Lohe Ki Kamarpetiyan
(0)
Author:
Tapi Dharma RaoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
25
₹ 20 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
स्वर्गीय तापी धर्माराव के लेखन का फ़ोकस मुख्यत: समाज सुधार रहा है। तेलगू में इनकी पुस्तकें लोकप्रियता के शिखर पर रही हैं। इस पुस्तक में विख्यात लेखक ने कमरपेटियों की परम्परा और इतिहास को अपना विषय बनाया है।</p> <p>कमरपेटियाँ हमारी परम्परा में जड़ी यौन–वर्जनाओं, पुरुष–वर्चस्व और शुद्धतावादी नैतिक आग्रहों की चरम और सर्वाधिक नृशंस अभिव्यक्ति हैं। इस पुस्तक में कमरपेटियों के इतिहास, उनके समाज–नीतिशास्त्र और वर्तमान में उनके लोक–प्रचलित अवशेषों का सरल, जनसाधारण की भाषा में विवरण दिया गया है। लेखक बताते हैं कि मरुगुबिल्लाओं (लाज–रक्षक पदक) के रूप में आज आन्ध्र में जो आभूषण प्रचलित है, वह कमरपेटियों का ही इमिटेशन है। उसके अलावा पुरातात्त्विक सर्वेक्षणों और खुदाइयों में मिली कमरपेटियों, उनके प्रकारों और उनसे जुड़ी किंवदन्तियों के बारे में प्रामाणिक जानकारी इस पुस्तक में है।
Read moreAbout the Book
स्वर्गीय तापी धर्माराव के लेखन का फ़ोकस मुख्यत: समाज सुधार रहा है। तेलगू में इनकी पुस्तकें लोकप्रियता के शिखर पर रही हैं। इस पुस्तक में विख्यात लेखक ने कमरपेटियों की परम्परा और इतिहास को अपना विषय बनाया है।</p>
<p>कमरपेटियाँ हमारी परम्परा में जड़ी यौन–वर्जनाओं, पुरुष–वर्चस्व और शुद्धतावादी नैतिक आग्रहों की चरम और सर्वाधिक नृशंस अभिव्यक्ति हैं। इस पुस्तक में कमरपेटियों के इतिहास, उनके समाज–नीतिशास्त्र और वर्तमान में उनके लोक–प्रचलित अवशेषों का सरल, जनसाधारण की भाषा में विवरण दिया गया है। लेखक बताते हैं कि मरुगुबिल्लाओं (लाज–रक्षक पदक) के रूप में आज आन्ध्र में जो आभूषण प्रचलित है, वह कमरपेटियों का ही इमिटेशन है। उसके अलावा पुरातात्त्विक सर्वेक्षणों और खुदाइयों में मिली कमरपेटियों, उनके प्रकारों और उनसे जुड़ी किंवदन्तियों के बारे में प्रामाणिक जानकारी इस पुस्तक में है।
Book Details
-
ISBN9788171196166
-
Pages79
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Morning Musings Sutras for Success & Happiness
- Author Name:
Mahendra Ranga
- Book Type:

- Description: Most of us are trying to make sense of life. ‘Morning Musings’ is author’s framework for handling both professional and private life. It is distilled experience of a perceptive observer. The book contains life lessons in the form of sutras. These lessons have been explained in a simple but lucid manner. The author has used Indian similes to provide the context. The book will help us resolve many a conundrums of life.
Upnishdon Ke Samvad
- Author Name:
Shobha Nigam
- Book Type:

-
Description:
उपनिषद् भारत के गौरव-ग्रंथ हैं। ये वेदों के अंतिम भाग हैं। वैसे तो ये विश्वप्रसिद्ध ग्रंथ हैं, किंतु दुःख की बात है कि इनसे हम भारतीय ही बहुत कम परिचित हैं। अत्यंत सरल किंतु ओजस्वी भाषा में ये ग्रंथ दार्शनिक समस्याओं पर विचार करते हैं, ऐसी दार्शनिक समस्याओं पर जो मानवजीवन से जुड़ी हुई हैं। ये भारत को श्रेष्ठ मार्ग तो दिखाते ही हैं...प्रेरित करते हैं...चेतावनी भी देते हैं कि यदि हमने इसे नहीं अपनाया तो जीवन में महान हानि निश्चित है।
इस तरह उपनिषदों की शिक्षा सदियों से मानव पर उपकार करती आई है। उपनिषदों ने न केवल भारतीयों को अथवा हिंदुओं को प्रभावित किया है वरन् इन्होंने अन्य देश एवं धर्म के लोगों को भी प्रभावित किया है। अनेक विदेशी विद्वान भी इनके मुरीद हुये हैं। इनसे न केवल परवर्ती आस्तिक दर्शन सिंचित हुये हैं वरन् नास्तिक दर्शन भी सिंचित हुये हैं।
उपनिषदों की एक बड़ी विशेषता यह भी रही है कि वेदों के कर्मकांड की ओर बढ़ते कदमों को रोककर यहां के तेजस्वी ऋषियों ने ज्ञानकांड की गंगा बहाकर भारतीय दर्शन, भारतीय समाज और भारतीय धर्म को एक नई दिशा की ओर मोड़ा है। भगवत्गीता पर उपनिषदों का अत्यंत प्रभाव पड़ा है। गीता को इसीलिये उपनिषदों का सार कहा जाता है।
उपनिषदों के विचार मुख्यतः गुरु और शिष्य के मध्य संवाद रुप में प्रस्तुत हुये हैं। वैसे तो उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है किंतु इस ग्रंथ में हमने 11 प्रमुख उपनिषदों में आये संवादों को 31 अध्यायों में प्रस्तुत किया है। बृहदारण्यक एवं छांदोग्य उपनिषद् से सर्वाधिक संवाद लिये गये हैं जो इन उपनिषदों का बृहत् आकार देखते हुये स्वाभाविक है।
Dattatreyagita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: तत्त्वं क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते। अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते॥ तत्त्व (सत्य) क्षेत्र (देह) से परे होता है और उसे क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहा जाता है। मैं कर्ता (क्रिया करनेवाला) और भोक्ता (भोग करनेवाला) हूँ। जो इस सत्य को जानता है, वही सच्चा जीवन्मुक्त कहलाता है।
Devalayon Per Mithun Murtiyan Kyon ?
- Author Name:
Tapi Dharma Rao
- Book Type:

-
Description:
तेलगू लेखक तापी धर्माराव के लेखन का प्रयोजन समाज को शिक्षित करना रहा है। इतिहास को बाँचने में उन्हें कोई गुरेज़ नहीं। वे तथ्यों की वैज्ञानिक पड़ताल भी करते हैं और अन्धविश्वासों को चुपचाप पचा लेने की ग़लतियाँ वह नहीं करते। आत्मानुभव उनके मन में उठे द्वन्द्व का कारण बनता है और वह उनके समाधान की खोज करने में जुट जाते हैं। उनके लेखन में ज्ञान से अधिक अनुभव है और परम्परा से अधिक व्यावहारिक तथ्य।
सच कहने के लिए साहस, धैर्य और आत्मबल की ज़रूरत होती है। तापी धर्माराव के यह गुण प्रस्तुत पुस्तक में साफ़ महसूस किए जा सकते हैं। पुस्तक सवाल–दर–सवाल खड़े करती है। लेखक ने इन प्रश्नों को प्रस्तुत करने और उनके सम्बन्ध में तथ्यों को स्पष्ट करने की चेष्टा की है। प्रश्नों के कारणों की विवेचना के साथ–साथ उनके हल की तलाश भी ज़रूरी है। पुस्तक में कई प्रश्न टकराते हैं और उनका समाधान जिज्ञासाओं की पूर्ति के रूप में किया गया है।
Temples Tour: South India
- Author Name:
Rajiv Aggarwal
- Book Type:

- Description: Temples Tour is a book of compilation of major Temples in India and it is compiled with the help of official website of 739 districts of the country (till March 2020), website of Ministry of Tourism of Government of India and all states, website of Archaeological Survey of India, Wikipedia, official website of Temples, other religious websites, Facebook, Twitter, many books and articles. In this compilation, I have covered Temples from Andaman to Ajmer, Bodhgaya to Sarnath, Jagannath Puri to Kedarnath, Kanyakumari to Ksheer Bhavani, Koteshwar to Kamakhya, Lakshadweep to Leh, Sammedshikhar to Shravanbelgola and Somnath to Kashi Vishwanath. There are various types of Temples such as Ashtavinayak Temples, Buddhist Temples, Char Dham, Chota Char Dham, Eight Mahakshetras of Lord Vishnu, Hot/Perennial Sulphur Springs, ISKCON Temples, Jain Temples, Jyotilinga, Nag Devta Temples, Nava Narasimhas, Nava Thirupathi, Panch Badri, Panch Dwarka, Panch Kannan Kshetrams, Panch Kedar, Panch Prayag, Pancha Narasimha Kshetras, Pancharama Kshetras, Pancha Bhoota Sthalam, Panch Sabhai Temples, Sapta Puris, Seven Baithaks of Pushtimarg (Thakurji), Seven Thakurji of Vrindavan, Shakti Peetha, Shani Parihara Temples, Sindhi Temple, Six Abodes of Lord Murugan, Sun Temples, Trilinga Kshetras and other Temples, ponds/lakes, trees, saints and statues of more than 50 foot height.
Sriramcharit Manas : Pancham Sopan Sundarkand
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
तुलसी कृत सुन्दरकांड के कथा नायक हनुमान हैं, परन्तु वह लगते नहीं। कवि सुन्दरकांड के माध्यम से श्रीराम के माहात्म्य, उनके प्रति भक्ति तथा प्रपत्ति एवं शरणागति भाव को व्यंजित करना चाहता है। इस दृष्टि से, सुन्दरकांड में आए हनुमान, सीता, रावण एवं विभीषण के चरित्रों का तुलनात्मक अध्ययन करें तो विभीषण का स्थान सर्वोपरि है। सुन्दरकांड के इस विभीषण का चरित्र ऐतिहासिक नहीं, स्वयं तुलसीदास का अपना निजी भोगा हुआ उपेक्षित व्यक्तित्व है। विभीषण एवं तुलसी दोनों श्रीराम की शरणागति में ही जीवन की सार्थकता प्राप्त करते हैं। यदि और स्पष्ट ढंग से कहना चाहें तो यह भी कह सकते हैं कि इस विभीषण का पर्याय तुलसीयुगीन सम्पूर्ण निराश्रित जनसमूह है।
तुलसी सुन्दरकांड में विभीषण का विद्रावक तथा संवेदनशील व्यक्तित्व निर्मित करके इस कथा का मुख ग़रीब एवं असहाय जनता की ओर मोड़ देते हैं। इसीलिए, इस सुन्दरकांड में कवि अपनी सम्पूर्ण रचनात्मक ऊर्जा न हनुमान की शक्ति एवं बल से सम्बद्ध करता है, न रावण के प्रति अन्याय और आक्रोश में लगाता है, साथ ही, उसे न वह श्रीराम की प्राणप्रिया सीता की विरह पीड़ा से ही जोड़ता है; वह पूरी तरह से सजग तथा संवेदनशील होकर आश्रयविहीन विभीषण को अपना भावात्मक समर्पण देकर उसे सार्थक बनाने की चेष्टा करता है। इस सुन्दरकांड के कवि तथा उसकी कविता की यही भव्यता है।
Bhagwadgita-Kaavya
- Author Name:
Mulchand Pathak
- Book Type:

- Description: भगवद्गीता भारत के आध्यात्मिक वाङ्मय की अनुपम विभूति है। यह कम-से-कम दो सहस्र वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय चिंतन व आध्यात्मिक साधना की महत्त्वपूर्ण प्रेरणा-स्रोत रही है। विश्व की सभी महत्त्वपूर्ण भाषाओं में गीता के अनुवाद किए जा चुके हैं। हिंदी भाषा भी इसका अपवाद नहीं है; किंतु ये अनुवाद प्रायः गद्य में किए गए हैं। अत : एक पद्यात्मक कृति के रूप में गीता के मूल पाठ में जो लयात्मक सरलता है, वह इन अनुवादों में सुलभ नहीं है। इसी अभाव की पूर्ति के लिए गीता का यह काव्यात्मक अनुवाद ‘भगवद्गीता-काव्य’ प्रस्तुत किया जा रहा है। गीता के मूल संस्कृत पाठ में अंत्यानुप्रास या तुकों की योजना का अभाव है। इसी बात को ध्यान में रखकर प्रस्तुत अनुवाद में छंद व लय का निर्वाह करते हुए भी तुकें मिलाने का प्रयास नहीं किया गया। इससे अनुवादक को गीता के मूल अर्थ की अधिकतम रक्षा में अभीष्ट सफलता मिली है। जीवन की विषम-से-विषम परिस्थिति में गीता ने असंख्य लोगों को मानसिक शांति प्रदान कर उनके जीवन-पथ को आलोकित किया है। आज के भौतिकता-परायण, मानसिक तनावों से ग्रस्त तथा जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज में भटकते मनुष्य के लिए गीता का संदेश उतना ही प्रासंगिक है, जितना वह सदैव रहा है। आशा है, गीता का यह काव्यात्मक अनुवाद संस्कृत न जाननेवाले या उसका कम ज्ञान रखनेवाले गीता-प्रेमियों को मूल संस्कृत पाठ को पढ़ने जैसा ही आनंद दे सकेगा।
The Prophet
- Author Name:
Khalil Gibran
- Book Type:

- Description: The Prophet is one of the most beloved classics of our time. This is a collection of poetic essays that are philosophical, spiritual, and, above all, inspirational. Khalil Gibran was a Lebanese-American writer, poet, and visual artist. Gibran's simple and direct style was a revelation and an inspiration.
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg
- Author Name:
Vishen Lakhiani
- Book Type:

- Description: Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg Hindi Translation of The Buddha and The Badass: The Secret Spiritual Art of Succeeding at Work. क्या आपने गौर किया है कि कैसे कुछ लोग नौकरी में कमाल के भाग्यशाली होते हैं! वे बड़ी आसानी से समाधान सुझा देते हैं। वे सही लोगों को आकर्षित करते हैं। लोग उनके अभियानों, कंपनियों, उनकी टीमों का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे बड़े-बड़े काम मुसकराते हुए पूरा कर लेते हैं और वेतन में अच्छी वृद्धि के साथ ही प्रमोशन भी पा लेते हैं। ये सुपरस्टार कमाल की एकाग्रता और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर खास दायरे का हिस्सा बन जाते हैं।यह पुस्तक बताती है कि उनके साथ कैसे जुड़ें। आप जहाँ भी हों, आप में अनोखी शक्तियाँ हैं। यह आधुनिक युग का भ्रम है कि कठिन परिश्रम और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। आपके भीतर एक आत्मा है और एक बार आपने काम के क्षेत्र में इसकी पूरी शक्ति का प्रयोग किया, तो बस कमाल हो जाता है। अपने भीतर के बुद्ध और निर्भीक योद्धा को जगाना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आपके काम करने के तरीके को बदलकर रख देगी। आप उन तरीकों को जान लेंगे, जो वास्तविकता के हर नियम को आपके पक्ष में ला देंगे।
Gorakh-Vijay
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal
- Book Type:

- Description: ‘गोरख विजय' नाथपंथ के महान योगी गुरु गोरखनाथ से सम्बन्धित पुरातन बाग्रा काव्य ग्रन्थ ‘गोर्ख विजय’ का हिन्दी अनुवाद और समीक्षात्मक पर्यालोचन प्रस्तुत करनेवाली कृति है। गोरखनाथ ने अपने साधनामय जीवन और कल्याणमय दर्शन से तत्कालीन जन-समाज को अत्यन्त प्रभावित-प्रेरित किया था। उन्होंने द्वैताद्वैत-विलक्षण अद्वैतवाद का समर्थन किया लेकिन संसार को मिथ्या मानने से इनकार किया। उन्होंने मोक्ष का साधन योग को माना और योग को अष्टांग न मानकर षडंग माना। वस्तुतः यम-नियम को उन्होंने, साधक हो या सामान्य-जन, मनुष्य मात्र का कर्तव्य और दायित्व बताया जिनमें परिपक्वता के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की सिद्धि सम्भव है। ऐसी अनेकानेक बातों को जानने-समझने के लिए ‘गोरख विजय’ एक अत्यन्य उपयोगी ग्रन्थ है। प्रस्तुत पुस्तक का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसमें बंगाल के लोक समाज में प्रचलित गोरखनाथ सम्बन्धी कई लोकगाथाएँ और कुछ अन्य प्रासंगिक सामग्री भी दी गई हैं जिनसे गोरखपंथी साधना के नये आयाम खुलते हैं। वस्तुतः साधक हो या साहित्यिक, विद्वान हो या सामान्य पाठक, गोरखनाथ में दिलचस्पी रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Vishwa Vandya Vivekananda
- Author Name:
Triloki Nath Sinha
- Book Type:

- Description: स्वामी विवेकानंदजी ने विश्व धर्म संसद् में अपने उद्बोधन से प्रतिनिधियों सहित सभी श्रोताओं की हृद्तंत्री को ऐसा झनझनाया कि वहाँ 17 दिन की सभा में आयोजकों को उन्हें 5 दिन बोलने का अवसर देना पड़ा। भारत के उस अंधकारपूर्ण युग में स्वामी विवेकानंदजी ने भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने व सम्मान दिलाने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने इस संपूर्ण भूमंडल में भारत की श्रेष्ठता की पहचान सर्वत्र करा दी। उन्होंने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी के दिव्य संदेश को विश्व में प्रचारित करने के साथ ही ‘नर सेवा—नारायण सेवा’ का एक अभिनव सूत्र धर्मप्रिय लोगों व संन्यासियों को देकर श्रीरामकृष्ण आश्रम की स्थापना करके उस सूत्र को व्यवहार में लाने का माध्यम प्रस्तुत कर दिया। स्वामी विवेकानंदजी के जीवन तथा विचारों से संबंधित विपुल साहित्य प्रकाशित हो चुका है, तथापि उनका विस्तृत समस्त विवरण इस छोटी सी पुस्तक के रूप में भारत के समाज-बंधुओं, विशेषकर नवयुवकों एवं विद्यार्थियों के लिए सुलभ कराने का प्रयत्न किया गया है। उनके विचारों को अधिकाधिक उन्हीं के शब्दों में उद्धृत करने का भरसक प्रयास किया गया है, जो उनकी उपलब्ध जीवनियों, पुस्तकालयों, पत्रिकाओं एवं विद्वानों के उद्धरणों से प्रयत्नपूर्वक ढूँढ़कर निकाले गए हैं। विश्व के जनमानस को उद्वेलित करनेवाले तथा दरिद्र नारायण की सेवा का मार्ग प्रशस्त करनेवाले स्वामी विवेकानंद की प्रेरणादायी जीवनी।
Teerthon Mein Teerthraj Prayag
- Author Name:
Shri Prakash
- Book Type:

-
Description:
इलाहाबाद मुग़लों की नज़र में अल्लाह द्वारा आबाद किया हुआ पवित्र नगर है। प्रयाग है, तीर्थ है, तीर्थराज है, प्रयागराज है। इसकी प्राचीनता असन्दिग्ध है। इसकी पौराणिकता, इसका इतिहास गौरवशाली है। मन्दिरों की ऐसी शृंखला है यहाँ कि इसे मन्दिरों का नगर कहें तो अतिशयोक्ति न होगी।
स्वतंत्रता आन्दोलन में 1857 की क्रान्ति से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन तक में इसकी भागीदारी अति महत्त्वपूर्ण है। स्वतंत्रता आन्दोलन में इस नगर और नेहरू परिवार की भागीदारी ने आनन्द भवन को तो राष्ट्रीय तीर्थ ही बना दिया। इन्दिरा गांधी ने अपने इस पैतृक भवन को राष्ट्र को समर्पित भी कर दिया।
नगर में मन्दिर हैं, ऐतिहासिक स्थल हैं, राष्ट्रीयता के प्रतीक-स्थल हैं और सबसे बढ़कर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का पवित्र त्रिवेणी संगम है। प्रयाग की इस स्थापित महत्ता को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है यह पुस्तक।
Bhagwatigita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: Bhagwati gita
Shri Ramcharitmanas : Shasth Sopan (Lankakand)
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
‘श्रीरामचरितमानस’ लीलान्वयी काव्य है। इनकी मान्यताएँ वाल्मीकि रामायण से न जुड़कर भागवत पुराण से जुड़ती हैं। वाल्मीकि अपनी ‘रामायण’ के ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की समापन कथा कहते हैं, किन्तु तुलसीकृत मानस का ‘लंकाकांड’ रावण का मुक्ति का आख्यान है।
प्रभु के प्रति द्वेष भी भक्ति ही है और उस अमर्ष भाव में आकंठ डूबे रावण जैसे व्यक्तित्व के प्रति श्रीराम का क्रोध उनकी कृपा तथा अनुग्रह है। इसलिए तुलसीदासकृत लंकाकांड को कथा समापन के रूप में नहीं लेना चाहिए, वरन् मध्यकालीन लीलाभक्ति की उस अवधारणा से जोड़कर देखना चाहिए, जहाँ शत्रु-मित्र, साधु-असाधु, राक्षस-मानव के बीच स्थिर दीवार को तोड़कर सभी को एक मंच पर बैठाने की तत्परता दिखाई पड़ती है। हिन्दू-अहिन्दू को एक तार से जोड़नेवाली यह भक्ति निश्चित ही भारतीय संस्कृति की विषमता के युग में एक बहुत बड़ी सम्बल थी।
तुलसी अपने इस ‘लंकाकांड’ में ‘रावण वध’ की कथा न कहकर राम एवं रावण के बीच रागात्मक ऐक्य की स्थापना की कथा कहते हैं। रावण के भौतिक शरीर को विनष्ट करके उसकी तेजोमयी चेतना का श्रीराम के शरीर में विलयन भक्ति द्वारा स्थापित रागात्मक समन्वय का सबसे बड़ा साक्ष्य है।
MadhyaKalin Dharm-Sadhna
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: ्यकालीन धर्म-साधना' यद्यपि भिन्न-भिन्न अवसर पर लिखे गये निबन्धों का संग्रह ही है, तथापि आचार्य द्विवेदी जी ने प्रयत्न किया है कि ये लेख परस्पर विच्छिन और असम्बद्ध न रहें और पाठकों को मध्यकालीन धर्म-साधनाओं का संक्षिप्त और धारावाहिक परिचय प्राप्त हो जाए। दो प्रकार के साहित्य से इन धर्म-सानाओं का परिचय संग्रह किया गया है— (1) विभिन्न सम्प्रदायों के साधना-विषयक और सिद्धान्त-विषयक ग्रन्थ; और (2) साधारण काव्य-साहित्य। इस प्रकार पुस्तक में आलोचित अधिकांश धर्म-साधनाएँ शास्त्रीय रूप में ही आई हैं। जिन सम्प्रदायों के कोई धर्म-ग्रन्थ प्राप्त नहीं हैं या जो धर्म-साधनाएँ साधारण काव्य-साहित्य में नहीं आ सकी हैं, वे छूट गई हैं। हमारे देश की धर्म-साधना का इतिहास बहुत विपुल है। विभिन्न युग की सामाजिक स्थितियों से भी इसका सम्बन्ध है। फलस्वरूप इस पुस्तक में प्रयत्न किया गया है कि उत्तर भारत की प्रधान धर्म-साधनाएँ यथासम्भव विवेचित हो जाएँ और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का भी सामान्य परिचय पाठक को मिल जा
Shri Ramcharitmanas (Pramanik Path Tatha Teeka)
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: ‘श्रीरामचरितमानस’ भारतीय संस्कारों का श्रेष्ठतम महाकाव्य है। भारतीय संस्कार का अर्थ है, समग्र मानव जाति के निखिल मंगल, कल्याण एवं हितैषिता के प्रति समर्पित होकर प्रेम, स्नेह, उदारता, ममता, सहिष्णुता, दया, अस्तित्व, अहिंसा, सत्य, परोपकार आदि मूल्यों की प्रतिष्ठा करना। इस प्रकार, मानस मानव अस्तित्व को सर्वोपरि मानकर उसके लिए सबसे सुलभ, सर्वाधिक सुगम तथा श्रेयस्कर मार्ग की तलाश की छटपटाहट से संयुक्त है। समाज के सर्वोच्च शुभ की प्रतिष्ठा ही मानसकार तुलसी का महत्तम शुभ है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानवीय अस्तित्व की सार्थकता के लिए जिस भव्यतम शुभ का दर्शन किया है, मानस की कविता के विविध पात्रों द्वारा उसे जिस प्रकार व्यंजित किया है तथा नैतिक मंगल के सर्वोच्च मूल्य श्रीराम और उनके ठीक विपरीत गर्हित अशुभ एवं अधर्म के प्रतीक रावण को आमने-सामने रखकर जिस मानवीय शुभ की स्थापना की है—उसकी चरम परिणति असत्य पर सत्य की विजय, अशुभ पर शुभ की स्थापना, क्रूरता पर प्रेम तथा दया का प्रसार, प्रपंच तथा छल पर मानवीय सहजता की छाया की स्थापना में होती है। इस सृष्टि पर जब तक मानव जाति रहेगी, अपनी सांस्कृतिक धरोहर सत्य, प्रेम, दया, उदारता आदि श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों से सम्पृक्त ‘श्रीरामचरितमानस’ जैसे काव्य की रक्षा करती रहेगी। इस प्रकार ‘श्रीरामचरितमानस’ निखिल मानव जाति की सनातन धरोहर है और इस टीका का मन्तव्य है—उसकी इस अमूल्य तथा परम शुभमयी धरोहर से उसे बराबर परिचित कराते रहना।
Shloks Set of 8 For Kids Gita Revolution
- Author Name:
Swati Garg
- Book Type:

- Description: Can leadership be taught from an early age? In the series '8 Leadership Skills from Bhagavad Gita, Krishna helps Arjuna understand that leadership isn’t about telling others what to do—it’s about setting the right example, making wise choices, and never giving up.
Vishnu Purana
- Author Name:
Bibek Debroy
- Rating:
- Book Type:

- Description: The Vishnu Purana is part of a series of eighteen sacred Hindu texts known collectively as the Puranas. It occupies a prominent position among the ancient Vaishnava Puranas which recount tales of creation and the many incarnations of Lord Vishnu. It describes the four classes of society, the four stages of life, and key astronomical concepts related to Hinduism. Brimming with insight and told with clarity, this translation of the Vishnu Purana by Bibek Debroy presents readers with an opportunity to truly understand the classical Indian mythic texts. Debroy has previously translated the Bhagavata Purana, the Markandeya Purana, and the Brahma Purana.
Ramcharitmanas : Ocean of Science
- Author Name:
S.P. Gautam
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Urilinga Peddi-Kaalavve
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book