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Dhruvswamini

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गुप्त काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रचा गया नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ जयशंकर प्रसाद की अन्तिम नाट्य-कृति है जिसे उनकी श्रेष्ठतम नाट्य-रचना भी माना जाता है। मंचन की दृष्टि से भी अत्यन्त सफल रहे इस नाटक की घटनाओं का इतिहास-सम्मत तथ्यों की रोशनी में विवेचन भी प्रसाद ने इस पुस्तक में किया है। नाटक की कथा गुप्तवंश के शासक रामगुप्त की पत्नी ध्रुवस्वामिनी के इर्द-गिर्द घूमती है और प्राचीन भारत में स्त्री के आत्मसम्मान तथा साहस को रेखांकित करती है। रामगुप्त की उपेक्षा और सन्देह की शिकार ध्रुवस्वामिनी कायर राजा के निर्णय का सशक्त प्रतिरोध कर अपने सम्मान की रक्षा करती है तथा चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर राज्य के शत्रु शकराज से भी मुक्ति पाती है। यह नाटक भारतीय स्त्री का एक अनूठा चित्र प्रस्तुत करता है जिसमें नारीसुलभ कोमल भावनाओं के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम तथा अपने निजी सम्मान का अद् भुत सम्मेल देखने को मिलता है। नाटक की भाषा संस्कृतनिष्ठ होते हुए भी इतनी प्रवहमान है कि हर पात्र तथा हर परिस्थिति का जैसे एक चित्र हमारे सामने उभरता चलता है। बहुत ज्‍़यादा पात्र का न होना इसे मंच-संयोजन के लिहाज़ से भी एक अच्छे नाटक का रूप देता है।

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गुप्त काल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रचा गया नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ जयशंकर प्रसाद की अन्तिम नाट्य-कृति है जिसे उनकी श्रेष्ठतम नाट्य-रचना भी माना जाता है। मंचन की दृष्टि से भी अत्यन्त सफल रहे इस नाटक की घटनाओं का इतिहास-सम्मत तथ्यों की रोशनी में विवेचन भी प्रसाद ने इस पुस्तक में किया है। नाटक की कथा गुप्तवंश के शासक रामगुप्त की पत्नी ध्रुवस्वामिनी के इर्द-गिर्द घूमती है और प्राचीन भारत में स्त्री के आत्मसम्मान तथा साहस को रेखांकित करती है। रामगुप्त की उपेक्षा और सन्देह की शिकार ध्रुवस्वामिनी कायर राजा के निर्णय का सशक्त प्रतिरोध कर अपने सम्मान की रक्षा करती है तथा चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर राज्य के शत्रु शकराज से भी मुक्ति पाती है। यह नाटक भारतीय स्त्री का एक अनूठा चित्र प्रस्तुत करता है जिसमें नारीसुलभ कोमल भावनाओं के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम तथा अपने निजी सम्मान का अद् भुत सम्मेल देखने को मिलता है। नाटक की भाषा संस्कृतनिष्ठ होते हुए भी इतनी प्रवहमान है कि हर पात्र तथा हर परिस्थिति का जैसे एक चित्र हमारे सामने उभरता चलता है। बहुत ज्‍़यादा पात्र का न होना इसे मंच-संयोजन के लिहाज़ से भी एक अच्छे नाटक का रूप देता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
1994
Weight
100 grams
ISBN-13
9788180319242
Pages
56
Reading time
~2 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12.5 × 18 cm
Language
Hindi

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