Shoodra
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Hindi poems Shoodra by Tribhuvan
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Hindi poems Shoodra by Tribhuvan
Book Details
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ISBN9789385013393
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Pages112
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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किसी चीज़ को शब्दों में ज़िन्दा कर देना एक कवि की सिफ़त है और विष्णु खरे के पास वह जादू है।
—केदारनाथ सिंह
Koyla Aur Kavitwa
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description: ला और कवित्व' में रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की सन् साठ के बाद रची गई ऐसी कविताएँ हैं जो अपने आधुनिकता-बोध में पारदर्शी तो हैं ही, कला-विन्यास का श्रेष्ठ उदाहरण भी हैं। इस संग्रह में संकलित है एक विदुषी को लिखा गया कवि का गीत-पत्र–'कला फलाशा से युक्त होती है या वियुक्त और कोयले का उत्पादन बढ़ाने को यदि गीत लिखे जाएँ तो कैसा रहे?' यह गीत-पत्र मात्र पत्र नहीं, कवि के गहन चिन्तन का दस्तावेज़ भी है। और यह चिन्तन-ज़मीन अपनी सम्पूर्णता में इस संग्रह को विशिष्ट भी बनाती है, हमें अपने वर्तमान से जोड़ती भी है। 'कोयला और कवित्व' में संकलित कविताएँ अपने आकार में बहुत बड़ी न होकर भी अपनी प्रकृति में बहुत बड़ी हैं। एक बड़े कालखंड से जुड़ी ये कविताएँ परम्परा और अन्तर्विरोधों से गुज़रते हुए जिस संवाद का निर्वाह करती हैं, वह बहुत बड़ी सृजनात्मकता का प्रतीक है। हमारे मन और मस्तिष्क को उद्वेलित करनेवाली ये कविताएँ संग्रहणीय भी हैं, और अविस्मरणीय भ
Shabri
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description: ‘शबरी’ में कवि आधुनिकता के अधिक पास होते हैं। उन्होंने लिखा है—‘वाल्मीकि ने सामाजिक वर्ण-व्यवस्था से ऊपर व्यक्ति के आध्यात्मिक स्वत्व एवं असंग कर्म को प्रतिष्ठापित किया और शबरी वही बीज चरित्र है। चरित्र की दृष्टि से शबरी मंत्र चरित्र लगती है'—अपनी छोटी-सी उपस्थिति में सार-भूत। ‘शबरी’ काव्य विचारों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। एक दलित स्त्री को अपने कर्म-श्रम के ज़रिए ऊपर उठाकर ऋषि मतंग जिस भूमि पर प्रतिष्ठित करते हैं, उससे पौराणिकता की रक्षा भी होती है और वर्ण-व्यवस्था के विरुद्ध उठती आज की आवाज़ को भी बल मिलता है।
Pratinidhi Kavitayen : Kedarnath Agrawal
- Author Name:
Kedarnath Agrawal
- Book Type:

-
Description:
केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं में प्रकृति और नारी का सौन्दर्य बहुत चित्रित है। वे जीवन-रस का छककर पान करनेवाले कवि हैं। सुख, सौन्दर्य, श्रम—ये केदारनाथ अग्रवाल के जीवन एवं काव्य-मूल्य के ढाँचे के विभिन्न अवयव हैं। निस्सन्देह इसका स्रोत समाजवादी विचारधारा है। यह सुख सामाजिकता से अलग या उसका विरोधी नहीं। बस, इसका अनुभव निजी है। वह अनावश्यक संचय से, निष्क्रियता से, दूसरों का हक़ मार लेने से नहीं मिलता। सुख केदारनाथ अग्रवाल के लिए मानवता का स्वाद है, अस्तित्व का रस है। उनका जीवन-आचरण और कविता भी उसी प्राप्ति के लिए अनुशासित और अनुकूलित थी। प्रेम हो तो साधना भी सिद्धि का आनन्द देती है। केदारनाथ अग्रवाल प्रकृति और मनुष्य को श्रम-संस्कृति की दृष्टि और विचारधारा से चित्रित करते हैं। उनके यहाँ प्रकृति और मनुष्य का तादात्म्य है। केदारनाथ अग्रवाल की कविता ने नई प्रकृति, नया समुद्र, नए धन-जन, नया नारी सौन्दर्य गढ़ा है। वे श्रम-संस्कृति के सौन्दर्य-निर्माता कवि हैं। उन्होंने प्रगतिशील कविता-हिन्दी कविता को कालजयी गरिमा दी है। केदारनाथ अग्रवाल बुन्देलखंड की प्रकृति, वहाँ के जन-जीवन से ही नहीं, वहाँ के लोकगान, वहाँ की लय, वहाँ की भाषा और तान से जुड़े हैं। उनकी रचनाधर्मिता में बुन्देलखंड अपनी समग्रता में रचा-बसा है। यह सारा रचाव-बसाव कवि के हृदय में है और अभिव्यक्तित्व में भी।
—डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी
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