Khat E Abyaz
Author:
Shifa KajganwiPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
UrduCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
Book
ISBN: 9789381520253
Pages: 120
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Chuni Hui Kavitayen
- Author Name:
Atal Bihari Vajpayee
- Book Type:

- Description: This book has no description
Kaun Hai Aisa Poojari Dair Mein
- Author Name:
Maikash Akbarabadi
- Book Type:

- Description: हिंदी पाठकों के लिए मयकश अकबराबादी के फ़ारसी और उर्दू कलाम का इन्तिख़ाब पहली बार प्रकशित हो रहा है. किताब के संपादक सुमन मिश्र हैं.
Raidas Bani
- Author Name:
Shukdev Singh
- Book Type:

-
Description:
‘रैदास-बानी’ का सम्पादन मध्यकालीन साहित्य की ग्रन्थ-विधा की सारी जटिलताओं को समेटते हुए पहली बार किया गया है। यह ग्रन्थावली नहीं ग्रन्थ है। निर्गुण साहित्य को ग्रन्थ करने के लिए ग्रन्थ जैसे—साखी, सबद, रमैनी सबदी, अंगु, उनसठ से चौरासी तक जैसे गुरुदेव को अंग; राग जैसे सोरठ, आसावरी प्राय सोलह, महला, घरु, बीजक, बानी, गुरु ग्रन्थ सर्वंगी, गुणगंजनामा, पद-संग्रह की विधाओं को समझते हुए जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, आमेर, उदयपुर, नागरी प्रचारिणी सभा, साहित्य सम्मेलन, इंडिया ऑफ़िस लाइब्रेरी, तमाम जगह के हस्तलेखों और उनके फ़ोटो-चित्रों की सहायता ली गई है। इस क्रम में प्रो. डेविड लोरंजन, पीटर फ़्राइलैंडर, जोजेफ़ सोलर से सहयोग लिया गया है। सबसे सहमति/असहमति लेकिन निष्कर्ष केवल अपने।
रैदास, दादू ग्रन्थों, सर्वंगी पोथियों, बानी, पंचबानी संग्रहों गुरुग्रन्थ यहाँ तक कि सूर पद संग्रह में सात पदों के साथ उपस्थित हैं। कबीर के बराबर। इस सामग्री के साथ रैदासी डेरों में भी उनसे जुड़े पद मिल जाते हैं। पदों की संख्या में हेर-फेर, पंक्तियों को बढ़ाना-घटाना-हटाना लेकिन यह अज्ञान और आलस्य के कारण नहीं, सिद्धान्त और सम्प्रदाय के हठ और मठ के कारण है। इसे समझने के लिए भी एक परम्परा है जो भक्तमालों, जनमसाख, परिचयी गोष्ठी, तिलक, बोध, सागर, नामक सैकड़ों पोथियों में प्राप्त है। इस पुस्तक में इस पूरी परम्परा का समझ-बूझ कर प्रयोग किया गया है।
साखी, सबदी, हरिजस, आरती जैसे रूपों के पीछे दर्शन क्या है? किसी राग में किसी पद के होने का मतलब क्या है? इस विज्ञान को समझे बिना यह सम्पादन सम्भव नहीं था। भक्तमालों और नागरी दासों के पद-प्रसंगों में यह सामग्री मिलती है। इन सबकी छान करते हुए इस पुस्तक की बीन तय की गई है।
Kala Aur Boodha Chand
- Author Name:
Sumitranandan Pant
- Book Type:

-
Description:
‘कला और बूढ़ा चाँद’ सुविख्यात कवि सुमित्रानंदन पंत की ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ प्राप्त काव्यकृति है। इसमें उनकी सन् 1958 में लिखी गई कविताएँ हैं। शैली और विषयवस्तु दोनों ही दृष्टियों में कवि की परवर्ती रचनाओं में इनका विशिष्ट स्थान है। अरविन्द-दर्शन और भारतीय मनोविज्ञान के जो प्रभाव उनकी रचनाओं में कुछ समय से दृष्टिगोचर हो रहे थे, उनका पूर्ण परिपाक प्रस्तुत संग्रह में हुआ है। कवि ने उन तमाम प्रभावों को आत्मसात् कर जिस अतीन्द्रिय भावमंडल का आख्यान यहाँ किया है, वह सर्वथा उसका अपना है, आत्मानुभूत है। चेतन-अवचेतन के स्तरों का भेदन करते हुए अतिचेतन का अवलोकन इन कविताओं की विषयवस्तु है, जिसे कवि ने दार्शनिक और तात्त्विक प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयत्न किया है।
मुक्त छंद का प्रयोग पंत जी बहुत प्रारम्भ से ही करते रहे हैं, किन्तु छंद-भंग की वास्तविक स्थिति ‘वाणी’ से प्रारम्भ हुई और उसका पूर्ण विकास ‘कला और बूढ़ा चाँद’ में हुआ है। इन कविताओं में कवि ‘छंदों की पायलें उतार’ देता है, शब्दों को तोड़कर उनमें नई अर्थवत्ता का संचार करता है और इस प्रकार अपनी अभिव्यक्ति के उपकरणों को उसने इतना समर्थ बना लिया है कि उनके द्वारा ‘अविगत गति’ का प्रकाशन किया जा सके।
वस्तुतः पंत जी के चेतनाशील काव्य के अध्येताओं के लिए यह एक अपरिहार्य कृति है।
Main Bhi To Hoon
- Author Name:
Nusrat Mehdi
- Book Type:

- Description: Book
Tarkash
- Author Name:
Javed Akhtar
- Book Type:

-
Description:
तरकश
ऊँची इमारतों से मकान मेरा घिर गया
कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए
जावेद एक अच्छे बोलनेवाले, एक अच्छे सोचनेवाले, काव्य-समर्थ उत्तर-आधुनिक कवि हैं। ताज़गी, गहराई और विविधता, भावनाओं की ईमानदारी और ज़िन्दगी में नए भावों की तलाश उनकी शायरी की विशेषताएँ हैं।
नाज़ुक-ख़याली और फ़सीहुल-बयानी उनको विरासत में मिली है। वह कभी-कभी पारम्परिक शे’र कह लें मगर बुरी शायरी नहीं कर सकते।
तरकश ग़मे-जानाँ और ग़मे-दौराँ के तीरों से भरा है। बचपन की मीठी या कड़वी यादें हर अदीब या शायर के लिए स्थायी साबित हुई हैं। जावेद अख़्तर की चन्द ऐसी नज़्में जो उनकी ज़ख़मी भावनाओं और अनुभूतियों का दर्पण हैं, पारदर्शी आत्मकथा के तौर पर पढ़ी जा सकती हैं।
जावेद ने अचेत रूप में उर्दू कल्चर के ज़रिए इस सूफ़ी तहज़ीब की ख़ास विशेषताओं यानी धर्मनिरपेक्ष और मानवप्रेमी मूल्यों को भी क़ुबूल किया है। उनका वैल्यू सिस्टम सही है और वह बुनियादी तौर पर प्रगतिशील हैं।
–कुर्रतुल ऐन हैदर
Ajnabi Shahar
- Author Name:
Zubairul-Hasan Ghafil
- Book Type:

- Description: Ghazals
Pakistani Urdu Shayari Vol. 2
- Author Name:
Narendra Nath
- Book Type:

-
Description:
‘नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया/इतने हुए ज़लील कि ख़ुद्दार हो गए।’ कर्रार नूरी का यह शे’र इस संकलन में शामिल उनकी ग़ज़ल से है। लेकिन हिन्दी पाठकों में अनेक ऐसे होंगे जिन्होंने उनका नाम नहीं सुना होगा।
पाकिस्तान के दरअसल कुछ ही शायर हैं जिनसे हिन्दी समाज परिचित है। इस शृंखला की योजना इसी को ध्यान में रखकर बनाई गई थी ताकि वे शायर जो किसी कारण भाषा और मुल्क की सीमा लाँघकर भारत के कविता-प्रेमियों तक नहीं पहुँच सके, यहाँ का पाठक उन्हें जान सके। सम्पादक नरेन्द्र नाथ के शब्दों में ‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शृंखला का उद्देश्य पाकिस्तान के ‘प्रसिद्ध कवियों के साथ-साथ उन शायरों को भी हिन्दी जगत के सामने लाना है जिनके लिए कविता केवल आत्मरति-भर नहीं, जो अपनी क़लम की नोक को सेंसरशिप की संगीनों से टकराते हुए शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़’ उठाते रहे, इसलिए सजी-धजी स्टेजों तक नहीं पहुँच सके।
इस खंड में उन्नीस शायरों की नज़्में, ग़ज़लें और फुटकर अशआर शामिल हैं जिनमें से कुछ, जैसे अहमद नदीम कासमी, अहमद फ़राज़ और क़तील शिफ़ाई, से तो सामान्य पाठक भी वाक़िफ़ है, लेकिन ज़्यादातर उसके लिए नये होंगे।
पाकिस्तान की सरज़मीं पर उगी इन रचनाओं से गुज़रते हुए हम इन दोनों मुल्कों की सांस्कृतिक और भावनात्मक समानताओं से भी साक्षात्कार करते हैं जिसके निशान उनकी शब्दावली से लेकर उन सरोकारों और बिम्बों तक फैले हैं जिन्हें ये रचनाएँ हम तक पहुँचाती हैं। हिमायत अली शायर का यह शे’र देखें :
हर क़दम पर नित-नये साँचे में ढल जाते हैं लोग
देखते-ही-देखते कितने बदल जाते हैं लोग।
Quaid Mein Aazad Qulam
- Author Name:
Anand Mohan
- Book Type:

-
Description:
कविता भावप्रधान होने के कारण हृदय का व्यापार है, पर अनेक कविताओं में उदात्त विचारों की शृंखला भी उतनी ही आकर्षक और मोहक होती है और वैसी कविताएँ हृदय को संकीर्णताओं से उठाकर मुक्तावस्था में ले जाती हैं। इसके लिए कवि को उपयुक्त शब्द-विधान में निपुण होना चाहिए।...‘क़ैद में आज़ाद क़लम’ आनन्द मोहन की काव्यकृति है। काव्य की प्रमुख चिन्ता जीवन-मूल्यों को बचाए रखने की होती है, जिससे मानवता की श्रीवृद्धि होती रहे। मानव-मूल्यों के ह्रास की चिन्ता ‘क़ैद में आज़ाद क़लम’ के कवि की अधिकांश कविताओं में कलात्मक ढंग से अभिव्यक्त हुई है। जीवन-व्यापार की व्यापक विस्तृति में जहाँ छल-छद्म है, झूठ है, फ़रेब है, अन्याय-अत्याचार है, विसंगति और व्यभिचार है, वहाँ-वहाँ कविता में ‘शौर्य की हुंकार’ है। इनका सम्पूर्ण काव्य मार्मिक अनुभूतियों की वाग्वैदग्ध्यपूर्ण अभिव्यक्ति है।
—परिशंसा से
Shabdved
- Author Name:
Shradda Purvi
- Rating:
- Book Type:

- Description: Masterpeice marathi poetry collection
Yaqeen Ki Ayten
- Author Name:
Ashutosh Dube
- Book Type:

- Description: तोष दुबे की कविता में महज़ विषयों की विविधता नहीं, बल्कि करुणा, अवसाद, विडम्बना-बोध और अपराध-बोध के अलग-अलग शेड्स और विस्तार हैं और भाषा कवि के मानस को ऐसी जगह भी प्रक्षेपित करने में सफल है जो बयानों और अतिकथनों के बाहर बनती है। —विजय कुमार आशुतोष दुबे की कविताएँ एक अभयारण्य हैं।...कम लोगों की कविता ऐसी होती है जहाँ इतने अधिक स्रोतों से बेधड़क शब्द चले आएँ और ऐसे अर्थलाघव के साथ...यह काव्य-विवेक आशुतोष में है कि समझें कितना कहना है और रुकना कहाँ है! विडम्बनाओं की गहरी समझ चट-चटाक इनके एक-एक बिम्ब में वैसे खुलती है जैसे कि पानी के छींटे पड़ते ही चिटपिटिया के बीज चट से चटक जाते हैं। —अनामिका आशुतोष दुबे की काव्यानुभूति की बनावट बहुत सूक्ष्म और संश्लिष्ट है। उसमें कई बार सोच के ऐसे समुन्नत स्तर का स्पर्श है, जो हमें दैनंदिन पीड़ाओं के जंजाल से ऊपर उठाता है। कविता की यह मुक्तिकामी भूमिका है।...जैसे एक प्रशान्त और एकाग्र अन्तश्चेतना के सहारे वे चीज़ों के भीतर झाँकते हैं और उसके अनुभव को ऐसा दार्शनिक अर्थ देते हैं, जो कई बार उनसे पहले हमें अप्राप्य ही था। —पंकज चतुर्वेदी शायद ऐसी कविताओं के लिए एक निरायास—किन्तु संयमित प्रतीक्षा करनी पड़ती होगी कि विषय अन्दर उतरे और अपना फ़ॉर्म, अपना शेड, अपना टेम्परेचर, अपनी संक्षिप्तता, अपना भुरभुरापन और...और...लेकर बाहर निकले। लेकर बाहर निकले यानी इनके सहित नहीं, इन्हें ओढ़कर-पहनकर नहीं—इनसे बना हुआ होकर, इनका बना हुआ होकर बाहर निकले। और इन तमाम बातों के कई-कई टुकड़े हैं और हर टुकड़ा ‘हर रात अलग-अलग कमरों में सोता है।’ —प्रभु नारायण वर्मा
Kavita Ji Kar Dekho
- Author Name:
Ambrish Kumar Singh
- Book Type:

- Description: इस रचना में निराशा की मनोदशाएँ हैं तो आशा का समुचित संचरण भी है। आकर्षण के उन्नत शिखर है तो यत्र-तत्र विकर्षण की विलम्बित घाटियाँ भी हैं। युद्ध उन्माद की विश्रान्ति है तो शान्ति की अथाह गहराई भी है। दीन-हीन निःशक्तता है तो शक्ति का स्वरचित संसार भी है। यहाँ दुःख द्रवित अश्रुपूरित व्यष्टि है तो हर्षोल्लासित सुख समष्टि भी है। यहाँ शाश्वत सत्य जन्म है तो यथार्थ सत्य मृत्यु भी है। प्रथमतः यह रचना इसी द्वैत भाव से सम्पूरित लगती है किन्तु गहन अनुशीलन-परिशीलन के साथ भाव-प्रवण अन्तर्यात्रा में यह द्वैत भाव तिरोहित हो जाता है और तत्त्वमसि का अनन्त भाव एकत्व में समाहित हो जाता है। यहाँ सर्वदा कल्याणकारी नित नूतन सौन्दर्य से अभिप्रेरित शाश्वत सत्य स्थापित है, वामन से विराट, यथार्थ और आदर्श का समन्वय समुपस्थित है जो अन्ततः आनन्द से ब्रह्मानन्द-सहोदर की ओर प्रयाण है। यह रचना स्व से पर की यात्रा में श्रेय और प्रेय से मंडित मौक्तिक खोज है। कवि का यह प्रथम प्रयास श्लाघ्य, वरेण्य और स्तुत्य भी है।
Pahali Barish
- Author Name:
Aziz Nabeel
- Book Type:

- Description: दू में दुनिया की अहम तरीन शायरी मौजूद है, मैंने बहुत सारी ज़बानों की शायरी पढ़ी है लेकिन उर्दू शायरी की ख़ूबसूरती और दिलकशी सबसे अलग है। नई उर्दू शायरी की मोतबर और तवाना आवाज़ों में अज़ीज़ नबील का नाम बहुत अहम है। उनकी शायरी में नाज़ुक ख़्यालात की ख़ुशबू, नए एहसासात की रोशनी और ज़िन्दगी के मुख़्तलिफ़ इन्किशाफ़ात के रंग बख़ूबी देखे और महसूस किए जा सकते हैं। अज़ीज़ नबील की शायरी में जो बात सबसे ज़्यादा अपील करती है, वो ये है कि वह अपनी बातें सीधे-सीधे ना करते हुए अलामतों और तशबीहात के बहुत ख़ूबसूरत इस्तिमाल से करते हैं, जिसकी वजह से उनके एक शे’र से ब-यक-वक़्त कई-कई मतलब निकाले जा सकते हैं। एक और ख़ास बात ये है कि अज़ीज़ नबील की शायरी का डिक्शन और उस्लूब उनका अपना है। उन्होंने इस्तिमाल-शुदा रास्तों से बचते हुए अपने लिए कुछ इस तरह एक अलग राह निकाली है कि ज़िन्दगी को शायरी और शायरी को ज़िन्दगी में शामिल करके पेश कर दिया है। —जस्टिस मार्कंडेय काटजू इक्कीसवीं सदी तेज़ी से बदलते हुए अक़दार की सदी है, इस सदी में उर्दू शायरी की जो आवाज़ें बुलन्द हुई हैं, उनमें अज़ीज़ नबील का नाम तवज्जो का हामिल है। क्लासिकी अदब से वाबस्तगी और इस अहद की हिस्सियत की आमेज़िश ने उनकी शायरी को पुरकशिश बना दिया है। मुझे पूरी उम्मीद है कि सादा ज़बान और ख़ूबसूरत अलामतों के फ़नकाराना इस्तिमाल से पुर इस शायरी को क़ारईन पसन्द फ़रमाएँगे। —जावेद अख़्त
Jindagi Ke Liye Hi
- Author Name:
Ripusudan Shrivastava
- Book Type:

-
Description:
कविता मौलिक रूप से अनुभव का शाब्दिक विस्तार है। जीवन के तमाम अनुभव जब कल्पना और विचार का साहचर्य प्राप्त करते हैं तब अभिव्यक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। रिपुसूदन श्रीवास्तव का कविता-संग्रह ‘ज़िन्दगी के लिए ही’ एक लम्बे जीवनानुभव को विभिन्न छवियों में व्यक्त करता है।
आज अनेक कारणों से मनुष्य और समाज तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। व्यक्ति अपनी जड़ों से दूर होकर एक बनावटी ज़िन्दगी में बन्दी-सा हो गया है। एक उचाटी शाश्वत भाव-सी बन गई है। स्मृतियाँ हैं कि बार-बार वर्तमान पर दस्तक देती हैं। वे क्षण जो बरसों पहले समय की सदी में प्रवाहित हो गए, जाने कैसे आकुलता के जल में उभर आते हैं...इस संग्रह की कविताएँ ऐसे बहुत सारे तथ्यों को नेपथ्य में महसूस करते हुए रची गई हैं। इनकी सहजता-सरलता ही इनका अलंकरण है।
Pankh
- Author Name:
Dr.Abrar Multani
- Book Type:

- Description: Just finding the right path is not enough. Walking on it is also essential. Mercy is not justice. The world is always ready to provide ‘debt’ to ‘rich’ and ‘help’ to ‘powerful’ people. The reason behind the invention of weapons is human's fear, not the bravery. One great sorrow overpowers hundreds of small pains
Main Samay Hoon
- Author Name:
Pawan Jain
- Book Type:

-
Description:
कुछ लोग कविता को एक ऐसा साज बनाना चाहते हैं जिसकी मधुर आवाज़ से थके-हारे इनसानों को नींद आ सके। लेकिन, पवन जैन उनमें से हैं जो कविता को ऐसा हथियार बनाना चाहते हैं जिसे लेकर समाज के शोषण और दुनिया के अँधियारे से युद्ध किया जा सके। पवन जैन की कविताएँ एक जागते हुए कवि की रचनाएँ हैं जो अपने चारों ओर पल-पल बदलती और बिगड़ती दुनिया को देख रहा है और हमें दिखाना चाहता है और साथ ही बिन पूछे हमसे पूछना चाहता है कि करना क्या है?
—जावेद अख्तर
कविता किसे कहते हैं? वह शब्द है या शब्दार्थ? भाव है या भाव का भाषिक विस्फोट या फिर अति संवेदनशील लोक-मानस की असाधारण भाव प्रतिक्रिया—इस सब पर बरसों से विचार होता चला आ रहा है और समाज और कला-संस्कृति की परम्परा में इस सबको अलग-अलग समयों में स्वीकार-प्रतिस्वीकार किया जाता है।
यह भी कि कविता को कोई एक सुनिश्चित आकार-प्रकार, सुनिर्धारित ढाँचा या फिर अभिव्यंजना पद्धति आज तक अपनी सीमा रेखा में नहीं बाँध सकी। करोड़ों-करोड़ जाने-माने चेहरों की अपूर्वता और मौलिकता की तरह कविता भी हमेशा अपूर्व और मौलिक को अपनी आधारभूत पहचान मानती आई है—ठीक निसर्ग-सृजन की तरह। तथापि वह एक अभिव्यंजना-कला भी है। कवि द्वारा प्रयुक्त जाने-पहचाने से शब्द जब सर्वथा एक नई मुद्रा में आकर हमसे रोचक या उत्तेजक संवाद करने लगते हैं, हम मान लिया करते हैं, यह तो कविता है। तब भाषा के इस प्रकार की बनावटों को कविता कहना कोई अनहोना कथन कैसे कहा जाए?
पवन जैन की इन कविताओं का अन्तरंग गहरा राजनीतिक है। रचनात्मक तौर पर राजनीतिक किन्तु भारी सामूहिक व्यथा और क्षोभ से उपजा हुआ है। आदर्श नहीं बचे, मूल्य अवमूल्यों के द्वारा खदेड़ दिए गए, विचार की जगह कुविचार और घर को नष्ट-भ्रष्ट कर बाज़ार हमारे बीच किसी महानायक का प्रेत बन आ खड़ा है। ऐतिहासिक और क्रूर यथार्थ से ये कविताएँ हमारा साबक़ा करवाती हैं।
इन कविताओं में भाषा एक चीख़ बनकर फूटी है। इससे हम कविता की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारियों और भाषा के आवेग-विह्वल विचलनों का अनुमान लगा पाएँगे और यह भी कि समय की बहुरूपी जटिलता और मानव-संवेदना की छटपटाहटों के बीच छिड़ा संग्राम किस तरह कविता का चेहरा-मोहरा बदल दिया करता है।
—डॉ. विजयबहादुर सिंह
Kavi ka shahar
- Author Name:
Rakesh Mishra
- Book Type:

-
Description:
ग्राम, शहर, प्रकृति और प्रेम इन कविताओं में बराबर-बराबर मात्रा में है और उनकी अपनी-अपनी पीड़ाएँ भी। यानी कवि की आँख हर कहीं खुली है और कोई भी ऐसा दृश्य जो मानवीय विडम्बना को धारण किए हुए है—उनकी कलम से अछूता नहीं रहता। दुख हर कहीं है, देह में भी और धरती में भी। जितना खोदो, जहाँ तक खोदो, दुख ही दुख। ये कविताएँ इसी खुदाई में निकला खनिज हैं।
कवि अगर इस दुनिया में उन लोगों को देख पाता है जो ‘मरने के काम पर हैं’ तो कहना चाहिए कि उन्हें मौजूदा सभ्यता के बहुत भीतर की किसी व्याधि का भी पता है, जिसने जीवन और संसार को यातना और मृत्यु की एक मशीन-भर बना छोड़ा है। ‘पुताई वाले लड़के’ कविता में भी उनकी यह तीक्ष्ण दृष्टि दिखाई पड़ती है। बेहद चित्रात्मक इस कविता में वे जब बताते हैं कि ‘घड़ी किसी के पास नहीं/पुताई के क्षेत्रफल से नापते हैं/समय’ तो यह जैसे हमारे इस समय की तमाम विद्रूपताओं पर एक टिप्पणी मालूम पड़ती है।
‘जब तक हम जान पाते/क्यों हुआ था पिछला युद्ध/उससे पहले ही शुरू हो जाता है। अगला युद्ध’—‘युद्ध’ शीर्षक कविता की ये पंक्तियाँ सभ्यता-समीक्षा की इसी प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाती हैं जो राकेश मिश्र के इस नए संग्रह की लगभग सभी कविताओं का उद्देश्य है।
ये कविताएँ अपनी विषयवस्तु में जीवन और सभ्यता के एक बड़े फलक को समेटती हैं, और हर बिन्दु से मानवीय मूल्यों के अभाव को रेखांकित करती हुईं हमें आत्मनिरीक्षण के लिए उकसाती हैं। एक कविता में वे चेताते भी हैं कि ‘नहीं बोलने की आदत/धीमे से छीन लेती है/सुनने की शक्ति भी।’
Aiwan-E- Ghazal
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ‘ऐवाने ग़ज़ल’ की फ़िज़ा परम्परा से शायराना चली आई है, लेकिन वक़्त, बदला, ज़मींदारी की पुख़्ता ज़मीनें खिसकने लगीं, सबकी बराबरी के नारे हवा में गूँजने लगे तो ऐवाने ग़ज़ल के आख़िरी शायर वाहिद हुसैन के पास दिल की बातें करने के लिए रंगीन परों वाली एक नन्ही-सी चिड़िया ही बच गई जो रोज़ उनके बाग़ में उनके पास आकर बैठती। ख़त्म होने पर आमादा इस कहानी को नई रफ़्तार बख़्शती है चाँद। बड़ी हवेली की नन्ही-मुन्नी खिलंदड़ी नवासी चाँद बड़ी होकर स्टेज पर पहुँचती है और एक असम्भव मुहब्बत में तपेदिक के हत्थे चढ़ जाती है। लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ जाती है ग़ज़ल को। ग़ज़ल जिसने पैदा होने के बाद से प्यार और दुलार क्या होता है, नहीं जाना; बड़ी हुई तो ज़िन्दगी से उसने सिर्फ़ एक चीज़ माँगी—प्यार। जो आख़िरकार उसे नहीं मिला और उसने अपना ख़ाली आँचल क्रान्ति के ऊपर फैला दिया। और नक्सली माँ-बाप की जंगलों में जन्मी इकलौती औलाद क्रान्ति ने जैसे ‘ऐवाने ग़ज़ल’ की पूरी परम्परा को ही उलटकर रख दिया। उसके कमरे में बम थे, जेब में पिस्तौल, हाथ में सिगरेट और चेहरे पर वह तेज़ जिसके सामने ऐवाने ग़ज़ल की दीवारों पर चस्पाँ तमाम हुस्नपरस्त शायर हक-दक रह गए। छोटी-छोटी तफ़सीलों से लबरेज़ एक बड़ी कहानी।
Agar Main Sher Na Kahta
- Author Name:
Abbas Tabish
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Orhan Aur Anya Kavitayen
- Author Name:
Shriprakash Shukla
- Book Type:

-
Description:
‘आँधी में टूटकर गिरा हुआ मकान/तूफ़ान में सूखकर रेत हुई नदी/थककर गिरा हुआ आदमी/ज़्यादे भरोसे का होता है/अपनी-अपनी सम्भावनाओं में/समर्पित सफलता से/ज़्यादा मूल्यवान होती है/तनी हुई विफलता।’ श्रीप्रकाश शुक्ल के कविता-संग्रह ‘ओरहन और अन्य कविताएँ’ में शामिल कविता ‘तनी हुई विफलता’ की ये पंक्तियाँ रचनाकार के पक्ष को स्पष्ट कर देती हैं। प्रत्येक सजग और समर्थ रचनाकार बार-बार निजी और सामाजिक अनुभवों को चेतना की कसौटी पर कसता है। इसे ‘पुन:पाठ’ कहें या ‘अर्थान्तर’ सच्चाई यही है कि हर शब्द एक अनुभव माँगता है और हर अनुभव एक जीवन। इस आन्तरिक प्रक्रिया से गुज़रकर जो कवि समय को व्यक्त कर रहे हैं, उनमें श्रीप्रकाश शुक्ल महत्त्वपूर्ण हैं।
प्रस्तुत संग्रह को पढ़ते हुए यह लगना अनायास नहीं कि ‘बनारस’ इसकी केन्द्रीयता है। बनारस के अनेक प्रसंग, स्थान और स्वभाव कविताओं में निहित व निनादित हैं।...और एक ‘सनातन नगर’ के बहाने कवि ने आधुनिकता के श्वेत-श्याम आवासों को टटोला है। श्रीप्रकाश शुक्ल में यह कहने का साहस व सलीका भी है कि, ‘सब कुछ बहुवचन में नहीं सोचा जा सकता।’ अपने तरीक़े से सोचते हुए उन्होंने ‘ओरहन’, ‘एक कवि की तलाश में’, ‘हमारे समय का एक शोकगीत’, ‘एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती है’ व ‘छठ की औरतें’ जैसी कई उदाहरणीय कविताएँ रची हैं।
इस संग्रह में ‘स्त्री’ को लेकर कुछ बेहद ख़ास कविताएँ हैं। बिना शब्दों का डमरू बजाए। निजी देसी मुहावरे में श्रीप्रकाश ‘लरिकोर’ जैसी अनूठी कविता लिखते हैं। भाषा के स्वीकृत विन्यास को सतर्क चुनौती देते हुए रची गई ये कविताएँ हमें संवेदनाओं के एक सघन संसार में ले जाती हैं, जहाँ अपेक्षित भाषाई मुखरता के साथ एक आत्मसंवादी स्वर भी है जिसमें प्रकृति के साहचर्य से दूर जाते समाज की चालाकियों का पर्दाफ़ाश भी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book