Mere Baad….
(0)
Author:
Anuradha Sharma, Rahat IndoriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
गहरी से गहरी बात को आसानी से कह देने का जटिल हुनर जाननेवाले राहत भाई से मेरा बड़ा लम्बा परिचय है। मुशायरे या कवि-सम्मेलन में वे कमल के पत्ते पर बूँद की तरह रहते हैं। पत्ता हिलता है, झंझावात आते हैं, बूँद पत्ते से नहीं गिरती। कई बार कवि और शायर कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर आसन जमा लेते हैं, लेकिन इस नए कॉरपोरेट ज़माने में चूँकि कवि-सम्मेलन या मुशायरा एक शो या इवैंट की तरह हैं, तो शुरुआत से पहले आम तौर से शायर हज़रात मंच के पीछे खड़े रहते हैं। नाम के साथ एक-एक करके उनको पुकारा जाता है, तब मंच पर आते हैं। जिस शायर के लिए ख़ूब देर तक ख़ूब सारी तालियाँ बजती रहती हैं, उनका नाम है राहत इन्दौरी। एक अध्यापक जैसे सादा लिबास में वे आते हैं, जो बिलकुल शायराना नहीं होता। तालियों के प्रत्युत्तर में वे हल्का सा झुककर सामईन को आदाब करते हैं और बैठने के लिए अपनी सुविधा की जगह देखते हैं, वैसे उन्हें पालथी मारकर बैठने में भी कोई गुरेज़ नहीं होता। एक बेपरवाही भी शाइस्तगी के साथ मंच पर बैठती है, जब राहत भाई बैठते हैं। आम तौर से हथेली को गद्दे से टिका देते हैं। मैं कई बार उनके गाढ़े साँवले सीधे हाथ को, जिसको वे टिकाते हैं, देर तक देखता रहता हूँ, उसकी अँगूठियों को निहारता हूँ और उँगली अँगूठे के पोरों को देखता हूँ कि कितनी ख़ुश होती होगी वह क़लम जब इस हाथ से अशआर निकलते होंगे। ऐसे अशआर जिनकी ज़िन्दगी बहुत तवील है, बहुत लम्बी है।</p> <p>राहत साहब जब माइक पर आते हैं तो लगता है कि ये ज़मीन से जुड़ा हुआ आदमी कुछ इस तरह खड़ा है कि ज़मीन ख़ुश है और वो जब हाथ ऊपर उठाते हैं तो लगता है कि आसमान छू रहे हैं। वे तालियों से बहुत ख़ुश हो जाएँ या अपने अशआर सुनाते वक़्त तालियों की अपेक्षा रखें, ऐसा नहीं होता। उनका अन्दाज़, उनके अल्फाज़, उनकी अदायगी, ज़बान पर उनकी पकड़, उनकी आवाज़ का थ्रो, उनके हाथों का संचालन, माइक से दूर और पास आने की उनकी कला, शब्द की अन्तिम ध्वनि को खींचने का उनका कौशल, एक पंक्ति को कई बार दोहराकर सोचने का समय देने की होशियारी, एक भी शब्द कहीं ज़ाया न हो जाए इसकी सावधानी, न कोई भूमिका और न उपसंहार, अगर होते हैं तो सिर्फ़ और सिर्फ़ अशआर। बहुत नहीं सुनाते हैं, लेकिन जो सुना जाते हैं, वह कम नहीं लगता। क्योंकि वे जो सुना गए, उस पर सोचने के लिए कई गुना वक़्त ज़रूरी होता है। वे सामईन को स्तब्ध कर देते हैं। वे अपने जादू की तैयारी नहीं करते, लेकिन जब डायस पर आ जाते हैं तो उनका जादू सिर चढ़कर बोलता है। राहत इन्दौरी का होना एक होना होता है। वे अपनी निज की अनोखी शैली हैं, दुनिया-भर के सैकड़ों शायर उनका अनुकरण करते हैं, लेकिन सिर्फ़ कहन की शैली से क्या होता है, शैली के पीछे सोच और समझ का व्यापक भंडार भी तो होना चाहिए।</p> <p>‘जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली, चाँद, सूरज घर के रौशनदान में रखे रहे' ये शे’र ये बताता है कि उनके अन्दर इतना हौसला है कि कायनात से चाँद-सूरज को उठाकर वे अपने रौशनदान में रख सकते हैं। रौशनदान दोनों तरफ़ उजाला करता है। घर के अन्दर भी और घर के बाहर भी। अगर वे सूरज, चाँद हैं तो। मुझे लगता है कि राहत इन्दौरी एक रौशनदान हैं, जो आभ्यन्तर लोक को भी देदीप्यमान करते हैं तो बहिर्लोक को भी चुँधिया देते हैं। बहुत लम्बी चर्चा की जा सकती है राहत भाई के बारे में वो कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के लिए एक राहत हैं, एक धरोहर हैं क्योंकि वे सामईन की चाहत हैं। मैं दुआ करता हूँ कि राहत भाई कवि-सम्मेलन और मुशायरों को स्तरीय बनाए रखने में अपना योगदान दीर्घकाल तक देते रहें...!</p> <p>—अशोक चक्रधर
Read moreYou pay ₹999/Year
You will be auto-charged ₹999 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Prime Plus
Author-signed copy
25% off on all MRP of books
Book Recomendation Per Year
Delivery is free for the entire year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
गहरी से गहरी बात को आसानी से कह देने का जटिल हुनर जाननेवाले राहत भाई से मेरा बड़ा लम्बा परिचय है। मुशायरे या कवि-सम्मेलन में वे कमल के पत्ते पर बूँद की तरह रहते हैं। पत्ता हिलता है, झंझावात आते हैं, बूँद पत्ते से नहीं गिरती। कई बार कवि और शायर कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर आसन जमा लेते हैं, लेकिन इस नए कॉरपोरेट ज़माने में चूँकि कवि-सम्मेलन या मुशायरा एक शो या इवैंट की तरह हैं, तो शुरुआत से पहले आम तौर से शायर हज़रात मंच के पीछे खड़े रहते हैं। नाम के साथ एक-एक करके उनको पुकारा जाता है, तब मंच पर आते हैं। जिस शायर के लिए ख़ूब देर तक ख़ूब सारी तालियाँ बजती रहती हैं, उनका नाम है राहत इन्दौरी। एक अध्यापक जैसे सादा लिबास में वे आते हैं, जो बिलकुल शायराना नहीं होता। तालियों के प्रत्युत्तर में वे हल्का सा झुककर सामईन को आदाब करते हैं और बैठने के लिए अपनी सुविधा की जगह देखते हैं, वैसे उन्हें पालथी मारकर बैठने में भी कोई गुरेज़ नहीं होता। एक बेपरवाही भी शाइस्तगी के साथ मंच पर बैठती है, जब राहत भाई बैठते हैं। आम तौर से हथेली को गद्दे से टिका देते हैं। मैं कई बार उनके गाढ़े साँवले सीधे हाथ को, जिसको वे टिकाते हैं, देर तक देखता रहता हूँ, उसकी अँगूठियों को निहारता हूँ और उँगली अँगूठे के पोरों को देखता हूँ कि कितनी ख़ुश होती होगी वह क़लम जब इस हाथ से अशआर निकलते होंगे। ऐसे अशआर जिनकी ज़िन्दगी बहुत तवील है, बहुत लम्बी है।</p>
<p>राहत साहब जब माइक पर आते हैं तो लगता है कि ये ज़मीन से जुड़ा हुआ आदमी कुछ इस तरह खड़ा है कि ज़मीन ख़ुश है और वो जब हाथ ऊपर उठाते हैं तो लगता है कि आसमान छू रहे हैं। वे तालियों से बहुत ख़ुश हो जाएँ या अपने अशआर सुनाते वक़्त तालियों की अपेक्षा रखें, ऐसा नहीं होता। उनका अन्दाज़, उनके अल्फाज़, उनकी अदायगी, ज़बान पर उनकी पकड़, उनकी आवाज़ का थ्रो, उनके हाथों का संचालन, माइक से दूर और पास आने की उनकी कला, शब्द की अन्तिम ध्वनि को खींचने का उनका कौशल, एक पंक्ति को कई बार दोहराकर सोचने का समय देने की होशियारी, एक भी शब्द कहीं ज़ाया न हो जाए इसकी सावधानी, न कोई भूमिका और न उपसंहार, अगर होते हैं तो सिर्फ़ और सिर्फ़ अशआर। बहुत नहीं सुनाते हैं, लेकिन जो सुना जाते हैं, वह कम नहीं लगता। क्योंकि वे जो सुना गए, उस पर सोचने के लिए कई गुना वक़्त ज़रूरी होता है। वे सामईन को स्तब्ध कर देते हैं। वे अपने जादू की तैयारी नहीं करते, लेकिन जब डायस पर आ जाते हैं तो उनका जादू सिर चढ़कर बोलता है। राहत इन्दौरी का होना एक होना होता है। वे अपनी निज की अनोखी शैली हैं, दुनिया-भर के सैकड़ों शायर उनका अनुकरण करते हैं, लेकिन सिर्फ़ कहन की शैली से क्या होता है, शैली के पीछे सोच और समझ का व्यापक भंडार भी तो होना चाहिए।</p>
<p>‘जुगनुओं ने फिर अँधेरों से लड़ाई जीत ली, चाँद, सूरज घर के रौशनदान में रखे रहे' ये शे’र ये बताता है कि उनके अन्दर इतना हौसला है कि कायनात से चाँद-सूरज को उठाकर वे अपने रौशनदान में रख सकते हैं। रौशनदान दोनों तरफ़ उजाला करता है। घर के अन्दर भी और घर के बाहर भी। अगर वे सूरज, चाँद हैं तो। मुझे लगता है कि राहत इन्दौरी एक रौशनदान हैं, जो आभ्यन्तर लोक को भी देदीप्यमान करते हैं तो बहिर्लोक को भी चुँधिया देते हैं। बहुत लम्बी चर्चा की जा सकती है राहत भाई के बारे में वो कवि-सम्मेलनों और मुशायरों के लिए एक राहत हैं, एक धरोहर हैं क्योंकि वे सामईन की चाहत हैं। मैं दुआ करता हूँ कि राहत भाई कवि-सम्मेलन और मुशायरों को स्तरीय बनाए रखने में अपना योगदान दीर्घकाल तक देते रहें...!</p>
<p>—अशोक चक्रधर
Book Details
-
ISBN9788183618212
-
Pages91
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Maujood
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
राहत साहब मेरे बड़े पुराने दोस्त हैं, लगभग चालीस बरस से मेरी और उनकी दोस्ती क़ायम है। वो एक बड़े शायर और एक सच्चे इनसान हैं। सच्चा इनसान उसे कहता हूँ, जो अच्छाइयों को ही नहीं बुराइयों को भी प्यार कर सके। मेरा व्यक्तित्व भी अच्छाइयों और बुराइयों का नमूना है और राहत का भी। इसीलिए तो मैं कहता हूँ कि फ़रिश्तों के टूटे हुए ख़्वाब का एक नाम राहत है। राहत ने जीवन और जगत के विभिन्न पहलुओं पर जो ग़ज़लें कही हैं, वो हिन्दी-उर्दू की शायरी के लिए एक नया दरवाज़ा खोलती हैं। वर्तमान परिवेश पर जो टिप्पणी उन्होंने अपनी ग़ज़लों में की है वो आज की राजनीति, आज की साम्प्रदायिकता, धार्मिक पाखंड और पर्यावरण पर बड़े ही मार्मिक भाव से की है। छोटी-बड़ी बहर की ग़ज़ल में उनका प्रतीक और बिम्ब विद्यमान है, जो नितान्त मौलिक और अद्वितीय है। उनके कितने ही शे’र ऐसे हैं जो ज़ुबान पर बरबस बैठे जाते हैं। नए रदीफ़, नई बहर, नए मज़मून, नया शिल्प उनकी ग़ज़लों में जादू की तरह बिखरा है और पढ़ने व सुननेवाले सभी के दिलों पर छा जाता है। राहत की शायरी तसव्वुफ़ की उच्चतम ऊँचाइयों तक पहुँचती है। उनका ये शे’र मेरे ज़ेहन में अक्सर कौंधता रहता है—
किसने दस्तक दी है दिल पर, कौन है?
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है...?
भाई राहत की सोच एक सच्चे इनसान की सोच है। वो यद्यपि अपनी उम्र से अधेड़ दिखाई पड़ते हैं लेकिन आज भी उनके दिल में एक मासूम-सा बच्चा है जो बिना किसी भय के सच बोलना जानता है। मुझे विश्वास है कि पाठक उनके इस ग़ज़ल-संग्रह ‘मौजूद’ को भी बड़े प्यार और सम्मान से ग्रहण करेंगे।
—गोपालदास नीरज
Main Zinda Hoon
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
Rahat Indori's poetic style is known for its boldness, simplicity, and emotional intensity. His ghazals often revolve around themes of love, social issues, and patriotism. Filled with deep emotions and a strong connection to the common man, his poetry is widely appreciated by the masses. Despite its simplicity, his writing was impactful, conveying profound meanings in straightforward words. Rahat Indori primarily wrote in the traditional ghazal form, a significant genre of urdupoetry, but he added a contemporary twist to it. His ghazals often reflected a modern perspective and addressed contemporary issues. His work continues to inspire readers and audiences worldwide. Rahat Indori’s full name was Rahatullah Qureshi. He was born on January 1, 1950, in Indore. His father’s name was Rifatullah Qureshi, and his mother’s name was Maqbool-un-Nisa Begum. He earned a B.A. degree in urdufrom Devi Ahilya University, Indore, an M.A. in urduLiterature from Awadh University, and a Ph.D. (on urduMushaira) from M.P. Bhoj University. For 16 years, he served as a professor of urduliterature at I.K. College, Devi Ahilya University, Indore. He was also the editor of the urduquarterly magazine Shaakhein for 10 years. Several researchers in Indian and Pakistani universities have completed their Ph.D. degrees on Dr. Rahat Indori's life and works. His ghazals are included in the urducurriculum for classes 9 and 11 of the Maharashtra State Board. राहत इंदौरी की काव्यशैली को उसकी साहसिकता, सरलता और भावनात्मक तीव्रता के लिए जाना जाता है। उनकी ग़ज़लें अक्सर प्रेम, सामाजिक मुद्दों, और देशभक्ति जैसे विषयों से जुड़ी होती है। उनकी ग़ज़लें गहरी भावनाओं से भरी हुई हैं और आम आदमी से जुड़ी हुई भी हैं, जिससे उनको आम लोगों के बीच सराहा जाता है। उनका लेखन आसान होने के बावजूद असरदार था, जिसमें गहरे अर्थ को सीधे शब्दों में व्यक्त किया गया था। राहत इंदौरी मुख्य रूप से पारम्परिक ग़ज़ल शैली में लिखते थे, जो उर्दू कविता का एक ख़ास रूप है, लेकिन उन्होंने इसमें समकालीन ट्विस्ट दिया। उनकी ग़ज़लें अक्सर आधुनिक दृष्टिकोण से जुड़ी होती थीं, जो समकालीन मुद्दों को पेश करती थीं। उनका काम आज भी पाठकों और श्रोताओं को दुनिया भर में प्रेरित करता है। “राहत इंदौरी” का पूरा नाम राहतुल्लाह क़ुरैशी था। उनका जन्म 01/01/1950 को इंदौर में हुआ। उनके पिता का नाम रिफ़त-उल्लाह क़ुरैशी और माँ का नाम मक़बूल-उन-निसा बेगम था। उन्होंने बी.ए. उर्दू की डिग्री देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर से, एम.ए. उर्दू साहित्य की डिग्री अवध यूनिवर्सिटी से और पीएच.डी. (उर्दू में मुशायरा) की डिग्री एम.पी. भोज यूनिवर्सिटी से हासिल की। इंदौर स्थित आई.के. कॉलेज, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में 16 वर्षों तक उर्दू साहित्य के प्रोफ़ेसर के रूप में कार्य किया। इंदौर से प्रकाशित उर्दू तिमाही पत्रिका “शाख़ें” के 10 वर्षों तक सम्पादक रहे। कई भारतीय और पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में डॉ. राहत इंदौरी के जीवन और कृतियों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं ने पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की है। डॉ. राहत इंदौरी की ग़ज़लें महाराष्ट्र राज्य बोर्ड के कक्षा 9 और 11 के उर्दू पाठ्यक्रम में शामिल हैं। Main Zinda Hoon - Rahat Indori Kulliyat Dive into the world of Rahat Indori with "Main Zinda Hoon," a comprehensive Kulliyat (Complete Works) that brings together the finest of his poetic creations. This remarkable compilation offers readers an immersive experience of Indori's profound verses, reflecting his bold voice, emotional depth, and unyielding spirit. From verses that ignite a sense of rebellion to tender expressions of love and longing, "Main Zinda Hoon" captures the essence of Rahat Indori’s literary legacy. A must-have for poetry enthusiasts and fans of urduliterature, this collection is a tribute to the enduring brilliance of one of India’s most celebrated poets.
Yaad Ka Chehra
- Author Name:
Ambareen Haseeb Ambar +1
- Book Type:

- Description:
अम्बरीन हसीब अम्बर की शायरी में एक अलग तरह का फ़िक्री जहान नज़र आता है। वह एक तरफ़ हुस्न की जानिब से शायरी में अपना मुक़द्दमा पेश करती नज़र आती हैं और नाज़ और अदा कही जाने वाली महबूबा की ज़िन्दगी के असली मसलों से हमें रू-ब-रू करवाती हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ वह इतिहास की धूल में दफ़नाई हुई औरत के सवालों को भी दौर-ए-हाज़िर के दामन पर सब्त करती हुई मालूम होती हैं। ‘याद का चेहरा’ ग़ज़ल और नज़्म का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसमें सिर्फ़ तख़य्युल के फूल ही नहीं हैं, बल्कि आज की औरत के चुभते हुए तंज़ के काँटे भी हैं। वह ज़ुल्म और जब्र से आँखों में आँखें डाल कर मुकालमा करने की रवादार हैं। मोहब्बत में भी वह अगर एक तरफ़ ईसार और क़ुर्बानी के जज़्बे को अहम तस्लीम करती हैं तो वहीं अपना हक़ माँगने से भी पीछे नहीं हटती हैं। वफ़ा उनके लिए मर्द को तन्हाई से जहान-ए-रंगीं तक लाती है, मगर ख़ुद के जहान-ए-रंगीं से तन्हाई तक पहुँचने को नज़रअन्दाज़ नहीं करती। उनकी शायरी की इस ख़ूबसूरत किताब को उन्हीं के अल्फ़ाज़ में कुछ यूँ पेश किया जा सकता है— तंज़ रुसवाई सितम शिकवे गिले हैं यही शायद वफ़ाओं के सिले मुझको दुनिया की नहीं है आरज़ू मेरे होने की ख़बर मुझको मिले
Khwaabgah Mein Ret
- Author Name:
Mubashshir Saeed +2
- Book Type:

- Description:
उर्दू शायरी में जिन नए शायरों के दस्तख़त बहुत मज़बूती के साथ अपनी जगह बनाते नज़र आते हैं, उनमें मुबश्शिर सईद का नाम ख़ास तौर पर शामिल है। वह कहीं सूफ़ियाना रक़्स के धीमेपन की तरह पढ़ने वाले को सुकून बख़्शते हैं तो कहीं किसी भड़कते हुए शोले की तरह अपनी लपट में पढ़ने वाले को लपेटने का हुनर रखते हैं। ‘ख़्वाबगाह में रेत’ मुबश्शिर सईद का पहला मजमूआ है और इसने अपनी मुनफ़रिद शैली की बुनियाद पर बहुत कम समय में शोहरत की बुलन्दियाँ तय की हैं। वह धीमे लहजे के शायर हैं और ग़ज़ल के हुनर पर गहरी पकड़ रखते हैं। उनकी शायराना सलाहियत जहाँ पढ़ने वाले को एक तरफ़ उर्दू की नई ग़ज़ल के चेहरे से वाक़िफ़ कराती है, वहीं इस सिन्फ़-ए-सुख़न की इक्कीसवीं सदी में बदलती हुई शक्ल से भी आशना करवाती है।
Do Kadam Aur Sahi
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है चाँद पागल है, अँधेरे में निकल पड़ता है उसकी याद आई है साँसों ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता है राहत इंदौरी ने उर्दू शायरी को अवाम में मक़बूल बनाया है, वो अदब के रुख-ओ-रफ़्तार से वाक़िफ़ हैं. - अली सरदार जाफ़री राहत इंदौरी के पास लफ़्ज़ों से तस्वीरकशी कर देने का अनोखा हुनर हैं, में उसके इस हुनर का फैन हूँ. - एम. एफ. हुसैन रा से राम है, रा से राहत है, राम वही है जो राहत दे, जो आहात करता है वो रावण होता है. राहत साहब की शायरी में राहत है, मैं उनके अंदाज़ को सलाम करता हूँ. - मुरारी बापू डॉ. राहत इंदौरी के कलाम बरजस्तगी, मआनी आफ़रीनी और दौर-ए-हाज़िर का अक्स है. उनका वजूद उर्दू शेर-ओ-सुखन और उर्दू ज़बान के लिए बड़ा क़ीमती तोह्फ़ा है. - दिलीप कुमार राहत इंदौरी के पास अपने युग की साडी कड़वाहटों और दुखों को खुलकर बयां कर देने की बेपनाह ताक़त है, वो बेजान शब्दों को भी छूते हैं तो उनमें धड़कन पैदा हो जाती है. - प्रो. अज़ीज़ इंदौरी
Raat Samundar Mein
- Author Name:
Amjad Islam Amjad +1
- Book Type:

- Description:
कहाँ आ के रुकने थे रास्ते! कहाँ मोड़ था! उसे भूल जा वो जो मिल गया उसे याद रख, जो नहीं मिला, उसे भूल जा वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं दिल-ए-बेख़बर मिरी बात सुन, उसे भूल जा, उसे भूल जा मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तिरी आस तेरे गुमान मे सबा कह गई मिरे कान में, मिरे साथ आ, उसे भूल जा किसी आँख में नहीं अश्क-ए-ग़म तिरे बाद कुछ भी नहीं है कम तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा, उसे भूल जा
Yoon Hee
- Author Name:
Idrees Babar +2
- Book Type:

- Description:
इदरीस बाबर ने अपनी ग़ज़ल के ज़रिये नई शायरी को दरयाफ़्त किया है। उनकी किताब ‘यूँ ही’ की तमाम ग़ज़लों की ख़ासियत ये है कि वह ग़ज़ल के पुराने और घिसे-पिटे मज़ामीन को दोहराती नहीं हैं, बल्कि जदीद ज़िन्दगी से जुड़े इंसानी मामलात को अपना मौज़ू बनाती हैं। अपनी ग़ज़ल में वह उर्दू से वाबस्ता नफ़ासत और नज़ाकत को नज़र अन्दाज़ करते हुए ऐसे अलफ़ाज़ के इस्तेमाल करने में भी कोई बुराई महसूस नहीं करते, जिनको बहुत पहले मेयारी ज़बान के तसव्वुर ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उनके अन्दर का ग़ज़ल-गो हर तरह से समाज की बदलती हुई ज़हनी करवट, सियासी निज़ाम में धँसी हुई इनसानी चीख़ और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इश्क़ करते, भटकते, बेरोज़गार और बा-सलाहियत नौजवान की बे-चैनी से वाक़िफ़ है। इदरीस बाबर के लिए कहा जा सकता है कि ग़ज़ल में ज़बान और बयान के जितने तज'रबे उन्होंने ज़फ़र इक़बाल के बाद किये हैं, वह अपने पहले शेरी मजमूए में किसी और शायर ने शायद ही किये हों। इस तरह वह जदीदतरीन ग़ज़ल में वाक़ई अनोखे लहजे के एक बा-कमाल शायर के तौर पर ख़ुद को मनवाने की भरपूर ताक़त रखते हैं। उनकी इस किताब से आपको उनके नएपन का महज़ कुछ पन्ने पलटते ही अन्दाज़ा हो जाएगा।
Udti Dhool
- Author Name:
Amjad Islam Amjad +1
- Book Type:

- Description:
कौन आएगा! किसकी आहट पर मिट्टी के कान लगे हैं! ख़ुशबू किसको ढूँढ रही है! शबनम का आशोब समझ और देख कि उन फूलों की आँखें किस का रस्ता देख रही हैं किसकी ख़ातिर क़रया-क़रया जाग रहा है सूना रस्ता गूँज रहा है किसकी ख़ातिर!! तनहाई के हौल नगर मे शब-भर गिरते पत्तों की आवाज़ें चुनता रहता हूँ अपने सर पर तेज़ हवा के नौहे सुनता रहता हूँ
Raks Jaari Hai
- Author Name:
Zilani Bano +2
- Book Type:

- Description:
अब्बास ताबिश की ग़ज़लों में एक साधा हुआ रूमान है, जिसकी हदें इंसानी रूह और इंसानों की दूर-दूर तक फैली हुई दुनिया के तमामतर मसलों पर निगाह डालती हैं। वे पाकिस्तान से हैं और उर्दू शायरी की उस रवायत में हैं जिससे पाकिस्तान के साथ-साथ हिन्दुस्तान के लोग भी बख़ूबी परिचित हैं, और जिसके दीवाने दोनों मुल्कों में बराबर पाए जाते हैं। अहसास के उनके यहाँ कई रंग हैं, यानी ये नहीं कहा जा सकता कि वे सिर्फ़ इश्क़ के शायर हैं, या सिर्फ़, फ़लसफ़े की गुत्थियों को ही अपने अशआर में खोलते हैं, या सिर्फ़ दुनियावी समझ और ज़िन्दगी को ही अपना विषय बनाते हैं। उनके यहाँ यह सब भी है—मसलन यह शेर, ‘हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस, जो तआल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं।’ इस शे’र में निहाँ विराग और लगाव हैरान कर देनेवाला है, उसको कहने का अन्दाज़ तो लाजवाब है ही। अपनी बात को कहने के लिए वे अपने अहसास को एक तस्वीर की शक्ल में हम तक पहुँचाते हैं जो पढ़ने-सुनने वाले के ज़ेहन में नक़्श हो जाता है। ‘मैं कैसे अपने तवाज़ुन को बरकरार रक्खूँ, क़दम जमाऊँ तो साँसें उखड़ने लगती हैं’। इस शे’र में क्या एक भरा-पूरा आदमी अपने वजूद की चुनौतियों को सँभालने की जद्दोजहद में हलकान हमारे सामने साकार नहीं हो जाता? अब्बास ताबिश की विशेषताओं में यह चित्रात्मकता सबसे ज़्यादा ध्यान आकर्षित करती है। मिसाल के लिए एक और शे’र, ‘ये जो मैं भागता हूँ वक़्त से आगे-आगे, मेरी वहशत के मुताबिक़ ये रवानी कम है’। अब्बास ताबिश की चुनिन्दा ग़ज़लों का यह संग्रह उनकी अब तक प्रकाशित सभी किताबों की नुमायंदगी करता है। उम्मीद है हिन्दी के शायरी-प्रेमी पाठक इस किताब से उर्दू ग़ज़ल के एक और ताक़तवर पहलू से परिचित होंगे।
Hauz Mein Chand
- Author Name:
Ali Akbar Natik +2
- Book Type:

- Description:
अली अकबर नातिक़ की नज़्म जितनी मुनफ़रिद और बाँकी है, उतनी ही उनकी ग़ज़ल में ताज़गी और नुदरत है। वह एक ऐसे अदीब हैं जो एक ही समय में नस्र और नज़्म पर एक जैसी क़ुदरत रखते हैं। ग़ज़ल में उनका रुझान ज़्यादातर फ़ितरत से फूटने वाली सुन्दरता की उन निशानियों को क़ैद करने की तरफ़ है, जिन पर अक्सर शायरों का ध्यान नहीं जाता। ज़बान का असर उनके यहाँ जादुई तरकीबों और नित-नए इस्तिआरों की दुनिया आबाद करता हुआ नज़र आता है। वह अपनी ग़ज़ल से कम पहचाने गए हैं, और उनके पढ़ने वालों के लिए ये एक ऐसा ज़ाविया है, जिस पर ध्यान दिए बिना आप अली अकबर नातिक़ की तख़्लीक़ी दुनिया का सुराग़ ठीक-ठीक नहीं लगा सकते। वह अपनी ग़ज़लों में निहायत मुश्किल और पथरीली ज़मीनों पर चलते हुए फ़िक्र और बयान के ऐसे ख़ूबसूरत फूल खिलाने का हुनर जानते हैं कि पढ़ते हुए उनके हुनर पर हज़ार हैरत होती है। उर्दू शायरी के मुआसिर शायरों में अली अकबर नातिक़ पहले भी किसी तार्रुफ़ के मोहताज नहीं रहे हैं, मगर ये किताब उनकी तारीफ़ के एक नए पहलू से पढ़ने वालों को रू-शनास कराती चलती है।
Goonj
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
भावनाएँ और संवेदनाएँ अक्सरहां मनरूपी समंदर में मौन बवंडर बन सोया करती हैं। शब्दों के कंकड़ जब इस बवंडर को जागृत करते हैं, तब कहीं जाकर काव्य अपना स्वरुप लेती है। काव्य-संग्रह “गूंज” यथार्थ और कल्पना, सत्य और असत्य, सुख और दुःख, प्रेम और द्वेष, जैसी सभी संवेदनाओं को स्वयं में निहित कर आपके समक्ष प्रस्तुत कि गयी है। काव्यों का ये संकलन आपके मन को प्रेम से स्पर्श भी करेगा तथा आपके अस्तित्व के आगे कई अनछुए पहलुओं एवं सवालों को प्रस्तुत भी करेगा। सुकून की अनुभूति एवं विचारों के द्वंद की गूंज, आपको काव्य-संग्रह “गूंज” में स्पष्ट रूप से सुनाई देगी।
Shahar Is Taraf Hai
- Author Name:
Shaheen Abbas +2
- Book Type:

- Description:
शाहीन अब्बास को पढ़ते समय उनके यहाँ मौजूद मुश्किल ख़यालों को रवानी से बयान कर देने की ख़ूबी जिस तरह उजागर होती है, वह एक ख़ुशगवार हैरत से दो-चार करवाती है। उनके कलाम में रिवायत और जदीदियत का ऐसा मिलन है जो आम तौर पर शायरी करने वाले दूसरे शायरों के यहाँ इस ख़ूबसूरती से कम ही अपनी जगह बना पाता है। शाहीन अब्बास की ग़ज़ल को पढ़े बग़ैर इस दौर की शेरी समझ को पूरी तरह ख़ुद में उतार पाना ना-मुमकिन-सा काम है। वह अपनी शायरी में शहर के बदलते हुए इनसान, जज़्बों की टूट फूट और सियासत को भी कई बार उस बारीक ऐनक से देखते हैं, जिसकी वजह से उनकी ग़ज़ल में मौजूद इशारे पढ़ने वाले पर ज़्यादा आसानी से वाज़ेह होते चले जाते हैं। वह पिछले तीस-पैंतीस बरस से ग़ज़ल की दुनिया में अपने अनोखे उस्लूब का जादू जगा रहे हैं और उनकी आवाज़ वक़्त के साथ-साथ और मज़बूत होती जा रही है। आसान ज़बान और दुश्वार ख़यालात से बुनी गई उनकी ग़ज़ल ‘इश्क़-ओ-आशिक़ी’ के अलावा वुजूद और ज़हन से जुड़े मसलों की तरफ़ भी बख़ूबी इशारे करती है। वह हर लिहाज़ से एक ना-क़ाबिल-ए-फ़रामोश शायर हैं, जिन्होंने अपने ज़माने में ही अपनी बेहतरीन शेरी और फ़िक्री दुनियाओं के नक़्शे बना लिए हैं। उनको पढ़ कर शेर कहने का सच्चा सलीक़ा सीखा जा सकता है।
Ashre
- Author Name:
Idrees Babar +2
- Book Type:

- Description:
‘अरबी ज़बान’ में ‘अशरा’ लफ़्ज़ के मानी होते हैं—'दस', इसी से ये बात समझ आनी चाहिए कि इदरीस बाबर ने उर्दू में एक ऐसी सिन्फ़ या फ़ॉर्म ईजाद की है, जिसमें सिर्फ़ दस मिसरे होते हैं। दिलचस्प बात ये है कि ‘अशरा’ किसी भी तरह लिखा जा सकता है। ग़ज़ल, नज़्म, आज़ाद नज़्म या फिर नसरी नज़्म के तौर पर भी। इसी लिए इस किताब में आपको ‘अशरे’ के ये सभी रूप दिखाई देंगे। ‘अशरे’ को किसी ख़ास मौज़ू का मोहताज भी नहीं बनाया गया है, एक अशरा जहाँ सियासी हो सकता है तो वहीं दूसरा ‘समाजी’ और 'इस्लाही' या फिर इश्क़-ओ-आशिक़ी से भी उसका तअल्लुक़ हो सकता है। ऐसा नहीं है कि क्लासिकल शायरी में दस मिसरों की ऐसी कोई सिन्फ़ मौजूद नहीं थी, दकन से लेकर शुमाली हिन्दुस्तान तक दस मिसरों की ऐसी नज़्मों को ‘मुअश्शर’ कहा जाता था। मगर इदरीस बाबर की इस नई सिन्फ़ ने ख़ुद को बहर और उस्लूब की क़ैद से आज़ाद करके इसमें कई नए इमकान पैदा कर दिए हैं, इस बात का सुबूत आपको ये किताब पढ़ कर मिल जाएगा। इदरीस बाबर नए शायरों में एक बेचैन और तज’रबा-पसन्द शायर हैं। वह किसी एक कल बैठने को तख़लीक़कार के लिए अच्छा नहीं मानते। इसी वजह से उनके यहाँ अलफ़ाज़ से लेकर अहसास तक हर क़दम पर नैरंगी दिखाई देती है। उर्दू अदब में इदरीस बाबर की ईजाद की हुई इस सिन्फ़ का इस्तक़बाल हुआ है और बहुत से लोग अशरे लिख रहे हैं। आप भी अगर उर्दू अदब में तेज़ी से पनपती इस नई सिन्फ़-ए-सुख़न से वाक़िफ़ होना चाहते हैं तो ये किताब ज़रूर पढ़िए।
Lateefe
- Author Name:
Anuradha Sharma
- Book Type:

- Description:
शाइरों और अदीबों की हाज़िरजवाबी, तंज और मजाहिया गुफ़्तगू में भी शाइरी और इल्म की गहरी बातें छिपी होती हैं| ये चीज़ें किसी भाषा के अदब का अनौपचारिक विस्तार ही नहीं होतीं, उस साहित्य और समाज की आत्मा में झाँकने का एक खूबसूरत झरोखा हैं| इस किताब में शामिल लतीफ़ों से लगभग दो सौ सालों के महान शाइरों, संपादको, सियासी शख्शियतों और पत्रकारों का किरदार उभरता है| साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप का बौद्धिक परिदृश्य बनता दिखाई पड़ता है
Main Zinda Hoon
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
Rahat Indori's poetic style is known for its boldness, simplicity, and emotional intensity. His poetry often deals with themes of love, heartbreak, social issues, patriotism, and personal identity. His work is deeply emotional and connects with the common person, making it relatable and widely appreciated. His poetry was accessible, yet impactful, blending deep meaning with straightforward expressions. Rahat Indori wrote primarily in the traditional ghazal form, a classical genre of urdupoetry, but he brought a contemporary twist to it. His ghazals were often modern in their approach, dealing with contemporary issues while maintaining the classical structure and emotional depth of ghazal. His work continues to inspire readers and listeners around the world. "Rahat Indori" was born as Rahtullah Qureshi on 01/01/1950 in Indore. His father's name was Rif'at Ullah Qureshi and his mother's name was Maqbool-un-Nisa Begum. He earned his Bachelor of Arts in urdufrom Devi Ahilya University, Indore, his Master of Arts in urduliterature from Awadh University, and his Ph.D. (in urduon Mushaira) from M.P. Bhoj University. Dr. Rahat Indori worked as a professor of urduliterature at I.K. College, Devi Ahilya University, Indore, for 16 years. He was the editor of the urduquarterly magazine "Shaakhein" for 10 years, published from Indore. Many researchers have earned their Ph.D. degrees on the life and works of Dr. Rahat Indori at various Indian and Pakistani universities. Dr. Rahat Indori's ghazals are included in the urdusyllabus of Class 9 and 11 of the Maharashtra State Board.
Ganju Lama, VC; Sikkim’s Hero in War and Peace
- Author Name:
Anuradha Sharma
- Book Type:

- Description:
The exact turn of events that led Gyamtso to flee home is a bit of a mystery. But one thing is certain: he left suddenly and secretly, without even saying goodbye or packing his bags. In no time, the young man from Sikkim was in Burma fighting in the world’s biggest war. This remarkable biography chronicles Gyamtso Shangderpa’s transformation from an ordinary village boy to the legendary war hero, Ganju Lama VC. He is the only Indian Gurkha soldier to be awarded with the Victoria Cross, the highest honour given by the British to members of the armed forces for extraordinary bravery. Yet, Ganju Lama’s story is about more than just wartime valour. It is a deeper narrative of resilience, sense of duty, and the power of the human spirit.
Tokri Mein Digant
- Author Name:
Anamika
- Book Type:

- Description:
अनामिका के नए संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त—थेरी गाथा : 2014’ को पूरा पढ़ जाने के बाद मेरे मन पर जो पहला प्रभाव पड़ा, वो यह कि यह पूरी काव्य-कृति एक लम्बी कविता है, जिसमें अनेक छोटे-छोटे दृश्य, प्रसंग और थेरियों के रूपक में लिपटी हुई हमारे समय की सामान्य स्त्रियाँ आती हैं। संग्रह के नाम में 2014 का जो तिथि-संकेत दिया गया है, मुझे लगता है कि पूरे संग्रह का बलाघात थेरी गाथा के बजाय इस समय-सन्दर्भ पर ही है। संग्रह के शुरू में एक छोटी-सी भूमिका है, जिसे कविताओं के साथ जोड़कर देखना चाहिए। बुद्ध अनेक कविताओं के केन्द्र में हैं, जो बार-बार प्रश्नांकित भी होते हैं और बेशक एक रोशनी के रूप में स्वीकार्य भी। इस नए संकलन में अनेक उद्धरणीय काव्यांश या पंक्तियाँ मिल सकती हैं, जो पाठक के मन में टिकी रह जाती हैं।
बिना किसी तार्किक संयोजन के यह पूरा संग्रह एक ऐसे काव्य-फलक की तरह है, जिसके अन्त को खुला छोड़ दिया गया है। स्वयं इसकी रचयिता के अनुसार “वर्तमान और अतीत, इतिहास और किंवदन्तियाँ, कल्पना और यथार्थ यहाँ साथ-साथ घुमरी परैया-सा नाचते दीख सकते हैं।” आज के स्त्री-लेखन की सुपरिचित धारा से अलग यह एक नई कल्पनात्मक सृष्टि है, जो अपनी पंक्तियों को पाठक पर बलात् थोपने के बजाय उससे बोलती-बतियाती है, और ऐसा करते हुए वह चुपके से अपना आशय भी उसकी स्मृति में दर्ज करा देती है। शायद यह एक नई काव्य-विधा है, जिसकी ओर काव्य-प्रेमियों का ध्यान जाएगा। समकालीन कविता के एक पाठक के रूप में मुझे लगा कि यह काव्य-कृति एक नई काव्य-भाषा की प्रस्तावना है, जो व्यंजना के कई बन्द पड़े दरवाज़ों को खोलती है और यह सब कुछ घटित होता है एक स्थानीय केन्द्र के चारों ओर। कविता की जानी-पहचानी दुनिया में यह सबाल्टर्न भावबोध का हस्तक्षेप है, जो अलक्षित नहीं जाएगा।
—केदारनाथ सिंह
Saptaparna
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
मनुष्य की स्थूल पार्थिव सत्ता उसकी रंग-रूपमयी आकृति में व्यक्त होती है। उसके बौद्धिक संगठन से जीवन और जगत सम्बन्धी अनेक जिज्ञासाओं, उनके तत्त्व के शोध और समाधान के प्रयास, चिन्तन की दिशा आदि संचालित और संयमित होते हैं! उसकी रागात्मक वृत्तियों का संघात उसके सौन्दर्य-संवेदन, जीवन और जगत के प्रति आकर्षण-विकर्षण, उन्हें अनुकूल और मधुर बनाने की इच्छा, उसे अन्य मानवों की इच्छा से सम्पृक्त कर अधिक विस्तार देने की कामना और उसकी कर्म-परिणति आदि का सर्जक है।
Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein
- Author Name:
Bodhisatwa
- Book Type:

- Description:
यह संग्रह अपनी कविताओं के तीव्र आवेग, भाव–विविधता एवं वस्तु–बहुलता के कारण महत्त्वपूर्ण माना जाएगा। बोधिसत्व की कविताएँ मानो अनेक नदियों का संगम हैं। लोकगीतों की ऊष्मा तथा रागात्मकता, वर्तमान जीवन के ‘दुख–तंत्र’ की कठोर प्रतीति और वैचारिक दृढ़ता एवं प्रतिरोध—इन सबके संयोग से ये कविताएँ हमारे लिए एक वैकल्पिक पाठ की सृष्टि करती हैं। ‘हाहाकार के बीच से गुज़रती’ इन कविताओं में दर्ज हैं ‘बेनूर आँखों के ख़्वाब’, ‘सिले होंठों की मुस्कुराहट’ और ‘बँधे हाथों की छटपटाहट’। लोकगीत और बोलियों की शक्ति का उपयोग, जिसके लिए बोधिसत्व की आरम्भिक कविताएँ चिह्नित की गई थीं, उनका अद्यतन रूप यहाँ मिलता है, कुछ ज्वाया और सख़्त।
इनमें बेचैन कर देनेवाली ऐन्द्रिकता है—‘ताज़े आटे की गर्मी थी उसकी ख़ुशी/वसन्त उसके लिए अब उखड़े नाखून की तरह है’। एक विरल करुणा और क्रोध। इनमें जीवन के प्रति समर्थन और लालसा है जैसे कि ‘ऐसा ही होता है’ कविता में, जो साधारण मनुष्य के दैनंदिन प्रेम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है। ‘गंध’ शीर्षक कविता स्वयं बोधिसत्व की कविताओं में अलग से उल्लेखनीय है। यह एक बड़ी कविता है, हमारे जीवन की दारुण विपत्ति, विडम्बना एवं निजी और सामाजिक के सीमा–प्रदेश पर निरन्तर विद्यमान द्वन्द्व की कविता।
एक बात और—ये कविताएँ गहरे राजनैतिक आशय एवं नैतिक संकल्प की कविताएँ हैं। बोधिसत्व का ही शब्द लेकर कहें तो यह वह कविता है ‘जो समाज के हारे–गाढ़े काम दे’।
—अरुण कमल
Kavya Chayanika
- Author Name:
Pramod Kovaprath
- Book Type:

- Description:
बिगड़ते पर्यावरण की समस्या आज मनुष्य के लिए भूख के बाद दूसरी सबसे बड़ी समस्या है। भूख जिस तरह एक देह के अस्तित्व के लिए आसन्न ख़तरा होती है, उसी तरह पर्यावरण-विनाश सृष्टि के अस्तित्व के लिए होता है। एक-एक व्यक्ति के रूप में जी रहे हम लोगों की आँखों से वह ख़तरा भले ही इतने स्पष्ट और ठोस रूप में न दिखाई देता हो, और भले ही हम बीच-बीच में प्रकृति द्वारा दी जानेवाली चेतावनियों को नज़रअन्दाज़ करने की ढीठता भी जुटा लेते हों, लेकिन जल, ज़मीन, हवा और हरियाली का सतत क्षरित होता जीवन उन निगाहों से अनचीन्हा नहीं रह जाता जो प्रस्तुत उल्लास की झीनी चदरिया के पार दूर क्षितिज के धुँधलके में लिखी जा रही नाश-विनाश की पटकथाओं की पंक्तियाँ पढ़ लेती हैं, यानी कवियों और रचनाशील हृदयों की निगाहें। यह पुस्तक प्रकृति और कवि के इसी अपने, और समाज की रिश्तेदारियों के धोखादेह प्रपंच से परे, उनके निहायत पवित्र और निजी रिश्ते का दस्तावेज़ है। पाठकगण इस किताब को सरकारों और संस्थाओं के रस्मी पर्यावरण-प्रेम और शुष्क रुदन के काव्यानुवाद के रूप में न लें। यह समष्टि-मन के रचनाकुल और ईमानदार स्नायुओं की पीड़ाजनित प्रतिक्रियाओं का संकलन है जिसमें हिन्दी के नए-पुराने, वरिष्ठ, श्रेष्ठ और सजग रचनाकारों ने प्रकृति के साथ अपनी सम्बन्ध-यात्रा के सबसे चिन्तित क्षणों को वाणी दी है। संग्रह में एक सौ एक समकालीन कविताएँ और पैंतालीस कवि शामिल हैं। कौन छोटा है, कौन बड़ा है, यह सवाल अप्रासंगिक है। क्योंकि कविता का विषय महत्त्वपूर्ण है, समस्याओं की भयंकरता प्रासंगिक है। एक ही त्रासदपूर्ण मुद्दा सबके लिए महत्त्वपूर्ण है। सब में आशंकाएँ हैं तो साथ ही आशाएँ भी हैं। प्रकृति की आसन्न मृत्यु पर चीख़ने के बजाय प्रतिरोध खड़ा करना ये रचनाकार अपना दायित्व समझते हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book