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Ant Ka Ujala

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यह वाक्य प्रायः सुनने को मिलता है कि हिन्‍दी में मौलिक नाट्यालेखों का अभाव है। इस अभाव को कृष्ण बलदेव वैद सरीखे वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित रचनाकार काफ़ी हद तक दूर करते हैं। ‘भूख आग है’, ‘हमारी बुढ़‍िया’, ‘सवाल और स्वप्न’ एवं ‘परिवार अखाड़ा’ जैसे उनके उल्लेखनीय नाटकों ने हिन्‍दी रंगकर्म को पर्याप्त समृद्ध किया। इसी क्रम में कृष्ण बलदेव वैद का नया नाटक ‘अन्‍त का उजाला’ कुछ नए रचनात्मक प्रयोगों के साथ उपस्थित है। यह विदित है कि वैद भाषा में निहित अर्थों व ध्वनियों के साथ मानीख़ेज़ खिलवाड़ करते हैं। कथ्य और शिल्प में नए प्रयोग करते हुए वे किसी बड़े जीवन सत्य को रेखांकित करते हैं। ‘अन्‍त का उजाला’ जीवन की वृद्धावस्था में ठहरे पति-पत्नी की मनोदशा को एक 'अनौपचारिक भाषिक उपक्रम' में व्यक्त करता है। सावधानी से पढ़ें, अनुभव करें तो पूरा नाटक प्रतीकों से भरा है। लेखक एक स्थान पर कहता है, ‘एक आदर्श प्रतीक की तरह उसे याद भर किया है। खाने और पीने को भी एक प्रतीक ही समझो।’ नाटक बड़े सलीके से जीवनान्त के उजाले को संवादों में शामिल करता है। दो पात्रों के सुदीर्घ साहचर्य से उत्पन्न जीवन रस पाठकों को अभिभूत करता है। प्रयोगात्मकता और प्रतीकधर्मिता के कारण ‘अन्‍त का उजाला’ नाटक महत्त्पूर्ण हो उठता है।

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यह वाक्य प्रायः सुनने को मिलता है कि हिन्‍दी में मौलिक नाट्यालेखों का अभाव है। इस अभाव को कृष्ण बलदेव वैद सरीखे वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित रचनाकार काफ़ी हद तक दूर करते हैं। ‘भूख आग है’, ‘हमारी बुढ़‍िया’, ‘सवाल और स्वप्न’ एवं ‘परिवार अखाड़ा’ जैसे उनके उल्लेखनीय नाटकों ने हिन्‍दी रंगकर्म को पर्याप्त समृद्ध किया। इसी क्रम में कृष्ण बलदेव वैद का नया नाटक ‘अन्‍त का उजाला’ कुछ नए रचनात्मक प्रयोगों के साथ उपस्थित है। यह विदित है कि वैद भाषा में निहित अर्थों व ध्वनियों के साथ मानीख़ेज़ खिलवाड़ करते हैं। कथ्य और शिल्प में नए प्रयोग करते हुए वे किसी बड़े जीवन सत्य को रेखांकित करते हैं। ‘अन्‍त का उजाला’ जीवन की वृद्धावस्था में ठहरे पति-पत्नी की मनोदशा को एक 'अनौपचारिक भाषिक उपक्रम' में व्यक्त करता है। सावधानी से पढ़ें, अनुभव करें तो पूरा नाटक प्रतीकों से भरा है। लेखक एक स्थान पर कहता है, ‘एक आदर्श प्रतीक की तरह उसे याद भर किया है। खाने और पीने को भी एक प्रतीक ही समझो।’ नाटक बड़े सलीके से जीवनान्त के उजाले को संवादों में शामिल करता है। दो पात्रों के सुदीर्घ साहचर्य से उत्पन्न जीवन रस पाठकों को अभिभूत करता है। प्रयोगात्मकता और प्रतीकधर्मिता के कारण ‘अन्‍त का उजाला’ नाटक महत्त्पूर्ण हो उठता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2012
Weight
256 grams
ISBN-13
9788126722945
Pages
112
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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