Sampoorna Kahaniyan : Amarkant : Vols. 1-2
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अमरकान्त हिन्दी के ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने किसी वाद या विचारधारा को अपनी रचनात्मकता का आधार नहीं बनाया, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और संवेदनापूर्वक देखी गई जीवन-स्थितियों को लेकर जन-पक्षधर और प्रगतिशील कहानियाँ लिखीं। मध्यवर्गीय जीवन, उसके विरोधाभासों और समाज के दैनंदिन व्यवहार में निहित अमानवीयता को खासतौर पर रेखांकित करते हुए उन्होंने एक विराट कथा-संसार का सृजन किया। उनकी कुछ कहानियों के सन्दर्भ में यशपाल ने उनकी तुलना गोर्की से की थी।</p> <p>वे अपने पात्रों को एक निस्पृह भाव से देखते हैं, और अपनी तरफ से कोई विचार या दृष्टि आरोपित किए बिना, महज मानवीयता के परिप्रेक्ष्य में उन्हें यथावत चित्रित करते हैं, यही विशेषता उनकी कहानियों और उनके रचे पात्रों को असाधारण बना देती है। उनके कथा-संसार में हम आज़ादी बाद के लंबे समय की एक सांस्कृतिक-सामाजिक पड़ताल से रू-ब-रू होते हैं।</p> <p>यह उनकी कहानियों की समग्र प्रस्तुति है। ‘हत्यारे’ और ‘दोपहर का भोजन’ जैसी कालजयी कहानियों के रचनाकार को यहाँ आप उसकी सम्पूर्ण विशेषताओं के साथ जान पाएँगे।
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अमरकान्त हिन्दी के ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने किसी वाद या विचारधारा को अपनी रचनात्मकता का आधार नहीं बनाया, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और संवेदनापूर्वक देखी गई जीवन-स्थितियों को लेकर जन-पक्षधर और प्रगतिशील कहानियाँ लिखीं। मध्यवर्गीय जीवन, उसके विरोधाभासों और समाज के दैनंदिन व्यवहार में निहित अमानवीयता को खासतौर पर रेखांकित करते हुए उन्होंने एक विराट कथा-संसार का सृजन किया। उनकी कुछ कहानियों के सन्दर्भ में यशपाल ने उनकी तुलना गोर्की से की थी।</p>
<p>वे अपने पात्रों को एक निस्पृह भाव से देखते हैं, और अपनी तरफ से कोई विचार या दृष्टि आरोपित किए बिना, महज मानवीयता के परिप्रेक्ष्य में उन्हें यथावत चित्रित करते हैं, यही विशेषता उनकी कहानियों और उनके रचे पात्रों को असाधारण बना देती है। उनके कथा-संसार में हम आज़ादी बाद के लंबे समय की एक सांस्कृतिक-सामाजिक पड़ताल से रू-ब-रू होते हैं।</p>
<p>यह उनकी कहानियों की समग्र प्रस्तुति है। ‘हत्यारे’ और ‘दोपहर का भोजन’ जैसी कालजयी कहानियों के रचनाकार को यहाँ आप उसकी सम्पूर्ण विशेषताओं के साथ जान पाएँगे।
Book Details
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ISBN9789360864125
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Pages560
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Avg Reading Time19 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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नई और मौलिक है। उनकी कृतियाँ आज के जीवन की वास्तविकता को कई स्तरों पर उद्घाटित करती हैं और जब वे उनकी व्यंग्य की धार देते हैं तो वे एक ओर मानव-मन का आन्तरिक संस्कार करती हैं, वहीं दूसरी ओर आस्था, विश्वास व संघर्ष की प्रेरणा भी देती
हैं।कहानियों की तरह ही अमरकान्त के कई उपन्यास भी महत्त्वपूर्ण हैं, जिनमें ‘सूखा पत्ता’ हिन्दी साहित्य की स्थायी निधि है। प्रस्तुत उपन्यास ‘बीच की दीवार’ मध्यम वर्ग की बदलती हुई परिस्थितियों एवं मनःस्थितियों का विश्लेषण करनेवाली एक विशेष कृति है। इसमें अमरकान्त ने आज के जीवन के अन्तर्द्वन्द्वों एवं अन्तर्विरोधों की प्रामाणिक तस्वीर प्रस्तुत की है। इस उपन्यास के केन्द्र में एक ऐसी नारी है, जो आज की अवसरवादी ज़िन्दगी के भँवर-जाल में फँसकर संघर्ष करती है, आगे बढ़ती है और विकास की वांछित मंज़िल प्राप्त करने में सफल होती है। पूरा उपन्यास जहाँ हमें आनन्दित करता है, वहीं सामाजिक बदलाव के लिए आस्था व विश्वास भी प्रदान करता है।
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हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
- Author Name:
J.B. Kriplani
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अनेक दूसरे लोगों की तरह मैं भी विदेशी साम्राज्यवाद के जुए से मातृभूमि को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारी आंदोलन से करीब से जुड़ा था। गांधीजी जब सन् 1915 के शुरू में दक्षिण अफ्रीका से आए तो उनके निकट संपर्क में आने वाला मैं पहला राजनीतिक कार्यकर्ता था। मैं उनके पहले सत्याग्रह आंदोलन के साथ भी करीब से जुड़ा था, जो चंपारण (बिहार) में गोरे निलहों के अत्याचार के खलाफ हुआ। हमारी आजादी की लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण और बेचैनी वाले दौर में मैं कांग्रेस का बारह वर्ष तक महामंत्री रहा। जिस साल देश को आजादी मिली, उस वक़्त मैं कांग्रेस अध्यक्ष था। मेरे दोस्तों को लगता है कि हमारे राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाओं और व्यक्तियों के बारे में मेरी जानकारी काफी अंतरंग और नई चीजें सामने लाने वाली होगी। इस कारण मेरे संस्मरणों का कुछ ऐतिहासिक महत्व होगा। इसलिए मैंने जो कुछ लिखा है, उसमें अपने बारे में कम लिखकर हमारी आजादी की लड़ाई पर ज्यादा लिखा है। इस पुस्तक को मैंने ‘माई टाइम्स : मेरा दौर’ नाम दिया है, पर इसमें ‘मैं’ का जिक्र उतना ही भर है, जितना जरूरी है। मेरे जीवन की कथा में भी कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का बड़ा हिस्सा समाया हुआ है। इसलिए यह कोई आत्मकथा न होकर, इन बड़ी और महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड भी है और इनका वर्णन करते हुए मैंने यह जिक्र कम किया है कि मैंने क्या-क्या किया, बल्कि यह बताने की कोशिश की है कि मैंने तब क्या देखा और समझा।
Mera Daur "मेरा दौर: एक आत्मकथा" Book in Hindi- J.B. Kriplani
J.B. Kriplani
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Leo Tolstoy Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Leo Tolstoy
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"‘‘क्या वे लोग खेत जोत रहे हैं? क्या उन लोगों ने अपना काम खत्म कर लिया?’’ ‘‘उन लोगों ने आधे से अधिक खेत जोत लिये हैं।’’ ‘‘क्या कुछ भी काम बचा नहीं है?’’ ‘‘मुझे तो नहीं दिखा; पर उन्होंने जुताई अच्छी तरह से की है। वे सभी डरे हुए हैं।’’ ‘‘ठीक है। अब तो जमीन ठीक हो गई है न?’’ ‘‘हाँ, अब खेत तैयार हैं और उनमें अफीम के पौधों के बीज डाले जा सकते हैं।’’ मैनेजर थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला, ‘‘वे लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं? क्या वे मुझे गाली देते हैं?’’ बूढ़ा कुछ हकलाने लगा, पर माइकल ने उसे सच बोलने के लिए कहा, ‘‘तुम मुझे सच बताओ। तुम अपने शब्द नहीं, बल्कि किसी और के शब्द बोल रहे हो। यदि तुम मुझे सच-सच बताओगे, तब मैं तुमको इनाम दूँगा; और अगर तुम मुझे धोखा दोगे तो ध्यान रखना, मैं तुम्हें बहुत मारूँगा। कर्तुशा! इसे एक गिलास वोदका दो, ताकि इसमें साहस पैदा हो।’’ —इसी संग्रह से • सुप्रसिद्ध रूसी कथाकार लियो टॉलस्टॉय ने जीवन के सभी पक्षों पर प्रभावी रचनाएँ की हैं। उन्होंने धर्म में व्याप्त पाखंड तथा तत्कालीन कुरीतियों को अनावृत किया। मनोरंजन के साथ-साथ मन को उद्वेलित करनेवाली सरस टॉलस्टॉय की लोकप्रिय कहानियों का संग्रह।"
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