव है—
दया के बिना धर्म कहाँ?
सभी प्राणियों के प्रति दया चाहिए
दया ही धर्म का मूल है
दया धर्म के पथ पर जो न चलता
कूडलसंगमदेव को वह नहीं भाता।
बसवेश्वर की वचन रचना का उद्देश्य ही सुखी समाज की स्थापना करना था। चोरी, असत्य, अप्रामाणिकता, दिखावा, आडम्बर एवं अहंरहित समाज की स्थापना बसव का परम उद्देश्य था, जो निम्न एक वचन से स्पष्ट होता है—
चोरी न करो, हत्या न करो, झूठ मत बोलो
क्रोध न करो, दूसरों से घृणा न करो,
स्वप्रशंसा न करो, सम्मुख ताड़ना न करो,
यही भीतरी शुद्धि है और यही बाहरी शुद्धि है,
यही मात्र हमारे कूडलसंगमदेव को प्रसन्न करने का सही मार्ग है।
हठ चाहिए शरण को पर-धन नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को पर-सती नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को अन्य देव को नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को लिंग-जंगम को एक कहने का, हठ चाहिए शरण को प्रसाद को सत्य कहने का, हठहीन जनों से कूडलसंगमदेव कभी प्रसन्न नहीं होंगे॥
Rigved : Mandal-3, 4 & 5
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीसिप्त विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के तीसरे, चौथे एवं पाँचवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Bhrigugita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: तत्र यत्सत्यं स धर्मो यो धर्मः स प्रकाशो यः प्रकाशस्तत्सुखमिति। तत्र यदनृतं सोऽधर्मो योऽधर्मस्तत्तमो यत्तमस्तद्दुःखमिति॥ जहाँ सत्य है, वहाँ धर्म है। जहाँ धर्म है, वहाँ प्रकाश है। जहाँ प्रकाश है, वहाँ सुख है। इसी प्रकार, जहाँ असत्य है, वहाँ अधर्म है। जहाँ अधर्म है, वहाँ अन्धकार है। और जहाँ अन्धकार है, वहाँ दुःख है।
Alchemy – A Siddha Science
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Alchemy – A Siddha Science is an insightful and captivating exploration of the ancient science of Alchemy, a spiritual practice and form of healing that has been used for centuries in India and Southeast Asia. This book provides an in-depth look at the history and practices of Alchemy, as well as the application of its teachings in modern times. It includes a wide variety of topics, from the health benefits of Alchemy to its spiritual and metaphysical aspects, as well as practical advice on how to incorporate its teachings into your own life. Learn how to unlock the power of your inner energy, and gain skills to aid in personal transformation. Through this book, you'll discover how to unlock the hidden mysteries of the universe and find true balance and harmony. Unlock the secrets of the Siddha Science, and discover a world of wellness, wisdom, and transformation.
Shri Ramcharitmanas : Shasth Sopan (Lankakand)
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
‘श्रीरामचरितमानस’ लीलान्वयी काव्य है। इनकी मान्यताएँ वाल्मीकि रामायण से न जुड़कर भागवत पुराण से जुड़ती हैं। वाल्मीकि अपनी ‘रामायण’ के ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की समापन कथा कहते हैं, किन्तु तुलसीकृत मानस का ‘लंकाकांड’ रावण का मुक्ति का आख्यान है।
प्रभु के प्रति द्वेष भी भक्ति ही है और उस अमर्ष भाव में आकंठ डूबे रावण जैसे व्यक्तित्व के प्रति श्रीराम का क्रोध उनकी कृपा तथा अनुग्रह है। इसलिए तुलसीदासकृत लंकाकांड को कथा समापन के रूप में नहीं लेना चाहिए, वरन् मध्यकालीन लीलाभक्ति की उस अवधारणा से जोड़कर देखना चाहिए, जहाँ शत्रु-मित्र, साधु-असाधु, राक्षस-मानव के बीच स्थिर दीवार को तोड़कर सभी को एक मंच पर बैठाने की तत्परता दिखाई पड़ती है। हिन्दू-अहिन्दू को एक तार से जोड़नेवाली यह भक्ति निश्चित ही भारतीय संस्कृति की विषमता के युग में एक बहुत बड़ी सम्बल थी।
तुलसी अपने इस ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की कथा न कहकर राम एवं रावण के बीच रागात्मक ऐक्य की स्थापना की कथा कहते हैं। रावण के भौतिक शरीर को विनष्ट करके उसकी तेजोमयी चेतना का श्रीराम के शरीर में विलयन भक्ति द्वारा स्थापित रागात्मक समन्वय का सबसे बड़ा साक्ष्य है।
Treasures of Lakshmi
- Author Name:
Namita Gokhale +1
- Book Type:

- Description: Treasures of Lakshmi is the culmination of the much-loved goddess series, brilliantly curated and edited by Namita Gokhale and Malashri Lal. This trilogy, which began with In Search of Sita and continued with Finding Radha, examines the mystical realms of Hindu thought and practice, celebrating the essence of the sacred feminine. Whether it is Lakshmi’s 108 names or a sahasranama of a thousand appellations, her blessings are multidimensional and eternal. as the third and final instalment of this remarkable trilogy, Treasures of Lakshmi takes readers on a unique journey of exploration, unravelling the compelling narrative of ‘the goddess who gives’.
Islam Mein Dharmik Chintan Ki Punarrachna
- Author Name:
Mohd. Ikbal
- Book Type:

-
Description:
‘इस्लाम में धार्मिक चिन्तन की पुनर्रचना’ डॉ. मुहम्मद इक़बाल के उन महत्त्वपूर्ण अंग्रेज़ी व्याख्यानों का अनुवाद है जिन्हें उन्होंने मद्रास मुस्लिम एसोसिएशन के निवेदन पर तैयार किया था। ये व्याख्यान दिसम्बर, 1928 के अन्त में मद्रास और जनवरी, 1929 में हैदराबाद और अलीगढ़ में दिए गए थे।
यूरोपीय भाषाओं—जर्मन, फ़्रेंच, इतालवी तथा एशियाई भाषाओं—उर्दू, अरबी, फ़ारसी और तुर्की में इन व्याख्यानों के अनुवाद बहुत पहले हो चुके हैं। ज़रूरत थी कि दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रमुख भाषा हिन्दी में भी इनका अनुवाद हो ताकि हिन्दीभाषी पाठक अपने दिक और काल में इस्लाम में धार्मिक चिन्तन के स्वरूप को समझने तथा इसकी पुनर्रचना के इस सबसे आधुनिक एवं समर्थ प्रयास से न केवल परिचित हो सकें, बल्कि इस्लाम में धार्मिक चिन्तन को लेकर फैलाए जा रहे प्रभावों से मुक्त होकर एक समुचित दृष्टिकोण अपना सकें।
इस पुस्तक से एक बार पुनः भारतीय दर्शन की अनेक गंगा-जमुनी समस्याओं का समाधान हो सके, इसी विश्वास के साथ एक विस्तृत परिदृश्य को रेखांकित किया गया है ताकि पाठकों एवं चिन्तकों को न केवल इक़बाल की मनोभूमि का पता चल सके, बल्कि इस्लामी चिन्तन की गहरी अर्थवत्ता और व्यापक मानवीयता का भी बोध हो सके।
Ram Utkarsh Ka Itihas
- Author Name:
Shriram Mehrotra
- Book Type:

- Description: प्राचीन इतिहास में इक्ष्वाकु वंश में एक से बढ़कर एक यशस्वी, उत्तम प्रजापालक, वचन के धनी, महात्मा नरेशों में 39वीं पीढ़ी के श्रीरामचन्द्र श्रेष्ठतम नरेश ही नहीं, पृथ्वी के अप्रतिम पुरुषोत्तम हुए जिन्होंने मानवता के उत्कर्ष देवों को भी बौना कर दिया। राज्य छोड़कर वनवास करने की, छोटे से समय की, माता के आज्ञापालन की बात एक पुत्र को पुरुषोत्तम और देवोत्तम बना सकती है, यह श्रीराम के आचरण से प्रमाणित हुआ। राम की आयु ग्यारह हज़ार वर्ष की रही हो या मात्र एक सौ ग्यारह वर्ष की, इसमें चौदह वर्ष का छोटा काल-खंड उनकी चरित्रगत सम्पत्ति को अयोध्या के चक्रवर्ती अधिपति के पद से भी ऊँचा उठानेवाला हुआ। कठोर दंडकवन के लिए वनवासी होने की विमाता की आज्ञा शिरोधार्य कर राम ने वन में असम्भव को सम्भव करने की जो उपलब्धियाँ पाईं, उनसे वे पुरुषोत्तम-ईशोत्तम दोनों ही हुए। राम के जीवन का यह काल उन्हें ‘राम' बनाने का उत्कर्ष काल था। जीवन में यह संयोग न होने पर उत्तम प्रजापालन की रघुवंश की परम्परा में एक और श्रेष्ठ राजा की गिनती हो जाती, किन्तु वे देश-देशान्तर के विश्व-राम नहीं होते। पीड़ादायक राक्षसों के साथ अजेय रावण से संसार को मुक्ति दिलाना इस वन प्रदेश में प्रवेश से सम्भव हुआ। विमाता की आज्ञा और पुत्र की शिरोधार्यता में ऐसा क्या था कि विश्व में ऐसा दूसरा इतिहास नहीं हुआ, यह इस ग्रन्थ की विषय वस्तु है। वनवास की कठोर कसौटी से रामराज्य के नाम से वनों में ही अंकुरित हुई थी। माता-पिता के आज्ञा-पालन की साधारण सी बात से कोई इतना असाधारण लोकादर्श हो सकता है, राजा बनने से अधिक महत्त्व कर्तव्यों में है, यह राम-चरित्र बताता है। परम्परागत प्रसंगों से अलग ऐसे अनेक अज्ञात व उपेक्षित प्रसंग यहाँ प्रकाशित हुए हैं जो राम इतिहास पर नई रोशनी डालते हैं। महान इतिहास की नवीन दिशा में राम के समकक्ष शत्रु-नायक पौलस्त्य रावण-कुल के इतिहास का भी विस्तार से यहाँ वर्णन है। यह ग्रन्थ हिन्दी, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में प्रकाशित उन सामग्रियों का उत्तर है जो पूर्वग्रह से लिखे गए हैं, जिनमें अध्ययन का अभाव है और विशेषतः युवा वर्ग को भ्रमित करने का प्रयास है।
Mahayogiraj Gorakhnath
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal
- Book Type:

- Description: ‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है। लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
Chitt Basain Mahaveer : Jivan Aur Darshan
- Author Name:
Prem Suman Jain
- Book Type:

- Description: विश्व के साधक चिन्तकों में जैन दार्शनिक एवं तीर्थंकर कई दृष्टियों से स्मरण किए जाते हैं। उनका चिन्तन धर्म, जाति, देशकाल को गहरे प्रभावित करता है। उन्होंने प्राणीमात्र के कल्याण एवं विकास के सूत्र अपने उद्बोधनों में प्रदान किए हैं। भगवान महावीर का सन्देश है कि सुख, शान्ति, तनावरहित जीवन अपरिग्रह, सन्तोष, संयम से ही आ सकता है। तीर्थंकर महावीर ने अपने जीवन में व्यक्तिगत स्वामित्व के विसर्जन का प्रयोग करके बताया है। उन्होंने राज्यपद को त्यागा और पदार्थों के ढेर से अलग जा खड़े हुए, तब वे समता और शान्ति के स्वामी बने भगवान महावीर ने व्यक्ति के पूर्ण विकास के लिए एक ओर जहाँ आत्म-विकास का पथ प्रशस्त किया है, वहीं दूसरी ओर लोक-कल्याण के लिए सामाजिक मूल्यों का भी सृजन किया है। अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकान्त—ये तीनों मूल्य महावीर के सामाजिक अनुसन्धान के परिणाम हैं। तीर्थंकर महावीर के चिन्तन ने व्यक्ति को पुरुषार्थी और स्वावलम्बी बनने की शिक्षा दी है। उन्होंने मानव को सहिष्णु, निराग्रही होने का भी सन्देश दिया है। विचारों की उदारता से ही हम सत्य की तह तक पहुँच सकते हैं। तीर्थंकर महावीर का सारा जीवन आत्म-साधना के पश्चात् सामाजिक और नैतिक मूल्यों के निर्माण में ही व्यतीत हुआ। इसी कारण तीर्थंकर महावीर मानव जाति के गौरव के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ‘चित्त बसें महावीर’ पुस्तक में प्रो. प्रेम सुमन जैन ने तीर्थंकर महावीर के प्रेरणादायक जीवन और दर्शन को एक रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। एक महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति।
Temples Tour: West India
- Author Name:
Rajiv Aggarwal
- Book Type:

- Description: Temples Tour is a book of compilation of major Temples in India and it is compiled with the help of official website of 739 districts of the country (till March 2020), website of Ministry of Tourism of Government of India and all states, website of Archaeological Survey of India, Wikipedia, official website of Temples, other religious websites, Facebook, Twitter, many books and articles. In this compilation, I have covered Temples from Andaman to Ajmer, Bodhgaya to Sarnath, Jagannath Puri to Kedarnath, Kanyakumari to Ksheer Bhavani, Koteshwar to Kamakhya, Lakshadweep to Leh, Sammedshikhar to Shravanbelgola and Somnath to Kashi Vishwanath. There are various types of Temples such as Ashtavinayak Temples, Buddhist Temples, Char Dham, Chota Char Dham, Eight Mahakshetras of Lord Vishnu, Hot/Perennial Sulphur Springs, ISKCON Temples, Jain Temples, Jyotilinga, Nag Devta Temples, Nava Narasimhas, Nava Thirupathi, Panch Badri, Panch Dwarka, Panch Kannan Kshetrams, Panch Kedar, Panch Prayag, Pancha Narasimha Kshetras, Pancharama Kshetras, Pancha Bhoota Sthalam, Panch Sabhai Temples, Sapta Puris, Seven Baithaks of Pushtimarg (Thakurji), Seven Thakurji of Vrindavan, Shakti Peetha, Shani Parihara Temples, Sindhi Temple, Six Abodes of Lord Murugan, Sun Temples, Trilinga Kshetras and other Temples, ponds/lakes, trees, saints and statues of more than 50 foot height.
Channabasavanna : Gyan Ki Nidhi
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

-
Description:
छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?
ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?
आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड
ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व
गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी
दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!
भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए
अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए
सबके हित में वचन बोलना चाहिए
जंगम में निन्दा रहित होकर
सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए
तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।
अपात्र को दान न देना चाहिए
सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए
यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो
लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।
Devtulya Nastik
- Author Name:
Arun Bhole
- Book Type:

-
Description:
धर्म, दर्शन और विज्ञान अपने-अपने तरीक़े से सत्य और ज्ञान की खोज करते रहते हैं। स्थूल रूप से इनकी चेष्टाएँ विरोधी प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन गहरे मन्तव्यों में लक्ष्य एक ही है। आस्तिक और नास्तिक केवल व्यावहारिक विभाजन हैं—प्रक्रिया की भिन्नता के कारण।
‘देवतुल्य नास्तिक’ पुस्तक में अरुण भोले कुछ विशिष्ट व्यक्तित्वों के माध्यम से जीवन के रहस्यों को जानने का प्रयास करते हैं। ‘ज्ञानपिपासु गौतम’, ‘अन्तर्मुखी विज्ञान’, ‘तटस्थ प्रकृति’, ‘वैज्ञानिक ज्ञान-मीमांसा’, ‘सन्देह और श्रद्धा के संगम’, ‘संवाद और सहयोग', 'जले दीप से दीप' तथा 'विज्ञान और नियति' शीर्षकों के अन्तर्गत लेखक ने सत्य और ज्ञान की खोज करनेवाले विश्वविख्यात व्यक्तित्वों का विश्लेषण किया है।
लेखक का उद्देश्य स्पष्ट है। वह चाहता है कि शक्तियों में समन्वय हो।
लेखक के शब्दों में : ‘अपने अन्वेषण और प्रयोगों से विज्ञान ने जो तथ्य बटोरे हैं, उन सबके आत्यन्तिक अर्थ क्या हैं तथा लोकमंगल की दृष्टि से उनका परम उपयोग क्या होगा, इसी का बोध ज्ञान माना जाएगा। वैसे ज्ञान के अभाव में अमर्यादित वैज्ञानिक जानकारियाँ हमें सर्वनाश की ओर ले जा सकती हैं। यही वह स्थल है जहाँ हमें धर्म और दर्शन की सहायता लेनी पड़ेगी; क्योंकि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जीवन को सँवारने और मानवीय भावनाओं को प्रभावित करने का अधिक अभ्यास और अनुभव दर्शन और धर्म को ही है।’
विश्व संस्कृति की अन्तर्धाराओं का प्रवाहपूर्ण, प्रामाणिक और सतर्क विश्लेषण।
Masihi Dharm Ka Itihas
- Author Name:
Bainjamin Khan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
The Book Of Life
- Author Name:
J. Krishnamurti
- Book Type:

- Description: 'The story of mankind is in you, the vast experience, the deep-rooted fears, anxieties, sorrow, pleasure and all the beliefs that man has accommodated throughout the millennia. You are that book.' Inspired by Krishnamurti's belief that truth is found through living, The Book of Life presents 365 timeless daily meditations, developed thematically over seven days, illuminating the concepts of freedom, personal transformation, living fully awake and much more. The Book of Life is a profound collection of insights to treasure every day for those who have come to cherish the wisdom of this extraordinary spiritual sage as well as those who are discovering it for the first time.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book