Grees Puran Katha-Kosh
Author:
Kamal NaseemPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Reviews
Price: ₹ 1516
₹
1895
Available
एशिया और पश्चिमी देशों के सारे साहित्य-संस्कृति की रीढ़ हैं भारतीय और ग्रीस-पुराण-कथाएँ। अपोलो, हेराक्लीज़ ऑरोरा, ऐफ्रॉडायटी ट्रॉय इत्यादि न जाने कितने देवी-देवता, वीर नायक-नायिकाएँ स्थान और घटनाएँ हैं, जिनके ज़िक्र अंग्रेज़ी और भारतीय साहित्य में प्रारम्भ से ही आने लगते हैं और आगे हर क्षेत्र में इनके सन्दर्भ मिलते हैं। कमल नसीम ने बेहद ही परिश्रम से इन परिचयात्मक कहानियों को वर्गीकृत किया और प्रामाणिक रूप से लिखा है।
यह अनोखा, विलक्षण सन्दर्भ-कोश एकदम नए ढंग से हमें इस उपयोगी, ज्ञानवर्धक और दिलचस्प सामग्री से परिचित कराता है। हज़ारों महाकाव्यों, काव्यों, नाटकों, फ़िल्मों इत्यादि की आधारभूत सामग्री की पृष्ठभूमि खोलता है। इसमें हैं—देवी-देवता, वीर, पराक्रमी, चमत्कारी नायक, योद्धा, सुन्दर-कुरूप नायिकाएँ, घटनाएँ, घटना-स्थल, युद्ध और निर्माण, विजय-पराजय, स्वप्न और इतिहास, मनुष्य के आदिम और उदात्त रूप, सम्बन्धों के घिनौने और पूज्य धरातल।
ये कहानियाँ जितनी रोचक, रोमांचक, प्रतीकात्मक और ज्ञानवर्धक हैं, उतनी ही उपयोगी भी। पुस्तक में पीछे दी गई अनुक्रमणिका की सहायता से वांछित प्रसंगों का विस्तृत विवरण आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह ऐसा कोश है, जिसे न सिर्फ़ इतिहास के छात्र, प्राध्यापक वरन् सुधी पाठक भी पढ़ना और सँजोकर रखना चाहेंगे।
ISBN: 9788126714865
Pages: 592
Avg Reading Time: 20 hrs
Age : 18+
Country of Origin: India
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Habib Tanveer
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- Description: ‘राजा चम्बा और चार भाई’ हबीब तनवीर का लिखा और उन्हीं के द्वारा खेला गया ऐसा नाटक है जिसकी अपेक्षित चर्चा नहीं हुई। राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखकर लिखा गया यह ऐतिहासिक दिखनेवाला नाटक, किसी समय या किसी मुल्क के इतिहास से तो ताल्लुक़ नहीं रखता, लेकिन इसकी विषयवस्तु हर दौर और हर जगह के लिए आज भी मौज़ूँ है। राजनीति, जिसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना होता है और जिसके लिए वह जन-गण के कल्याण का बहाना करती है, लोगों को बाँटकर ही अपना मनचाहा पाती है। एक काल्पनिक भूगोल में यह नाटक हमारा परिचय कुछ गंभीर वास्तविकताओं से कराता है। हबीब साहब ने अपने नाटकों में अकसर ही सत्ता और ताक़त को आईना दिखाते हुए अवाम की आवाज़ को बुलन्द किया है। यह नाटक उसी अवाम को एक रहने का सन्देश देता है, और बताता है कि आपसी मन-भेद सिर्फ़ विनाश की ओर ले जाता है। तीन अंकों और सत्रह दृश्यों में बँटा यह नाटक आज के समय में ख़ासतौर पर प्रासंगिक है। नाट्य-समूह इसे खेलते हुए जिस सार्थकता का अहसास करेंगे, उतना ही उपयोगी यह पाठकों को पढ़ते हुए भी लगेगा।
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