Pichhale Prishth Se Aage…
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Author:
Narayan Kulkarni KavthekarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry₹
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मराठी के प्रसिद्ध कवि नारायण कुलकर्णी कवठेकर के काव्य-संग्रह ‘मागील पानावरून पुढे सुरू...’ का हिन्दी अनुवाद है—‘पिछले पृष्ठ से आगे...’।</p> <p>संग्रह की कविताएँ देश की समकालीन परिस्थितियों पर नई शैली में प्रकाश डालती हैं। यह नई शैली हिन्दी पाठकों को निश्चय ही कवि की भावनाओं की उत्कट प्रतीति कराएगी। यह काव्य-संग्रह मनुष्य को असहाय, विवश एवं संत्रस्त बनानेवाली व्यवस्था के विरुद्ध एक प्रतिभावान कवि का कारगर हस्तक्षेप है।</p> <p>न्यायिक प्रक्रिया का खोखलापन, सरकारी नीतियों की अशाश्वतता, सरकारी योजनाओं का ग़लत कार्यान्वयन, व्यवस्था द्वारा किए जानेवाले विकास के ग़लत दावे एवं फ़तवे, कलाकारों की बाधित स्वतंत्रता, प्रभावहीन नेताओं के नक़ली चेहरे, प्राकृतिक तत्त्वों की बेशुमार लूट, किसानों एवं आदिवासियों की छीछालेदर, उन पर बरसनेवाले आसमानी एवं सुल्तानी संकट, महिलाओं पर हो रहे निर्मम अत्याचार आदि कितने ही विषय हैं जिनको ज़मीनी यथार्थ के अधिकाधिक पहलुओं समेत प्रस्तुत कर कवि ने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया है।</p> <p>कवि द्वारा समस्या की जड़ तक जाने, उसके अछूते पहलुओं को उभारने तथा उक्ति, सूक्ति, स्वभावोक्ति, वक्रोक्ति, व्यंग्योक्ति आदि अभिव्यक्ति के सभी स्तरों पर नए प्रयोग करने से प्रस्तुत संग्रह की कविताओं में हम असाधारण ताज़गी एवं जीवन्तता का अनुभव कर सकते हैं।
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मराठी के प्रसिद्ध कवि नारायण कुलकर्णी कवठेकर के काव्य-संग्रह ‘मागील पानावरून पुढे सुरू...’ का हिन्दी अनुवाद है—‘पिछले पृष्ठ से आगे...’।</p>
<p>संग्रह की कविताएँ देश की समकालीन परिस्थितियों पर नई शैली में प्रकाश डालती हैं। यह नई शैली हिन्दी पाठकों को निश्चय ही कवि की भावनाओं की उत्कट प्रतीति कराएगी। यह काव्य-संग्रह मनुष्य को असहाय, विवश एवं संत्रस्त बनानेवाली व्यवस्था के विरुद्ध एक प्रतिभावान कवि का कारगर हस्तक्षेप है।</p>
<p>न्यायिक प्रक्रिया का खोखलापन, सरकारी नीतियों की अशाश्वतता, सरकारी योजनाओं का ग़लत कार्यान्वयन, व्यवस्था द्वारा किए जानेवाले विकास के ग़लत दावे एवं फ़तवे, कलाकारों की बाधित स्वतंत्रता, प्रभावहीन नेताओं के नक़ली चेहरे, प्राकृतिक तत्त्वों की बेशुमार लूट, किसानों एवं आदिवासियों की छीछालेदर, उन पर बरसनेवाले आसमानी एवं सुल्तानी संकट, महिलाओं पर हो रहे निर्मम अत्याचार आदि कितने ही विषय हैं जिनको ज़मीनी यथार्थ के अधिकाधिक पहलुओं समेत प्रस्तुत कर कवि ने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया है।</p>
<p>कवि द्वारा समस्या की जड़ तक जाने, उसके अछूते पहलुओं को उभारने तथा उक्ति, सूक्ति, स्वभावोक्ति, वक्रोक्ति, व्यंग्योक्ति आदि अभिव्यक्ति के सभी स्तरों पर नए प्रयोग करने से प्रस्तुत संग्रह की कविताओं में हम असाधारण ताज़गी एवं जीवन्तता का अनुभव कर सकते हैं।
Book Details
-
ISBN9788183617840
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अभिव्यक्ति किसी भी कला को और उसकी ज़्यादातर आपूर्ति उसके स्वयं के परिवेश की परिकल्पना से होती है। जो भी व्यक्ति के साथ होता है, उन सभी अनुभवों को कमोबेश क्रम से प्रस्तुत करता है और वह साहित्य हो जाता है।
कई बार स्वयं को लगता है कि क्या यह सचमुच मैंने लिखा है? एक मोड़ पर आकर वह दैवीय शक्ति से अनुगृहीत हो जाता है। मैंने स्वयं लिखा है कि कविता किसी सुदूर तारागणों के पास से उन्हीं की धूल से अटी धरती तक पहुँचती है, फिर वह मुझमें बस जाती है, कविता मेरी हो जाती है—बस कविता हो जाती है।
मेरा योगदान सिर्फ़ इतना है कि मैंने ईमानदारी से उन क्षणों का, उन सम्बन्धों का चित्रण किया। वही लिखा जो सत्य था, जो पवित्र था और जो लेशमात्र भी कृत्रिम न था।
Deewan-E-Meer
- Author Name:
Ali Sardar Jafri
- Book Type:

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मीर तक़ी मीर भारतीय कविता के उन बड़े नामों में से हैं, जिन्होंने लोगों के दिलो-दिमाग़ में स्थान बनाया हुआ है। अपनी शायरी को दर्द और ग़म का मज़मूआ बताते हुए मीर ने यह भी कहा है कि मेरी शायरी ख़ास लोगों की पसन्द की ज़रूर है, लेकिन ‘मुझे गुफ़्तगू अवाम से है।’ और अवाम से उनकी यह गुफ़्तगू इश्क़ की हद तक है। इसलिए उनकी इश्क़िया शायरी भी उर्दू शायरी के परम्परागत चौखटे में नहीं अँट पाती। इन्सानों से प्यार करके ही वे ख़ुदा तक पहुँचने की बात करते हैं, जिससे इस राह में मुल्ला-पंडितों की भी कोई भूमिका नज़र नहीं आती। यही नहीं, मीर की अनेक ग़ज़लों में उनके समय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों तथा व्यक्ति और समाज की आपसी टकराहटों को भी साफ़ तौर पर रेखांकित किया जा सकता है, जो उन्हें आज और भी अधिक प्रासंगिक बनाती हैं।
दरअसल मीर की शायरी भारतीय कविता, ख़ास कर हिन्दी-उर्दू की साझी सांस्कृतिक विरासत का सबसे बड़ा सबूत है, जो उनकी रचनाओं के लोकोन्मुख कथ्य और आम-फहम गंगा-जमुनी भाषायी अन्दाज़ में अपनी पूरी कलात्मक ऊँचाई के साथ मौजूद है।
Uttararddha
- Author Name:
Ashok Kumar Mahapatra
- Book Type:

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जीवन, ज़मीन और प्रकृति के अद्भुत कवि हैं अशोक कुमार महापात्र। अनुभूति की ऐसी सघन यात्रा के कवि कि संवेदना अपनी रिक्तता में भी मुखर हो उठती है। संघर्ष और सपने अपनी सम्पूर्णता के लिए पूरी जिजीविषा के साथ अपनी क्रियात्मकता में घटित होते प्रतीत होते हैं। अपने काव्य-वितान के लिए एक ऐसे विज़न का कवि जिसके पास मनुष्य और उसकी पीड़ा को रचने के लिए हज़ारों रंग हैं।
'उत्तरार्द्ध' जितना काल भीतर, उतना ही काल बाहर देखने और रचने का काव्य-कर्म है। यथार्थ से टकराने में जिस तरह आस्था, उसी तरह स्मृतियाँ भी साथ, ताकि सम के केन्द्र में विषम के गाढ़ापन को गहरे जाना जा सके और मिथ्या मानने से इनकार किया जा सके। कवि भूख को जब भूख की आँखों से देखता है, तब अपने आन्तरिक ब्रह्मांड की गति का हिस्सा होता है, तभी तो 'माया-लोक' में ऋतुओं के 'छाया-लोक' को रच पाता है।
भौतिकता में अपनी दृष्टि का तब एक और गहरा परिचय देता है कवि, जब जन और तंत्र के बीच शतरंज के गणित को हल करते ताल को आत्मसात् करता है; और सम्बन्धों को जीवन की आँच के साथ सँजोता है। तेज़ी से बदलती हुई इस दुनिया में पीढ़ियों का द्वन्द्व मानो म्नात साक्ष्य, लेकिन यह कवि की कुशलता ही है कि इसे भी एक नए रूप में रच लेता है। रच लेता है जैसे-सृष्टि के सौन्दर्य के साथ प्रेम का बृहद् आख्यान।
अपने बीते-अनबीते को बार-बार देखने और देखे हुए को कला और उसकी गति में जीने का कविता-संग्रह है—'उत्तरार्द्ध'।
Uska To Koi Gaon Hoga Hi Nahi
- Author Name:
Manoj Kumar Sharma
- Book Type:

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‘‘मनोज कुमार शर्मा की कविताएँ आगामी कविता की ऐसी दस्तकें हैं जिनकी नादमयता में हम लोकभाषा की महीन किन्तु अविच्छिन्न उपस्थिति देख सकते हैं। शायद अच्छी कविता का लक्ष्य भी यही है। इनके पास जो भाषा है, वह आकस्मिक-सी नहीं है बल्कि वह धीरे-धीरे किसी उफनती हुई बाढ़ग्रस्त नदी की वास्तविकता की तरह है।’’
—गंगाप्रसाद विमल
‘‘प्रीत और सौन्दर्य की जो छवियाँ कवि श्री मनोज ने उकेरी हैं, वे हार्दिक हैं।’’
—ताराप्रकाश जोशी
‘‘अभिव्यक्ति का माध्यम शब्द, भाव और शिल्प है। मनोज कुमार शर्मा की कविताएँ अधिक लम्बी नहीं हैं। कहा जा सकता है कि छोटी-छोटी कविताओं में बहुत बड़ी बातों को सहज में कहने का ही नहीं अपितु ध्यान आकर्षित करने का सफल प्रयास है।’’
—मधुमती
(राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर)
Kaun Hai Aisa Poojari Dair Mein
- Author Name:
Maikash Akbarabadi
- Book Type:

- Description: हिंदी पाठकों के लिए मयकश अकबराबादी के फ़ारसी और उर्दू कलाम का इन्तिख़ाब पहली बार प्रकशित हो रहा है. किताब के संपादक सुमन मिश्र हैं.
Tuzya Othanvarchya Kavita
- Author Name:
Nayan Savita
- Book Type:

- Description: The most romantic poetry collection
Bakhtiyarpur
- Author Name:
Vinay Saurabh
- Book Type:

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Description:
कुछ चीज़ें होती हैं जो हम से छूट जाती हैं, कभी हमारे हाथ से फिसल जाती हैं, कभी उन्हें हमसे छीन लिया जाता है; कुछ चीज़ें होती हैं जो हमारे पास रह जाती हैं और छूटी हुई, जा चुकी चीज़ों, लोगों, जगहों की याद हमें दिलाती रहती हैं। कुछ सपने होते हैं हमारे, कुछ इच्छाएँ होती हैं, कुछ नहीं किए जा सके काम होते हैं, जो हमें अकसर बुलाते रहते हैं। प्रेम होता है, जिसके दोनों तरफ़ पीड़ा होती है—पा लेने की अपनी, न पाने की अपनी।
ऐसी ही चीज़ों से हम बनते हैं, हमारी दुनिया बनती है। विनय सौरभ का कवि जैसे इस दुनिया की हर खुली-अधखुली खिड़की में झाँकता-देखता फिरता रहता है। हर किसी के अनुभवों का उदास-सा विस्तार मालूम होतीं इस संग्रह की कविताएँ जीवन के अधूरेपन की तरफ़ इतने अनायास ढंग से इशारा करती हैं कि हम अपनी तथाकथित पूर्णताओं को लेकर सन्देह से भर उठते हैं।
स्मृतियों, विडम्बनाओं और मध्यवर्गीय जीवन की साँवली उदासियों में अपनी कविता को आकार देनेवाले विनय सौरभ के इस संग्रह में वे कविताएँ भी हैं जो राजनीति, सत्ता और बाजार की आक्रामकताओं की आलोचना करती हैं; और उनके जादू को समझने, उनके तिलिस्म को तोड़ने की कोशिश भी करती हैं।
कविता-प्रेमी पाठक को इस किताब में ऐसे अनेक स्थल मिलते हैं जहाँ वह ठहरकर अपने आप और अपनी दुनिया को दुबारा से देखना चाहता है।
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