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Shailendra Sharan 3 Book
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Shailendra Sharan 3 Book
Book Details
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ISBN9789390593415
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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—भारतभूषण अग्रवाल की यह टिप्पणी आज भी उल्लेखनीय है।
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‘जंगल का दर्द’ में कवि सर्वेश्वर की अपने अन्तर्जगत और बाह्य-जगत के जानवरों से लड़ाई, समसामयिक हिन्दी कविता की उपलब्धि है। ‘कुआनो नदी’ की कविताएँ डूबते सूरज की लम्बी परछाइयाँ थीं। अब ‘जंगल का दर्द’ में अंधकार सिमटकर बुलेट–सा छोटा, ठोस और भारी हो गया है। काव्य–विन्यास में इस परिवर्तन को कवि की यातना और दृष्टि से जोड़कर ही समझा जा सकता है। भेड़िए, कुत्ते, तेन्दुए, चिड़ियाँ, तितलियाँ, इस जंगल में सबसे उसका सामना होता है, उनसे वह जूझता है, बचता है, सीखता है और मानव नियति की राह टटोलता, झाड़ियों की रगड़ से अपनी देह का संगीत सुनता, ख़ुद को उधेड़ता–बुनता आगे बढ़ता जाता है। यह यात्रा जारी है, और हिन्दी कविता की भावी यात्रा के प्रति आश्वस्त करती है। यह काव्य–संग्रह ढहते मूल्यों के बीच खड़े रहने की सामर्थ्य देता है और यह स्पष्ट करता है कि कविता का मुख्य प्रयोजन सौन्दर्य–बोध के विस्तार के साथ–साथ मानव–आत्मा को निर्भीक करना और उसे कर्म से जोड़ना है।
Har Kavita Kuchh Kahti Hai
- Author Name:
Kalpana Verma
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अपना तीसरा कविता-संग्रह मैं अपने पाठकों को सौंप रही हूँ। एक शिशु की तरह देखभाल करके मैंने संग्रह की कविताओं को पालने की कोशिश की है। एहसासों के साथ अपने होने को महसूस किया है। एक ओर ज़िन्दगी की अज़ब कहानी चल रही है तो दूसरी ओर चार दृश्यों का सच है। प्यार और पैसे की जंग में भौतिकता की जीत का जश्न है। डिमेंशिया और सुडोकू जैसे ग्रहण भी हैं। केबल टी.वी. की जकड़न का अपना अन्दाज़ है। बूँद भी छलकती है, चलते-चलते, सब आ जाता है के विस्तार में अनुभवों की पकड़ है। विचारों की आवाजाही से कलम को गति मिली है। यह पुस्तक इस गति का एक पड़ाव है। पड़ाव पर ठहरने के बाद आगे की मंजिल दिखने लगी है।
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