JISE WE BACHA DEKHNA CHAHTE HAIN
(0)
Author:
Lakshman Prasad GuptaPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Poetry₹
235
192.7 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
collection of poems
Read moreAbout the Book
collection of poems
Book Details
-
ISBN9789385013140
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sirhane ke pal
- Author Name:
Sulabha Kore
- Book Type:

- Description: मराठी भाषी हिंदी कवयित्री सुलभा कोरे का ताज़ा काव्य-संग्रह 'सिरहाने के पल' प्रकृति और जीवन, जीवन और देश, देश और सरोकार के अंतरसंबंधों की सचेत टोह लेती कविताओं का विलक्षण संकलन है। सुलभा कोरे कविता इसलिए लिखती हैं ताकि 'धरती साँस ले सके', पेड़ सपने देख सकें और चिडिय़ा दाना चुग सके। सदियों से जिनके मुँह पर पाबंदियाँ लगी हुई हैं, उन पाबंदियों को चुनौती देती सुलभा की कविताएँ उन्हें बोलने का आह्वान करती हैं। आह्वान करती हैं ताकि वह अपना आसमां $खुद तोल सकें। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ इस्तकबाल करती हैं 'अंतिम छोर पर खड़ी औरतों' का, उनकी उड़ान का, उनकी जिम्मेदारियों का और 'गहरी खाई में उतरने' के उनके अदम्य साहस का। 'सिरहाने के पल' की कविताएँ सारे जलते-सुलगते सवालों से बहसतलब होती हैं। भूले-बिसरे यादों को ताज़ा करने का काव्य-आग्रह आपको कविता के पास ले जाएगा। 'अतीत के बवंडर में गुम हो गए पलों' की शिनाख्त करती सुलभा कोरे की कविता राजनीतिक छल-छद्म से भी दो-दो हाथ करती है। कविता अपने पाठकों से सावधान रहने की गुजारिश करती हुई याद दिलाती है कि इस देश में 'सब कुछ बेचा जाएगा', देशभक्ति भी बेची जाएगी और देशद्रोह भी, इमानदारी भी और बेईमानी भी। छोटी-छोटी किंतु निहायत ज़रूरी बातों, विचारों, घटनाओं और मुद्दों का काव्य रूपांतरण कविता को गरिमामयी बनाता है। —कमलानंद झा
Kaju Ki Roti
- Author Name:
Pankaj Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
पंकज चतुर्वेदी की कविता उन पाठकों के दिल के बहुत क़रीब रहती है, जो समझते हैं कि कविता का सबसे ज़रूरी काम भाषा में अर्थ के जनसंहार को विफल करना है। सभी तरह की आततायी सत्ताएँ इस जनसंहार की हिस्सेदार होती हैं। भाषा को जुमलेबाज़ी में घसीटकर लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदला जा सकता है। विनाश को विकास की तरह दिखाया जा सकता है। अन्याय को न्याय की आभा दी जा सकती है। जनसंहार को राष्ट्रीय गौरव के अभिसार में बदला जा सकता है। झूठ को सच बनाया जा सकता है। कविता इस प्रपंच को उजागर कर शब्दों के सच्चे अर्थों का पुनर्जन्म घटित करती है।
रघुवीर सहाय की कविता ने इस ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाया। उन्होंने देखा था कि शासक जब 'लोकतंत्र का अन्तिम क्षण है' कहकर हँसते हैं, तब वे लोकतंत्र के अर्थ का ही अन्त नहीं करते, हँसी को भी हत्या के उल्लास में बदल देते हैं। पंकज की कविता देख रही है कि नेता जब कहता है 'देश के लिए जी रहा हूँ', तब उसकी मुराद यह होती है कि उसके जीने में ही देश का जीना समझा जाए!
पंकज की कविता में दर्ज है कि आज असहमति को दबोचती हुई मुस्कान हिंसा के नहीं, मेहरबानी के रूप में प्रकट हो रही है। यह विफल लोकतंत्र का नहीं, फ़ासीवाद के उत्थान का लक्षण है।
रघुवीर सहाय से पंकज चतुर्वेदी तक हिन्दी कविता की यात्रा लोकतंत्र के अन्तिम क्षण से फ़ासीवाद के पहले क्षण तक की यात्रा है। खुली सड़क पर पूर्व-घोषित हत्या के कातर तमाशबीन अब सिर्फ़ तमाशा नहीं देखते, हत्यारों की जय-जयकार भी करते हैं।
भाषा के हर पाखंड को उजागर करने की ज़िद में पंकज की कविता, कविता जैसी न दिखने की हद तक कविता के आडम्बरों से परहेज़ करती है। दुस्साहस सरीखा यह साहस उनकी कविता को हमारे समय की सच्ची और पारदर्शी कविता होने की क़ुव्वत अदा करता है।
—आशुतोष कुमार
Coffee Cafe
- Author Name:
Rashmi Tarika
- Book Type:

- Description: This book has no description
Sirf tum
- Author Name:
Rashmi Gupta
- Book Type:

-
Description:
आज के दौर में कई रिश्ते बदल गए हैं। मानवीय रिश्ते ही नहीं, रोटी और भूख के रिश्ते भी—तन और वस्त्र के रिश्ते भी—इंसान और समाज के रिश्ते भी। इन रिश्तों में शून्यता का एहसास मानव जीवन के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है। इन्हीं शून्यता और सन्नाटे को ही तो कवि शब्द देता है तब काव्य के रूप में वह हमें उन पहलुओं से साक्षात्कार का मौक़ा देता जो हमारी दृष्टि ही नहीं कल्पना से भी ओझल होता है। रश्मि गुप्ता के यहाँ संवेदना का यही रंग हावी है जिसको उन्होंने सामाजिक यथार्थ की कसौटी पर ढाला है।
‘सिर्फ़ तुम’ की कवयित्री का यह पहला काव्य-संग्रह भी इस बात के साक्ष्य के लिए काफ़ी है कि नींद के आलम में अचेतन जिस तरह बिम्बों, इशारों और मवाद का तालमेल से सपने बुनता है रश्मि के यहाँ वही काम रचनात्मक क्रिया के दौरान चेतना अंजाम देती है।
Kavita Ka Amar Phal
- Author Name:
Leeladhar Jagudi
- Book Type:

- Description: लीलाधर जगूड़ी का मानना है कि कविता ने जैसे पहले अपने लिए गद्य को पद्य का रूप दिया उसी तरह आधुनिक समय में कविता को एक नए गद्य की ज़रूरत है जो पद्य की सरसता को एक नया रूप-विधान दे सके। 'कविता का अमर फल' जगूड़ी का आधुनिक लोकगाथाओं जैसा संग्रह है। समय और स्मृति एक-दूसरे के अविभाज्य रूप बन जाते हैं। लगता है कि स्मृति ही समय है। वही घटनाओं के अंश सँभाले हुए है। ऋतुओं और वनस्पतियों का फिर से आ जाना पृथ्वी और ब्रह्मांड की स्मृति का वार्षिक पुनर्जन्म है। कभी-कभी इनकी कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि नए जितनी पुरानी कोई दूसरी चीज़ नहीं होती। कोई भी आविष्कार अपने स्थापित स्वरूप में परिष्कार का ही काम करता है। इनकी कविता पढ़ते हुए भाषा के अनेक रूपाकार उभारने की रचनात्मक शक्ति पाठक को प्राप्त होती है। भर्तृहरि इन कविताओं की प्रेरणा के मूल में हैं। उस महान कवि ने कविता को कैसे सम्भव किया। बहुत प्रकार के बादल रहते हैं आसमान में, कुछ तो सृष्टि को भिगो देते हैं और कुछ बेकार ही गरजकर चले जाते हैं। इसी तरह काव्यानुभव भी सब एक तरह के नहीं होते। कुछ तो अपना शिल्प और गल्प भी लेकर आते हैं। जगूड़ी की कविताओं को ज़िन्दगी रक्त की भाषा में हवा, पानी और आग के मिट्टी में डाले जानेवाले बीज की तरह समेटे रहती है। वह सपनों के कर्म को शब्दों के मर्म में ढाल देती है। इन कविताओं के हर शब्द में अनुभव का रक्त बजता है जो स्याही से लिखे शब्दों में अपने अर्थ की अरुणाई फैला देते है
Bagh-E-Bedil
- Author Name:
Krishna Kalpit
- Book Type:

- Description: Poems
Lamhe Zindagi Ke
- Author Name:
Prahlad Narayan Mathur
- Book Type:

- Description: 'लम्हे जिंदगी के' कविता पुस्तक, सामाजिक विषयों पर स्वयं लेखक की कविताओं का संकलन है। 'पिता क्या होता है' इसका अहसास पिता बनने के बाद ही होता है, यह इस कविता के माध्यम से बेहतरीन तरीके से बतलाया है। इस कविता के अलावा पिता पर बहुत-सी भावनात्मक कविताओं का समावेश है जैसे 'पिता', 'पिता का प्यार', 'पिता की डांट' एवं 'सूरज से पिता' इत्यादि। माँ पर भी दिल को छू लेने वाली बहुत-सी कविताएँ हैं। 'माँ को कभी सोते देखा नहीं' कविता में एक बच्चे का माँ के प्रति अथाह प्रेम को मर्मस्पर्शी तरीके से दर्शाया है। कोरोना ने समाज के हर तबके को बहुत गम दिये हैं। बहुत लोगों ने अपनों को खोया है। कविताओं के माध्यम से कोरोना के प्रति अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। एक छोटे बच्चें की भावना को जो करोना के कारण लंबे समय से स्कूल नहीं जा पा रहा है, बहुत सुंदर तरीके से पेश किया है। दोस्तों पर लिखी कविताएँ भी बेमिसाल है। उपरोक्त पुस्तक में प्रत्येक कविता दिल को छू जाने वाली तथा आम आदमी के जीवन का प्रतिबिम्ब है। यह हर उम्र के व्यक्तियों के पढ़ने योग्य है।
Chidambara
- Author Name:
Sumitranandan Pant
- Book Type:

-
Description:
‘चिदंबरा’ मेरी काव्यचेतना के द्वितीय उत्थान की परिचायिका है। उसमें ‘युगवाणी’ से लेकर ‘अतिमा’ तक की रचनाओं का संचयन है—सन् ’37 से ’57 तक प्राय: बीस वर्षों की विकास-श्रेणी का विस्तार।
‘चिदंबरा’ की पृथु-आकृति में मेरी भौतिक, सामाजिक, मानसिक, आध्यात्मिक संचरणों से प्रेरित कृतियों को एक स्थान पर एकत्रित देखकर पाठकों को उनके भीतर व्याप्त एकता के सूत्रों को समझने में अधिक सहायता मिल सकेगी। इनमें मैंने अपनी सीमाओं के भीतर, अपने युग के बहिरन्तर के जीवन तथा चैतन्य को, नवीन मानवता की कल्पना से मंडित कर, वाणी देने का प्रयत्न किया है। मेरी दृष्टि में ‘युगवाणी’ से लेकर ‘वाणी’ तक मेरी काव्य-चेतना का एक ही संचरण है, जिसके भीतर भौतिक और आध्यात्मिक चरणों की सार्थकता, द्विपद मानव की प्रकृति के लिए, सदैव ही अनिवार्य रूप से रहेगी।
‘‘पाठक देखेंगे कि (इन रचनाओं में) मैंने भौतिक-आध्यात्मिक, दोनों दर्शनों से जीवनोपयोगी तत्त्वों को लेकर, जड़-चेतना सम्बन्धी एकांगी दृष्टिकोण का परित्याग कर, व्यापक सक्रिय सामंजस्य के धरातल पर, नवीन लोक-जीवन के रूप में, भरे-पूरे मनुष्यत्व अथवा मानवता का निर्माण करने का प्रयत्न किया है, जो इस युग की सर्वोपरि आवश्यकता है?’’
—भूमिका से
Shabdon ka Desh
- Author Name:
Rakesh Mishra
- Book Type:

-
Description:
यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि सुप्रतिष्ठित कवि राकेश मिश्र का चतुर्थ काव्य-संग्रह शब्दों का देश प्रकाशित हो रहा है। इस संकलन में दो सौ के आस-पास कविताएं संकलित हैं, जो मिश्र जी के विकसित भाव-बोध और विश्व-बोध का सतर्क परिचय देती हैं।
यहां कवि जिस तटस्थता से शब्दों एवं संवेदनाओं के संश्लेषण द्वारा जिंदगी और कविता को परस्पर अनुस्यूत करता है, उससे जीवन और जगत का वैविध्यपूर्ण-अनावृत यथार्थ पूरी मर्मस्पर्शिता तथा गहनता के साथ प्रस्तुत हुआ है। मिश्र जी अपने सुख-दुख, उदात्त प्रेम, जीवन-बोध, विश्व-बोध, उर्वर सहानुभूति, समय-समाज के बदलते संदर्भों, प्रकृति-पर्यावरण के प्रति चिंता और मानवीय सरोकारों को जिस मौलिकता और सहजता से चित्रित करते हैं, उससे इस संकलन की कविताएं एक विशिष्ट संवेदनात्मक गहराई और बौद्धिक उत्कर्ष प्राप्त करती हैं।
इस संकलन का केन्द्रीय भाव-बोध और मूल प्रतिपाद्य यह है कि प्रकृति-पर्यावरण की तरह ही भौतिक-जीवन, वैयक्तिक अनुभव-स्मृतियाँ और वस्तु जगत मनुष्य की नियति को कैसे संचालित करता है तथा कैसे उसे घेरे रहता है, इसे आविष्कृत करने का दुष्कर और चुनौतीपूर्ण कार्य इस संग्रह की कविताओं द्वारा सम्पन्न हुआ है। इसमें प्रेम, सौंदर्य, आसपास के जीवनानुभव, गांव-शहर से लेकर वैश्विक घटनाओं तक का गत्यात्मक चित्रण हुआ है। शब्दों का देश अमानवीय स्थितियों के बीच मनुष्य को बेहतर मनुष्य बनाने के प्रयास की अभिव्यक्ति है, जिसमें कवि की दुर्निवार आस्था, संघर्ष चेतना की सही पहचान और अनुभव जगत का वैविध्यपूर्ण समारोह उपस्थित हुआ है। इसमें कवि की लघु, सामान्य और लंबी कविताओं का मनोरम विन्यास, भावों की उत्कटता, चित्रण की सूक्ष्मता एवं जीवनानुभूति की गहनता के साथ एक विशिष्ट औदात्य और वैभव से सम्पन्न हैं जो एक बड़ी संभावना की ओर बढ़ रहे कवि का निदर्शन कराती हैं। इस दृष्टि से संग्रह की सारी कविताएँ बेहद पठनीय, चिंतनीय और पाठक को संवेदन एवं बौद्धिक धरातल पर समृद्ध करने वाली हैं।
—डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय
Maithilisharan Gupta Ki Baal Kavitaen
- Author Name:
Maithilisharan Gupta
- Book Type:

- Description: आप सरकस के बारे में कोई कविता पढ़ना चाहते हैं? और भगवान बुद्ध के बारे में? और अपने देश के किसानों के बारे में भी? ये सब कविताएं इस किताब में मिल जाएंगी। और ये कविताएं हैं जो सबको पसंद हैं। आपको भी पसंद आएंगी। कुछ कविताएं आपको अपने देश, समाज और राष्ट्रध्वज के बारे में बताएंगी तो कुछ को पढ़कर आनंद आएगा।
Bahati Ho Tum Nadi Nirantar
- Author Name:
Shyam Sunder Tiwari
- Book Type:

- Description: This book has no description
Udasi Baal Khole So Rahi Hai
- Author Name:
Nasir Kazmi
- Book Type:

- Description: 'उदासी बाल खोले सो रही है' उर्दू के मश्हूर-ओ-मारूफ़ शाइर जनाब नासिर काज़मी के चुनिन्दा कलाम का संग्रह है जिसे उर्दू शाइरी के चाहनेवालों के लिए देवनागरी लिपि में पेश किया जा रहा है।
Araj-Nihora
- Author Name:
Prakash Uday
- Book Type:

- Description: अगर आप भोजपुरी की मौजूदा सांस्कृतिक मुख्यधारा के साथ आलोचनात्मक सम्बन्ध विकसित करते हुए भोजपुरी जातीयता की पुनर्खोज करना चाहते हैं, अगर आप जीवन-संघर्षों के रस में सनी-पगी भोजपुरी की दूसरी परम्परा से अपने को जोड़ते हैं, अगर आप दया और घृणा के ध्रुवों के बीच विकसित होते इस इलाक़े के जीवन से कोई साबक़ा रखते हैं, तब यह संग्रह आपके ही लिए है।
Akbar Allahabadi
- Author Name:
Akbar Allahabadi
- Book Type:

- Description: मज़हबी बहस मैं ने की ही नहीं फ़ालतू अक़्ल मुझ में थी ही नहीं दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता पैदा हुआ वकील तो इबलीस ने कहा लो आज हम भी साहिब-ए-औलाद हो गए लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं वह क़त्ल से बच्चों के यूँ बदनाम न होता अफ़सोस कि फ़िरऔन को कॉलेज की न सूझी
Neela Phool
- Author Name:
Alokeshwar Chabdal
- Book Type:

- Description: सच्ची है या है यह कच्ची, कैसी अपनी प्रीत लिखो, उसने आज कहा है मुझसे, मुझ पर कोई गीत लिखो। ‘नीला फूल’ गीतों का ऐसा संग्रह है जिसमें पारिवारिक सम्बन्धों से लेकर देश, ईश्वर-भक्ति, तीज-त्योहार और मनुष्य की भिन्न-भिन्न मनस्थितियों को लेकर लिखे गए भावप्रवण गीत संकलित हैं। गीतों को कविता का वह रूप समझा जाता है जो मन की सबसे कोमल भावनाओं को ऐसी शैली में व्यक्त करता है जिससे हमारी अभिव्यक्ति एक तरल और याद रह जानेवाले रूप में हमेशा के लिए हमारे पास रह जाती है। वे हमें याद रहते हैं और ऐसे अवसरों पर हमारा साथ देते हैं जब हम किसी निर्वचनीय भावना को व्यक्त करना चाहते हैं। इस पुस्तक में शामिल गीतों में सरल और प्रवहमान शब्दावली में अत्यन्त अर्थपूर्ण ढंग से ऐसे विषयों को भी गीत में ढाल दिया गया है जो सामान्यतः गीतों में स्थान नहीं पाते, ‘अदरक वाली चाय’ शीर्षक गीत की ये पंक्तियाँ दृष्टव्य हैं— धीमी-धीमी लौ में हमने, मन की बात उबाली जनम-मरण की सौगन्धों की, ताजी तुलसी डाली दोनों मिलकर लिख दें आओ, एक नया अध्याय देखो तुमको बुला रही है, अदरक वाली चाय कवि के अनुसार, ‘राम मेरे गीतों की प्रेरणा भी हैं, विषय भी और मेरे गीतों के अर्थ भी।’ इसलिए राम, उर्मिला, तुलसी, कृष्ण आदि को सम्बोधित-समर्पित गीत यहाँ हैं तो होली, दीवाली और ईद का उत्सव मनाने वाले गीत भी हैं। जब तक आँसू हिचकी सिसकी, दुख नैराश्य निराशा है जब तक मुस्कानें रूठी हैं, जब तक जग दुर्वासा है मैं घावों पर गीत लगाने, की सौगन्ध उठाता हूँ! गीत प्रेम के गाता हूँ मैं, गीत प्रेम के गाता हूँ!!
Chhatha Beta
- Author Name:
Upendra Nath Ashk
- Book Type:

- Description: उपेन्द्रनाथ अश्क के नाटकों में ‘छठा बेटा’ का विशेष स्थान है। नाटक मुख्य रूप से देखने की वस्तु है। नाटककार के सामने जितनी चुनौती दृश्य को साकार करने की होती है उतनी ही चुनौती पाठ को प्रभावी बनाने की भी होती है, ताकि उसका नाटक अभिनेय और पठनीय, दोनों हो। पठनीयता को नाटक की श्रेष्ठता का अनिवार्य गुण भले न माना जाए लेकिन उसके अभाव में वह एक साहित्यिक कृति के रूप में पूर्णता प्राप्त करने से वंचित रह जाता है। ‘छठा बेटा’ इन दोनों कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरता है। इसमें नाटकीय रचना की तीनों आवश्यक इकाइयों—समय, स्थान और अभिनय का सुसंगत संयोजन है। इसका नाटकीय कौशल यानी स्टेज क्राफ्ट देखें तो आरम्भ, गति, संघर्ष, क्लाइमेक्स आदि नाटकीय कार्य-व्यापार की सभी अवस्थाओं का इसमें अनूठा सन्तुलन है। और इस नाटक का पाठ, मंचन-अभिनय के लिए निर्देश-संवाद मात्र तक सीमित नहीं न रहकर एक मुकम्मल पाठ है जिसको सिर्फ पढ़ कर भी कोई पाठक इसके मर्म तक पहुँच सकता है। हास्य-व्यंग्य की एक धारा शुरू से अन्त तक इस नाटक में प्रवाहित होती रहती है जो इसकी पठनीयता को और प्रभावी बना देती है। लेकिन हास्य-व्यंग्य के इस प्रवाह से नाटक की गम्भीरता कहीं बाधित नहीं होती। मनुष्य की सुख-शान्ति की स्वाभाविक आकांक्षा उस समय दारुण हो उठती है जब वह इसके लिए दूसरों से अपेक्षा करता है। हमारे सामाजिक जीवन की इस सचाई को अश्क इस नाटक में बखूबी उजागर करते हैं लेकिन निराशा की ओर धकेलते हुए नहीं, बल्कि जीवन की इस विडम्बना पर हँसने का हौसला देते हुए।
Jadoon Ki Aakhiri Pakar Tak
- Author Name:
Ravindra Bharti
- Book Type:

-
Description:
रवीन्द्र भारती का कवि गाँव का कवि है। ठेठ देहाती। देहात के जीवन, उसके वृक्ष, वहाँ के चरवाहे, कुएँ, नदी का किनारा, किनारे पर जलती चिता से उठता धुआँ, लू से भरी पछेया हवा, सूखे हुए गाछ के पत्ते, जलती हवा में टनटनाते पत्ते, यानी पूरा देहाती वातावरण—इन कविताओं में साँस लेता और धड़कता प्रतीत होता है।
रवीन्द्र की ये कविताएँ औसत भारतीय जनमानस के उन उपेक्षित धूल-धूसरित खंडित व्यक्तित्व-बिम्बों को बिना किसी कालगत कलात्मक व पारिभाषिक जॉगर्नस में पहचान करवाने की ईमानदार कोशिश है। रवीन्द्र ने अपनी विषय-वस्तु के साथ एक अत्यन्त आत्मीय सम्बद्धता का अहसास कराते हुए भी पूरी सतर्कता के साथ उन अभिव्यक्ति-रूढ़ियों से बचने की कोशिश की है, जिनकी उपस्थिति का मुख्य प्रभाव आज कविता द्वारा उपस्थित मनुष्य की आदिम और ऐतिहासिक भावनाओं, आकांक्षाओं और हर्ष-विवाद को एक विशिष्ट कलात्मक मुद्रा में परिणत कर उनके वस्तुनिष्ठ द्वन्द्व की तपिश को कुन्द कर देता है।
रवीन्द्र भारती ग्रामीण जीवन की प्रशंसा नहीं करते, उसका उपहास भी नहीं करते, सहानुभूति भी नहीं दिखाते, बल्कि उसे अपनी संवेदना का अंग बनाते हैं। यानी, ये कविताएँ निजता, संलग्नता की सहज उपज हैं। कवि अपनी अभिव्यक्ति के प्रति ईमानदार है और उसके माध्यम से वह भाषा को नई ऊर्जा प्रदान करता है; कवि की हृदयस्पर्शी और अन्तरंग कविताओं में ‘गुल्लू’, ‘माँ का क़िस्सा’, ‘स्मृति-1’, ‘स्मृति-2’, ‘सूर्य की ज्योति’, ‘पेड़’, ‘रात का क़िस्सा’, पिछली बार जैसी एक से एक कविता जड़ों की आख़िरी पकड़ तक में संगृहीत हैं।
ये कविताएँ बार-बार पढ़ने के लिए विवश करती हैं। संक्षेप में कहना हो, तो कहेंगे कि रवीन्द्र भारती के कविता-संसार से गुज़रना अभूतपूर्व अनुभव से गुज़रना है।
Dhoop Aur Dhuan
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
‘धूप और धुआँ' आज़ादी के बाद लिखी गई राष्ट्रीय कविताओं का एक महत्त्वपूर्ण संग्रह है। इसमें संगृहीत कविताएँ समकालीन अवस्थाओं के विरुद्ध भावात्मक प्रतिक्रिया के रूप में प्रकट हुई हैं। स्वराज्य से फूटनेवाली आशा की धूप और उसके विरुद्ध जन्मे असन्तोष का धुआँ, ये दोनों ही इन रचनाओं में यथास्थान प्रतिबिम्बित हैं। अतएव, जिनकी आँखें धूप और धुआँ, दोनों को एक ख़ास परिप्रेक्ष्य में देख सकती हैं, उनके लिए यह नाम निरर्थक नहीं लगेगा।
इस संग्रह में कविताएँ रचना के कालक्रम के अनुसार नहीं रखी गई हैं। इसके बारे में दिनकर जी का ख़ुद कहना है कि, '...मैंने कई ऐसी कविताओं को आरम्भ में ही रख दिया है, जिनकी रचना हाल में हुई है। यह इसलिए कि मैं देखता हूँ कि इधर मेरे लिखने की तर्ज मेरी वर्तमान मनोदशा के मुआफिक भी आ रही है। यह प्रयोग है या प्रगति, मैं नहीं बता सकता। निश्चयपूर्वक इतना ही कह सकता हूँ कि आजकल इसी लहजे में बोलने में कुछ सन्तोष का अनुभव करता हूँ।'
'धूप और धुआँ' दिनकर जी की कविताओं का एक अनूठा संग्रह है। इनमें जहाँ नवीनता है, ताजगी है, विचारों में उत्तेजना है, वहीं मन में स्फुरण जगाने की शक्ति भी है।
Pratinidhi Kavitayen : Shrikant Verma
- Author Name:
Shrikant Verma
- Book Type:

-
Description:
श्रीकान्त वर्मा का कविता-संसार उनके पाँच कविता-संग्रहों—‘भटका मेघ’ (1957), ‘दिनारम्भ’ (1967), ‘माया दर्पण’ (1967), ‘जलसाघर’ (1973) और ‘मगध’ (1984) में फैला हुआ है। यहाँ इन्हीं से इन कविताओं का चयन किया गया है। इन कविताओं से गुजरते हुए लगेगा कि कवि में आद्यन्त अपने परिवेश और उसे झेलते मनुष्य के प्रति गहरा लगाव है। उसके आत्मगौरव और भविष्य को लेकर वह लगातार चिन्तित है। उसमें यदि परम्परा का स्वीकार है तो उसे तोड़ने और बदलने की बेचैनी भी कम नहीं है। शुरू में उसकी कविताएँ अपनी ज़मीन और ग्राम्य जीवन की जिस गन्ध को अभिव्यक्त करती हैं, ‘जलसाघर’ तक आते-आते महानगरीय बोध का प्रक्षेपण करने लगती हैं या कहना चाहिए, शहरीकृत अमानवीयता के ख़िलाफ़ एक संवेदनात्मक बयान में बदल जाती हैं। इतना ही नहीं, उनके दायरे में शोषित-उत्पीड़ित और बर्बरता के आतंक में जीती पूरी-की-पूरी दुनिया सिमट आती है।
कहने की ज़रूरत नहीं कि श्रीकान्त वर्मा की कविताओं से अभिव्यक्त होता हुआ यथार्थ हमें अनेक स्तरों पर प्रभावित करता है और उनके अन्तिम कविता-संग्रह ‘मगध’ तक पहुँचकर वर्तमान शासकवर्ग के त्रास और उसके तमाच्छन्न भविष्य को भी रेखांकित कर जाता है।
Tulsidas "Nirala"
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
“तुलसीदास में स्वाधीनता की भावना का पूर्ण प्रस्फुटन हुआ है। भारत के सांस्कृतिक सूर्य के अस्त होने पर देश में किस तरह अन्धकार छाया हुआ है, इसका मार्मिक चित्रण करते हुए निराला ने दिखलाया है कि किस प्रकार एक कवि इस अन्धकार को दूर करने की चेष्टा करता है। तुलसीदास के रूप में निराला ने आधुनिक कवि के स्वाधीनता-सम्बन्धी भावों के उद्गम और विकास का चित्रण किया है। छायावादी कवि की तरह निराला के तुलसीदास को भी देश की पराधीनता का बोध प्रकृति की पाठशाला में ही होता है; किन्तु छायावादी कवि की तरह वे भी कुछ दिनों के लिए नारी-मोह में पड़कर उस भाव को भूल जाते हैं। अन्त में जो ज्ञान प्रकृति की पाठशाला में मिला था, उसका दीक्षांत भाषण उसी नारी के विश्वविद्यालय में सुनने को मिलता है, और भविष्यवाणी होती है कि :
देश-काल के शर से बिंधकर
यह जागा कवि अशेष छविधर
इसके स्वर से भारती मुखर होंगी।
इस तरह हिन्दी जाति के सबसे बड़े जातीय कवि की जीवन-कथा के द्वारा निराला ने अपनी समसामयिक परिस्थितियों में रास्ता निकालने का संकेत दिया है।”
—नामवर सिंह
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book