🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Koltar ke Pair

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

कविता सिर्फ बिंबों में नहीं रहती और न ही उस अर्थ में जो अंत में बस एक बात बोलता नज़र आता है। असली कविता तो वही है जो शब्दों के सार्थक समूह की यात्रा में अपने शीतल जल, तरल रंग या गर्म कोलतार की तरह बहती है। यह बहना दरअसल, उन शब्दों के बीच उसका सदा के लिए इस तरह रहना है कि पढ़ती हुई आँखों का स्पर्श उसे जगा दे। पल्लवी शर्मा संग्रह की पहली ही कविता में इस अंतर्धारा की उपस्थिति और इसकी अमोघ प्रभविष्णुता को न्योतती चेतावनी की तरह परोसती हैं, और जब आप आगे बढ़ते हैं तो वह संसार पीछे छूट जाता है जहाँ सामयिक यथार्थ और उसके अखबारी बोल बसते हैं। 'कोलतार के पैर' की कविताएँ आपको क्लोज़ अप के अनोखे चित्रकार जार्जिया ओ कीफ के द्वारा चित्रित कंकाल से सरककर निकलती जीवित जीभ जैसी अनुभूति से आपके आधे-अधूरे मन को मिलवाती हैं। इस संग्रह की कविताओं में यथार्थ तो है मगर उसे खर्चीले विवरणों की जगह उस स्पर्श के रूप में चित्रित किया गया है जो संवेदना को लगभग वह सब बता देता है जो विवरण बताते। लेकिन ऐसा भी नहीं कि पल्लवी में दृश्य नहीं। यहाँ दृश्य भी हैं मगर चित्रों की तरह कभी रूपांतरित तो कभी संघनित और कभी अमूर्त। कवि की चेतना का हाल यह कि 'जैसे एक चित्र खींचा हो किसी ने/और मैं उसका हिस्सा हूँ!' इस संग्रह की कविताएँ आपको रंगों और रेखाओं की दुनिया में ले जाती हैं। तरह-तरह की बातें करते तरह-तरह के रंग! चटख से लेकर मोनोक्रोम और कोलतार और कालिख तक। यह अकारण नहीं कि संग्रह में बिंदियों से चित्र बनाने की अनोखी शैली के लिए प्रसिद्ध यायोई कुसामा की मानसिक रुग्णता को उसी की बिंदियों से चित्रित किया गया है। —विनय कुमार

Read more

₹ 395

323.9 18% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Koltar ke Pair This book ₹324
Unbosoming Samridhi Prakash ₹120
Solitude's Embrace Anna Belmonte ₹120
3 books selected ₹635 ₹564

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

कविता सिर्फ बिंबों में नहीं रहती और न ही उस अर्थ में जो अंत में बस एक बात बोलता नज़र आता है। असली कविता तो वही है जो शब्दों के सार्थक समूह की यात्रा में अपने शीतल जल, तरल रंग या गर्म कोलतार की तरह बहती है। यह बहना दरअसल, उन शब्दों के बीच उसका सदा के लिए इस तरह रहना है कि पढ़ती हुई आँखों का स्पर्श उसे जगा दे। पल्लवी शर्मा संग्रह की पहली ही कविता में इस अंतर्धारा की उपस्थिति और इसकी अमोघ प्रभविष्णुता को न्योतती चेतावनी की तरह परोसती हैं, और जब आप आगे बढ़ते हैं तो वह संसार पीछे छूट जाता है जहाँ सामयिक यथार्थ और उसके अखबारी बोल बसते हैं। 'कोलतार के पैर' की कविताएँ आपको क्लोज़ अप के अनोखे चित्रकार जार्जिया ओ कीफ के द्वारा चित्रित कंकाल से सरककर निकलती जीवित जीभ जैसी अनुभूति से आपके आधे-अधूरे मन को मिलवाती हैं। इस संग्रह की कविताओं में यथार्थ तो है मगर उसे खर्चीले विवरणों की जगह उस स्पर्श के रूप में चित्रित किया गया है जो संवेदना को लगभग वह सब बता देता है जो विवरण बताते। लेकिन ऐसा भी नहीं कि पल्लवी में दृश्य नहीं। यहाँ दृश्य भी हैं मगर चित्रों की तरह कभी रूपांतरित तो कभी संघनित और कभी अमूर्त। कवि की चेतना का हाल यह कि 'जैसे एक चित्र खींचा हो किसी ने/और मैं उसका हिस्सा हूँ!' इस संग्रह की कविताएँ आपको रंगों और रेखाओं की दुनिया में ले जाती हैं। तरह-तरह की बातें करते तरह-तरह के रंग! चटख से लेकर मोनोक्रोम और कोलतार और कालिख तक। यह अकारण नहीं कि संग्रह में बिंदियों से चित्र बनाने की अनोखी शैली के लिए प्रसिद्ध यायोई कुसामा की मानसिक रुग्णता को उसी की बिंदियों से चित्रित किया गया है। —विनय कुमार

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline or cash on delivery
100% OriginalGenuine copy from Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Format
Hardbound
Publisher
Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Publication year
2022
Weight
200 grams
ISBN-13
9789391925116
Pages
128
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
19 × 21 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp