Kahi Ankahi (Poems)
Author:
Nandita Shukla BhaskarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Unavailable
"यह नियति ही है
जिसे भोगना है
सोचती हूँ हँसकर झेलूँ
पर जब भी ये सोचती हूँ रो पड़ती हूँ
भरे गले से तुम्हारा नाम लेना चाहती हूँ
तुम्हें कृतज्ञता के दो शब्द कहना चाहती हूँ।
कितना तो हमें कहना-सुनना है
कह-सुन भी लेंगे
इर्द-गिर्द के लोगों की दृष्टि में हम मौन हैं
सिर्फ बरसों बाद मिले अपरिचितों की भाँति।
देखते-देखते
नीले आकाश में बादल
रुई के फाहे-से छा गए हैं
एकाएक सफेद परोंवाले पक्षी
अपने पंख फड़फड़ा के उड़ने लगे हैं
मैं दुबककर तुम में और समा जाती हूँ
अपने बसेरे में, चिडि़या-सी!
बस यों ही जीना सीख लिया है
अपने काँधों पर अपने ही अस्थिकलशों को
ढोना शुरू कर दिया है।
—इसी संग्रह से
बचपन में ही माँ के साए से संचित हो गई एक बालिका के मनोभावों का संकलन है यह पुस्तक। पिता की स्नेहिल छाँव और ममत्व से जिसका पालन हुआ, उस बालिका की आशा-उत्कंठाओं का संकलन है यह पुस्तक। ईश्वर सबकुछ ले ले, पर माता-पिता के साए से वंचित न करे क्योंकि वही दुनिया का सबसे सुरक्षित कवच होते हैं—यह प्रार्थना करनेवाली बालिका की ‘कही-अनकही’ भावनाओं का संकलन है यह पुस्तक।
"
ISBN: 9789390366514
Pages: 48
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘अकबर’ के कलाम की एक विशेषता और भी है। उन्होंने अपनी शायरी की शुरुआत संजीदा रवायती शायरी के साथ की थी। वही गुलो–बुलबुल, वही साग़ रो–मीना, वही शीरीं–फ़रहाद, वही शमा और परवाना रवायती शायरी के सारे प्रतीक ‘अकबर’ की शुरुआती शायरी में नज़र आते हैं। लेकिन अकबर इसी रवायत पर क़ायम रहे होते तो तय है कि वे मामूली दर्जे के सैकड़ों शायरों में बस एक होते।
लेकिन ख़ुशनसीबी कि ऐसा नहीं हुआ। जल्द ही अकबर ने अपनी एक अलग राह बना ली और वे हास्य–व्यंग्य के पहले प्रमुख शायर के रूप में जल्वागर हुए। यूँ तो जाफ़र, मीर, सौदा, ग़ालिब और दूसरे शायरों के यहाँ हास्य और व्यंग्य की सुन्दर छटाएँ देखने को मिलती हैं, लेकिन इनमें से किसी को भी बाक़ायदा हास्य–व्यंग्य का शायर नहीं कहा जा सकता। ये ‘अकबर’ थे जिन्होंने उर्दू शायरी में अपनी बात कहने के लिए हास्य–व्यंग्य का सहारा लिया और एक ऐसी नई रवायत की बुनियाद डाली जो आज तक फल–फूल रही है।
विचारधारा के स्तर पर देखें तो पश्चिमी ज्ञान–विज्ञान और पश्चिमी सभ्यता का जितना भारी विरोध ‘अकबर’ के यहाँ दिखाई देता है, उतना किसी और शायर के यहाँ नहीं दिखाई देता। इसी तरह ‘अकबर’ धार्मिक और सामाजिक सुधार के भी विरोधी थे। बदलते हुए हालात में ‘अकबर’ की शिकस्त लाज़मी थी और कहीं हास्य के साथ और कहीं दु:ख के साथ उन्होंने अपनी इस शिकस्त का इज़हार भी किया है। लेकिन इस नकारात्मक पहलू के अन्दर जो सकारात्मक तत्त्व मौजूद हैं, सावधानी के साथ उनकी निशानदेही किए बिना ‘अकबर’ के साथ इंसाफ़ करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।
Nepathy Mein Hansi
- Author Name:
Rajesh Joshi
- Book Type:

- Description: ये कविताएँ पिछले सात आठ बरसों में लिखी गई है । हमारे आसपास इस बीच बहुत तेजी से परिवर्तन हुए हैं । घटनाओं की गीत इतनी तेज और अप्रत्याशित बल्कि कहना चाहिये कि विस्मित कर देने वाली है कि उसे अव- धारणाओं में पकड़ना अगर असंभव नहीं तो कठिन अवश्य हो गया है । दृश्य गहरी मानवीय तकलीफों और बेचैनियों से भरा है । इन कविताओं में .शायद इसके कुछ संकेत मिलें । शायद इसीलिए इन कविताओं में 'मूड्स' की बहुत भिन्नताएं हैं । निराशा, उदासी और उन्माद के इस दृश्य के बीच भी उम्मीद बची है । और यह उम्मीद है, इस देश की विराट श्रमशील जनता-जों बहुत थोड़े में अपना गुजर-बसर करते हुए भी, ज्यादा से ज्यादा जगह को मनुष्य के रहने लायक और सुंदर बनाने में जुटी हैं । ये कविताएँ उस धुँधले उजाले को देख और दिखा सकें ऐसी मेरी इच्छा है ।
Pakistani Urdu Shayri: Vol. 1
- Author Name:
Narendra Nath
- Book Type:

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Description:
पाकिस्तान के कुछेक नामचीन शायरों को छोड़ दें तो हिन्दी का पाठक वहाँ के ज़्यादातर शायरों से परिचित नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखकर ‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शीर्षक इस शृंखला की योजना बनाई गई थी जिसमें दो सौ से ज़्यादा शायरों को उनके जीवन-परिचय और रचनाओं के साथ पाठकों के सामने लाने का इरादा किया गया था।
इसके लिए इन पुस्तकों के सम्पादक नरेन्द्र नाथ पाकिस्तान भी गए, कराची और लाहौर के किताबघरों-पुस्तकालयों से नई-पुरानी किताबें जमा कीं और पत्र-पत्रिकाओं की फ़ाइलें खँगालीं। शायरों से निजी तौर पर ख़तो-किताबत भी की गई।
पाकिस्तान के शायरों को हिन्दी पाठक तक पहुँचाने के अलावा इस शृंखला का एक उद्देश्य हिन्दी और उर्दू कविता के बीच एक पुल बनाना भी है। भारत की आज़ादी के साथ ही पाकिस्तान एक मुल्क के रूप में अलग हो गया, सरहदें खिंच गईं, लेकिन कोई चीज़ थी जिसे नहीं बाँटा जा सका, वह तब भी एक थी, आज भी एक है। वह है देखने का, सोचने का, जीने का ढंग और हमारा सामाजिक-सांस्कृतिक बोध। पाकिस्तानी उर्दू शायरी के इन पाँच खंडों से गुज़रते हुए आप हर हाल में इस चीज़ को महसूस करेंगे। अनेक नज़्में और ग़ज़लें हैं जिनके रूपक, उपमाएँ और उपमान सरहदों से ऊपर उठकर भारत और पाकिस्तान के इस एकत्व को बरबस उजागर कर देते हैं।
इस खंड में कुल अठारह शायरों की रचनाएँ शामिल हैं, साथ ही उनका जीवन-परिचय भी, और जहाँ सम्भव हो सका, उनकी शायरी के बारे में टिप्पणियाँ भी। ख़ासतौर पर जिन विधाओं की रचनाएँ यहाँ ली गई हैं उनमें ग़ज़लें, नज़्में और फुटकर शे’र प्रमुख हैं। कुछ शायरों की रुबाइयाँ, क़तआत और गीत भी लिये गए हैं जो पाकिस्तान के काव्य-परिदृश्य का विस्तृत परिचय हमें देते हैं।
Srishti Par Pahara
- Author Name:
Kedarnath Singh
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- Description: केदारनाथ सिंह का यह नया संग्रह कवि के इस विश्वास का ताज़ा साक्ष्य है कि अपने समय में प्रवेश करने का रास्ता अपने स्थान से होकर जाता है। यहाँ स्थान का सबसे विश्वसनीय भूगोल थोड़ा और विस्तृत हुआ है, जो अनुभव के कई सीमान्तों को छूता है। इन कविताओं में कवि की भाषा और पारदर्शी हुई है—और संवादधर्मी भी। संग्रह की लम्बी कविता ‘मंच और मचान’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि यहाँ कटते हुए वृक्ष के विरुद्ध एक व्यक्ति (चीना बाबा) का प्रतिरोध ‘घर’ के लिए आदमी के बुनियादी संघर्ष का रूपक बन जाता है। यहाँ तुच्छ कीचड़ भी दुनिया बचाने के लिए सक्रिय दीखता है और घास की एक छोटी-सी पत्ती भी बैनर उठाए हुए मैदान में खड़ी है। पानी, कपास, लकड़ी और धूल जैसी छोटी-छोटी चीज़ों की बेचैनी से भरी ये कविताएँ कोई दावा नहीं करतीं। वे सिर्फ़ आपसे बोलना-बतियाना चाहती हैं—एक ऐसी भाषा में जो जितनी इनकी है उतनी ही आपकी भी।
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