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Ek Din Lautegi Ladki

In category

Poetry

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Hindi

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About the book

‘एक दिन लौटेगी लड़की’ गगन गिल का पहला कविता-संग्रह है। आज भी यह कविताएँ अपनी दृढ़ता और शब्द-संयम से आने वाले परिष्कार का बोध कराती हैं जो उनके बाद के काम में फलीभूत भी हुआ। गगन की इन कविताओं में स्त्री-मन का एक अनुशासित लेकिन भव्य संशय और दुःखबोध है, जो अभी तक रूढ़ि नहीं बना। इन कविताओं के रचाव का रंग बड़ी सहजता से कहीं गहन और कहीं धीमा होता चलता है, ऊपर से चढ़ाया कोई रोग़न इनमें लगभग नहीं है। इसलिए इन कविताओं में भावों का गठन और विकास गगन का एकदम अपना भी है, और हमारे समय में एक स्त्री की अवस्थिति की खुरदुरी सचाइयों का आईना भी! उदासी का मतलब यहाँ पूरी चारित्रिक दृढ़ता से एक ऐतिहासिक सच से रू-ब-रू होना है—रूखी हृदयहीनता या पीड़ा का विलास नहीं। इतिहास गगन की परवर्ती कविताओं में दुःख, निर्लिप्तता, राग और विराग के सन्दर्भों में बार-बार आया है। उत्कट मोह और उत्कट वीतरागिता से भरे ब्यौरे उनमें यत्र-तत्र ऐतिहासिक अवशेषों की मार्मिक और आतंकित करने वाली भव्यता के साथ बिखरे हुए हैं। इतिहास के या किन्हीं शब्दातीत अनुभवों को बड़ी कुशलता से उद्दीप्त कर पाने की गगन की क्षमता यहाँ पहले-पहल अपने अँखुए खोल रही है। गगन के पास पंजाब की भाषा के, इतिहास के गहरे संस्कार हैं। कई मध्ययुगीन ऐतिहासिक अनुभवों-दुःस्वप्नों की टापें इसीलिए कई बार अचानक इन कविताओं में हमें सुनाई देती हैं। शब्दों की यह आह्वानात्मक ताक़त गगन के गद्य में भी है, और पद्य में भी। सच्चे और सही मायनों में यह विवेक की कविताएँ हैं, काल को वामन-डगों से मापती हुईं। —मृणाल पांडे

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About the Book

‘एक दिन लौटेगी लड़की’ गगन गिल का पहला कविता-संग्रह है। आज भी यह कविताएँ अपनी दृढ़ता और शब्द-संयम से आने वाले परिष्कार का बोध कराती हैं जो उनके बाद के काम में फलीभूत भी हुआ।

गगन की इन कविताओं में स्त्री-मन का एक अनुशासित लेकिन भव्य संशय और दुःखबोध है, जो अभी तक रूढ़ि नहीं बना। इन कविताओं के रचाव का रंग बड़ी सहजता से कहीं गहन और कहीं धीमा होता चलता है, ऊपर से चढ़ाया कोई रोग़न इनमें लगभग नहीं है। इसलिए इन कविताओं में भावों का गठन और विकास गगन का एकदम अपना भी है, और हमारे समय में एक स्त्री की अवस्थिति की खुरदुरी सचाइयों का आईना भी! उदासी का मतलब यहाँ पूरी चारित्रिक दृढ़ता से एक ऐतिहासिक सच से रू-ब-रू होना है—रूखी हृदयहीनता या पीड़ा का विलास नहीं।

इतिहास गगन की परवर्ती कविताओं में दुःख, निर्लिप्तता, राग और विराग के सन्दर्भों में बार-बार आया है। उत्कट मोह और उत्कट वीतरागिता से भरे ब्यौरे उनमें यत्र-तत्र ऐतिहासिक अवशेषों की मार्मिक और आतंकित करने वाली भव्यता के साथ बिखरे हुए हैं। इतिहास के या किन्हीं शब्दातीत अनुभवों को बड़ी कुशलता से उद्दीप्त कर पाने की गगन की क्षमता यहाँ पहले-पहल अपने अँखुए खोल रही है।

गगन के पास पंजाब की भाषा के, इतिहास के गहरे संस्कार हैं। कई मध्ययुगीन ऐतिहासिक अनुभवों-दुःस्वप्नों की टापें इसीलिए कई बार अचानक इन कविताओं में हमें सुनाई देती हैं। शब्दों की यह आह्वानात्मक ताक़त गगन के गद्य में भी है, और पद्य में भी।

सच्चे और सही मायनों में यह विवेक की कविताएँ हैं, काल को वामन-डगों से मापती हुईं।

—मृणाल पांडे

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2024
Weight
300 grams
ISBN-13
9789360862527
Pages
136
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13.5 × 21 cm
Language
Hindi

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