Navajeevana Gamyam
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The book Navajeevana Gayam is about Telugu versus a poetry and is one of the best books of its kind. In this book the author talks about social responsibility, society about its role, life and inspirational talk for all ages, Shiva philosophy, love, life and how to live a successful life, old and new generations, Hinduism and its essence. And every thing is written in a book. Essentially the author used simple everyday language to reach many people.
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The book Navajeevana Gayam is about Telugu versus a poetry and is one of the best books of its kind. In this book the author talks about social responsibility, society about its role, life and inspirational talk for all ages, Shiva philosophy, love, life and how to live a successful life, old and new generations, Hinduism and its essence. And every thing is written in a book. Essentially the author used simple everyday language to reach many people.
Book Details
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ISBN9788195643981
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Pages124
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ये कविताएँ बीते दो-एक दशकों में उपजी बेचैनियों और निराशाओं को स्वर देने का प्रयास करती हैं। वक़्त की चोट को शब्दों में महसूसना चोट पर मरहम का ही काम नहीं करता, बल्कि उसे ज़िन्दा भी रखता है। यह संग्रह अपने ज़ख़्मों के प्रति उत्तरदायी बने रहने की अपील करता हुआ, उनके भरने की उम्मीद की व्यर्थ और अश्लील सकारात्मकता से मुक्त उम्मीद भी करता है। जैसे-जैसे इस दौर की अलामतें हम पर नुमायाँ हुई हैं, कविता, विचार और संवेदना में भ्रम और कुहासा बढ़ा है। दृश्य के धुँधलाने के साथ दृष्टि भी क्षीण होती-सी महसूस हुई है। यहाँ प्रस्तुत कविताएँ इस सन्दर्भ में दृष्टि की खोज भी हैं और उसके थिर और स्पष्ट बने रहने की टॉर्च भी। हालाँकि इन कविताओं में रोशनी की दिशोन्मुखता नहीं, आग की दहनप्रियता अधिक है और इस जलने में केवल सन्ताप नहीं, प्रतिदिन की, सम्बन्धों की, स्थितियों और संघर्षों की ऊष्मा भी है जो जीवन को ठंडेपन से दूर रखते हुए जीवन्त-जाग्रत बनाए रखती है। शिल्प और भाषा के स्तर पर अपने को परस्पर काटते हुए प्रयोग भी उस विकलता को अपने में विन्यस्त करते हैं जो अन्तर्वस्तु की ज़मीन पर जगह-जगह उद्घाटित हुई है। इन कविताओं में एक कवि की यात्रा भी है जो गणित, विज्ञान, दर्शन और समाजशास्त्र की गलियों में भटकती हुई बार-बार कविता के दयार पर लौटती है। ये लौटना ही उसका अरमान भी है और उसका निकष भी। नतीजन इनमें जो धधक रहा है, कई पाँवों का चक्कर, कई हाथों की दुआ है जो हर बार कविता पर आकर ख़त्म होती है। इसलिए तमाम उत्कंठाओं और व्याकुलताओं के बाद भी इन कविताओं में एक बसेरापन भी है और अपनी जगह की ठसक भी।
Ant Anant
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
यह संकलन सम्पूर्ण निराला-काव्य का परिचय देने के लिए नहीं, बल्कि इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि इससे पाठकों को उसकी मनोहर तथा उदात्त झाँकी-भर प्राप्त हो, जिससे वे उसकी ओर आकृष्ट हों और आगे बढ़ें।
निराला की ख़ासियत क्या है? वे प्रचंड रूमानी होते हुए भी क्लासिकी हैं, भावुक होते हुए भी बौद्धिक, क्रान्तिकारी होते हुए भी परम्परावादी तथा जहाँ सरल हैं, वहाँ भी एक हद तक कठिन। उनकी अपनी शैली है, अपनी काव्य-भाषा। अभिव्यक्ति की अपनी भंगिमाएँ और मुद्राएँ।
यह सर्वथा स्वाभाविक है कि उनके निकट जानेवाले पाठकों से यह अपेक्षा की जाए कि उनका काव्यानुभव बच्चन, दिनकर या मैथिलीशरण गुप्त तक ही सीमित न हो। जब वे किंचित् प्रयासपूर्वक उक्त कवियों से हटकर उनके काव्य-लोक में प्रवेश करेंगे, तो पाएँगे कि उनकी तुलना में वे उनके ज़्यादा आत्मीय हैं।
निराला के प्रसंग में सरलता का यह मतलब क़तई नहीं है कि उनकी कविताएँ पाठकों के मन में बेरोक-टोक उतर जाएँ। कारण यह है कि उनके लिए काव्य-राचन सशक्त भावनाओं का मात्र अनायास विस्फोट नहीं था, बल्कि वे अपनी प्रत्येक कविता को किंचित् आयासपूर्वक पूरी बौद्धिक सजगता के साथ गढ़ते थे। स्वभावतः उनकी सम्पूर्ण अभिव्यकि कलात्मक अवरोध से युक्त है, जिसे ग्रहण करने के लिए थोड़ा धैर्य और श्रम आवश्यक है।
इस पुस्तक में निराला के काव्य-विकास की तीनों अवस्थाओं—पूर्ववर्ती, मध्यवर्ती और परवर्ती—की सौ चुनी हुई सरल कविताएँ संकलित की गई हैं, प्राय रचना-क्रम से। आरम्भिक दोनों अवस्थाओं में सृजन के कई-कई दौर रहे हैं, कविता और गीत के, जिसकी सूचना अनुक्रम से लेकर पुस्तक के भीतर सामग्री-संयोजन तक में दी गई है।
पाठक मानेंगे कि यह कविता की एक नई दुनिया है, अधिक आत्मीय और प्रत्यक्ष, जिसे भाषा सजाती नहीं बल्कि अपनी भीतरी शक्ति से खड़ी करती है।
Premchand Biskohar Mein
- Author Name:
Vishwanath Tripathi
- Book Type:

- Description: ‘प्रेमचन्द बिस्कोहर’ में हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी की कविताओं का संकलन है—कह सकते हैं कि उनका मन, भावों से भरा। लेकिन ये किसी निराकार अनुभूति से उपजे भाव नहीं हैं। इनकी जड़ें हैं—पृथ्वी में, स्मृति में, परिवार में, प्रकृति में और उस इतिहास में जो समय के अंक में बन रहा है, बीत रहा है— फूल में सूरज में मिट्टी में आँखों में झुलसे सँवलाए चेहरों में एक लपट काँपती रहती है| मैं उसी से शब्दों को सुलगा लेता हूँ| ये धीमी आँच में सुलगते हुए शब्द हैं जिनकी उष्मा हमें कुछ देर बाद महसूस होती है और फिर देर तक साथ रहती है, हमें हमारे ऐसे ही क्षणों की ओर लौटाती हुई—अपने स्मृति-वृक्षों के पास। यह देखकर तो किसे अचरज होगा कि वे भाषा से काम भी एक कुशल कारीगर की तरह लेते हैं। वह शब्द-संयम जो मुक्तिबोध और शमशेर में है, यहाँ भी दिखाई देता है; और अनेक ऐसे बिम्ब भी जो केवल यहीं उपलब्ध हैं। मसलन एक बिल्ली है—मैंने उसके अंगों में चुम्बनों की घंटियाँ बाँध दी हैं वह जहाँ होगी, घंटियाँ खनखना रही होंगी। एक पठनीय और संग्रहणीय कविता-संग्रह।
Customer Reviews
4.5 out of 5
Book
19/01/2023
Kiran Kumar
ముందుగా శ్రీ నవజీవన్ రెడ్డి గారికి న అభినందనలు. ఈ రచనలు అగాధమైన మరియు నిగూడమైన విశ్లేషణ కు తార్కాణం. ఇది కవితలు మాత్రమే కావు, ఇవి యువత మేలుకొలుపులు. మనలని చాల లోతుగా ఆలోచింపజేసే సంకలనాలు. ఈ పుస్తకము నందు యాభై పై చీలుకు పద్య మాలికలు నిక్షిప్త పరిచియున్నారు ప్రతి కవిత పాఠకులకు స్పూర్తి తో పాటు మనసు చెలింపజేసేలా పొందుపరిచారు, సరళీకృత భాష, దిశా నిర్దేశం చేయగలిగిన సత్తా ఉన్న మేలుకొలుపు, జ్ఞాపక విశ్లేషణ, జీవిత గమ్య మార్గదర్శనాలు ఈ పుస్తకం నందు పుష్కలంగా అందించారు. "జననం,మరణం మధ్యలో మన జీవితం ఒక రణరంగం" అన్న నానుడి తో ప్రారంభించి "గతాన్ని గతంలోనే వదిలి, వర్తమానం లో జీవిస్తూ, బంగారు భవిష్యత్తు కు పునాదులు వేసుకోవాలి" అన్న అందమైన ముగింపు ఇచ్చారు మన ప్రియతమా రచయత ప్రతి ఒకరికి ఆచరణ యోగ్యమైన మరియు ఆశయ సాధన దోహద పడే నిధిని మనకు పద్య రూపేణా అందించారు మన "నవజీవన్ రెడ్డి" గారు. ఊహ శక్తి, రచన సామర్థ్యం, సరళ చాతుర్యం ఈ నవల ప్రత్యేకం, వ్యక్తిగతంగా నాకు స్ఫూర్తి తో పాటు ఆచరణ సాధ్యమైన మేధస్సు మరియ నా భావనలు కావలసిన స్పష్టమైన ప్రేరణ నే కాకా వ్యవహార జ్ఞానం తో కూడిన జీవన సార్ధక్యం అందించడమే కాక ఆలోచింప జేసినా మాలికలు కో-కొల్లలు తెలుగు చదవ గలిగిన ప్రతి భారతీయుడు చదవ వలసిన సంపుటం ఈ "నవజీవన గమ్యం". ఈ బుక్ ద్వారా పాఠకులకు తన కవితలు ప్రస్ఫుటమైన జీవన గమ్య నిర్దేశం అందిచడం లో "నవజీవన్ రెడ్డి" గారు కృతకృత్యులు. - కిరణ్ కుమార్ అధరాపురం-