Sookha Patta
Author:
AmarkantPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 239.2
₹
299
Available
वर्ष 1959 में प्रकाशित ‘सूखा पत्ता’ को अमरकान्त की ही नहीं, बल्कि उस दौर में लिखे गए समूचे उपन्यास-साहित्य की एक विशिष्ट उपलब्धि माना जाता है।</p>
<p>आज़ादी से पहले के पूर्वी उत्तर प्रदेश का क़स्बाई परिवेश और इसके किशोर कथा-नायक कृष्ण का चित्रण यहाँ असाधारण रूप में हुआ है। कृष्ण के मित्र मनमोहन के रूप में किशोरावस्था की मानसिक विकृतियों, कृष्ण के ‘क्रान्तिकारी’ रूझान के बहाने अपरिपक्व युवा मानस की कमज़ोरियों और कृष्ण-उर्मिला-प्रेमकथा के सहारे समाज की मानव-विरोधी रूढ़ परम्पराओं पर तीखा प्रहार इस उपन्यास में किया गया है।</p>
<p>किशोर वय से युवावस्था में प्रवेश करते छात्र-जीवन की अनुभव-विविधता के बीच अनायास जुड़ गए कृष्ण-उर्मिला प्रसंग को लेखक ने जिस सूक्ष्मता और विस्तार से उकेरा है, उसकी ताज़गी, सहजता और सादगी हिन्दी कथा-साहित्य की बेजोड़ उपलब्धि है। इस प्रणय-गाथा की पवित्र और गहन आत्मीय सुगन्ध मन में कहीं गहरे पैठ जाती है; और साथ ही यह तकलीफ़ भी कि सामाजिक रूढ़ियों की दीवार आख़िर कब तक दो युवा-हृदयों के बीच उठाई जाती रहेगी?
ISBN: 9788126709830
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Lajja
- Author Name:
Ilachandra Joshi
- Book Type:

-
Description:
कमलिनी (सेक्रेटरी का यही नाम था) इस ढंग से मुस्कराने लगी जैसे वह मेरे दिल की सब बातें ताड़ गई हो। बोली, “ऐसे गुणवान पुरुष को स्त्रियों की महफ़िल में लाना क्या ख़तरे की बात नहीं है?” मैंने पूछा, “ख़तरा कैसा?” “अरी पगली, समझती नहीं? तेरे अनुमोदित और इच्छित पुरुष की आँखें जब इतनी अलबेली नारियों पर दौड़ेंगी तो क्या फिर वह तेरी परवाह करेगा?” “दुर। कहके मैंने, गुस्से में आकर उसकी पीठ पर एक धौल जमा दी। पर उसकी इस बात से मेरे हृदय में भय का संचार होने लगा। कमलिनी ने कहा, “अच्छी बात है। मुझे कोई एतराज़ नहीं। पर मैं सावधान किए देती हूँ। पीछे पछताना पड़ेगा।" यूनिवर्सिटी के लड़कों और प्रोफ़ेसरों के साथ कमलिनी की बड़ी घनिष्ठता थी। बहुत सम्भव है, उन लोगों के स्वभाव से परिचित होने पर वह पुरुषों की प्रकृति से अभिज्ञ हो चुकी थी। उसकी बात से कुछ भय होने पर भी मुझे विशेष चिन्ता नहीं हुई। मुझे अपने रूप-गुण का बड़ा घमंड था। किसी व्यक्ति को मुझे छोड़कर अन्यत्र जाने का लोभ हो सकता है, यह आशंका मेरे हृदय में उत्पन्न नहीं हो सकती थी।
—इसी पुस्तक से।
Pahar Dhalte
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

- Description: बीहड़ सर्दियों की एक रात के आहिस्ता-आहिस्ता ढलते पहर। फ़ज़ा को इमरज़ेंसी के नाख़ूनों ने जकड़ रखा है। शहर की आम बस्तियों से दूर एक आलीशान कोठी के अँधेरे-उजाले में हरकत करते कुछ किरदार, लेखन में उन्हें, रात के अँधेरे में, एक शातिर जासूस की महारत के साथ, ऐसे पकड़ा गया है कि वे कभी यथार्थ लगते हैं कभी फ़ैन्टेसी। इन्हें देखकर सहसा मुक्तिबोध की लम्बी कविता ‘अँधेरे में’ के चरित्र याद आते हैं। इन चरित्रों में नवाब, बेगम, अफ़सर, मंत्री, व्यापारी, क़व्वाल, औरतें, ख़ादिम, शोहदे, सब हैं। अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियों से बच निकलने का पार्ट अदा करते हुए। इस भुतहा नाटक में पाखंड, गुरूर, नफ़रत, ईर्ष्या, सूफ़ियाना क़लाम, इश्क, पछतावा, आँसू, फ़रेब, मक्कारी सभी के रक़्स हैं। रात के एक हिस्से की कहानी के बाहर जाने कितनी और रातें और दिन हैं जहाँ लेखक हमें ले जाता है, और फिर वापस ले आता है, वर्तमान में सक्रिय भूतों की बारात के बीचोबीच।
Khabsoorat Bahoo
- Author Name:
Nag Bodas
- Book Type:

-
Description:
— दिल्ली रंगमंच पर अब तक का यह सर्वोत्तम संगीत फॉम।
रोमेशचन्द्र (‘द हिन्दू’, 15 मई, 1992)
शहरों में बसे हिन्दी के नाटककार अपने नाटकों में आमतौर पर किसी बोली का उपयोग करने से कतराते हैं, जिस कारण हिन्दी में केवल बोली में लिखी गईं पाण्डुलिपियाँ अत्यन्त नगण्य हैं। ग्वालियर के आसपास प्रचलित बुन्देली और ब्रज के मिश्रण से बनी बोली में लिखा नाटक ‘खबसूरत बहू’ इस दिशा में एक स्वागत योग्य क़दम है।
—नेमिचन्द्र जैन (‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’, नई दिल्ली, 21 मई, 1992)
नाटक की हर घटना मन को छू रही थी।
—जगमोहन (‘नवभारत टाइम्स’, नई दिल्ली)
प्रतिमा काजमी का सतत सन्तुलित चरित्रांकन नाटक को बाँधकर रखता है।
—कविता नागपाल (‘हिन्दुस्तान टाइम्स’, नई दिल्ली, 17 मई, 1992)
जो बात स्पष्ट रूप से दिखलाई देती है, वह यह है कि चरित्रों की बारीकियों को बख़ूबी उजागर किया गया है और नाटककार ने गाँव के जीवन को देखने में काफ़ी समय लगाया है।
—मोनिका नरूला (‘इंडियन एक्सप्रेस’, नई दिल्ली, 17 मई, 1992)
Love In Jamshedpur
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: Do you remember who was your first crush? Did you too dream of marrying her? Everyone does somehow, isn't it? So did Arnab! When he saw simpi for the very first time, he fell in for a forever-love. Yet, the dream took a different turn when she rejected him time and again. What lies ahead? Will Arnab be able to impress his first love? Or will he fail, again? Bestselling author, ajitabha Bose brings to you a true tale of love based in the small town of Jamshedpur.
Ek Thag Ki Dastan
- Author Name:
Filip Midoz Teilar
- Book Type:

-
Description:
700 से अधिक हत्याएँ करके अपराध के महासिन्धु में डूबा हुआ अमीर अली जेल में सामान्य बन्दियों से पृथक् बड़े ठाट-बाट से रहता था। वह साफ़ कपड़े पहनता, अपनी दाढ़ी सँवारता और पाँचों वक़्त की नमाज़ अदा करता था। उसकी दैनिक क्रियाएँ नियमपूर्वक चलती थीं। अपराधबोध अथवा पश्चात्ताप का कोई चिह्न उसके मुख पर कभी नहीं देखा गया। उसे भवानी की अनुकम्पा और शकुनों पर अटूट विश्वास था। एक प्रश्न के उत्तर में उसने कहा था कि भवानी स्वयं उसका शिकार उसके हाथों में दे देती हैं, इसमें उसका क्या कसूर? और अल्लाह की मर्ज़ी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। उसका यह भी कहना था कि यदि वह जेल में न होता तो उसके द्वारा शिकार हुए यात्रियों की संख्या हज़ार से अधिक हो सकती थी।
प्रस्तुत पुस्तक ‘एक ठग की दास्तान’ 19वीं शताब्दी के आरम्भ काल में मध्य भारत, महाराष्ट्र तथा निजाम के समस्त इलाक़ों में सड़क-मार्ग से यात्रा करनेवाले यात्रियों के लिए आतंक का पर्याय बने ठगों में सर्वाधिक प्रसिद्ध अमीर अली के विभिन्न रोमांचकारी अभियानों की तथ्यपरक आत्मकथा है। इसे लेखक ने स्वयं जेल में अमीर अली के मुख से सुनकर लिपिबद्ध किया है।
औपन्यासिक शैली में प्रस्तुत अत्यधिक मनोरंजक आत्मकथात्मक पुस्तक।
Alag-Alag Vaitarni
- Author Name:
Shivprasad Singh
- Book Type:

-
Description:
प्रेमचन्द के बाद ग्रामीण जीवन का चित्रण करनेवाले सफल कथाकारों में शिवप्रसाद जी अगली पंक्ति में आते हैं। अपने इस वृहद् उपन्यास में उन्होंने उत्तर प्रदेश के करैता गाँव को समस्त भारतीय गावों के प्रतिनिधि के रूप में ग्रहण करके अत्यन्त यथार्थवादी एवं विचारोत्तेजक चित्रण प्रस्तुत किया है। स्वतंत्रतता आई, ज़मींदारी टूटी। करैता के किसानों को लगा कि दिन फिरेंगें। मगर हुआ क्या। अलग-अलग वैतरणी। अलग-अलग नर्क। इसे निर्मित किया है भूतपूर्व ज़मींदारी ने, धर्म तथा समाज के पुराने ठेकेदारों ने, भ्रष्ट सरकारी ओहदेदारों ने जिससे इस वैतरणी में जूझ और छटपटा रही है गाँव की प्रगतिशील नई पीढ़ी। निश्चय ही यह कृति हिन्दी उपन्यास साहित्य की एक उपलब्धि है।
Daastan-E-Guru Dutt
- Author Name:
Mahmood Farooqui
- Book Type:

- Description: ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ उस गुरुदत्त के दुःख और सृजनात्मक उल्लास की कथा है जिसने अपने वक़्त से आगे बढ़कर ‘प्यासा’, ‘काग़ज़ के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा को दीं। उस गुरुदत्त की जिसने बहुत कम उम्र में अपनी उम्मीदों-आकांक्षाओं के बाग़ों को खिलते भी देखा, और बहुत कम ही उम्र में अपने तमाम हासिल को परे रखकर उदासी की ऐसी राह पकड़ी जो कभी पलट न सकी। गुरुदत्त की दास्तान समाज के पाखंड और इनसान के पैदा किए रिवाज़ों से असहमत हर उस बेचैन रूह की दास्तान है जो इस दुनिया को, बड़े होने के इसके तमाम दावों से इतर, वास्तविक अर्थों में इसे बड़ा देखना चाहती है। ऐसी दुनिया जहाँ कोई किसी का ग़ुलाम न हो, कोई किसी का शिकार न हो। इस दास्तान में गुरुदत्त नाम की उस विकट पहेली की ज़िन्दगी के दृश्य भी हैं, उसकी जो फ़िल्में आज क्लासिक कही जाती हैं, उनके बनने की कहानी भी है, उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव, इश्क़, उसके शौक़ और उसकी ख़ुदकुश रचनात्मकता के क़िस्से भी, साथ ही हिन्दी सिनेमा के उस निर्णायक दौर की दिलचस्प जानकारी भी। और यह दास्तान कही दास्तानगोई के उस्ताद महमूद फ़ारूक़ी ने!
Jungle (Raj)
- Author Name:
Upton Sinclaire
- Book Type:

-
Description:
अप्टन सिंक्लेयर की सर्वाधिक चर्चित कृति ‘जंगल’ ने विगत सदी के पहले दशक में पूरे अमेरिका में एक आन्दोलन-सा खड़ा कर दिया था और अमेरिकी सत्ता को हिला डाला था। इस उपन्यास के प्रकाशन को अमेरिकी मज़दूर आन्दोलन के इतिहास की एक घटना माना जाता है। शिकागो स्थित मांस की पैकिंग करनेवाले उद्योगों और उनके मज़दूरों की नारकीय स्थिति का बयान करनेवाले इस उपन्यास ने थियोडोर रूज़वेल्ट की सरकार को ‘प्योर फूड एंड ड्रग एक्ट’ और ‘मीट इंस्पेक्शन एक्ट' नामक दो क़ानून बनाने के लिए बाध्य कर दिया था।
अनेक कठिनाइयों के बाद 1906 में पुस्तकाकार प्रकाशित होते ही ‘दि जंगल’ की डेढ़ लाख से भी अधिक प्रतियाँ हाथोंहाथ बिक गईं। अगले कुछ ही वर्षों के भीतर सत्रह भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ और लगभग पूरी दुनिया में इसे बेस्टसेलर का दर्जा मिला। ‘दि न्यूयार्क इवनिंग वर्ल्ड’ ने लिखा था : “बायरन को रातोंरात मिली प्रसिद्धि के बाद से एक किताब से एक ही दिन में वैसी विश्वव्यापी ख्याति अर्जित करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता जैसी अप्टन सिंक्लेयर को मिली है।”
‘दि जंगल’ ने पूरे अमेरिकी समाज को झकझोर दिया। लगभग आधी सदी पहले प्रकाशित हैरियट बीचर स्टो के उपन्यास ‘अंकल टॉम्स केबिन’ (1852) के बाद यह पहली पुस्तक थी जिसने इतना गहरा सामाजिक प्रभाव डाला था।
इस उपन्यास का मूल उद्देश्य शिकागो स्टॉकयाड् र्स में व्याप्त गन्दगी और अस्वास्थ्यकर स्थितियों को उजागर करना मात्र नहीं, बल्कि इसकी मूल थीम उजरती ग़ुलामी को कठघरे में खड़ा करना है। सिंक्लेयर ने स्पष्ट बताया कि उपन्यास का उद्देश्य औद्योगिक पूँजीवाद में मेहनतकश स्त्रियों-पुरुषों की अमानवीय जीवन-स्थितियों का जीवन्त दस्तावेज़ प्रस्तुत करना और यह बताना था कि समाजवाद ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हो सकता है। उपन्यास का सादा, रुखड़ा, निर्मम गद्य वस्तुतः उस क़िस्म के मानव-जीवन के बयान के सर्वथा अनुरूप है जो सिंक्लेयर ने शिकागो के स्टॉकयाड् र्स में देखा, जहाँ काम करनेवाले औरत-मर्द उन मूक पशुओं जैसे ही हो गए थे जिन्हें कसाईबाड़े में वे जिबह किया करते थे।
आज के नवउदारवादी दौर में भारत जैसे जिन देशों में एक बार फिर उजरती ग़ुलामी के नए-नए नर्क रचे जा रहे हैं, वहाँ के लिए सिंक्लेयर और ‘जंगल’ जैसी उनकी कृतियाँ एक बार फिर प्रासंगिक हो गए हैं।
Apne Khilaone
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ajnabi
- Author Name:
Albert Camus
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
फ्रांस के अमर लेखक, नोबेल पुरस्कार-विजेता अल्बैर कामू मानव-अन्तर्मन के संवेगों और कुंठाओं को अनावृत करने में पटु हैं। नियति में उनका विश्वास है और कृत्य की स्वतंत्रता एक निर्दिष्ट परिधि में ही वह मानते हैं। आरम्भ से अन्त तक पाठक की रुचि को साधे रखनेवाले इस उपन्यास में नायक के समस्त क्रिया-कलाप और उसके साथ घटी घटनाओं में उनका यही जीवन-दर्शन व्यक्त हुआ है।
विश्व के विशिष्ट उपन्यास-साहित्य में स्थान पानेवाले उपन्यास ‘अजनबी’ की कथा-वस्तु न केवल हमारे मर्म को मथ देने में सफल होती है, वरन् हमें जीवन और कर्म, और इन दोनों के उद्देश्यों के सम्बन्ध में भी सोचने पर विवश करती है।
सन् 1942 में प्रकाशित इस उपन्यास को द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न हताशा और विसंगतियों को अभिव्यक्त करनेवाली कृति माना जाता है। उपन्यास के नायक से कामू यहाँ जीवन की निरुद्देश्यता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं; नायक की समाज से विरक्ति और उदासीनता का जैसा मार्मिक चित्रण कामू ने इस उपन्यास में किया है, वह आज भी स्तब्ध कर देता है।
Pachpan Khambhe Lal Deewaren
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

-
Description:
उषा प्रियम्वदा की गणना हिन्दी के उन कथाकारों में होती है जिन्होंने आधुनिक जीवन की ऊब, छटपटाहट, संत्रास और अकेलेपन की स्थिति को अनुभूति के स्तर पर पहचाना और व्यक्त किया है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में एक ओर आधुनिकता का प्रबल स्वर मिलता है तो दूसरी ओर उनमें चित्रित प्रसंगों तथा संवेदनाओं के साथ हर वर्ग का पाठक तादात्म्य का अनुभव करता है; यहाँ तक कि पुराने संस्कारवाले पाठकों को भी किसी तरह के अटपटेपन का एहसास नहीं होता।
‘पचपन खम्भे लाल दीवारें’ उषा प्रियम्वदा का पहला उपन्यास है, जिसमें एक भारतीय नारी की सामाजिक-आर्थिक विवशताओं से जन्मी मानसिक यंत्रणा का बड़ा ही मार्मिक चित्रण हुआ है।
छात्रावास के पचपन खम्भे और लाल दीवारें उन परिस्थितियों के प्रतीक हैं जिनमें रहकर सुषमा को ऊब तथा घुटन का तीखा एहसास होता है, लेकिन फिर भी वह उनसे मुक्त नहीं हो पाती, शायद होना नहीं चाहती।
उन परिस्थितियों के बीच जीना ही उसकी नियति है। आधुनिक जीवन की यह एक बड़ी विडम्बना है कि जो हम नहीं चाहते, वही करने को विवश हैं। लेखिका ने इस स्थिति को बड़े ही कलात्मक ढंग से प्रस्तुत उपन्यास में चित्रित किया है।
Dinosaur
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: "डायनासोर—विनोद कुमार मिश्र संसार के विलुप्त प्राणी डायनासोर के बारे में अब तक की गई खोजें दरशाती हैं कि पृथ्वी पर अलग-अलग प्रकार के प्राणियों का आधिपत्य रहा है। प्रकृति के कोप की विभिन्न मुद्राएँ भी सामने आई हैं—उल्काओं का गिरना, समुद्री तल का कभी ऊपर आ जाना तो कभी नीचे चला जाना, भयानक बाढ़, सुनामी आदि। डायनासोर अकेले प्राणी नहीं हैं, जो विलुप्त हुए। ऐसे और भी प्राणी होंगे। आगे होनेवाले अनुसंधानों में उनके बारे में भी अद्भुतजानकारियों का पिटारा खुलेगा। डायनासोर पर अनुसंधान अभी चल रहा है। आगे इसमें और रोचक मोड़ आएँगे। अब तक के अनुसंधानों पर आधारित हिंदी में यह सचित्र पुस्तक पाठकों की इससे संबंधित जानकारी में पर्याप्त वृद्धि करेगी। अभी भी डायनासोर के नए-नए जीवाश्म तलाशे जा रहे हैं। उन पर नई-नई मान्यताएँ सामने आ रही हैं। अत: यह कहा जा सकता है कि हिंदी में संभवत: यह इस विषय पर पहली पुस्तक तो है, पर अंतिम नहीं है। बच्चों ही नहीं, सभी आयु वर्ग के पाठकों में डायनासोर के बारे में जानने की अधिक जिज्ञासा रहती है। आशा है, यह पुस्तक अपने इस उद्देश्य को अवश्य पूरा करेगी।"
Jharokhe
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description: ‘झरोखे’ एक छोटे-से परिवार की व्यथा-कथा को प्रस्तुत करनेवाला मार्मिक उपन्यास है। लेखक ने एक छोटे-से बालक की आँखों से उस परिवार में घटनेवाली छोटी-छोटी घटनाओं को देखने और उनका उल्लेख करने की कोशिश की है। एक-एक घटना एक-एक प्रबल संस्कार बनकर आती है और परिवार के बच्चों के भावी चरित्र की रूपरेखा गढ़ती चली जाती है। पारिवारिक जीवन में घटनेवाली घटनाएँ आम तौर पर अल्प और साधारण ही होती हैं, पर संस्कारों के रूप से उनका महत्त्व प्रचंड होता है। इन्हीं अल्प और साधारण लगनेवाली घटनाओं के नीचे ज़िन्दगी करवट लेती रहती है। यही छोटी-छोटी घटनाएँ पात्रों के जीवन में निर्णायक साबित होती हैं और उनकी ज़िन्दगी का रुख़ बदल देती हैं। एक छत के नीचे रहते हुए भी सभी की राहें अलग-अलग हैं। इसकी कथावस्तु में जहाँ एक ओर जीवन के उल्लसित क्षणों का चित्रण है, वहीं उसके दु:ख-दर्द और उसकी निर्मम गति का भी अविस्मरणीय रेखांकन हुआ है।
Rokar Jo Mili Nahin
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: 'रोकड़ जो मिली नहीं' वस्तुत: मनुष्य के भाग्य का इतिहास है। आज के युग में मनुष्य टेक्नोलॉजी के तर्क से पैसे को ही सब कुछ मानकर किस प्रकार के अनैतिक कार्य करता है और अन्तत: सुख उसे समृद्धि से नहीं मिलता है। इस उपन्यास में 'सोने के हार की चोरी' की खोज के माध्यम से मानव की कमज़ोरियों का रहस्य समझने का प्रयत्न किया गया है। ब्लैक प्रिंस का इतिहास पैसे के पीछे पागल लोगों का इतिहास है। जासूसी कथा शिल्प के माध्यम से रचनाकार ने कलकत्ता महानगर के काले पक्ष को उजागर करने का आश्चर्यजनक प्रयत्न किया है। कौतूहल मनोरंजन आदि तत्त्वों से युक्त होने के बावजूद यह ‘रहस्य रोमांच’ से भिन्न एक साहित्यिक रचना है, यही इसका रहस्य है। सुनीति मित्र, झगड़ू और ब्लैक प्रिंस तो सामाजिक व्यवस्था के उस पक्ष के परिणाम हैं जो रोटी के लिए पूँजी की भूख पैदा करता है। अपराधों के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण क्या हैं, यह पुस्तक पढ़कर समझा जा सकता है, क्योंकि अपराध इसमें स्वयं प्रतीक के रूप में प्रयुक्त है। वस्तुत: इन्हीं कारणों से पुस्तक रोचक और कौतूहलपरक ही नहीं, शैली की दृष्टि से भी आकर्षक है।
5 Jeevon Se Baatein | 5 जीवों से बातें
- Author Name:
Anita Gopesh
- Book Type:

- Description: गूगल और इंटरनेट ने बच्चों की कल्पना से प्रकृति के असली, जीवंत रंग कहीं छीन से लिए हैं। जबकि पेड़, पौधों और जीव-जंतुओं की दुनिया अनगिनत रंगों, रहस्यों और कहानियों से भरी है। जीव विज्ञान पढ़ाते हुए समझ आया कि यह संसार कितना रोचक है- और इतना विस्तृत कि इसे एक बार में बता पाना लगभग असंभव है। इसी सजीव दुनिया से बच्चों का परिचय कराने के लिए मैंने कुछ जाने-पहचाने जन्तुओं को बच्चों से बातें करते हुए पेश करने की कोशिश की है । उसी प्रयास से यह किताब जन्मी - ताकि बच्चे फिर से प्रकृति को उसके अपने रंगों में देख सकें, सुन सकें और महसूस कर सकें।
Crosshatch of Time
- Author Name:
Aswin T Dev
- Book Type:

- Description: Trust, a simple five letter word but a strong one which plays a major role in everyone life. This story is both a fairy tale and a story that shows the reality that life is not always a fairy tale. This tale is about two people, the coincidences in their life leading to different Phase in life. Their journey reaches an abrupt halt due to the distrust between them leading to an unsuccessful marriage. Trust breaks but the love doesn't. They both meet after ten years for their eldest daughter's marriage, the twin brothers come face to face after ten years and the youngest daughter sees her mother's face in real for the first time. A family reunion. Sweet right?? But not for long. Life starts throwing unexpected twists to their life forcing them to trust each other for survival. Can the "two" Trust each other after everything that had happened?? Love was deep inside them but what was on the surface was the broken trust. Can love build back a broken trust??.
Ek Ghoont Chandani
- Author Name:
Rakesh Kumar Singh
- Book Type:

-
Description:
यह छोटा-सा उपन्यास प्रेम की एक बड़ी कहानी है—प्रेम की, और प्रेम की खोज की और प्रेम के विस्तार की। कहानी खोए हुए प्रेम को ढूँढ़ने की, और मिल गए प्यार को बचाए रखने की।
प्यार की कोई एक परिभाषा नहीं होती, प्यार की परिभाषा से कभी कोई रिश्ता तय भी नहीं किया जा सकता; इस तथ्य को जानते हुए भी समाज, संसार प्यार को किसी न किसी रिश्ते में बाँध देना चाहता है, जहाँ वह धीरे-धीरे अपने सत्त्व को, अपनी ऊष्मा को खो देता है। यह कथा एक अनन्त और अकुंठ प्यार को सँजोए रखने की भीतरी जद्दोजहद की कहानी है। इसकी अपनी रवानी है, जैसे प्यार की होती है...और है अपने ढंग की पढ़त भी।
—इसी पुस्तक से
Krishnavtar : Vol. 5 : Satyabhama
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
कृष्ण-चरित की अनेकानेक विलक्षण घटनाओं को ऐतिहासिक और तर्कसंगत ढंग से उद्घाटित और व्याख्यायित करने वाली वृहद् औपन्यासिक कृति ‘कृष्णावतार’ का पाँचवाँ खंड है ‘सत्यभामा’।
‘सत्यभामा’ के रूप में मुंशी जी ने ऐसी नारी का अंकन किया है जो बचपन से ही स्वयं को कृष्ण-प्रिया मानती है और फिर उनके योग्य ‘वीर-पत्नी’ बनने का संकल्प लेकर भीषण कठिनाइयों में कूद पड़ती है। महत्त्वपूर्ण यह कि ये कठिनाइयाँ उसके धनाढ्य पिता सत्राजित द्वारा खड़ी की गई हैं जो कृष्ण के प्रति घोर शत्रु-भाव रखता है और अपनी अकूत सम्पदा का उपयोग राज्य-हित के विरुद्ध अपने ही वैभव-विलास को बढ़ाने में करता आ रहा है। कृष्ण इसके विरुद्ध हैं। इससे क्षुब्ध सत्राजित स्यमंतक मणि के बहाने कृष्ण के विरुद्ध षड्यंत्र रचता है। सत्यभामा इसे जानती है, इसलिए कृष्ण को बिना बताए उनके मित्र सात्यकि को साथ लेकर उस षड्यंत्र को विफल करने के लिए अन्तहीन जोखिमों से टकराती है और अन्ततः कृष्ण का विश्वास जीत लेने में सफल होती है।
इस कथा के माध्यम से मुंशी जी ने जहाँ सम्पत्ति के धर्मसम्मत उपभोग की आवश्यकता को रेखांकित किया है, वहीं तत्कालीन वन्य जीवन के बाह्याचारों, लोक-विश्वासों और वातावरण का भी लोमहर्षक चित्रण किया है। निश्चय ही इस ग्रन्थमाला का यह एक और महत्त्वपूर्ण खंड है।
Apradh Aur Dand
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky
- Book Type:

-
Description:
दोस्तोयेव्स्की ने अपने समय के निरंकुश शासन और सामाजिक संरचना में जी रहे आम रूसी लोगों के दारुण यंत्रणा-भरे जीवन और निरन्तर आत्मा पर बोझ डालने वाले अमानवीय परिवेश को, उनके अवसादों, घुटन और खंडित स्वप्नों को, पुरातन मन्थरता की पीड़ा को और साथ ही पूँजीवादी संक्रमण के साथ-साथ जारी सामाजिकता के व्यक्तित्व के विघटन को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। अपने दिक्काल के यथार्थ के कलात्मक पुनर्सृजन के लिए उन्होंने जो प्रविधि अपनाई, वह पात्रों के मनोजगत के संश्लिष्ट बहुपरती द्वन्द्वों में गहरे, और गहरे उतरते जाने की प्रविधि थी।
'अपराध और दंड' लेखक के सभी उपन्यासों में सबसे आसानी से पढ़ा जा सकनेवाला उपन्यास है। यद्यपि समझने की दृष्टि से यह एक कठिन और गूढ़ रचना है। इस उपन्यास को लेकर प्रचलित धारणाएँ अपेक्षाकृत सरलीकृत हैं, जिनमें सारा ध्यान उसकी अन्तर्वस्तु के किसी एक पहलू पर केन्द्रित किया जाता है। मसलन, 'अपराध और दंड' को प्राय: एक क़िस्म का 'फ़ौजदारी' उपन्यास माना जाता है अथवा उसे कोरी राजनीतिक कृति समझा जाता है, जो तथाकथित निषेधवादियों अर्थात गत शती के सातवें दशक के विप्लवी और क्रान्तिकारी विचारमना रूसी युवाजन के विरुद्ध लक्षित है।
निस्सन्देह, उपन्यास में ये सभी बातें किसी-न-किसी हद तक मौजूद हैं। दोस्तोयेव्स्की ने हत्यारे की मनोदशा का सूक्ष्मतम, बेजोड़ कलात्मक 'विश्लेषण' किया था। इस बात में भी कोई सन्देह नहीं कि उपन्यास रूसी निषेधवाद से गहरे रूप से सम्बन्धित है। इसी तरह इसमें तनावपूर्ण नैतिक-दार्शनिक मर्म भी भरपूर है। लेकिन मूल बात कुछ और ही है। दोस्तोयेव्स्की के उपन्यासों के मूलाधार में विचार-मानव यानी ऐसे चरित्र हैं जो इस या उस विचार के अन्धाधुन्ध समर्थक हैं। 'अपराध और दंड' इसका साकार रूप है; इसमें नायक ने अपने सर्वस्व को एक भ्रामक ही नहीं, वरन् भयावह विचार के लिए अर्पित कर दिया है...।
A Rogue's Love Diary
- Author Name:
Krish Gangadharan
- Book Type:

- Description: Staring at more than ten years of prison time for attempted manslaughter, Dr Chandran Ramachandran’s life was all but finished. At least, the victim and the witnesses were sure about that. They hoped that the monster would get beaten up by the prison inmates and die in there, like the street mongrel that he was. Chandru was doing himself no favours by choosing to remain silent in court. Awaiting his sentence, he reflected on the verses of Kahlil Gibran: “The river cannot go back. Nobody can go back. To go back is impossible in existence. ” The son of docile, orthodox, middle-class parents, and the grandson of a holy priest, Chandru did not lead the life that was expected of him, nor was he meant for the end that loomed large. Sixteen years ago, he was a University topper, a champion chess player, an expert swimmer, and a Bravery Award recipient. But all that had been frittered away in hurt, grief, anger, jealousy, and debauchery. A spurned love had turned him into a selfish, deceitful, immoral and ruthless rogue. He connived his way to money, success, sex, and a marriage, only to lose everything in his chosen path of self-destruction. But every loss is a harbinger of a gain, and Chandru was redeemed by the grace of the divine. Yet, the paths to redemption are seldom smooth. The demons from the past return to haunt Chandru. What if everything he had believed turned out to be lies? What if the truths that were buried are more dangerous than the lies that had ruined him? What if it all unravels? Will Chandru be able to save those who love him? Will Chandru unleash the rogue in him, one last time, for love? In the ending, will the beginning lie? Join the rogue in his incredible journey of love, guilt, deviousness, duplicity, and unbridled perversion as it unveils in the pages of his stolen diary – A Rogue’s Love Diary.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book