Jai Shankar Prasad Granthavali Vol. 1-4
Author:
Jaishankar PrasadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Ratings
Price: ₹ 4800
₹
6000
Available
हिन्दी नाटक-साहित्य में प्रसाद जी का विशिष्ट स्थान है। इतिहास, पुराण-कथा और अर्द्धमिथकीय वस्तु के भीतर से प्रसाद ने राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल को पहली बार अपने नाटकों के माध्यम से उठाया। दरअसल उनके नाटक अतीत-कथा-चित्रों के द्वारा तत्कालीन राष्ट्रीय संकट को पहचानने और सुलझाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ‘चन्द्रगुप्त’, ‘स्कन्दगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ का सत्ता-संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न से जुड़ा हुआ है। प्रसाद ने अपने नाटकों की रचना द्वारा भारतेन्दुकालीन रंगमंच से बेहतर और संश्लिष्ट रंगमंच की माँग उठायी। उन्होंने नाटकों की अन्तर्वस्तु के महत्त्व को रेखांकित करते हुए रंगमंच को लिखित नाटक का अनुवर्ती बनाया। इस तरह नाटक के पाठ्य होने के महत्त्व को उन्होंने नजरअन्दाज नहीं किया। नाट्य-रचना और रंगमंच के परस्पर सम्बन्ध के बारे में उनका यह निजी दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण और मौलिक है। प्रसाद जी के नाटक निश्चय ही एक नयी नाट्य-भाषा के आलोक में चमचमाते हुए दिखते हैं। अभिनय, हरकत और एक गहरी काव्यमयता से परिपूर्ण रोमांसल भाषा प्रसाद की नाट्य-भाषा की विशेषताएँ हैं। इसी नाट्य-भाषा के माध्यम से प्रसाद अपने नाटकों में राष्ट्रीय चिन्ता के संग प्रेम के कोमल संस्पर्श का कारुणिक संस्कार देते है।
ISBN: 9788180315442
Pages: 2592
Avg Reading Time: 86 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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“कुरुक्षेत्र में दिन में ही रहो, बस! रात में वहाँ मत रहो। यदि तुम रात में वहाँ रहे तो दिन में जो देखोगे, ठीक उसका उलटा पाओगे।” ‘शस्त्र-सन्तान’ का यह सूत्र वाक्य—केवल ‘महाभारत’ (आरण्यक पर्व) तक ही सीमित नहीं है। अस्तित्व के तब से अब तक के महावृत्तान्त में यह गूँज रहा है और यह उसके अन्तर्विरोधों तथा दर्दनाक विडम्बना को एक झटके में उजागर करता है। क्या पता हम जो देख रहे हैं—अगले क्षण उसका अर्थ उलट जाए! यह नाटक निःशब्द रात्रि में गांधारी, शववाहक, शस्त्र संचयकर्ताओं और विलाप करती स्त्रियों के मद्धिम स्वरों से शुरू होकर एक ऐसी बीहड़ सांगीतिक रचना में परिवर्तित होता है, जहाँ करुणा के साथ शब्द और महारंग काक की आवाज़ें भी हैं। एक ऐसी सांगीतिक रचना जो खींचती है, रुलाती है और सत्य के काँटों से भरी मरुभूमि पर ढकेल देती है।
यह नाटक कुरुक्षेत्र की रातों के बहाने रक्त में ऊभ-चूभ विगत, वर्तमान, आगत की भी कथा है, जिसमें जटिल सम्बन्धों और सत्य के लिए संघर्षरत आत्माओं का पुनरुद्घाटन होता है।
बहुविदित महाआख्यान के बहाने ‘शस्त्र-सन्तान’ हिन्दी नाटक के इतिहास में समकालीन काव्य की भाषा के नाटकीय प्रक्षेपण का अप्रतिम उदाहरण है।
Jab Shahar Hamara Sota Hai
- Author Name:
Piyush Mishra
- Book Type:

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Description:
राबर्ट वाइज़ द्वारा निर्देशित, आर्थर लॉरेंट्ज द्वारा लिखित, जेरोम डी. रॉबिंस द्वारा नृत्य-संयोजित, नियोनिद बार्नस्टीन द्वारा संगीत और स्टीवन सोंघीम द्वारा लिखे गए गीतों से सुसज्जित फ़िल्म ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ सिर्फ़ अपने दस ऑस्कर अवाडर्स की भीड़ की वजह से ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि विलियम शेक्सपियर के ‘रोमियो एंड जूलियट’ से प्रेरित यह ब्राडवे म्यूजिकल क्लासिक कई मायनों में दुनिया के आधुनिक थिएटर इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। ‘एक्ट-वन’ ने अपना अगला नाटक चुन लिया था जिसे नाटक से अधिक दुस्साहस कहना उचित होगा। ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ का नया नामकरण हुआ...‘जब शहर हमारा सोता है’।
नाटक पढ़ा गया। फ़िल्म देखी गई। और गद्गद होने की प्रक्रिया से उबरने के बाद सर्वसम्मति से फ़ैसला हुआ कि अब इस स्क्रिप्ट को एक तरफ़ रख दिया जाए। हमारी स्क्रिप्ट हमारी होगी जिसमें हमारे चरित्र होंगे, हमारी सिचुएशंस होंगी, हमारे दृश्य होंगे, हमारे गीत और संगीत के साथ हमारा अपना हिन्दुस्तान होगा।
आज से चार सौ साल पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी के आगमन के परिणामों को भोगता हुआ हमारा ख़ूबसूरत मुल्क 1947 और 1984 को छूता हुआ आज जब गोधरा से एक क़दम आगे जाने की छटपटाहट से गुज़र रहा है, तो ‘शहर...’ के ज़िन्दा होने का अहसास पहले से भी ज़्यादा मुखर और प्रखर हो जाता है।
Imroz
- Author Name:
Kunal Hriday
- Book Type:

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Description:
इमरोज़ साहित्यिक जगत के एक अत्यन्त चर्चित और लगभग मिथकीय गरिमा हासिल कर चुके प्रेम-सम्बन्ध को नए और प्रासंगिक ढंग से प्रस्तुत करता नाटक है। अमृता प्रीतम और इमरोज़ के सम्बन्धों की कहानी न तो अनजानी है, न ही अस्पष्ट। इस कहानी के सिरे साहिर लुधियानवी और प्रीतम सिंह से भी जुड़ते हैं। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि इस कहानी के नायक इमरोज़ हैं और नायिका अमृता। मुश्किल यह है कि साहित्य-जगत में अमृता का मुक़ाम इतना ऊँचा और उनका असर इतना व्यापक है कि उसकी विशाल छाया में समर्पित-हृदय इमरोज़ का व्यक्तित्व प्राय: ओझल-अदेखा रह गया है। युवा नाटककार कुनाल हृदय ने इसी अदेखे पक्ष को अपने इस नाटक में अत्यन्त प्रभावी ढंग से पेश किया है जिसमें इमरोज़ एक उदात्त प्रेमी के रूप में सामने आते हैं।
इमरोज़ में रिश्तों की एक बारीक गुत्थी खुलती है जो इनसानी स्वभाव के बेहद नाज़ुक लेकिन ज़रूरी पक्ष पर रोशनी डालती है इसमें उम्मीद और असलियत का टकराव तो है, पर प्रेम के लिए हाथ बढ़ा चुका इमरोज़ अहंकार को बीच में एकदम नहीं आने देता। इस नाटक में हम एक ‘नए’ प्रेमी का दर्शन करते हैं जिसे प्रेमी, प्रेमिका और रक़ीब के पारम्परिक त्रिकोण से व्याख्यायित नहीं किया जा सकता।
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