Maithilisharan Gupta Sanchayita
(0)
₹
125
₹ 100 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBNMaithilisharanGuptaSanchayitaPaperBack
-
Pages302
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Vichardhara Aur Sahitya
- Author Name:
Amrit Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dr. Ambedkar : Aayaam Darshan
- Author Name:
Kishor Makwana
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Stree : Adhikar Aur Kanoon
- Author Name:
Taslima Nasrin
- Book Type:

-
Description:
‘स्त्री : अधिकार और क़ानून’ तसलीमा नसरीन के आलेखों और टिप्पणियों का संकलन है। उनकी बहस मानवीय स्वतंत्रता के पक्षधर ऐसे तर्कों के आधार पर होती है, जिन्हें खुली सोच वाला कोई भी न्यायप्रिय व्यक्ति स्वीकार करेगा। लेकिन धार्मिक, पारम्परिक और शक्तिकामी दुराग्रहों में उलझे लोगों को वे स्वीकार्य नहीं लगते। उनके कहने का ढंग और उनकी भाषा भी कई लोगों को आपत्तिजनक लगती है।
इस संकलन के आलेखों में तसलीमा नसरीन ने तीन तलाक, घरेलू हिंसा, विवाह, समलैंगिकता, बांग्लादेश में हिन्दू स्त्रियों की स्थिति, बहुविवाह, महिला दिवस, स्त्री-देह, परिवार और अन्य कई विषयों पर विचार किया है—कहीं संस्मरणात्मक पृष्ठभूमि में और कहीं घटनाओं के बहाने से।
उनका कहना है कि अत्याचार के शिकार मनुष्यों में स्त्रियाँ ही एकमात्र ऐसा समूह हैं, जो अत्यन्त घनिष्ठ रूप में अपने अत्याचारियों के साथ वास करता है। पश्चिम की स्त्रियों ने अपने लिए एक घर का इन्तज़ाम कर लिया है, तो समाज उन्हें अब कोई डर नहीं दिखाता, लेकिन भारतवर्ष की स्त्रियों को समाज लाल सुर्ख़ आँखों से ऐसे घूर रहा है कि वे डर के मारे दुबकी हुई हैं।
समलैंगिकता के विषय में उनका कहना है कि जो लोग इस समुदाय की सामाजिक स्वीकृति का समर्थन नहीं करते, उनके अधिकारों के पक्ष में खड़े नहीं होते, उन्हें मानवाधिकारों का पक्षधर भी नहीं कहा जा सकता, और न ही प्रगतिशील। वे ज़ोर देकर कहती हैं कि समकामी या समलैंगिक होना सिर्फ़ यौन-सम्बन्धों का मसला नहीं है, यह प्रेम का सम्बन्ध है।
स्त्रियों से जुड़े कई अन्य सामाजिक और क़ानूनी पहलुओं पर उन्होंने इसी तरह दो टूक विचार किया है।
Network Marketing Kitna Sach, Kitna Jhooth
- Author Name:
Dr. Ujjwal Patni
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramayan Ke Patra "रामायण के पात्र" Book in Hindi - Ramji Bhai
- Author Name:
Ramji Bhai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kalpana Chawla: A Complete Biography
- Author Name:
Abhishek Kumar
- Book Type:

- Description: "When you look at the stars and the galaxy, you feel that you are not just from any particular piece of land, but from the solar system." — these were the first words of the first Indian woman astronaut, Kalpana Chawla, when she landed on the earth. The story of Kalpana Chawla is the story of a dream becoming reality. It is the story that starts in the small city of Karnal and ends in space. Hers is a story that gives us the belief that the path from dreams to success does exist, all one needs is the vision, the perseverance, and the courage to follow it. This book is an attempt to relive the story of our forgotten hero - Kalpana Chawla. Through the pages of this book, the reader will become a part of her journey which travels from Karnal to Nasa and finally to space.
Sansar Mein Nirmal Verma : Uttararddh
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
संसार में निर्मल वर्मा का यह दूसरा खंड—उत्तरार्द्ध—उनके उत्कर्षकाल के दिनों में लिये गए साक्षात्कारों की प्रस्तुति है। यह उनके जीवन का वह दौर भी था जब अपने विचारों और उनकी निडर अभिव्यक्ति के चलते उन्हें बार-बार विवादों का सामना करना पड़ा। इन साक्षात्कारों में निःसंदेह इन विवादों की प्रतिध्वनियाँ भी सुनाई देती हैं।
अपनी वैचारिक और रचनात्मक यात्रा के अलावा यहाँ निर्मल जी अपने बचपन, पारिवारिक पृष्ठभूमि, इतिहास के कुछ निर्णायक पलों—मसलन बँटवारा और गाँधी जी की हत्या—से जुड़ी अपनी निजी अनुभूतियों को भी शब्द देते हैं। धर्म, इतिहास, मार्क्सवाद, भाषा, अन्तरराष्ट्रीय साहित्य, भारतीय राजनीति, आपातकाल आदि विषयों पर उनके विचारों को जानना उद्घाटनकारी भी है और विचारोत्तेजक भी।
मिसाल के तौर पर हिन्दी-भाषी समाज के संकट पर विचार करते हुए वे कहते हैं कि किसी हिन्दी-भाषी व्यक्ति को अगर केरल की फ़िल्म समझ न आए, यह बात समझ में आती है लेकिन हिन्दी लेखकों या हिन्दी फ़िल्मकारों को समझने में आम जनता को मुश्किल पड़ती है, तो ये एक गहरे सांस्कृतिक संकट का संकेत है।
इसी तरह कई अन्य चीज़ों पर नए ढंग से सोचने के लिए इन साक्षात्कारों में अनेक मौलिक प्रस्थान बिन्दु मिलते हैं। साक्षात्कारों के अलावा इस जिल्द में उन पर बनी फ़िल्मों और विविध मीडिया कार्यक्रमों के दौरान की गई वार्ताओं के अंश भी सम्मिलित कर लिये गए हैं।
Dictionary of Biology
- Author Name:
Kirti Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nalin Rachanawali : Vols. 1-5
- Author Name:
Vinod Tiwari
- Book Type:

-
Description:
1. आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
उन्होंने संस्कृत की शास्त्रीय आलोचना और पश्चिम की आलोचना-पद्धति का गहरा अध्ययन किया लेकिन उनमें से किसी का अनुसरण करने के बजाय अपने लिए नई आलोचना-पद्धति की तलाश की। उन्हें हिन्दी का पहला आधुनिक आलोचक माना जाता है। परम्परा और आधुनिकता-सम्बन्धी उनकी विद्वत्ता, चिन्तन-मनन और दृष्टिकोण के चलते उचित ही उन्हें ‘हिन्दी का इलियट’ कहा गया है।
उन्होंने बहुत ज्यादा नहीं लिखा। लेकिन जो कुछ लिखा उसका महत्व असन्दिग्ध है। उनके आलोचनात्मक लेखों, टिप्पणियों, डायरी-अंशों, नोटबुक की टीपों, आदि से पता चलता है कि हर तरह की ज्ञान-सरणी से उनका बहुत ही अच्छा संवाद था। यह रचनावली एक प्रयास है नलिन जी के चिन्तन और उनकी साहित्य-दृष्टि के साक्ष्य, उनके लेखन को एक स्थान पर उपलब्ध कराने का।
रचनावली के इस पहले खंड में उनकी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानी जानेवाली कृति साहित्य का इतिहास-दर्शन को प्रस्तुत किया गया है। नलिन जी मानते थे कि साहित्येतिहास भी बाकी इतिहासों की तरह, कुछ विशिष्ट लेखकों और उनकी कृतियों का इतिहास नहीं होता, बल्कि युग-विशेष के लेखक-समूह की कृति-समष्टि का इतिहास होता है। उन्होंने गौण लेखकों को भी इतिहास में समुचित स्थान देने की बात की और कहा कि इतिहास का विषय यदि विस्तार है तो महान लेखकों से ज्यादा अहमियत उन गौणों को दी जानी चाहिए जो उस विस्तार को सम्भव करते हैं।
आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
जिन कार्यों को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और उनकी धारा के आलोचकों ने अनावश्यक जानकर छोड़ दिया था, उसकी क्षतिपूर्ति नलिन जी ने अपनी आलोचना में की। यही एक आलोचक के रूप में उनकी उपलब्धि है। मसलन गौण कवियों के महत्त्व का रेखांकन, तात्त्विक शोध, उपन्यास की सैद्धान्तिक और व्यावहारिक आलोचना का विकास, प्रेमचन्द का कलात्मक दृष्टि से और परम्परा का आधुनिकता की दृष्टि से मूल्यांकन और तत्पश्चात् एक निष्कर्ष देना।
‘नकेन’ के कवि केसरी कुमार के शब्दों में, ‘नलिन जी वर्तमान पीढ़ी के सर्वतोमुखी लेखक थे। विज्ञान और दर्शन के मिलन-बिन्दु के विरल कवि...प्रत्येक रचना के भीतर से उसके मूल्यांकन का निष्कर्ष निकालने वाले और इस प्रकार अपनी उद्भावनाओं से रचनात्मक सम्भावनाओं के विकसित स्तर को उपजीव्य बनाते हुए आलोचना को सर्जनात्मक स्थापत्य देने वाले समीक्षा-शिल्पी।’
रचनावली के इस दूसरे खंड में उनके आलोचनात्मक लेख संकलित हैं। आलोचना के विषय में नलिन जी का मानना था कि यह उतनी ही सृजनात्मक है जितना किसी रचनात्मक कृति का निर्माण : ‘आलोचना और साहित्य-सृजन में अन्तर शायद इसलिए मान लिया गया है कि आलोचना मात्र कला ही नहीं, वह विज्ञान भी है। साहित्यालोचन जहाँ तक विज्ञान है, वह कृति-विशेष का परीक्षण करता है। उसका गुण-दोष निरूपण करता है और आवश्यकतानुसार नवीन सिद्धान्तों की उद्भावना भी करता है।’
आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
नलिन जी ने समीक्षा को अत्यन्त उत्तरदायित्वपूर्ण काम मानते हुए न सिर्फ प्रेमचन्द, शुक्ल, निराला आदि रचनाकारों पर बहुत प्रभावशाली आलोचना लिखी बल्कि अपने समकालीन रचनाकारों की रचनाओं पर भी लिखा और उनके माध्यम से आलोचना के कुछ प्रतिमान गढ़ने का प्रयास किया। आधुनिक उपन्यास के विषय में उनका कहना था कि इसे सुबन्धु, दंडी, बाणभट्ट की लुप्त परम्परा के तहत पुनर्जीवित नहीं किया गया बल्कि यह साहित्य का वह पौधा था जिसे अगर सीधे पश्चिम से नहीं लिया गया तो भी उसका बांग्ला कलम तो जरूर लिया गया था। वे कहते थे, समृद्धि और ऐश्वर्य की सभ्यता महाकाव्य में अभिव्यक्ति पाती है तो जटिलता, वैषम्य और संघर्ष की सभ्यता उपन्यास में।
इस तीसरे खंड में उनके द्वारा लिखे गए सम्पादकीय, फुटकर आलेख, नोट्स, समीक्षाएँ और कुछ पुस्तकों की उनके द्वारा लिखी गई भूमिकाएँ संकलित हैं। ये सम्पादकीय 'दृष्टिकोण' और 'साहित्य' त्रैमासिक के 1950-60 की अवधि में लिखे गए। इन सम्पादकीयों में उन्होंने हिन्दी के शोध, भाषा, लिपि, हिन्दी-टंकण, आवरण-सज्जा और लेखकों के सरोकारों पर लिखा है। वे हिन्दी को सिर्फ साहित्य की नहीं, बल्कि तमाम ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाना चाहते थे।
इस खंड में संकलित सामग्री का महत्त्व यह है कि इनके मार्फत हम नलिन जी के अध्यवसाय के साथ-साथ उनके रूप में एक आलोचक और शिक्षक की तैयारी से रूबरू होते हैं।
4 आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
नलिन जी कहानी को ‘शोधना’ समझते थे। उनके मुताबिक ‘कहानीकार बिन्दु में केन्द्रित विराट और पूर्ण सत्य का उद्घाटन करता है। कहानीकारों के दो काम होते हैं—बिन्दु फैले नहीं और बिन्दु पर से निगाह विचले नहीं। पिंड में ब्रह्मांड का सत्य देख लेना कृच्छ्र-साधना है, यह संत ही नहीं कहानीकार भी जानते हैं।’ यही उनके कहानीकार की आधार-भूमि थी। जितने समय में कुछ लोगों ने उपन्यास पूरे कर लिए उतना समय उन्होंने एक-एक कहानी को दिया। उनका कहानी-लेखन ढाई दशकों में फैला है। इस दौरान कई कहानी आन्दोलन चले लेकिन उन्होंने खुद को उनसे अलग रखा। उनकी कहानियों में सामाजिक समस्याएँ, मनुष्य की मनोग्रन्थियाँ, यौन-मनोविज्ञान और प्रेम जैसे विषय प्रमुख हैं।
कविता में प्रयोगवाद के बरक्स ‘नकेनवाद’ जैसी अवधारणा का सूत्रीकरण नलिन जी ने ही अपने सहयोगी कवियों केसरीकुमार और नरेश के साथ मिलकर किया जिसका उद्देश्य, उनके अनुसार, प्रयोगवाद की आत्मा की रक्षा था। वे अनुवाद में भी दखल रखते थे। मुख्यतः अंग्रेजी से हिन्दी में किए गए उनके अनुवादों को मानक के तौर पर देखा गया। उनका आत्मपरक लेखन उनके व्यक्तिगत और रचनात्मक जीवन का महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
रचनावली के इस चौथे खंड में नलिन जी की सभी उपलब्ध कहानियाँ, कविताएँ, संस्मरण, निबन्ध, डायरी, अनुवाद और साक्षात्कार सम्मिलित किए गए हैं।
5. आलोचक, लेखक, अध्यापक, सम्पादक नलिन विलोचन शर्मा का हिन्दी साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान है। आलोचना, कविता, कहानी, निबन्ध, अनुवाद, पुस्तक समीक्षा आदि सभी विधाओं में उनकी लेखनी अबाध गति से चली है। वे आधुनिकता के प्रबल प्रवक्ता थे तो परम्परा के भी उतने ही गहरे जानकार थे। प्रगतिवाद बनाम आधुनिकता के विवाद से अलग वे आलोचना के एक तीसरे धरातल की खोज में रत रहे। शिविरबद्धता के विरुद्ध उनका तीक्ष्ण आलोचनात्मक संघर्ष रहा।
उन्होंने भाषा और साहित्य को अलग-अलग करके नहीं देखा। इस दृष्टि से हम नलिन जी के अंग्रेजी में लिखे साहित्य को देखते हैं तो पाते हैं कि उनमें औपनिवेशिक दौर की भाषाई हीनता या श्रेष्ठता की ग्रन्थि नहीं है।
रचनावली के इस पाँचवें और अन्तिम खंड में नलिन जी की अंग्रेजी में लिखी रचनाएँ रखी गई हैं जिनमें तीन कहानियाँ, दो साहित्य और संस्कृति पर लिखे गए वैचारिक निबन्ध और किसी रचनाकार या शख्सियत पर लिखी एकमात्र प्रबन्ध पुस्तक जगजीवन राम शामिल हैं। यह बाबू जगजीवन राम की जीवनी है जो जगजीवन राम अभिनन्दन समिति, पटना के लिए 1954 में लिखी गई। यह जीवनी और इस खंड की अन्य रचनाओं को देखने-पढ़ने के बाद ‘क्लासिक’ अंग्रेजी का जो एक सहज प्रवाह मिलता है, कहीं-कहीं ‘सबलाइम्स’ की जो बानगी मिलती है, उससे नलिन जी की अंग्रेजी का पता चलता है।
नलिन जी द्वारा लिखित इस जीवनी पर गांधीवाद का प्रभाव है। इसलिए बाबू जगजीवन राम को एक 'हरिजन' नेता के रूप में ही इस जीवनी में चित्रित किया गया है। आज कुछ लोग इस किताब को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के विरोध में भी रेखांकित कर सकते हैं लेकिन देशकाल में जाकर देखेंगे तो पाएँगे कि यह जीवनी उनके विरोध में नहीं बल्कि उनके मूल्यों और प्रतिमानों के सहयोग में ही है।
Jamsetji Tata: A Complete Biography
- Author Name:
Prashant Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hum Ujale Joidte Hain
- Author Name:
Dr. Ram Prakash
- Book Type:

- Description: Book
Ratan Tata A Complete Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Achchhi Hindi Kaise Likhen
- Author Name:
Sant Sameer
- Book Type:

- Description: आप विद्यार्थी हैं, अध्यापक हैं, लेखक हैं, पत्रकार हैं या आम पाठक—यदि हिंदी पढ़ने-लिखने में आपकी थोड़ी भी रुचि है तो आपके काम की कुछ-न-कुछ मानसिक खुराक इस पुस्तक में जरूर मिलेगी। यों यह पुस्तक छात्र समुदाय को विशेष रूप से संबोधित है, पर अपने पूरे कलेवर में प्रायः हर वर्ग के हिंदी-प्रेमियों के लिए उपयोगी है। हिंदी की लिखत-पढ़त में लगे लोग इसे पढ़कर अपनी भाषा को प्रवाहमयी बना सकते हैं तथा रोजमर्रा के व्यवहार में होनेवाली अनेकानेक गलतियों को सुधार सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी में इससे भरपूर मदद मिलेगी। इस पुस्तक की एक विशिष्टता यह भी है कि इसमें सृजनात्मक लेखन पर भी उपयोगी जानकारी दी गई है। ऐसे में लेखक-पत्रकार बनने की राह पर चल रहे लोगों को भी यह जरूर लुभाएगी। भाषा-विमर्श प्रायः उबाऊ विषय माना जाता रहा है; पर यह पुस्तक अपने तमाम अध्यायों में एकरसता को तोड़ती है। अलग-अलग चित्तवृत्तियों में लिखी होने के चलते, पुरानी हिंदी से लेकर नई हिंदी तक, कई तरह की भाषा की छटाएँ इस पुस्तक के पन्ने-दर-पन्ने पर दिखाई देंगी। इसका भी एक अलग आस्वाद होगा। आशा है, हिंदी भाषा के विमर्श में यह पुस्तक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
BPSC Bihar Secondary School (Special) Teacher Eligibility Test Sakshamta Pariksha | Class 6-8 "सामाजिक विज्ञान" Samajik Vigyan 15 Practice Sets (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Breakout Trading Made Easy "ब्रेकआउट ट्रेडिंग मेड ईजी" Book in Hindi | Maximize your Profits with Simple Price Action Strategies | Sunil Gurjar
- Author Name:
Sunil Gurjar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Changemaker DM Jhansi Success Model ki Prerak Kahaniyan
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhagwan Ke Desh Ka DNA
- Author Name:
Dr. Jaikaran
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Safalta Prapti Ke 18 Mantra "सफलता प्राप्ति के 18 मंत्र" Book in Hindi
- Author Name:
Richard Denny
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UTTARAKHAND KE TYOHAR
- Author Name:
Jyotsna
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
ANAND KUMAR (RS-86)
- Author Name:
HARI PRASAD
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book