Mere Baad….
Author:
Rahat IndoriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
गहरी से गहरी बात को आसानी से कह देने का जटिल हुनर जाननेवाले राहत भाई से मेरा बड़ा लम्बा परिचय है। मुशायरे या कवि-सम्मेलन में वे कमल के पत्ते पर बूँद की तरह रहते हैं। पत्ता हिलता है, झंझावात आते हैं, बूँद पत्ते से नहीं गिरती। कई बार कवि और शायर कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर आसन जमा लेते हैं, लेकिन इस नए कॉरपोरेट ज़माने में चूँकि कवि-सम्मेलन या मुशायरा एक शो या इवैंट की तरह हैं, तो शुरुआत से पहले आम तौर से शायर हज़रात मंच के पीछे खड़े रहते हैं। नाम के साथ एक-एक करके उनको पुकारा जाता है, तब मंच पर आते हैं। जिस शायर के लिए ख़ूब देर तक ख़ूब सारी तालियाँ बजती रहती हैं, उनका नाम है राहत इन्दौरी। एक अध्यापक जैसे सादा लिबास में वे आते हैं, जो बिलकुल शायराना नहीं होता। तालियों के प्रत्युत्तर में वे हल्का सा झुककर सामईन को आदाब करते हैं और बैठने के लिए अपनी सुविधा की जगह देखते हैं, वैसे उन्हें पालथी मारकर बैठने में भी कोई गुरेज़ नहीं होता। एक बेपरवाही भी शाइस्तगी के साथ मंच पर बैठती है, जब राहत भाई बैठते हैं। आम तौर से हथेली को गद्दे से टिका देते हैं। मैं कई बार उनके गाढ़े साँवले सीधे हाथ को, जिसको वे टिकाते हैं, देर तक देखता रहता हूँ, उसकी अँगूठियों को निहारता हूँ और उँगली अँगूठे के पोरों को देखता हूँ कि कितनी ख़ुश होती होगी वह क़लम जब इस हाथ से अशआर निकलते होंगे। ऐसे अशआर जिनकी ज़िन्दगी बहुत तवील है, बहुत लम्बी है।</p>
<p>राहत साहब जब माइक पर आते हैं तो लगता है कि ये ज़मीन से जुड़ा हुआ आदमी कुछ इस तरह खड़ा है कि ज़मीन ख़ुश है और वो जब हाथ ऊपर उठाते हैं तो लगता है कि आसमान छू रहे हैं। वे तालियों से बहुत ख़ुश हो जाएँ या अपने अशआर सुनाते वक़्त तालियों की अपेक्षा रखें, ऐसा नहीं होता। उनका अन्दाज़, उनके अल्फाज़, उनकी अदायगी, ज़बान पर उनकी पकड़, उनकी आवाज़ का थ्रो, उनके हाथों का संचालन, माइक से दूर और पास आने की उनकी कला, शब्द की अन्तिम ध्वनि को खींचने का उनका कौशल, एक पंक्ति को कई बार दोहराकर सोचने का समय देने की होशियारी, एक भी शब्द कहीं ज़ाया न हो जाए इसकी सावधानी, न कोई भूमिका और न उपसंहार, अगर होते हैं तो सिर्फ़ और सिर्फ़ अशआर। बहुत नहीं सुनाते हैं, लेकिन जो सुना जाते हैं, वह कम नहीं लगता। क्योंकि वे जो सुना गए, उस पर सोचने के लिए कई गुना वक़्त ज़रूरी होता है। वे सामईन को स्तब्ध कर देते हैं। वे अपने जादू की तैयारी नहीं करते, लेकिन जब डायस पर आ जाते हैं तो उनका जादू सिर चढ़कर बोलता है। राहत इन्दौरी का होना एक होना होता है। वे अपनी निज की अनोखी शैली हैं, दुनिया-भर के सैकड़ों शायर उनका अनुकरण करते हैं, लेकिन सिर्फ़ कहन की शैली से क्या होता है, शैली के पीछे सोच और समझ का व्यापक भंडार भी तो होना चाहिए।</p>
<p>‘जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली, चाँद, सूरज घर के रौशनदान में रखे रहे' ये शे’र ये बताता है कि उनके अन्दर इतना हौसला है कि कायनात से चाँद-सूरज को उठाकर वे अपने रौशनदान में रख सकते हैं। रौशनदान दोनों तरफ़ उजाला करता है। घर के अन्दर भी और घर के बाहर भी। अगर वे सूरज, चाँद हैं तो। मुझे लगता है कि राहत इन्दौरी एक रौशनदान हैं, जो आभ्यन्तर लोक को भी देदीप्यमान करते हैं तो बहिर्लोक को भी चुँधिया देते हैं। बहुत लम्बी चर्चा की जा सकती है राहत भाई के बारे में वो कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के लिए एक राहत हैं, एक धरोहर हैं क्योंकि वे सामईन की चाहत हैं। मैं दुआ करता हूँ कि राहत भाई कवि-सम्मेलन और मुशायरों को स्तरीय बनाए रखने में अपना योगदान दीर्घकाल तक देते रहें...!</p>
<p>—अशोक चक्रधर
ISBN: 9788183618212
Pages: 91
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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गिद्ध आँखों से देखें तो
मुरदा होना सबसे सुन्दर होना है
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- Description: जीवन और योवन, सत्य और स्वप्न तथा सौन्दर्य और प्रेम के अप्रतिम कवि हरिवशराय बच्चन के विशाल काव्य-कोष से चुनी हुई ये कविताएँ बहुत दूर तक आपके साथ जाने वाली है । अपने जीवन का कोई-न-कोई रंग, कोई-न-कोई पहलू इनके शब्दबंधों में आप अवश्य तलाश लेंगे और कविता सहज ही आपकी निजी संवेदना का हिस्सा बन जाएगी । बच्चन-काव्य की यह एक ऐसी विशेषता है, जिससे छायावादोत्तर हिंदी कविता को लोकग्राह्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । दाय के रूप में प्राप्त छायावादी प्रयोगात्मक काव्य-शैली से अप्रभावित रहकर उन्होंने जीवन-सत्यों की अनुभुतिगम्य रचना की । काव्य-क्षेत्र में उनके पदार्पण और रचनात्मक विद्रोह को लक्ष्य करते हुए एक प्रक्यत समालोचक ने लिखा था कि “बच्चन सारा ढांचा बदलकर आए नई भाषा, नई अभिव्यंजना और नए किस्म की अनुभूति, उनका सब कुछ नया-ही-नया है ।” निश्चय ही बच्चन-काव्य का यह नयापन इस शताब्दी के पांच दशकों में फैला हुआ है और इस काल में होने वाली तमाम सामाजिक उथल-पुथल को भी उन्होंने कविताओ में रेखांकित किया है, पर इस सबको अनुभूति की आँख और संवेदना की छुं से ही परखा जा सकता है । तो आइए, इन कविताओं के माध्यम से हम अपने जीवन-यथार्थ और मनोमय भावलोक की यात्रा पर चलें ।
Jal Uthe Charag
- Author Name:
Anand Amitesh
- Book Type:

- Description: अंजानी और अपरिचित गन्धों से भरा हुआ है दृश्य से अदृश्य की यात्रा का यह मार्ग। फिर बँध ही जाते हैं पैरों में अनगिनत घूँघर किन्हीं सूक्ष्म रूपों में कि फिर जल उठते हैं चराग़ और प्रकाशित हो उठते हैं मार्ग उसी के परम आलोकों से। तब उस असीम से मिलन की चाह में उठते हैं हृदय में प्रार्थनाओं के तीक्ष्ण वेग और डूब जाती हैं आँखें आनंद के आँसुओं में। उसी अतिरेक और अहोभावों की असहाय-सी स्थितियों में तत्क्षण उतरने लगते हैं अस्तित्व के संगीत; उठते हैं जीवन के महाशिखर और उतरता है कोई काव्य अपनी त्वरा में रात-रानियों की सी गन्ध लिए।
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